Thursday, March 26, 2026
फिर खुलेंगी व्यापम की फाइलें? सुप्रीम कोर्ट सख्त
Thursday, February 26, 2026
एमपी टाइम्स की मुहिम का असर, अतिथि शिक्षकों के लिए आई खुशखबरी...जताया हमारा आभार
भोपाल।मध्यप्रदेश के लोक शिक्षण संचालनालय ने अतिथि शिक्षकों की लंबी अनुपस्थिति को लेकर पूर्व में जारी किए गए आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है। इस संबंध में 26 फरवरी 2026 को नया आदेश जारी किया गया है।
पूर्व आदेश में प्रावधान किया गया था कि यदि कोई अतिथि शिक्षक बिना सूचना लगातार 7 दिवस तक अनुपस्थित रहता है तो उसकी सेवा समाप्त की जा सकती है। इस प्रावधान को लेकर प्रदेश के विभिन्न जिलों में आपत्तियां और विरोध सामने आए थे। अतिथि शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुनील परिहार ने एमपी टाइम्स का आभार जताया है... और लिखा है #MP टाइम्स समाचार पत्र को हृदय से धन्यवाद। आपने भी अतिथि शिक्षकों के खिलाफ हुए शोषणकारी आदेश को निरस्त करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई । उम्मीद करते हैं इसी तरह से सहयोग करते रहेंगे । सुनील परिहार प्रदेश अध्यक्ष अतिथि शिक्षक समन्वय समिति
ताजा निर्देशों के अनुसार अब अतिथि शिक्षकों की उपस्थिति एवं अनुपस्थिति के संबंध में आगे की कार्रवाई एजुकेशन पोर्टल 3.0 पर आवश्यक तकनीकी व्यवस्था उपलब्ध होने के पश्चात की जाएगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस संबंध में पृथक दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।
आदेश की प्रतिलिपि सभी जिला शिक्षा अधिकारियों, कलेक्टरों तथा संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को प्रेषित कर दी गई है। फिलहाल पूर्व प्रावधान निरस्त होने से अतिथि शिक्षकों को अस्थायी राहत मिली है।
Sunday, February 22, 2026
Good News नन्हे कदमों की आहट से कूनो में गूंजी दहाड़
श्योपुर। मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से एक बार फिर बड़ी खुशखबरी सामने आई है। दक्षिण अफ्रीका से लाई गई मादा चीता गामिनी ने तीन शावकों को जन्म दिया है। पार्क प्रबंधन के अनुसार तीनों शावक पूर्ण रूप से स्वस्थ हैं और लगातार निगरानी में रखे गए हैं।
यह उपलब्धि एक बार फिर देश में चीतों के पुनर्वास अभियान को मजबूती देती नजर आ रही है। ताजा जन्म के बाद कूनो में शावकों की संख्या बढ़कर 27 हो गई है। वहीं कूनो में कुल चीतों की संख्या अब 35 हो गई है। गांधीसागर सहित पूरे भारत में चीतों का आंकड़ा बढ़कर 38 तक पहुंच गया है।
वन विभाग के अधिकारियों ने इसे संरक्षण की दिशा में सकारात्मक संकेत बताया है। कूनो में लगातार बढ़ती संख्या से यह स्पष्ट है कि यहां का वातावरण चीतों के अनुकूल साबित हो रहा है।
Friday, February 20, 2026
सरकार के आंकड़े साफ, लेकिन जवाब धुंधले?
भोपाल। पूर्व मंत्री एवं कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से हुई मौतों को लेकर सरकार पर तीखा तंज कसा है। उन्होंने कहा कि कागज़ों में सब कुछ “नियंत्रण में” दिखाया जा रहा है, लेकिन मौतों के आंकड़े ही आपस में मेल नहीं खा रहे। एक जगह 20, दूसरी जगह 32—आखिर सच किसे माना जाए?
जयवर्धन सिंह ने कहा कि जिस इंदौर को स्वच्छता का प्रतीक बताया जाता है, वहां पीने का पानी ही सवालों के घेरे में है। उन्होंने आरोप लगाया कि अगर 32 लोगों की जान गई है तो मुआवजा केवल 20 परिवारों तक ही क्यों सीमित रहा? क्या बाकी परिवार सरकारी गिनती में शामिल नहीं हैं?
उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि सरकार शायद “छवि बचाने” में ज्यादा गंभीर है, बजाय लोगों की जान बचाने के।
प्रमुख मांगें:
- मृतकों की सही और अंतिम संख्या सार्वजनिक की जाए।
- सभी पीड़ित परिवारों को समान रूप से पूरा मुआवजा दिया जाए।
- पूरे मामले की उच्च स्तरीय और स्वतंत्र जांच हो।
- लापरवाही के दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
- विधानसभा में इस मुद्दे पर विस्तृत और पारदर्शी चर्चा कराई जाए।
जयवर्धन सिंह ने कहा कि यह मामला सिर्फ आंकड़ों का अंतर नहीं, बल्कि जवाबदेही और न्याय का है। सच सामने आना ही चाहिए, चाहे वह कितना भी असहज क्यों न हो।
हेमंत कटारे के इस्तीफे की खबर! ये है बड़ी वजह..
Saturday, February 14, 2026
इंदौर के एमवाय अस्पताल में हुई जमकर मारपीट, वीडियो हुआ वायरल
इंदौर। इंदौर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल महाराजा यशवंतराव अस्पताल (एमवाय अस्पताल) में मेडिकल जांच के दौरान दो पक्षों के बीच विवाद हिंसक झड़प में बदल गया। पुलिस द्वारा एमएलसी प्रक्रिया के लिए लाए गए दोनों पक्षों में पहले कहासुनी हुई, जो देखते ही देखते लात-घूंसे चलने तक पहुंच गई। घटना का वीडियो सामने आने के बाद अस्पताल परिसर में हड़कंप मच गया।
मारपीट की यह घटना एमएलसी विभाग में हुई, जहां उस समय मरीज और उनके परिजन भी मौजूद थे। अचानक शुरू हुई हाथापाई से वहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थिति बिगड़ती देख अस्पताल के सुरक्षाकर्मी और मौके पर तैनात पुलिसकर्मी तुरंत बीच-बचाव के लिए पहुंचे और दोनों पक्षों को अलग कराया।
हालांकि घटना के बाद किसी भी पक्ष ने औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई है, लेकिन पुलिस ने दोनों के बयान दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। संवेदनशील माने जाने वाले सरकारी अस्पताल में इस तरह की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
Friday, February 13, 2026
आधी रात को महिलाओं और बच्चों पर छतरपुर में लाठीचार्ज!
छतरपुर। केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर जिले के बिजावर क्षेत्र में देर रात प्रदर्शन के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई। परियोजना से प्रभावित ग्रामीण बड़ी संख्या में एकत्र होकर मुआवजे और पुनर्वास को लेकर विरोध जता रहे थे। हालात बिगड़ने पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प की स्थिति बनी।
पुलिस ने किया लाठीचार्ज
प्रशासन के अनुसार भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उनकी मांगों पर सुनवाई नहीं की जा रही, जबकि प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई की गई। घटना के दौरान महिलाओं की मौजूदगी भी बताई जा रही है।
अतिरिक्त बल तैनात, नियंत्रण में हालात
फिलहाल क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है। आधिकारिक तौर पर किसी गंभीर घायल होने की पुष्टि नहीं हुई है। प्रशासन का कहना है कि प्रभावित पक्षों से संवाद की प्रक्रिया जारी है ताकि मामले का समाधान निकाला जा सके।
कांग्रेस नेता ने की मुआवजे की मांग
Thursday, February 12, 2026
एमपी के दिग्गज मंत्रियों का किसने मांगा इस्तीफा!
भोपाल। मध्यप्रदेश की सियासत में बजट सत्र से ठीक पहले राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर मंत्रिमंडल के तीन वरिष्ठ सदस्यों—राजेंद्र शुक्ल, कैलाश विजयवर्गीय और विजय शाह—को पद से हटाने की मांग की है। पटवारी ने कहा है कि सरकार को नैतिक आधार पर कार्रवाई करते हुए इन मंत्रियों को तत्काल बर्खास्त करना चाहिए।
पत्र में उठाए गए आरोप
अपने पत्र में पीसीसी चीफ ने आरोप लगाया है कि जिन मुद्दों को लेकर सवाल उठ रहे हैं, उन पर सरकार स्पष्ट स्थिति नहीं ले पा रही है। उनका कहना है कि बजट सत्र जैसे महत्वपूर्ण सत्र से पहले सरकार को जवाबदेही और पारदर्शिता का संदेश देना चाहिए। पटवारी ने यह भी कहा कि यदि सरकार कार्रवाई नहीं करती है तो विपक्ष विधानसभा में इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाएगा।
सियासी बयानबाजी और संभावित असर
इधर, इस मांग को लेकर सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई है। कांग्रेस इसे नैतिकता और जवाबदेही का सवाल बता रही है, जबकि सत्तारूढ़ दल की ओर से अभी तक औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। माना जा रहा है कि बजट सत्र के दौरान यह मुद्दा विधानसभा में गर्मा सकता है और सत्ता-विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल सकती है।
लेबर कोड को लेकर हंगामा: आखिर क्या बदला, किस बात पर नाराज़ हैं ट्रेड यूनियन?
भोपाल। देशभर में आज नए लेबर लॉ (लेबर कोड्स) के विरोध में व्यापक प्रदर्शन और हड़ताल देखने को मिली। केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर आयोजित इस आंदोलन का असर भोपाल सहित कई बड़े शहरों में दिखाई दिया, जहां कर्मचारी संगठनों ने रैली और धरना प्रदर्शन किए। कुछ स्थानों पर बैंकिंग सेवाएं, सरकारी दफ्तर और परिवहन व्यवस्था आंशिक रूप से प्रभावित रहे। मजदूर संगठनों का आरोप है कि नए श्रम कानून कामगारों के अधिकारों को कमजोर करते हैं, जबकि सरकार इन्हें श्रम सुधार की दिशा में बड़ा और जरूरी कदम बता रही है।
क्या है नए लेबर कोड
केंद्र सरकार ने पुराने 29 श्रम कानूनों को समाहित कर चार नए लेबर कोड तैयार किए हैं, जिनमें वेतन, औद्योगिक संबंध, सामाजिक सुरक्षा और कार्यस्थल सुरक्षा से जुड़े प्रावधान शामिल हैं। सरकार का कहना है कि इससे कानूनों की जटिलता कम होगी और रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा। हालांकि ट्रेड यूनियनों का दावा है कि नए प्रावधानों से कंपनियों को कर्मचारियों की नियुक्ति और छंटनी में अधिक छूट मिल सकती है, जिससे नौकरी की स्थिरता पर असर पड़ेगा और श्रमिक संगठनों के अधिकार सीमित हो सकते हैं।
यूनियन ट्रेड की मांग
प्रदर्शनकारी संगठनों की मुख्य मांगों में नए लेबर कोड को वापस लेने, नौकरी की सुरक्षा सुनिश्चित करने, सभी श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन लागू करने, हड़ताल और संगठन के अधिकार की रक्षा तथा ठेका प्रथा पर नियंत्रण शामिल है। कुछ संगठनों ने पुरानी पेंशन योजना की बहाली और महंगाई पर नियंत्रण की मांग भी उठाई है। यूनियनों ने संकेत दिया है कि यदि सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक कदम नहीं उठाती, तो आंदोलन को और तेज किया जा सकता है, जिससे श्रम सुधार को लेकर सरकार और संगठनों के बीच टकराव बढ़ने की संभावना बनी हुई है।
Tuesday, February 10, 2026
बीजेपी जिला प्रभारी होंगे सब पर भारी
विजय शाह मामले में नया मोड़: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टली, सरकार की चुप्पी बरकरार
भोपाल। कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर मंत्री विजय शाह के विवादित बयान से जुड़े मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई नहीं हो सकी। अब इस मामले की अगली सुनवाई 20 फरवरी को होगी। यह प्रकरण चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सूचीबद्ध था, लेकिन एसआईआर (स्पेशल इंवेस्टिगेशन रिपोर्ट) से संबंधित एक अन्य मामले की सुनवाई लंबी चलने के कारण विजय शाह प्रकरण पर सुनवाई नहीं हो पाई।
दो हफ्ते में मांगा था जबाव
गौरतलब है कि इससे पहले 19 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह दो सप्ताह के भीतर एसआईटी (विशेष जांच दल) की रिपोर्ट के आधार पर यह निर्णय ले कि मंत्री विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति दी जाए या नहीं। कोर्ट ने साफ तौर पर कहा था कि मामले में कानून के अनुसार जल्द निर्णय लिया जाना चाहिए।
20 फरवरी को होगी अगली सुनवाई
हालांकि, निर्धारित समयसीमा बीत जाने के बावजूद राज्य सरकार की ओर से न तो कोई दस्तावेज और न ही कोई रिपोर्ट सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पेश की गई। इसे लेकर कोर्ट में कोई ठोस प्रगति सामने नहीं आई। मंत्री विजय शाह के बयान को लेकर पहले से ही राजनीतिक और सामाजिक हलकों में विवाद बना हुआ है। अब सबकी नजरें 20 फरवरी को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जिसमें राज्य सरकार के रुख और कोर्ट की आगे की कार्रवाई पर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
Wednesday, February 4, 2026
रात के ढाई बजे थाने में घुसे बीजेपी विधायक, पुलिसकर्मियों की उड़ी नींद, VIDEO हुआ वायरल!
विदिशा। मध्यप्रदेश में जनता की सुरक्षा करने वाले पुलिसकर्मी गहरी नींद में सो रही है, ये हम नहीं सिरोंज से बीजेपी के विधायक उमाकांत शर्मा का कहना है। दरअसल, मंगलवार रात करीब ढाई बजे क्षेत्र के विधायक उमाकांत शर्मा आंनदपुर ईलाके में पहुंचे थे। तभी विधायक शर्मा औचक निरीक्षण के लिए थाने पहुंचे। यहां पहुंचने के बाद विधायक जी नजारा देखकर दंग रह गए। थाने का चैनल गेट खुला हुआ था, कमरों के दरवाजे खुले हुए थे, कुर्सियां खाली और बेंच पर सोता जवान मिला। ये न तो सिपाही था न ही आरक्षक, ये जवान था होमगॉर्ड का सिपाही जिसके भरोसे पूरा थाना और शहर छोड़ रखा था।
10 से 15 मिनट घूमने के बाद इस लापरवाही को देखते हुए, गहरी नींद में सो रहे सिपाही को विधायक ने खुद जगाया और पूछताछ की। इसी बीच, थाना प्रभारी अनुज प्रताप सिंह को विधायक के निरीक्षण की जानकारी मिली और वे भी आनन-फानन में थाने पहुंचे। थाना प्रभारी अनुज प्रताप सिंह ने सफाई देते हुए बताया कि थाने में कुल 20 पुलिसकर्मी पदस्थ हैं, जिनमें 3 महिला आरक्षक भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि वे थाने के पास बने क्वार्टर में थे और क्षेत्र में पुलिस गश्त जारी थी। विधायक ने इस स्थिति पर नाराजगी जताते हुए कहा कि अगर कोई गलत इरादे वाला व्यक्ति आता, तो थाने से सामान तक ले जा सकता था।
विधायक ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट पर वीडियो को पोस्ट करते हुए लिखा कि "आज मैंने रात्रि 2.30 से 3.00 बजे तक आनंदपुर गांव के थाने की रात्रि गश्त एवं चौकीदारी व्यवस्था को देखा। व्यवस्था पूर्णतः खराब है। मैं थानेदार साहब , SDOP साहब, SP महोदय से आवेदन करता हूं आनंदपुर में रात्रि गश्त की व्यवस्था बहुत खराब है। वहां के व्यापारीगण कई बार गश्त सुधारने हेतु आग्रह कर चुके है। मैंने भी थानेदार महोदय अनुज प्रताप सिंह आनंदपुर थाना , SDOP महोदय विकासखंड लटेरी तथा SP महोदय को अवगत कराया है। इसके बाद भी व्यवस्था नहीं सुधारना बिल्कुल गलत है। जनता के हित में सुधार हेतु आवश्यक कार्यवाही करें।"
हालांकि, विधायक के निरीक्षण में सामने आई स्थिति ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। साथ ही इस दौरान आंनदपुर में अगर कोई अनहोनी या दुर्घटना हो जाती तो पुलिस गहरी नींद में सोती ही रहती। या फिर थाने से ही कई महत्वपूर्ण दस्तावेज या सामान चोरी हो जाता तो उसका जिम्मेदार कौन होता। यही सोता हुआ सिस्टम जनता की परेशानियां बढ़ाता है। यहीं वजह है कि इंसाफ के लिए आम जनता को इतना परेशान होना पड़ता है। अब देखना होगा कि वीडियो वायरल होने के बाद व्यवस्थाएं सुधरेंगी या फिर किसी बड़ी अनहोनी होने का इंतजार किया जाएगा।


















