Showing posts with label #MPPolitics. Show all posts
Showing posts with label #MPPolitics. Show all posts

Friday, March 6, 2026

बीजेपी प्रशिक्षण शिविर में हेमंत खंडेलवाल ने नियुक्तियों पर कह दी बड़ी बात

भोपाल बीजेपी के प्रशिक्षण महाअभियान की तैयारियां भले तेज बताई जा रही हों, लेकिन संगठन के अंदर फिलहाल सबसे ज्यादा चर्चा लंबित नियुक्तियों को लेकर है। जिला स्तर की कार्यशालाओं से पहले संगठन में खाली पड़े पदों को भरने की कवायद तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक कई जिलों और पार्टी के अलग-अलग मोर्चों में अभी भी नियुक्तियां बाकी हैं। ऐसे में कार्यशालाओं से पहले इन्हें पूरा करने की कोशिशें तेज कर दी गई हैं। हाल ही में आयोजित वर्कशॉप में प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने भी 16 मार्च तक शेष नियुक्तियां पूरी करने की बात कही। खंडेलवाल ने बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम मंडल से लेकर जिला स्तर तक आयोजित किए जाएंगे। आज की कार्यशाला उन वक्ताओं के लिए है, जो आगे जिलों और मंडलों में जाकर कार्यकर्ताओं को अलग-अलग विषयों पर प्रशिक्षण देंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा विचारधारा आधारित पार्टी है, इसलिए समय-समय पर कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया जाता है। उन्होंने यह भी माना कि नए दौर में सोशल मीडिया का महत्व बढ़ा है, इसलिए प्रशिक्षण में इस पर भी खास फोकस रहेगा। वहीं राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि प्रशिक्षण से पहले नियुक्तियों की यह हलचल भी कम दिलचस्प नहीं है—अब देखना यह है कि 16 मार्च तक सभी पद भरते हैं या फिर यह ‘कसरत’ ही सुर्खियां बटोरती रहती है।

Tuesday, February 24, 2026

भोपाल से गरजी कांग्रेस: भारत-अमेरिका ट्रेड डील के खिलाफ किसान महापंचायत में हुंकार

भोपाल। भोपाल के जवाहर चौक पर 24 फरवरी को आयोजित किसान महापंचायत में कांग्रेस ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला। कार्यक्रम में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने हजारों किसानों को संबोधित किया। पार्टी ने इसे किसानों के हितों की रक्षा के लिए देशव्यापी अभियान की शुरुआत बताया।

सभा को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि लोकसभा में उन्हें अपनी बात रखने से रोका गया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा अमेरिका के साथ किया गया ट्रेड समझौता भारतीय किसानों के हितों के खिलाफ है और इससे कृषि क्षेत्र पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। राहुल ने सरकार की नीतियों को किसान विरोधी बताते हुए इसे बड़े आर्थिक जोखिम से जोड़ा।

वहीं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी केंद्र की नीतियों की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह समझौता किसानों के साथ अन्याय है और इससे देश के कृषि बाजार पर विदेशी प्रभाव बढ़ेगा।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भोपाल को इस महापंचायत के लिए चुनना कांग्रेस की रणनीतिक तैयारी का हिस्सा है। मध्यप्रदेश समेत हिंदी पट्टी के राज्यों में किसान वर्ग को साधने और ग्रामीण मतदाताओं को एकजुट करने के उद्देश्य से पार्टी इस मुद्दे को व्यापक आंदोलन का रूप देने की कोशिश में है। कांग्रेस का दावा है कि यदि यह डील लागू होती है तो अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए भारतीय बाजार खुल सकता है, जिससे स्थानीय किसानों की प्रतिस्पर्धा और आय पर असर पड़ सकता है।

Monday, February 23, 2026

इस बात से नाराज है उपनेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे! इस्तीफा देने की बताई वजह

भोपाल। मध्यप्रदेश की सियासत में उस वक्त हलचल तेज हो गई जब उप नेता प्रतिपक्ष पद से इस्तीफे को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच कांग्रेस विधायक हेमंत कटारे ने खुलकर अपनी बात रखी। कटारे ने दो टूक कहा कि उन्होंने अपना इस्तीफा संगठन को भेजा था और अब तक वापस नहीं लिया है। उन्होंने बताया कि त्यागपत्र कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को भेजा गया है और पार्टी जो भी फैसला करेगी, वह उन्हें मंजूर होगा। उनके इस बयान के बाद सियासी गलियारों में चर्चाओं का दौर और तेज हो गया है।

सदन में ठुकराया गया स्थगन प्रस्ताव

कटारे ने अपनी नाराजगी भी जाहिर की। उन्होंने कहा कि सदन में स्थगन प्रस्ताव लाने के लिए उन्होंने रातभर तैयारी की, लेकिन जब वक्त आया तो प्रस्ताव को स्वीकार ही नहीं किया गया। उन्होंने तल्ख अंदाज में सवाल उठाया—क्या सदन सरकार के इशारे पर चलेगा? क्या विपक्ष की आवाज को दबाया जा रहा है? हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि नेता प्रतिपक्ष से उनका कोई विवाद नहीं है और वे उन्हें अपना बड़ा भाई मानते हैं।

बीजेपी विधायक को कांग्रेस ज्वाइन की कही बात

बीजेपी से ऑफर की चर्चाओं पर भी कटारे ने चुटीला अंदाज अपनाया। उन्होंने बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा पर तंज कसते हुए कहा कि पहले वे कहते थे पार्टी में वैकेंसी है, अब कह रहे हैं कि कोई वैकेंसी नहीं है। कटारे ने पलटवार करते हुए कहा—अगर शर्मा चाहें तो कांग्रेस के दरवाजे खुले हैं, उनका स्वागत है। यहां तक कि 2028 में उन्हें कांग्रेस मंत्री भी बनाया जा सकता है।

कटारे के इस बयान ने साफ कर दिया है कि मामला सिर्फ इस्तीफे तक सीमित नहीं, बल्कि इसके पीछे सियासी संदेश भी छिपा है। अब सबकी नजरें पार्टी नेतृत्व के अगले कदम पर टिकी हैं।

Friday, February 20, 2026

हेमंत कटारे के इस्तीफे की खबर! ये है बड़ी वजह..



भोपाल। 
मध्यप्रदेश की राजनीति में अचानक हलचल तेज हो गई है। अटेर से कांग्रेस विधायक हेमंत कटारे ने उपनेता प्रतिपक्ष के पद से इस्तीफा देने की सूचना दी है। बताया जा रहा है कि उन्होंने इस संबंध में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को पत्र लिखकर अपना निर्णय अवगत कराया है।

सूत्रों के अनुसार, कटारे ने पत्र में उल्लेख किया है कि वे अपने विधानसभा क्षेत्र की जनता और परिवार को पर्याप्त समय नहीं दे पा रहे हैं, इसलिए जिम्मेदारी से मुक्त होने का आग्रह किया है। हालांकि पार्टी की ओर से अभी औपचारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन इस घटनाक्रम ने सियासी चर्चाओं को हवा दे दी है।

राजनीतिक जानकार इसे संगठनात्मक फेरबदल और आने वाले रणनीतिक बदलावों से जोड़कर देख रहे हैं। अब सबकी नजर कांग्रेस नेतृत्व के अगले कदम पर टिकी है।

Thursday, February 19, 2026

मुस्लिम विधायक को मिला शंकराचार्य का समर्थन, आतिफ अकील की जबरदस्त अपील

भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा में कांग्रेस विधायक द्वारा गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने संबंधी अशासकीय संकल्प लाए जाने के बाद इस मुद्दे ने सियासी और धार्मिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है।

ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य ने इस संकल्प का समर्थन करते हुए कहा कि सभी विधायकों को आगे आकर इसे पारित कराने में सहयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि यह संकल्प पास नहीं होता है तो यह हिंदुओं के लिए कलंक होगा।

शंकराचार्य ने कहा कि आश्चर्य की बात है कि जिनसे अपेक्षा होती है वे कई बार पीछे हट जाते हैं, जबकि जिनसे अपेक्षा नहीं होती वे आगे आकर साथ खड़े हो जाते हैं। उन्होंने विधायक आतिफ अकील के इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि स्वयं को हिंदू कहने वाले विधायकों को यह पहल करनी चाहिए थी।

आतिफ अकील ने अपने संकल्प में गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने के साथ ही मृत्यु के बाद गो माता के सम्मानजनक अंतिम संस्कार की व्यवस्था सुनिश्चित करने की भी मांग उठाई है।

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने सभी विधायकों से अपील की कि वे इस संकल्प को पारित कर इस कार्य में सहभागी बनें। उन्होंने आतिफ अकील को इस पहल के लिए बधाई भी दी।



सीएम मोहन यादव ने सदन में क्यों मांगी माफी ,,बार बार क्यों झुंझला रहे कैलाश !

मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र का चौथा दिन बहस से ज़्यादा बयानबाज़ी के नाम रहा। राज्यपाल के अभिभाषण पर गंभीर चर्चा होनी थी, लेकिन सदन का तापमान इतना बढ़ा कि मुद्दे पीछे और शब्द आगे निकल गए।

चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार सिंगरौली में आदिवासियों की ज़मीन उद्योगपति गौतम अडानी को देने के मुद्दे पर सरकार को घेर रहे थे। जैसे ही “अडानी” नाम बार-बार गूंजा, सत्ता पक्ष ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। अध्यक्ष ने भी सदन में मौजूद नहीं किसी व्यक्ति का नाम लेने पर आपत्ति जता दी।

इसी बीच संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने नेता प्रतिपक्ष को नसीहत दे डाली। बस फिर क्या था—सियासी पारा उबल पड़ा। विपक्ष ने इसे असंसदीय शब्द बताते हुए कड़ा विरोध किया और मंत्री से माफी की मांग पर अड़ गया। जवाब में नेता प्रतिपक्ष ने भी तीखे शब्दों में पलटवार किया।

सदन का माहौल ऐसा बना कि राज्यपाल के अभिभाषण की चर्चा शोर में दब गई। आधे घंटे में तीन बार कार्यवाही स्थगित हुई और पूरे दिन में कुल सात बार सदन की कार्यवाही रोकनी पड़ी। विपक्ष ने आरोप लगाया कि यह आदिवासी समाज का अपमान है, जबकि सत्ता पक्ष इसे बयान की गलत व्याख्या बता रहा है।

सियासी गलियारों में चर्चा है कि अभिभाषण पर बहस कम और विवादित शब्द पर बहस ज़्यादा होती रही। जनता उम्मीद कर रही थी कि विकास, बजट और नीतियों पर सार्थक चर्चा होगी, लेकिन चौथे दिन की कार्यवाही शब्दों की तल्खी और आरोप-प्रत्यारोप के नाम रही।

अब देखना यह है कि अगली बैठक में चर्चा पटरी पर लौटती है या फिर सदन में सियासी तापमान यूं ही उबलता रहेगा।

हालांकि मामले का पटापेक्ष तब हो गया जब सीएम मोहन यादव ने ही बड़ा दिल दिखाते हुए माफी मांगी,, जिसके बाद सदन की कार्यवाही आगे बढ़ी |

Tuesday, February 10, 2026

विजय शाह मामले में नया मोड़: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टली, सरकार की चुप्पी बरकरार

भोपाल। कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर मंत्री विजय शाह के विवादित बयान से जुड़े मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई नहीं हो सकी। अब इस मामले की अगली सुनवाई 20 फरवरी को होगी। यह प्रकरण चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सूचीबद्ध था, लेकिन एसआईआर (स्पेशल इंवेस्टिगेशन रिपोर्ट) से संबंधित एक अन्य मामले की सुनवाई लंबी चलने के कारण विजय शाह प्रकरण पर सुनवाई नहीं हो पाई।

दो हफ्ते में मांगा था जबाव

गौरतलब है कि इससे पहले 19 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह दो सप्ताह के भीतर एसआईटी (विशेष जांच दल) की रिपोर्ट के आधार पर यह निर्णय ले कि मंत्री विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति दी जाए या नहीं। कोर्ट ने साफ तौर पर कहा था कि मामले में कानून के अनुसार जल्द निर्णय लिया जाना चाहिए।

20 फरवरी को होगी अगली सुनवाई 

हालांकि, निर्धारित समयसीमा बीत जाने के बावजूद राज्य सरकार की ओर से न तो कोई दस्तावेज और न ही कोई रिपोर्ट सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पेश की गई। इसे लेकर कोर्ट में कोई ठोस प्रगति सामने नहीं आई। मंत्री विजय शाह के बयान को लेकर पहले से ही राजनीतिक और सामाजिक हलकों में विवाद बना हुआ है। अब सबकी नजरें 20 फरवरी को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जिसमें राज्य सरकार के रुख और कोर्ट की आगे की कार्रवाई पर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।

Thursday, February 5, 2026

विजय शाह विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने MP सरकार को लगाई फटकार, 2 हफ्ते में फैसला जरूरी



भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री विजय शाह के एक विवादित बयान को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा है। यह टिप्पणी कर्नल सोफिया कुरैशी से जुड़ी थी, जिसे अदालत ने गंभीर प्रकृति का माना। पहले इस पर हाई कोर्ट ने FIR दर्ज करने के आदेश दिए थे, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले की निगरानी अपने हाथ में ली।

SIT जांच और रिपोर्ट

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर इस मामले की जांच के लिए विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया था। SIT ने जांच पूरी कर अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। अब सवाल यह है कि मंत्री विजय शाह के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के लिए सरकार अभियोजन की अनुमति देती है या नहीं।

सरकार की देरी पर कोर्ट नाराज़

जांच पूरी होने के बावजूद राज्य सरकार की ओर से अब तक कोई स्पष्ट फैसला नहीं लिया गया है। इसी देरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराज़गी जताई है। अदालत ने कहा कि मामले को लटकाना स्वीकार्य नहीं है।

दो हफ्ते की अंतिम मोहलत

सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को साफ निर्देश देते हुए कहा है कि दो हफ्ते के भीतर यह तय किया जाए कि मंत्री विजय शाह के खिलाफ मुकदमा चलाया जाएगा या नहीं। कोर्ट ने संकेत दिए कि आगे और देरी पर सख्ती बढ़ सकती है।

माफी पर भी सवाल

मंत्री विजय शाह की ओर से पहले दी गई माफी को भी सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल पर्याप्त नहीं माना है। अदालत का मानना है कि सिर्फ माफी से मामला खत्म नहीं किया जा सकता।

सियासी असर तेज

इस पूरे मामले को लेकर प्रदेश की राजनीति में भी हलचल है। विपक्ष सरकार पर हमलावर है, वहीं आने वाले दिनों में यह विवाद राजनीतिक रूप से और गर्माने के संकेत दे रहा है।