Monday, March 16, 2026

गीता भवन से गुलजार होंगे छोटे शहर, बैतूल, रीवा, देवास में बनेंगे गीता भवन

मध्य प्रदेश सरकार प्रदेश के शहरों में धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाने जा रही है। सरकार ने प्रदेश के कुल 414 शहरों में गीता भवन बनाने की योजना तैयार की है। इसके लिए वर्ष 2026-27 के बजट में 60 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। सरकार की योजना है कि इन गीता भवनों का निर्माण इंदौर और जबलपुर में बने गीता भवन की तर्ज पर किया जाए। यहां धार्मिक कार्यक्रम, प्रवचन, सांस्कृतिक आयोजन और सामाजिक गतिविधियां आयोजित की जा सकेंगी। जानकारी के मुताबिक प्रदेश के करीब 100 नगरीय निकायों में गीता भवन बनाने के लिए जमीन भी उपलब्ध है। जहां जमीन मिल चुकी है, वहां जल्द निर्माण प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। इसके अलावा चार शहरों में ब्राउनफील्ड प्रोजेक्ट के तहत भी गीता भवन बनाने की मंजूरी दी गई है। यानी जहां पहले से सरकारी जमीन या भवन उपलब्ध हैं, उन्हें ही विकसित कर गीता भवन बनाया जाएगा। सरकार का मानना है कि इस योजना से शहरों में धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और लोगों को कार्यक्रमों के लिए बेहतर जगह मिल सकेगी।

विजय शाह मामले में फैसले के लिए उल्टी गिनती शुरू !

मध्य प्रदेश की राजनीति में एक टिप्पणी ने ऐसा बवाल खड़ा किया कि मामला सीधे देश की सबसे बड़ी अदालत तक पहुंच गया। अब इसी मामले में जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी चौथी स्टेटस रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश कर दी है। करीब दो महीने तक चली जांच के बाद तैयार की गई इस रिपोर्ट पर 17 मार्च को सुनवाई होनी है, जहां से मामले में आगे की दिशा तय हो सकती है। दरअसल, पूरा विवाद मध्य प्रदेश सरकार के जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह की एक टिप्पणी से शुरू हुआ। एक सार्वजनिक कार्यक्रम में उन्होंने सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर ऐसा बयान दे दिया, जिसने राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में हलचल मचा दी। बयान सामने आते ही विरोध के स्वर तेज हो गए और मामला शिकायतों से होते हुए जांच और अदालत तक जा पहुंचा। मामला जब तूल पकड़ने लगा तो जांच के लिए SIT का गठन किया गया। पिछले लगभग दो महीनों में टीम ने कार्यक्रम से जुड़े वीडियो, बयान और अन्य साक्ष्यों की पड़ताल की। कई लोगों से पूछताछ भी की गई और पूरे घटनाक्रम को खंगालने के बाद चौथी स्टेटस रिपोर्ट अदालत में सौंप दी गई। राजनीतिक गलियारों में अब चर्चा इस बात की है कि एक बयान ने ऐसा मोड़ ले लिया कि मंत्री जी को सफाई देने के साथ-साथ जांच और अदालत की प्रक्रिया का भी सामना करना पड़ रहा है। अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर है, जहां यह तय होगा कि यह मामला यहीं थमता है या फिर आगे और लंबी कहानी लिखता है।

एमपी में रेस्टोरेंट संचालकों के लिए राहत भरी खबर

राजधानी भोपाल में पिछले करीब एक हफ्ते से कमर्शियल LPG सिलेंडर की किल्लत ने होटल और ढाबा संचालकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। गैस की सप्लाई ठप पड़ने से कई छोटे होटल और खाने-पीने की दुकानों को अस्थायी रूप से ताला तक लगाना पड़ा। हालात ऐसे बन गए कि कई जगहों पर होटल संचालकों को वैकल्पिक इंतजामों से काम चलाना पड़ा। दरअसल, बीते 6-7 दिनों से कमर्शियल LPG सिलेंडरों की सप्लाई बेहद सीमित हो गई थी। इसकी वजह से शहर के सैकड़ों होटल, रेस्टोरेंट और ढाबे सीधे तौर पर प्रभावित हुए। होटल कारोबारियों का कहना है कि गैस न मिलने से किचन चलाना मुश्किल हो गया था, जिससे उन्हें ग्राहकों को भी वापस लौटाना पड़ा। हालांकि अब राहत की खबर सामने आ रही है। जानकारी के मुताबिक केंद्र सरकार की ओर से कमर्शियल LPG की सप्लाई दोबारा शुरू करने का फैसला किया गया है। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही शहर में सिलेंडरों की आपूर्ति सामान्य होने लगेगी, जिससे होटल कारोबारियों को बड़ी राहत मिल सकती है। होटल संचालकों का कहना है कि अगर जल्द सप्लाई बहाल नहीं होती तो कई छोटे कारोबार पूरी तरह बंद होने की कगार पर पहुंच सकते थे। फिलहाल सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि बाजार में गैस की आपूर्ति कितनी जल्दी सामान्य होती है।

Thursday, March 12, 2026

हेमंत कटारे बनेंगे राज्यसभा सांसद !

एमपी में राज्यसभा की एक सीट पर सस्पेंस, कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग का डर क्यों सता रहा है ,इसके पीछे का बड़ा कारण सामने आने लगा है,, एमपी विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के उपनेता के तेवर पार्टी को ये सोचने के लिए मजबूर कर रहे हैं,, हेमंत कटारे के तेवर लगातार बागी होते जा रहे हैं ,जिसके बाद माना जा रहा है कि राज्यसभा की कांग्रेस की एक सीट अब सुरक्षित नहीं है... मध्यप्रदेश में 19 जून को राज्यसभा की तीन सीटों के लिए चुनाव होने जा रहा है। इनमें दो सीटें भाजपा के पास हैं, जिन पर डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी और जॉर्ज कुरियन सांसद हैं। वहीं एक सीट कांग्रेस के खाते की है, जिस पर फिलहाल दिग्विजय सिंह सांसद हैं। दिग्विजय सिंह पहले ही राज्यसभा जाने से इनकार कर चुके हैं, जिसके बाद कांग्रेस में इस सीट के लिए कई दावेदार सामने आ गए हैं। कांग्रेस में बढ़ी दावेदारी दिग्विजय सिंह के इनकार के बाद कांग्रेस के भीतर इस सीट के लिए कई नेताओं ने दावा ठोक दिया है। इनमें प्रमुख नाम हैं: जीतू पटवारी – प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मीनाक्षी नटराजन – पूर्व सांसद कमलनाथ – पूर्व मुख्यमंत्री अरुण यादव – पूर्व केंद्रीय मंत्री कमलेश्वर पटेल – पूर्व मंत्री, विंध्य क्षेत्र का बड़ा चेहरा सज्जन सिंह वर्मा और प्रदीप अहिरवार – दलित वर्ग के नेता दलित वर्ग से किसी नेता को राज्यसभा भेजने की मांग भी उठ रही है। इस संबंध में कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने पत्र लिखकर मांग की है। कांग्रेस को क्यों है खतरा कांग्रेस के भीतर सबसे बड़ा डर क्रॉस वोटिंग का है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक यदि 5–6 विधायक भी इधर-उधर हो गए तो कांग्रेस की सीट खतरे में पड़ सकती है। बताया जा रहा है कि भाजपा की ओर से विधायकों को अगले चुनाव में टिकट और अन्य ऑफर देने की चर्चा भी पार्टी के अंदर चल रही है। विधानसभा के आंकड़े मध्यप्रदेश विधानसभा में फिलहाल भाजपा के पास 164 विधायक हैं। यदि भाजपा को एक-दो अतिरिक्त समर्थन मिल जाता है तो उसके लिए समीकरण और मजबूत हो सकते हैं। कांग्रेस को आशंका है कि उसके कुछ विधायक क्रॉस वोटिंग कर सकते हैं। पहले भी हो चुकी है क्रॉस वोटिंग 2022 के राष्ट्रपति चुनाव में भी मध्यप्रदेश में बड़े पैमाने पर क्रॉस वोटिंग देखने को मिली थी। उस समय विपक्ष के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा को अपेक्षा से काफी कम वोट मिले थे। अनुमान था कि उन्हें करीब 103 वोट मिलेंगे, लेकिन उन्हें केवल 79 वोट ही मिले। माना गया कि लगभग 19–20 विधायकों ने पार्टी लाइन से हटकर मतदान किया था। विपक्ष और भाजपा के बयान इस मुद्दे पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि भाजपा हमेशा तोड़फोड़ की राजनीति करती है, लेकिन कांग्रेस के विधायक मजबूत हैं और राज्यसभा सीट कांग्रेस की ही रहेगी। वहीं भाजपा विधायक अभिलाष पांडे का कहना है कि भाजपा के पास पर्याप्त विधायक हैं और पार्टी अपने संगठन और काम पर भरोसा करती है। जीत का गणित इस बार राज्यसभा चुनाव 230 विधायकों के गणित पर होगा। एक उम्मीदवार को जीतने के लिए लगभग 58 वोटों की जरूरत होगी। ऐसे में थोड़ी सी भी क्रॉस वोटिंग पूरे चुनाव का समीकरण बदल सकती है। निष्कर्ष: मध्यप्रदेश की इस राज्यसभा सीट पर चुनाव से पहले ही राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस के भीतर कई दावेदार हैं, वहीं क्रॉस वोटिंग की आशंका ने पार्टी की चिंता बढ़ा दी है। अब सभी की नजर 19 जून को होने वाले मतदान पर टिकी हुई है।

Tuesday, March 10, 2026

विजयपुर में विजयी कौन !

विजयपुर विधानसभा क्षेत्र को लेकर सियासी असमंजस की स्थिति तो बन ही गई है साथ में लगातार सियासी बयानबाजी भी जारी है,विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा का चुनाव हाईकोर्ट द्वारा शून्य करने के मामले को कांग्रेस ने इसे आदिवासियों का हक छीनने का मामला बताया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि भाजपा को यह कभी स्वीकार नहीं होगा कि एक आदिवासी व्यक्ति सामान्य सीट से विधायक कैसे बन गया। हम सुप्रीम कोर्ट में अपील कर कानूनी तरीके से फिर से कांग्रेस का विधायक बनवाएंगे। विजयपुर विधानसभा को लेकर हाई कोर्ट के निर्णय के बाद कांग्रेस के तमाम बड़े चेहरे मुकेश मल्होत्रा के समर्थन में कूद गए हैं,नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि देश में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां गंभीर आरोपों के बावजूद सत्ता पक्ष के नेताओं को राहत मिल जाती है। लेकिन हमें कोर्ट से उम्मीद है। मामले में राज्यसभा सदस्य विवेक तन्खा ने कहा कि विजयपुर विधान सभा के चुनाव याचिका में कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा को सर्वोच्च न्यायालय में अपील प्रस्तुत करके स्थगन आदेश प्राप्त करने का मौका प्रदान किया है। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि हाई कोर्ट ने भाजपा और रामनिवास रावत के साथ न्याय किया है। भाजपा इस फैसले का स्वागत करती है। हम हमेशा से न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करते हैं और आगे भी कोर्ट जो आदेश देगा हम उसका पालन करेंगे।फैसले के विरोध मे कांग्रेस नेताओं के बयान पर भी बीजेपी पलटवार करती नजर आ रही है एमपी की सियासत और न्यायिक व्यवस्था में ये पहली बार हुआ है कि किसी विधायक की विधायकी सीधे अदालत के आदेश से चली गई और हारे हुए प्रत्याशी को विधायकी मिल गई हो,,हालांकि फैसला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में अपील तक होल्ड पर है लेकिन इसने एमपी की सियासत को गरमा दिया है

Friday, March 6, 2026

एमपी में किसानों की बल्ले बल्ले, गेहूं खरीदी पर डबल लाभ...

मध्यप्रदेश के किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गेहूं खरीदी को लेकर बड़ा ऐलान किया है। अब किसानों को गेहूं बेचने पर पहले से ज्यादा पैसा मिलेगा। दरअसल, मुख्यमंत्री Dr. Mohan Yadav ने मुख्यमंत्री निवास में Bharatiya Kisan Sangh के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर किसानों से जुड़े कई बड़े फैसले लिए। बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हित में लगातार काम कर रही है और उन्हें उनकी फसल का अच्छा दाम दिलाने की कोशिश कर रही है। सरकार ने फैसला लिया है कि इस साल गेहूं खरीदी पर किसानों को ज्यादा दाम मिलेगा। केंद्र सरकार ने गेहूं का MSP 2585 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। इसके ऊपर मध्यप्रदेश सरकार 40 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस देगी। यानी अब किसानों को गेहूं का 2625 रुपये प्रति क्विंटल दाम मिलेगा। केंद्र सरकार ने गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2585 रुपए प्रति क्विंटल तय किया है। इस पर मध्यप्रदेश सरकार 40 रुपए प्रति क्विंटल का बोनस देगी। इस तरह अब प्रदेश के किसानों को गेहूं बेचने पर कुल 2625 रुपए प्रति क्विंटल मिलेंगे। सरकार के इस फैसले से किसानों को सीधा फायदा होगा और उनकी आमदनी बढ़ेगी। सरकार का कहना है कि किसानों को उनकी फसल का बेहतर दाम दिलाने के लिए यह फैसला लिया गया है। इससे प्रदेश के लाखों गेहूं उत्पादक किसानों को राहत मिलेगी।
इसके अलावा सरकार ने गेहूं खरीदी के लिए पंजीयन की अंतिम तारीख 7 मार्च से बढ़ाकर 10 मार्च कर दी है, ताकि जिन किसानों का रजिस्ट्रेशन नहीं हो पाया है, उन्हें भी मौका मिल सके। सरकार ने उड़द की खेती को बढ़ावा देने के लिए 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने की भी घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने किसानों से उड़द लगाने की अपील की है, ताकि उन्हें इसका फायदा मिल सके। साथ ही किसानों को राहत देने के लिए सिंचाई के लिए दिन में बिजली देने का भी फैसला लिया गया है, जिससे किसानों को रात में खेतों में जाकर पानी देने की परेशानी कम होगी। सरकार के इन फैसलों से प्रदेश के लाखों किसानों को फायदा मिलने की उम्मीद है।