Monday, April 13, 2026

अंबेडकर जयंती पर छुट्टी, पूरे MP में बंद रहेंगे सरकारी कार्यालय

 


भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर 14 अप्रैल को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है। इस संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग ने आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है। जारी आदेश के मुताबिक, 14 अप्रैल को प्रदेशभर के सभी शासकीय कार्यालय, सरकारी दफ्तर और कई शासकीय संस्थान बंद रहेंगे। इस दिन नियमित सरकारी कामकाज नहीं होगा। हर साल अंबेडकर जयंती के मौके पर प्रदेश में अवकाश घोषित किया जाता है। इस दिन विभिन्न जिलों में डॉ. अंबेडकर को श्रद्धांजलि देने के लिए कार्यक्रम, सभा और आयोजन भी किए जाते हैं। डॉ. भीमराव अंबेडकर को भारतीय संविधान का निर्माता माना जाता है और उन्होंने समाज में समानता और अधिकारों के लिए अहम योगदान दिया। सरकार के इस फैसले के बाद 14 अप्रैल को सरकारी कामकाज बंद रहेगा, वहीं प्रदेशभर में अंबेडकर जयंती को लेकर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

इंतजार खत्म: इस दिन आएगा 10वीं-12वीं का रिजल्ट

 


भोपाल। मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल (MPBSE) ने 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा 2026 के परिणाम की तारीख घोषित कर दी है। बोर्ड के अनुसार 15 अप्रैल 2026 को सुबह 11 बजे रिजल्ट जारी किया जाएगा।

रिजल्ट का ऐलान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे। इसके साथ ही लाखों छात्रों का इंतजार खत्म होगा।

कितने छात्रों ने दी परीक्षा

इस वर्ष करीब 9.5 लाख छात्रों ने 10वीं और लगभग 7.5 लाख छात्रों ने 12वीं की परीक्षा दी है। यानी कुल मिलाकर करीब 17 लाख विद्यार्थी रिजल्ट का इंतजार कर रहे हैं।

ऐसे चेक करें रिजल्ट

छात्र अपना परिणाम बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट mpbse.mponline.gov.in पर देख सकेंगे। इसके अलावा DigiLocker और MPBSE मोबाइल ऐप पर भी रिजल्ट उपलब्ध रहेगा।

रिजल्ट देखने के लिए छात्रों को रोल नंबर और आवेदन क्रमांक दर्ज करना होगा।

15 अप्रैल की तारीख प्रदेश के लाखों छात्रों के लिए बेहद अहम है, क्योंकि इसी दिन उनके भविष्य की अगली दिशा तय होगी।

Sunday, April 12, 2026

शिवराज, प्रहलाद और कैलाश को नई जिम्मेदारी

मध्य प्रदेश में भाजपा का नया कोर ग्रुप तैयार हो गया है इसकी पहली बैठक 14 अप्रैल को होगी... पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया,पूर्व मंत्री डॉ.नरोत्तम मिश्रा को भी इसमें शामिल किया गया है,साथ में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के नेतृत्व के साथ ही दोनों डिप्टी सीएम,मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, प्रहलाद पटेल, राकेश सिंह वीडी शर्मा समेत अन्य नेताओं को इसमें शामिल किया गया है। 15 नेताओं का यह कोर ग्रुप है जिसकी जल्द ही अधिकृत घोषणा होगी।14 अप्रैल की शाम 7:00 बजे सीएम हाउस में बैठक रखी गई है कुछ अहम मुद्दों पर चर्चा की जाएगी पार्टी के कार्यों पर भी चर्चा होगी,, कुछ नए प्रोग्राम जो आने वाले हैं उस पर भी मंथन होगा...

MP में बढ़ सकती हैं राज्यसभा सीटें, 3 की जगह 4 पर चुनाव की चर्चा


भोपाल। मध्यप्रदेश में राज्यसभा चुनाव से पहले सियासी समीकरण तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं। अब तक तीन सीटों पर चुनाव तय माना जा रहा था, लेकिन केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन को तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में उतारने के बाद एक और सीट खाली होने की संभावना ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है।

दरअसल, मुरुगन इस समय मध्यप्रदेश से राज्यसभा सदस्य हैं। अगर वे तमिलनाडु विधानसभा चुनाव जीतते हैं, तो उन्हें राज्यसभा से इस्तीफा देना होगा। ऐसे में प्रदेश में चौथी सीट खाली हो सकती है, जो सीधे तौर पर सत्ता संतुलन को प्रभावित करेगी।

बदलेगा पूरा चुनावी गणित

जून 2026 में मध्यप्रदेश की तीन राज्यसभा सीटें पहले ही खाली हो रही हैं, जिनमें दो भाजपा और एक कांग्रेस के पास है। लेकिन मुरुगन फैक्टर जुड़ने से सीटों की संख्या चार हो सकती है, जिससे चुनावी मुकाबला और दिलचस्प हो जाएगा।

भाजपा को बढ़त, कांग्रेस पर दबाव

विधानसभा में मजबूत बहुमत के चलते भाजपा अतिरिक्त सीट पर भी दावा मजबूत कर सकती है। ऐसे में पार्टी अपने संगठन या केंद्र के किसी बड़े चेहरे को राज्यसभा भेजने की रणनीति बना सकती है।

वहीं कांग्रेस के लिए यह स्थिति असहज हो सकती है। एक तरफ उसे अपनी सीट बचाने की चुनौती होगी, तो दूसरी तरफ संख्या बल की कमी उसके विकल्प सीमित कर सकती है।

क्यों अहम है यह बदलाव

राज्यसभा की अतिरिक्त सीट केवल संख्या का खेल नहीं है, बल्कि यह केंद्र और राज्य की राजनीति में भाजपा की पकड़ को और मजबूत कर सकती है। साथ ही, यह कांग्रेस के लिए राजनीतिक स्पेस और भी संकुचित करने वाला साबित हो सकता है।

अब निगाहें तमिलनाडु चुनाव के नतीजों पर टिकी हैं। अगर मुरुगन जीतते हैं, तो मध्यप्रदेश में राज्यसभा का समीकरण पूरी तरह बदल सकता है और भाजपा को एक और रणनीतिक बढ़त मिल सकती है।

Saturday, April 11, 2026

‘वंदे मातरम्’ गाने से इनकार पर बवाल, सीएम ने कांग्रेस को घेरा


इंदौर। इंदौर नगर निगम परिषद की बैठक के दौरान ‘वंदे मातरम्’ को लेकर विवाद खड़ा हो गया। जानकारी के मुताबिक, कांग्रेस पार्षद अनवर कादरी की पत्नी नाजिया कादरी (कांग्रेस पार्षद) ने परिषद की कार्यवाही के दौरान ‘वंदे मातरम्’ गाने से इंकार कर दिया।

बताया जा रहा है कि जैसे ही परिषद की बैठक की शुरुआत ‘वंदे मातरम्’ से की जा रही थी, उसी दौरान पार्षद नाजिया कादरी ने इसे गाने से मना कर दिया। इस पर भाजपा पार्षदों ने विरोध जताया और सदन में हंगामा शुरू हो गया। मामला बढ़ने पर बैठक का माहौल गर्मा गया और यह मुद्दा सियासी रंग ले गया।

सीएम मोहन यादव का बयान

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि कांग्रेस की पार्षद ने ‘वंदे मातरम्’ गाने से इंकार किया। उन्होंने कहा कि अगर इस पर कोई कार्रवाई नहीं होती है, तो कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और अन्य नेताओं को इस्तीफा दे देना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ देश का स्वाभिमान है और इसका अपमान किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।



महिलाओं को 33% आरक्षण, नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर BJP का जोर


 भोपाल। भाजपा प्रदेश कार्यालय में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को लेकर आयोजित पत्रकार-वार्ता में प्रदेश प्रवक्ता और पूर्व मंत्री अर्चना चिटनीस ने इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लाया गया यह कानून संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण देकर उन्हें नीति-निर्धारण में मजबूत भागीदारी देगा। उन्होंने बताया कि यह बिल 2023 में संसद से पारित होकर कानून बन चुका है और इसे लागू करने की प्रक्रिया जनगणना व परिसीमन के बाद पूरी होगी। इसके लिए 16 से 18 अप्रैल तक संसद का विशेष सत्र भी प्रस्तावित है।

चिटनीस ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि दशकों तक सत्ता में रहने के बावजूद उसने महिला आरक्षण लागू नहीं किया, बल्कि अटल बिहारी वाजपेयी के समय भी इसका विरोध किया गया। उन्होंने शाहबानो केस का जिक्र करते हुए कांग्रेस की नीतियों को महिला विरोधी बताया।

उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने उज्ज्वला, जनधन और मुद्रा जैसी योजनाओं के जरिए महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत किया है, वहीं मध्यप्रदेश में नगरीय निकायों में 50% आरक्षण देकर महिला भागीदारी पहले ही बढ़ाई गई है। बैठक में मंत्री विजय शाह, संपतिया उइके, सांसद लता वानखेड़े समेत कई नेता मौजूद रहे।

भाजपा इसे महिलाओं के लिए ऐतिहासिक बदलाव बता रही है, जबकि विपक्ष पर निशाना साधते हुए इसे राजनीतिक मुद्दा भी बनाया जा रहा है। आने वाले समय में इस कानून के लागू होने पर महिलाओं की राजनीति में भागीदारी बढ़ने की उम्मीद है।