Thursday, May 14, 2026

किसानों की बढ़ेगी कमाई! केंद्र सरकार का बड़ा फैसला

 


भोपाल। खरीफ सीजन से पहले किसानों के लिए राहत भरी खबर आई है। केंद्र सरकार ने विपणन वर्ष 2026-27 के लिए 14 खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है। इससे किसानों को अपनी फसल का ज्यादा दाम मिलेगा और उनकी आमदनी बढ़ने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक में यह फैसला लिया गया। सरकार का कहना है कि MSP बढ़ाने का उद्देश्य किसानों को उनकी लागत का बेहतर फायदा दिलाना और खेती को लाभ का सौदा बनाना है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इससे अन्नदाता किसानों को सीधा फायदा मिलेगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताते हुए कहा कि केंद्र सरकार लगातार किसानों के हित में फैसले ले रही है। माना जा रहा है कि MSP बढ़ने से धान, सोयाबीन, मक्का समेत खरीफ फसलों की खेती करने वाले किसानों को राहत मिलेगी। खासकर मध्यप्रदेश जैसे कृषि प्रधान राज्य में इसका बड़ा असर देखने को मिल सकता है। किसान अब उम्मीद कर रहे हैं कि फसल बेचने पर उन्हें पहले से बेहतर दाम मिलेंगे और खेती की बढ़ती लागत का कुछ बोझ कम होगा।

दिल्ली में मंथन, भोपाल में टेंशन! बड़े बदलाव के संकेत

 

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का दिल्ली दौरा भले “सरकारी” बताया जा रहा हो, लेकिन भाजपा के भीतर इसे सत्ता संतुलन और राजनीतिक मैनेजमेंट के बड़े मिशन के तौर पर देखा जा रहा है। दिल्ली में आज सीएम की कई बड़े नेताओं से मुलाकात प्रस्तावित है और इधर भोपाल से लेकर दिल्ली तक भाजपा के कई नेता ऐसे सक्रिय हो गए हैं, जैसे मंत्रिमंडल की शपथ बस अब होने ही वाली हो। सूत्रों की मानें तो दिल्ली में भाजपा संगठन और केंद्रीय नेतृत्व के साथ होने वाली बैठकों में सिर्फ विकास योजनाओं की चर्चा नहीं होगी, बल्कि कैबिनेट विस्तार, निगम-मंडल नियुक्तियां और सत्ता में क्षेत्रीय-सामाजिक संतुलन जैसे मुद्दों पर भी मंथन हो सकता है। यही वजह है कि कई पूर्व मंत्री और वरिष्ठ विधायक दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं। कोई “अनुभव” का हवाला दे रहा है, तो कोई “संगठन के प्रति समर्पण” याद दिला रहा है। सबसे ज्यादा चर्चा सिंधिया समर्थक और पूर्व मंत्री प्रभुराम चौधरी को लेकर है। सत्ता के गलियारों में चर्चा है कि मोहन यादव कैबिनेट में उन्हें जगह देकर सिंधिया खेमे को बड़ा संदेश दे सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो इसे सिर्फ मंत्रिमंडल विस्तार नहीं, बल्कि भाजपा के अंदरूनी शक्ति संतुलन की नई चाल माना जाएगा। खास बात यह है कि मोहन कैबिनेट में अब तक सिंधिया समर्थकों की भूमिका को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं, ऐसे में प्रभुराम की एंट्री कई राजनीतिक संकेत दे सकती है। इधर, दिल्ली में राजनीतिक समीकरण साधे जा रहे हैं, उधर मुख्यमंत्री प्रशासनिक सख्ती का संदेश देने में भी पीछे नहीं हैं। बताया जा रहा है कि सीएम दिल्ली से ही वर्चुअल माध्यम से करीब 45 अहम मुद्दों पर समीक्षा बैठक करेंगे। शहरी विकास, पेयजल, धार्मिक पर्यटन, औद्योगिक विकास और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर अफसरों से जवाब-तलब होगा। भाजपा के भीतर फिलहाल माहौल ऐसा है कि कोई नेता फोन साइलेंट नहीं रख रहा। दिल्ली में किसकी मुलाकात कितनी देर चली, कौन किसके बंगले पर पहुंचा और कौन बाहर निकलते समय मुस्कुरा रहा था — यही आज की सबसे बड़ी राजनीतिक चर्चा बनी हुई है।

मध्यप्रदेश की नब्ज टटोलने मध्यप्रदेश आ सकते हैं राहुल गांधी


भोपाल। मध्यप्रदेश कांग्रेस में लंबे समय से संगठन को मजबूत करने की कवायद चल रही है, लेकिन लगातार चुनावी हार और कमजोर जमीनी पकड़ के बीच अब पार्टी हाईकमान सीधे मैदान में उतरने की तैयारी करता नजर आ रहा है। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस नेता राहुल गांधी जून महीने में मध्यप्रदेश दौरे पर आ सकते हैं। माना जा रहा है कि उनका फोकस खासतौर पर रीवा और उज्जैन संभाग पर रहेगा, जहां संगठन की स्थिति और कार्यकर्ताओं की सक्रियता की समीक्षा की जाएगी। कांग्रेस संगठन से जुड़े सूत्रों का कहना है कि राहुल गांधी इस दौरे के दौरान बूथ स्तर तक पार्टी की मजबूती पर फीडबैक ले सकते हैं। साथ ही वे सीधे कार्यकर्ताओं से संवाद कर उनके सवाल और नाराजगी भी सुन सकते हैं। पार्टी के अंदर इसे 2027 की तैयारी के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।दरअसल, विधानसभा और लोकसभा चुनाव में कमजोर प्रदर्शन के बाद कांग्रेस अब संगठन में नई जान फूंकने की कोशिश कर रही है। प्रदेश नेतृत्व लगातार जिलों और संभाग स्तर पर बैठकों के जरिए कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने में जुटा है। ऐसे में राहुल गांधी का संभावित दौरा कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भरने की रणनीति माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक राहुल गांधी कार्यकर्ताओं से सीधा सवाल-जवाब भी कर सकते हैं। इसके लिए प्रदेश संगठन ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है। कार्यकर्ताओं को अपने क्षेत्र की राजनीतिक स्थिति, स्थानीय मुद्दों और संगठनात्मक गतिविधियों की जानकारी अपडेट रखने को कहा जा रहा है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि भाजपा के मजबूत संगठन और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सक्रिय राजनीति के बीच कांग्रेस के लिए 2027 की राह आसान नहीं है। ऐसे में राहुल गांधी का यह दौरा सिर्फ संगठनात्मक समीक्षा नहीं, बल्कि प्रदेश में कांग्रेस की नई राजनीतिक रणनीति का संकेत भी माना जा रहा है।

Tuesday, May 12, 2026

पेट्रोल-डीजल बचाने के लिए सीएम मोहन यादव का बड़ा फैसला



भोपाल। मध्यप्रदेश में पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बड़ा ऐलान किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर मुख्यमंत्री ने प्रदेश में सादगी और ईंधन बचत को बढ़ावा देने के लिए नई पहल शुरू करने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश राष्ट्रहित में पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने के लिए संकल्पित है। उन्होंने बताया कि आगामी आदेश तक उनके कारकेड में सुरक्षा की दृष्टि से न्यूनतम वाहनों का ही इस्तेमाल किया जाएगा। साथ ही भ्रमण के दौरान किसी भी प्रकार की वाहन रैली नहीं निकाली जाएगी। सीएम ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी मंत्रीगण भी यात्रा के समय न्यूनतम वाहनों का उपयोग करेंगे। इसके अलावा हाल ही में नियुक्त निगम-मंडल पदाधिकारियों को भी सादगी से कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से भी सार्वजनिक परिवहन को अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रहित सर्वोपरि है और ईंधन की बचत देशहित से जुड़ा विषय है। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, इसे केवल प्रशासनिक निर्देश नहीं बल्कि एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक संदेश भी माना जा रहा है। ऐसे समय में जब लगातार बढ़ते ट्रैफिक, प्रदूषण और ईंधन खपत को लेकर चिंता जताई जा रही है, सरकार का यह कदम सादगी और संसाधन बचत की दिशा में अहम माना जा रहा है।

एमपी में मंत्रिमंडल विस्तार अगले हफ्ते,, सिंधिया समर्थक प्रभुराम चौधरी बनेंगे मंत्री

भोपाल। मध्यप्रदेश की राजनीति में एक बार फिर कैबिनेट विस्तार की चर्चाएं तेज हो गई हैं। सत्ता के गलियारों में चर्चा है कि अगले हफ्ते मोहन सरकार का मंत्रिमंडल विस्तार हो सकता है। इसी के साथ भाजपा के कई विधायक और संगठन से जुड़े नेता मंत्री बनने के सपने सजाने लगे हैं। लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा सिंधिया समर्थक और पूर्व मंत्री प्रभुराम चौधरी के नाम को लेकर हो रही है। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव उन्हें मंत्री बनाकर बड़ा सियासी संदेश देने की तैयारी में हैं। सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री मोहन यादव अब मंत्रिमंडल में क्षेत्रीय और राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश में जुटे हैं। ऐसे में सांची से विधायक और ज्योतिरादित्य सिंधिया खेमे के मजबूत चेहरों में शामिल प्रभुराम चौधरी का नाम सबसे आगे चल रहा है। प्रभुराम चौधरी शिवराज सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रह चुके हैं और सिंधिया समर्थक नेताओं में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। बता दें मौजूदा समय में मोहन यादव कैबिनेट में मुख्यमंत्री और दो डिप्टी सीएम समेत कुल 31 मंत्री हैं, जबकि संवैधानिक रूप से मंत्रिमंडल में अभी कुछ सीटें खाली हैं। दिसंबर 2023 में बने मंत्रिमंडल में कई दिग्गजों को जगह मिली थी, लेकिन विस्तार की गुंजाइश अब भी बनी हुई है। राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि अगर प्रभुराम चौधरी को मंत्री बनाया जाता है, तो इसे सिंधिया खेमे को साधने और संतुलन बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जाएगा। फिलहाल मोहन कैबिनेट में तुलसी सिलावट, गोविंद सिंह राजपूत, प्रद्युम्न सिंह तोमर और ऐदल सिंह कंसाना जैसे सिंधिया समर्थक चेहरे पहले से मौजूद हैं, लेकिन प्रभुराम चौधरी की एंट्री को अलग राजनीतिक संदेश माना जा रहा है। कैबिनेट विस्तार की चर्चाओं के बीच भाजपा के भीतर भी हलचल बढ़ गई है। कई विधायक और नेता भोपाल-दिल्ली के चक्कर काटते नजर आ रहे हैं। संगठन और सत्ता के बीच जातीय, क्षेत्रीय और गुटीय संतुलन को लेकर लगातार मंथन चल रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मोहन यादव सरकार का यह विस्तार सिर्फ खाली सीटें भरने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसके जरिए भाजपा 2028 की रणनीति और अंदरूनी समीकरणों को भी साधने की कोशिश करेगी।

Monday, May 11, 2026

एमपी में कर्मचारियों का बढ़ा इंतजार,, अटक गई ट्रांसफर पॉलिसी


भोपाल। मध्यप्रदेश के लाखों सरकारी कर्मचारियों को एक बार फिर ट्रांसफर पॉलिसी के लिए इंतजार करना पड़ेगा। मंगलवार को हुई मोहन कैबिनेट की बैठक में तबादला नीति पर कोई फैसला नहीं हो सका। लंबे समय से कर्मचारी नई ट्रांसफर पॉलिसी का इंतजार कर रहे थे, लेकिन कैबिनेट बैठक के बाद भी स्थिति साफ नहीं हो पाई। कैबिनेट बैठक के बाद मंत्री चेतन कश्यप ने कहा कि ट्रांसफर पॉलिसी पर फिलहाल कोई निर्णय नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि “जब पॉलिसी आएगी, तब जानकारी दी जाएगी।” सूत्रों के मुताबिक, तबादला नीति को लेकर प्रभारी मंत्रियों और विभागीय मंत्रियों के बीच सहमति नहीं बन पा रही है। कई विभागों में तबादलों के अधिकार और प्रक्रिया को लेकर पेंच फंसा हुआ है, जिसके चलते मामला अभी अटका हुआ है। दरअसल, हर साल ट्रांसफर पॉलिसी जारी होने के बाद कर्मचारियों को तबादले के लिए आवेदन और विकल्प का मौका मिलता है। इस बार भी बड़ी संख्या में कर्मचारी नई नीति का इंतजार कर रहे हैं, खासकर वे कर्मचारी जो लंबे समय से एक ही जगह पदस्थ हैं या पारिवारिक और स्वास्थ्य कारणों से स्थानांतरण चाहते हैं। अब कर्मचारियों की नजर सरकार के अगले फैसले पर टिकी है। माना जा रहा है कि मंत्रियों के बीच सहमति बनने के बाद ही ट्रांसफर पॉलिसी को मंजूरी मिल पाएगी।