भोपाल। राजधानी भोपाल में माध्यमिक शिक्षक वर्ग-2 के चयनित अभ्यर्थियों का गुस्सा मंगलवार को सड़कों पर फूट पड़ा। प्रदेश के अलग-अलग जिलों से पहुंचे अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री निवास के सामने जोरदार प्रदर्शन करते हुए नियुक्ति पत्र जारी करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार लंबे समय से नियुक्ति प्रक्रिया को टाल रही है, जिससे उनका भविष्य अधर में लटक गया है। अभ्यर्थियों ने नारेबाजी करते हुए कहा कि उन्हें सिर्फ आश्वासन मिल रहा है, लेकिन नियुक्ति को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा। अभ्यर्थियों के मुताबिक, भर्ती प्रक्रिया वर्ष 2022 में विज्ञापन जारी होने के साथ शुरू हुई थी। इसके बाद 2023 में पात्रता परीक्षा आयोजित की गई, अप्रैल 2025 में चयन परीक्षा हुई और सितंबर 2025 में परिणाम घोषित कर दिए गए। इसके बावजूद अब तक करीब 10,700 चयनित उम्मीदवारों को नियुक्ति नहीं मिली है। उन्होंने बताया कि नियमानुसार चयन के तीन महीने के भीतर नियुक्ति आदेश जारी होना चाहिए था, लेकिन 2026 तक भी यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है। लगातार हो रही देरी से अभ्यर्थियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। प्रदर्शन के दौरान स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई जब अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री निवास की ओर बढ़ने की कोशिश की। पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए बल प्रयोग किया और लाठीचार्ज किया, जिससे मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। फिलहाल पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित कर लिया है और सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। वहीं, अभ्यर्थी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और जल्द से जल्द नियुक्ति पत्र जारी करने की मांग कर रहे हैं।
Wednesday, April 1, 2026
“स्कूल चलें हम” से सजेगा भविष्य, हर बच्चे को शिक्षा से जोड़ने का संकल्प
भोपाल। मध्य प्रदेश में “स्कूल चलें हम” अभियान और राज्य स्तरीय प्रवेशोत्सव की आज से शुरुआत हो गई है। राजधानी भोपाल में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्वयं बच्चों का स्कूल में प्रवेश करवाकर अभियान का शुभारंभ किया। यह अभियान 1 अप्रैल से 4 अप्रैल तक पूरे प्रदेश में चलाया जाएगा, जिसमें अधिक से अधिक बच्चों को स्कूल से जोड़ने और नामांकन बढ़ाने पर विशेष फोकस रहेगा। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में ड्रॉपआउट को शून्य करने का लक्ष्य रखा गया है और इस दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष नामांकन में करीब 19.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो शिक्षा के प्रति बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।सीएम ने यह भी कहा कि सरकारी स्कूलों में सुविधाओं के विस्तार के चलते अब बच्चों का रुझान बढ़ रहा है। “सांदीपनि” स्कूलों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि बेहतर शिक्षा और आधुनिक सुविधाओं के कारण कई छात्र निजी स्कूल छोड़कर सरकारी स्कूलों में प्रवेश ले रहे हैं। प्रदेश में अब तक 369 सांदीपनि स्कूल स्थापित किए जा चुके हैं, जहां गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। सरकार द्वारा विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए साइकिल, किताबें, ड्रेस, लैपटॉप और स्कूटी जैसी योजनाएं भी संचालित की जा रही हैं। सीएम ने बताया कि 75% से अधिक अंक लाने वाले छात्रों को लैपटॉप दिए जाते हैं, वहीं उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को स्कूटी भी प्रदान की जा रही है। इसके लिए बजट में विशेष प्रावधान किया गया है। वहीं स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने बताया कि पूरे प्रदेश में इस अभियान को “प्रवेशोत्सव” के रूप में मनाया जा रहा है। अब तक करीब 1 करोड़ बच्चों का पंजीयन हो चुका है और सरकार ने 1 करोड़ 40 लाख नामांकन का लक्ष्य तय किया है। उन्होंने कहा कि अगले 4 महीनों में बच्चों को साइकिल, किताब और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। यदि गणवेश समय पर तैयार नहीं हो पाती है, तो डीबीटी के माध्यम से राशि सीधे विद्यार्थियों के खातों में दी जाएगी।
अभियान में क्या-क्या होगा?
घर-घर जाकर बच्चों का नामांकन
रैलियां और जागरूकता कार्यक्रम
स्कूलों में स्वागत समारोह
ड्रॉपआउट बच्चों को फिर से जोड़ने की कोशिश
जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी
“स्कूल चलें हम” अभियान सिर्फ एक नामांकन ड्राइव नहीं, बल्कि हर बच्चे को शिक्षा से जोड़ने का एक बड़ा सामाजिक संकल्प है। सरकार की कोशिश है कि प्रदेश का कोई भी बच्चा स्कूल से दूर न रहे और शिक्षा के जरिए उसका भविष्य मजबूत हो सके।
भोपाल में लाठीचार्ज, हंगामा और एनकाउंटर
भोपाल। राजधानी भोपाल में गौ-हत्या के विरोध में हिंदू संगठनों का प्रदर्शन जारी है और माहौल पहले से ही तनावपूर्ण बना हुआ है। इसी बीच मामले में एक बड़ा और नाटकीय घटनाक्रम सामने आया है। पुलिस द्वारा हिरासत में लिए गए मुख्य आरोपी आसिफ का शॉर्ट एनकाउंटर हो गया। जानकारी के अनुसार, पुलिस उसे पूछताछ के बाद थाने लेकर जा रही थी। इसी दौरान रातीबड़ इलाके में रास्ते में आरोपी ने अचानक पुलिसकर्मी से पिस्टल छीन ली और पुलिस पर फायरिंग कर दी। अचानक हुई इस घटना से मौके पर अफरा-तफरी मच गई। पुलिस ने तत्काल जवाबी कार्रवाई करते हुए फायरिंग की, जिसमें आसिफ को गोली लग गई और वह घायल हो गया। घटना के तुरंत बाद घायल आरोपी को कड़ी सुरक्षा के बीच हमीदिया अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसका इलाज जारी है। पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।
दरअसल, भोपाल में हाल ही में गौ-हत्या की एक घटना सामने आई थी, जिसके बाद शहर में आक्रोश फैल गया। हिंदू संगठनों ने इसके विरोध में प्रदर्शन शुरू कर दिए और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग तेज हो गई। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी आसिफ को हिरासत में लिया था। लेकिन थाने ले जाते समय हुए इस घटनाक्रम ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपी के पास हथियार कैसे पहुंचा और सुरक्षा में कहां चूक हुई।
Tuesday, March 31, 2026
आसमान की मार और सिस्टम की देरी, बीच में फंसा किसान
भोपाल। मध्य प्रदेश में समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं खरीदी इस बार तय समय से देरी से शुरू होने जा रही है। सरकार ने खरीदी की नई तारीखें तय की हैं—चार संभागों में 10 अप्रैल से और बाकी संभागों में 15 अप्रैल से खरीदी शुरू होगी। लेकिन इस फैसले के बीच किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है, क्योंकि खेतों से निकली फसल अभी खुले में ही पड़ी है और मौसम लगातार खराब बना हुआ है। प्रदेश के कई इलाकों में आंधी, बारिश और ओलावृष्टि का खतरा बना हुआ है। ऐसे में लाखों क्विंटल गेहूं खुले में पड़ा होने से उसके खराब होने का डर किसानों को सता रहा है। कई किसानों के पास सुरक्षित भंडारण की सुविधा नहीं है, जिससे उनकी मेहनत पर पानी फिरने का खतरा बढ़ गया है।
इससे किसानों को क्या फायदा?
सरकार द्वारा MSP पर खरीदी से किसानों को तय न्यूनतम कीमत की गारंटी मिलेगी
देरी के कारण मंडियों में भीड़ कम हो सकती है, जिससे प्रक्रिया थोड़ी व्यवस्थित रह सकती है
कुछ किसानों को फसल सुखाने और तैयार करने का अतिरिक्त समय मिला है
ज्यादा भारी पड़ सकता है नुकसान
खराब मौसम के कारण खुले में रखी फसल खराब होने का खतरा
ओलावृष्टि और बारिश से गुणवत्ता गिरने पर MSP का लाभ भी प्रभावित हो सकता है
भंडारण की कमी के कारण छोटे और सीमांत किसान सबसे ज्यादा प्रभावित
मंडियों में खरीदी देर से शुरू होने पर भुगतान में भी देरी की आशंका
चिंता क्यों बढ़ी?
किसानों का कहना है कि अगर खरीदी समय पर शुरू होती तो फसल सीधे मंडियों में पहुंच जाती और खराब मौसम का असर कम होता। अब देरी के कारण उन्हें अपनी उपज को बचाने के लिए अतिरिक्त इंतजाम करने पड़ रहे हैं, जो हर किसान के बस की बात नहीं है।
सरकार की ओर से MSP खरीदी किसानों के लिए राहत का बड़ा माध्यम है, लेकिन इस बार देरी और खराब मौसम ने हालात मुश्किल बना दिए हैं। खेत से मंडी तक का सफर इस बार किसानों के लिए आसान नहीं, बल्कि चिंता और जोखिम से भरा नजर आ रहा है।
भोपाल में सजी युवा चौपाल, सियासत की नई कहानी लिखने को तैयार नई पीढ़ी
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पहली बार आयोजित युवा विधायक सम्मेलन ने राजनीति के भविष्य की एक झलक पेश की। दो दिनों तक चले इस खास आयोजन में मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के 45 युवा विधायक एक मंच पर नजर आए। सम्मेलन में जहां एक ओर ‘विकसित भारत 2047’ के विजन पर गंभीर और सार्थक मंथन हुआ, वहीं दूसरी ओर कुछ बयानों को लेकर सियासी हलचल भी तेज हो गई। सम्मेलन की शुरुआत उत्साह और पारंपरिक रंगों के साथ हुई। पहले दिन लोकतंत्र में आम नागरिकों की भागीदारी को और मजबूत बनाने और युवा जनप्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर गहन चर्चा की गई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने युवा विधायकों को मार्गदर्शन देते हुए उन्हें जिम्मेदार और दूरदर्शी नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दिया। दूसरे दिन कार्यक्रम में राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह का संबोधन खास रहा। उन्होंने विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सभी राजनीतिक दलों की साझा भागीदारी को जरूरी बताया। हालांकि उनके बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं और माहौल में हल्की सियासी गर्माहट देखने को मिली। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने उनके बयान पर सवाल उठाते हुए सरकार को घेरा, जबकि सत्तापक्ष ने इसे सकारात्मक और भविष्य की दिशा तय करने वाला प्रयास बताया। इस दौरान पक्ष और विपक्ष के बीच विचारों का टकराव भी साफ नजर आया। कुल मिलाकर, यह सम्मेलन सिर्फ एक औपचारिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि यह ऐसा मंच बनकर उभरा जहां नई पीढ़ी के जनप्रतिनिधियों ने न केवल अपने विचार साझा किए, बल्कि देश और प्रदेश की राजनीति की दिशा पर भी संकेत दिए। विजन और विचारों के इस संगम के बीच सियासत की हलचल ने इसे और भी अहम बना दिया।
किस दिन मिलेगा कौन सा मंत्री? बीजेपी ने जारी किया पूरा कैलेंडर
भोपाल। मध्य प्रदेश बीजेपी ने संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय को मजबूत करने के लिए एक नई पहल की है। पार्टी ने अप्रैल महीने के लिए “जनसुनवाई कैलेंडर” जारी किया है, जिसके तहत मोहन कैबिनेट के मंत्री क्रमवार भोपाल स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में बैठकर कार्यकर्ताओं की समस्याएं सुनेंगे। जारी शेड्यूल के मुताबिक, हर दिन तय समय—सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक—मंत्री कार्यालय में मौजूद रहेंगे और विभिन्न जिलों से आने वाले कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद करेंगे। इस दौरान कार्यकर्ता अपनी स्थानीय समस्याएं, संगठनात्मक मुद्दे और विकास से जुड़े सुझाव सीधे मंत्रियों तक पहुंचा सकेंगे। कैलेंडर में साफ तौर पर अलग-अलग तारीखों पर अलग-अलग मंत्रियों की जिम्मेदारी तय की गई है। इसमें खेल एवं युवा कल्याण, नगरीय विकास, स्वास्थ्य, पंचायत, ऊर्जा, शिक्षा, कृषि सहित कई विभागों के मंत्री शामिल हैं, जो अपने-अपने दिन पर उपस्थित रहेंगे। साथ ही, कार्यप्रणाली को सुचारू बनाए रखने के लिए प्रदेश पदाधिकारियों को भी जिम्मेदारी सौंपी गई है। समन्वय की भूमिका तय करते हुए वरिष्ठ नेता लोकेंद्र पाराशर को उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल से जुड़े समन्वय का जिम्मा दिया गया है। इसी तरह अन्य मंत्रियों के लिए भी अलग-अलग पदाधिकारियों की तैनाती की गई है। इस पहल का उद्देश्य संगठन और सरकार के बीच सीधा संवाद स्थापित करना, कार्यकर्ताओं की समस्याओं का त्वरित समाधान करना और जमीनी स्तर पर फीडबैक को मजबूत करना है। बीजेपी इसे संगठनात्मक मजबूती के साथ-साथ जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम मान रही है।
क्या खास है इस कैलेंडर में:
अप्रैल भर मंत्री तय शेड्यूल के अनुसार कार्यालय में बैठेंगे
रोजाना 11 से 1 बजे तक जनसुनवाई
अलग-अलग विभागों के मंत्री अलग-अलग दिन
कार्यकर्ताओं को सीधे मंत्री से मिलने का मौका
समन्वय के लिए पदाधिकारियों की तैनाती
यह व्यवस्था पार्टी के अंदर संवाद को नई दिशा देने और कार्यकर्ताओं के साथ सीधा जुड़ाव मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है।शिश के रूप में देखी जा रही है।





