Friday, February 6, 2026

“कार्यक्रम में नहीं आईं तो लाड़ली बहना योजना से बाहर! मंत्री के बयान पर बवाल”


सीहोर। मध्यप्रदेश के सीहोर जिले में आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान सरकार के मंत्री करण सिंह वर्मा ने लाड़ली बहना योजना को लेकर ऐसा बयान दिया, जिसने सियासी हलकों में हलचल मचा दी। मंत्री ने मंच से कहा कि योजना का लाभ लेने वाली महिलाओं को सरकारी कार्यक्रमों में मौजूद रहना चाहिए।

अनुपस्थिति पर सूची की बात

मंत्री ने कहा कि जिले में सैकड़ों महिलाएं हर महीने योजना की राशि ले रही हैं, लेकिन सरकारी आयोजनों में उनकी भागीदारी बहुत कम रहती है। उन्होंने इशारों में कहा कि लगातार अनुपस्थित रहने पर लाभार्थी सूची की समीक्षा की जा सकती है।

कल्याणकारी योजना या शर्तों की राजनीति?

जिस लाड़ली बहना योजना को सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण की मिसाल बताती रही है, उसी योजना को लेकर सरकार के मंत्री का यह बयान अब सवालों के घेरे में है। लोग पूछ रहे हैं कि क्या कल्याणकारी योजनाओं को अब उपस्थिति और कार्यक्रमों से जोड़ा जाएगा?

बयान के बाद सियासी चर्चा तेज

मंत्री के इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस शुरू हो गई है। विपक्ष इसे सरकार की कथनी और करनी का फर्क बता रहा है, वहीं आम जनता के बीच भी इस बयान को लेकर नाराजगी देखी जा रही है।




भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत की दिल्ली में सक्रियता के मायने

एमपी बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल अब लगातार सक्रिय नजर आ रहे हैं, संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा की विदाई के बाद खंडेलवाल का अंदाज बदल गया है,, वो संगठन को मजबूत करने में पूरी ताकत से जुट गए हैं,, इतना ही नहीं राजनैतिक नियुक्तियों को लेकर भी उन्होंने दिल्ली में महत्वपूर्ण बैठके की है,, लगातार राजधानी भोपालमें भी उनकी सक्रियता तेजी से बड़ी है,, माना जा रहा है कि हेमंत अब अपने असल अंदाज में नजर आएंगे,, हेमंत खंडेलवाल केसदर्भ में यह माना जाता है कि वे बेहद विनम्र है लेकिन खंडेलवाल बड़े निर्णय लेने में समय नहीं लेते ,, उन्होंने पार्टी में अनुशासन को लेकर कठोर कदम उठाए है, हेमंत खडेलवाल ने दिल्ली में।एमपी के सांसदों के साथ भी लंबी बैठक की..BJP सांसदों के साथ प्रदेश अध्यक्ष की वन टू वन चर्चा हुई है,बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने प्रदेश के लोकसभा और राज्यसभा सांसदों के साथ भोजन एवं संवाद किया ,ये मुलाकात केंद्रीय मंत्री दुर्गादास उइके क़े निवास पर हुई,,बैठ में प्रदेश के विकास संगठनात्मक मजबूती और कार्यक्रमों को लेकर गहन चर्चा हुई,,साथ में संसदीय क्षेत्रवार विकास योजनाओं पर जोर के साथ केंद्र-राज्य समन्वय पर विशेष बातचीत हुई |

Thursday, February 5, 2026

भोपाल में रात का आतंक खत्म: ‘नाइट ब्लेड अटैकर’ गिरफ्तार, वजह आई सामने


भोपाल। राजधानी भोपाल में बीते कुछ दिनों से रात के समय युवतियों पर चाकू से हमला करने वाले युवक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी की गिरफ्तारी के बाद शहरवासियों ने राहत की सांस ली है। यह घटनाएं भोपाल के पिपलानी और अयोध्या नगर थाना क्षेत्र में सामने आई थीं, जिससे इलाके में दहशत का माहौल बन गया था। पुलिस के अनुसार आरोपी रात के समय अकेली युवतियों को निशाना बनाता था और अचानक पीछे से चाकू या ब्लेड से हमला कर मौके से फरार हो जाता था। लगातार हो रही वारदातों के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विशेष टीमों का गठन किया था।

सीसीटीवी से हुई पहचान

भोपाल पुलिस ने करीब 25 टीमों को अलग-अलग इलाकों में तैनात किया और सैकड़ों सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। तकनीकी साक्ष्यों और लोकेशन ट्रैकिंग के आधार पर आरोपी की पहचान की गई। इसके बाद मिनाल क्षेत्र में घेराबंदी कर आरोपी को गिरफ्तार किया गया।

पूछताछ में चौंकाने वाले खुलासे

प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने कई वारदातों को अंजाम देना स्वीकार किया है। पुलिस के मुताबिक आरोपी मध्य प्रदेश के सागर जिले का रहने वाला है और मानसिक तनाव के चलते उसने इन घटनाओं को अंजाम दिया। हालांकि, पुलिस आरोपी के आपराधिक रिकॉर्ड और हमलों के पीछे की पूरी वजह की गहन जांच कर रही है।

सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश

घटना के बाद पुलिस ने रात के समय गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही नागरिकों से अपील की गई है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना पुलिस को दें। फिलहाल आरोपी को न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई के लिए कोर्ट में पेश किया जाएगा।




विजय शाह विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने MP सरकार को लगाई फटकार, 2 हफ्ते में फैसला जरूरी



भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री विजय शाह के एक विवादित बयान को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा है। यह टिप्पणी कर्नल सोफिया कुरैशी से जुड़ी थी, जिसे अदालत ने गंभीर प्रकृति का माना। पहले इस पर हाई कोर्ट ने FIR दर्ज करने के आदेश दिए थे, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले की निगरानी अपने हाथ में ली।

SIT जांच और रिपोर्ट

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर इस मामले की जांच के लिए विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया था। SIT ने जांच पूरी कर अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। अब सवाल यह है कि मंत्री विजय शाह के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के लिए सरकार अभियोजन की अनुमति देती है या नहीं।

सरकार की देरी पर कोर्ट नाराज़

जांच पूरी होने के बावजूद राज्य सरकार की ओर से अब तक कोई स्पष्ट फैसला नहीं लिया गया है। इसी देरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराज़गी जताई है। अदालत ने कहा कि मामले को लटकाना स्वीकार्य नहीं है।

दो हफ्ते की अंतिम मोहलत

सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को साफ निर्देश देते हुए कहा है कि दो हफ्ते के भीतर यह तय किया जाए कि मंत्री विजय शाह के खिलाफ मुकदमा चलाया जाएगा या नहीं। कोर्ट ने संकेत दिए कि आगे और देरी पर सख्ती बढ़ सकती है।

माफी पर भी सवाल

मंत्री विजय शाह की ओर से पहले दी गई माफी को भी सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल पर्याप्त नहीं माना है। अदालत का मानना है कि सिर्फ माफी से मामला खत्म नहीं किया जा सकता।

सियासी असर तेज

इस पूरे मामले को लेकर प्रदेश की राजनीति में भी हलचल है। विपक्ष सरकार पर हमलावर है, वहीं आने वाले दिनों में यह विवाद राजनीतिक रूप से और गर्माने के संकेत दे रहा है।

Wednesday, February 4, 2026

मोहन यादव का दिल्ली दौरा, इस बार लिस्ट होगी फाइनल

मध्य प्रदेश में लंबे समय से लटकी निगम मंडलों की सूची अगले दो दिन में सामने आ सकती है , दिल्ली में हाईकमान ने जंबो लिस्ट को मंजूरी दे दी है मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहनयदव का दिल्ली दौर इस मायने में बेहद अहम माना जा रहा है,, माना जा रहा है कि निगममडलों में नियुक्ति के साथ ही मोहन मंत्रिमंडल में भी कुछ बदलाव हो सकते हैं कुछ सीनियर मंत्रियों को अब केंद्रीय संगठन में जिम्मेदारी देने की तैयारी है.. निगम मंडलों के लिए ये नाम लगभग फाइनल इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, उज्जैन, जबलपुर जैसे बड़े शहरों के प्राधिकरणों में नियुक्तियां होंगी। निगम मंडल प्राधिकरण में चेतन सिंह चौहान, शशांक श्रीवास्तव, शैलेंद्र शर्मा, राघवेंद्र शर्मा, केपी त्रिपाठी, श्याम बंसल, दीपक सक्सेना, संजय नगाइच, सतेंद्र भूषण सिंह, आशीष अग्रवाल, गिरीश द्विवेदी, वीरेंद्र गोयल, अखिलेश जैन इन नेताओं को जगह मिल सकती है केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की करीबी आदिवासी वित्त विकास निगम की अध्यक्ष निर्मला बारेला की जगह किसी दूसरे ट्राइबल लीडर को कमान दी जा सकती है। इधर, दो हजार से कम अंतर से विधानसभा चुनाव हारे आदिवासी नेताओं को मंत्री का दर्जा मिल सकता है। इनमें कल सिंह भाबर, वेल सिंह भूरिया, नत्थन शाह कवरेती, भगत सिंह नेताम, प्रेम सिंह पटेल जैसे नेताओं को मंत्री का दर्जा दिया जा सकता है निगम-मंडल की सूची में राजनीतिक संतुलन बनाए रखने के लिए ग्वालियर-चंबल में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की पसंद को महत्व दिया जाएगा। सिंधिया के करीबियों में पूर्व नगरीय प्रशासन राज्यमंत्री ओपीएस भदौरिया, इमरती देवी, रघुराज कंसाना, पूर्व मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया और मुन्नालाल गोयल के नामों पर चर्चा हो चुकी है। वही रामनिवास रावत अभी भी निगम मंडल में नियुक्ति लेने के लिए तैयार नहीं है,,दूसरी तरफ कुछ पूर्व बीजेपी जिलाध्यक्ष को भी मंत्री पद का दर्जा देने की तैयारी है

रात के ढाई बजे थाने में घुसे बीजेपी विधायक, पुलिसकर्मियों की उड़ी नींद, VIDEO हुआ वायरल!


विदिशा। मध्यप्रदेश में जनता की सुरक्षा करने वाले पुलिसकर्मी गहरी नींद में सो रही है, ये हम नहीं सिरोंज से बीजेपी के विधायक उमाकांत शर्मा का कहना है। दरअसल, मंगलवार रात करीब ढाई बजे क्षेत्र के विधायक उमाकांत शर्मा आंनदपुर ईलाके में पहुंचे थे। तभी विधायक शर्मा औचक निरीक्षण के लिए थाने पहुंचे। यहां पहुंचने के बाद विधायक जी नजारा देखकर दंग रह गए। थाने का चैनल गेट खुला हुआ था, कमरों के दरवाजे खुले हुए थे, कुर्सियां खाली और बेंच पर सोता जवान मिला। ये न तो सिपाही था न ही आरक्षक, ये जवान था होमगॉर्ड का सिपाही जिसके भरोसे पूरा थाना और शहर छोड़ रखा था।

10 से 15 मिनट घूमने के बाद इस लापरवाही को देखते हुए, गहरी नींद में सो रहे सिपाही को विधायक ने खुद जगाया और पूछताछ की। इसी बीच, थाना प्रभारी अनुज प्रताप सिंह को विधायक के निरीक्षण की जानकारी मिली और वे भी आनन-फानन में थाने पहुंचे। थाना प्रभारी अनुज प्रताप सिंह ने सफाई देते हुए बताया कि थाने में कुल 20 पुलिसकर्मी पदस्थ हैं, जिनमें 3 महिला आरक्षक भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि वे थाने के पास बने क्वार्टर में थे और क्षेत्र में पुलिस गश्त जारी थी। विधायक ने इस स्थिति पर नाराजगी जताते हुए कहा कि अगर कोई गलत इरादे वाला व्यक्ति आता, तो थाने से सामान तक ले जा सकता था।

विधायक ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट पर वीडियो को पोस्ट करते हुए लिखा कि "आज मैंने रात्रि 2.30 से 3.00 बजे तक आनंदपुर गांव के थाने की रात्रि गश्त एवं चौकीदारी व्यवस्था को देखा। व्यवस्था पूर्णतः खराब है। मैं थानेदार साहब , SDOP साहब, SP महोदय से आवेदन करता हूं आनंदपुर में रात्रि गश्त की व्यवस्था बहुत खराब है। वहां के व्यापारीगण कई बार गश्त सुधारने हेतु आग्रह कर चुके है। मैंने भी थानेदार महोदय अनुज प्रताप सिंह आनंदपुर थाना , SDOP महोदय विकासखंड लटेरी तथा SP महोदय को अवगत कराया है। इसके बाद भी व्यवस्था नहीं सुधारना बिल्कुल गलत है। जनता के हित में सुधार हेतु आवश्यक कार्यवाही करें।"


हालांकि, विधायक के निरीक्षण में सामने आई स्थिति ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। साथ ही इस दौरान आंनदपुर में अगर कोई अनहोनी या दुर्घटना हो जाती तो पुलिस गहरी नींद में सोती ही रहती। या फिर थाने से ही कई महत्वपूर्ण दस्तावेज या सामान चोरी हो जाता तो उसका जिम्मेदार कौन होता। यही सोता हुआ सिस्टम जनता की परेशानियां बढ़ाता है। यहीं वजह है कि इंसाफ के लिए आम जनता को इतना परेशान होना पड़ता है। अब देखना होगा कि वीडियो वायरल होने के बाद व्यवस्थाएं सुधरेंगी या फिर किसी बड़ी अनहोनी होने का इंतजार किया जाएगा।