Friday, February 27, 2026

एमपी में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर बड़ी खबर !

मध्य प्रदेश में मोहन मंत्रिमंडल को लेकर बड़ी खबर है,, बड़वानी में होने वाली मोहन कैबिनेट की बैठक कुछ मंत्रियों के लिए उनकी आखिरी कैबिनेट हो सकती है ,, पुख्ता सूत्रों से खबर आ रही है आज कुछ बड़े चेहरों के सियासी भविष्य पर बड़े फैसले होने जा रहे हैं,एक मंत्री ने दबी जुबान से आज की रात को सियासी कत्ल की रात करार दे दिया है,, माना जा रहा है होलाष्टक के बाद सीधे आधा दर्जन चेहरों की छुट्टी तय है... सीएम मोहन यादव दिल्ली में है ,,और आज उनकी बेहद महत्वपूर्ण बैठक है,, विधानसभा सत्र में हुए घटनाक्रम को मुख्यमंत्री दिल्ली को अवगत कराएंगे..अब देखना ये है कि होलाष्टक के बाद होने वाले मंत्रिमंडल बदलाव में कौन बचेगा और कौन हटेगा

एमपी विधानसभा की कार्यवाही अनिश्चित काल के लिए स्थगित,,यहां जनता नहीं सरकार के लिए चलता है सदन !

विधायक जी का उल्टा होकर शीर्षासन करना,,संसदीय कार्यमंत्री का नेता प्रतिपक्ष को औकात दिखाना,, मंत्रीजी का अपने सीएम को ही मास्टर प्लान पर उलझाना,, उपनेता प्रतिपक्ष का इस्तीफा देकर अपने ही नेता प्रतिपक्ष पर सवाल खड़े करना... इसके अलावा एक ऐसा बजट पारित हो जाना जिसमें नयापन कम और कर्जे लेने की जरूरत ज्यादा नजर आती है,, कुछ इस तरह की कहानी रही है एमपी विधानसभा के बजट सत्र की... मध्यप्रदेश विधानसभा का इस बार का बजट सत्र कागज़ों में वित्तीय बहस का मंच था, लेकिन हकीकत में यह सियासी रंगमंच ज्यादा साबित हुआ। राज्यपाल के अभिभाषण से औपचारिक शुरुआत हुई, सरकार ने उपलब्धियों और योजनाओं का खाका पेश किया, पर सदन की असली गूंज आंकड़ों से नहीं, आरोपों और विरोध से सुनाई दी। सत्ता पक्ष विकास का दावा करता रहा, तो विपक्ष हर दावे की बुनियाद पर सवाल उठाता रहा। बहसें हुईं, बजट पारित भी हुआ, लेकिन इस सत्र को याद रखा जाएगा उसके प्रतीकों के लिए—मास्क, इस्तीफा और शीर्षासन। सत्र की शुरुआत से ही तेवर तल्ख थे। बेरोजगारी, किसानों का फसल भुगतान, लंबित भर्तियां, महंगाई और कानून-व्यवस्था—इन मुद्दों पर विपक्ष ने सरकार को लगातार घेरा। जब बजट पेश हुआ तो सत्ता पक्ष ने इसे “विकास का विजन डॉक्यूमेंट” बताया, वहीं विपक्ष ने इसे “कागजी उपलब्धियों का पुलिंदा” कहकर खारिज कर दिया। आंकड़ों की जंग चली, तर्कों के तीर चले और कई बार शोर-शराबे के बीच कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। इस सत्र को सबसे अलग बनाया विरोध के अनोखे अंदाज ने। एक दिन विपक्षी विधायकों ने डोनाल्ड ट्रंप और नरेंद्र मोदी के मास्क पहनकर सरकार पर निशाना साधा। यह प्रतीकात्मक संदेश था कि प्रदेश की नीतियां केंद्र से अलग नहीं हैं। तस्वीरें तेजी से वायरल हुईं और सदन के भीतर की राजनीति, सोशल मीडिया की सुर्खियों में बदल गई। सत्र के बीच एक और बड़ा सियासी मोड़ आया—उपनेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे का इस्तीफा। वजहों पर आधिकारिक बयान सीमित रहे, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे विपक्ष की अंदरूनी रणनीति और समीकरणों से जोड़कर देखा गया। इससे विपक्ष की एकजुटता पर सवाल भी उठे और सियासी अटकलों का दौर शुरू हो गया। समापन के दिन विरोध ने नया दृश्य रच दिया। कांग्रेस विधायक बाबू जंडेल ने शीर्षासन कर प्रदर्शन किया। उनका आरोप था कि उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर राजनीतिक दबाव का परिणाम हैं। सदन परिसर में किया गया यह शीर्षासन देखते ही देखते पूरे सत्र की सबसे चर्चित तस्वीर बन गया। इधर कटौती प्रस्तावों पर बहस हुई, विभागवार मांगें पारित हुईं और अंततः बहुमत के दम पर बजट पास हो गया। सत्ता पक्ष ने इसे ऐतिहासिक उपलब्धि बताया, तो विपक्ष ने इसे जमीनी सच्चाई से दूर करार दिया। आखिर में अध्यक्ष ने कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी। यह सत्र एक बार फिर यह संकेत दे गया कि अब विधानसभा की राजनीति सिर्फ भाषणों तक सीमित नहीं—यह प्रतीकों, प्रदर्शन और संदेशों की भी राजनीति बन चुकी है। अब असली फैसला सदन से बाहर, जनता की अदालत में होना है।

कैलाश विजयवर्गीय का हुआ हृदय परिवर्तन !

एमपी की सियासत में दिग्विजय सिंह और कैलाश विजयवर्गीय दो ऐसे नाम हैं जो हमेशा हलचल मचाते रहते है ,,अब कैलाश विजयवर्गीय का सोशल मीडिया पोस्ट जमकर चर्चाओं में है ,, उन्होंने अपने अकाउंट से कबीर का दोहा पोस्ट किया है और लिखा है "बुरा जो देखन मै चला मुझसे बुरा ना कोय " इस पोस्ट के कई मायने निकाले जा रहे है ,पिछले दिनों विजयवर्गीय के अधिकांश बयान अपने मुखिया के ही खिलाफ आ रहे थे ,ऐसे में अब ऐसा लग रहा है कि सफेद कबूतर उड़ गए है और दोनों में सुलह हो गई है। ,,चलिए अब ये कह सकते है "देर आए दुरुस्त आए "

विधानसभा में विधायक जी क्यों खड़े हुए सिर के बल

भोपाल मध्यप्रदेश विधानसभा में उस वक्त अजीब नज़ारा देखने को मिला जब कांग्रेस विधायक बाबू जंडेल विरोध जताने के लिए सदन में ही शीर्षासन करने लगे। अपने ऊपर दर्ज एफआईआर के खिलाफ उन्होंने अनोखे अंदाज़ में प्रदर्शन किया और सरकार पर झूठे मुकदमे दर्ज कराने का आरोप लगाया।

विधायक बाबू जंडेल ने कहा कि उन्होंने केवल एक समारोह में पटाखा चलाया था, लेकिन उनके खिलाफ बंदूक चलाने का केस दर्ज कर दिया गया। उनका दावा है कि यह कार्रवाई राजनीतिक बदले की भावना से की गई है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, “मैं सरकार से नहीं डरने वाला, सच के लिए लड़ता रहूंगा।”

सदन में विधायक के इस ‘उल्टे प्रदर्शन’ से सियासी पारा चढ़ गया। सत्ता पक्ष ने इसे नाटक करार दिया, तो वहीं कांग्रेस ने इसे लोकतांत्रिक विरोध बताया। अब यह मुद्दा विधानसभा से निकलकर प्रदेश की राजनीति में गर्म बहस का कारण बन गया है।



Thursday, February 26, 2026

एमपी टाइम्स की मुहिम का असर, अतिथि शिक्षकों के लिए आई खुशखबरी...जताया हमारा आभार


भोपाल।मध्यप्रदेश के लोक शिक्षण संचालनालय ने अतिथि शिक्षकों की लंबी अनुपस्थिति को लेकर पूर्व में जारी किए गए आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है। इस संबंध में 26 फरवरी 2026 को नया आदेश जारी किया गया है।

पूर्व आदेश में प्रावधान किया गया था कि यदि कोई अतिथि शिक्षक बिना सूचना लगातार 7 दिवस तक अनुपस्थित रहता है तो उसकी सेवा समाप्त की जा सकती है। इस प्रावधान को लेकर प्रदेश के विभिन्न जिलों में आपत्तियां और विरोध सामने आए थे। अतिथि शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुनील परिहार ने एमपी टाइम्स का आभार जताया है... और लिखा है #MP टाइम्स समाचार पत्र को हृदय से धन्यवाद। आपने भी अतिथि शिक्षकों के खिलाफ हुए शोषणकारी आदेश को निरस्त करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई । उम्मीद करते हैं इसी तरह से सहयोग करते रहेंगे । सुनील परिहार प्रदेश अध्यक्ष अतिथि शिक्षक समन्वय समिति



ताजा निर्देशों के अनुसार अब अतिथि शिक्षकों की उपस्थिति एवं अनुपस्थिति के संबंध में आगे की कार्रवाई एजुकेशन पोर्टल 3.0 पर आवश्यक तकनीकी व्यवस्था उपलब्ध होने के पश्चात की जाएगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस संबंध में पृथक दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।

आदेश की प्रतिलिपि सभी जिला शिक्षा अधिकारियों, कलेक्टरों तथा संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को प्रेषित कर दी गई है। फिलहाल पूर्व प्रावधान निरस्त होने से अतिथि शिक्षकों को अस्थायी राहत मिली है।



सरकारी कर्मचारियों को अलर्ट,, अब दफ्तर पर सीएम की नजर !

भोपाल। समय पर दफ्तर पहुंचने की आदत अब सिर्फ सलाह नहीं, बल्कि सख्त निर्देश बन चुकी है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वल्लभ भवन स्थित मंत्रालय में अधिकारियों और कर्मचारियों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए छापामार कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। खास बात यह है कि मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव भले ही भोपाल से बाहर दौरे पर रहेंगे, लेकिन मंत्रालय की घड़ी आज पूरी सख्ती से चलेगी। मुख्यमंत्री सचिवालय और सामान्य प्रशासन विभाग को सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक वल्लभ भवन, विंध्याचल और सतपुड़ा भवन—तीनों कार्यालयों में कर्मचारियों की उपस्थिति, आने-जाने का समय और अनाधिकृत अनुपस्थिति का ब्यौरा जुटाने के निर्देश दिए गए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग ने टीम गठित कर सभी भवनों में तैनाती भी कर दी है। यानी आज “लेट-लतीफी” पर सीधी नजर रहेगी। मंत्रालय के गलियारों में चर्चा है कि अब फाइलों से ज्यादा निगाहें हाज़िरी रजिस्टर पर होंगी। जो कर्मचारी अब तक ‘ट्रैफिक’, ‘मीटिंग’ या ‘फील्ड विज़िट’ के बहाने समय को लचीला मानते थे, उनके लिए यह दिन थोड़ा लंबा साबित हो सकता है। प्रशासनिक अनुशासन की इस कवायद को लेकर सख्ती साफ है—संदेश सीधा है, सरकार दौरे पर हो या न हो, दफ्तर समय पर ही खुलेगा।

मास्टर प्लान पर बयान ,लायेगा सियासी तूफान !

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीये के बीच चल रही तल्खी कोई नई बात नहीं है,,ये तल्खी मंत्रालय और मालवा से चलकर बजट सत्र में सदन तक पहुंच गई है,,आलम ये है कि ना मन मिल रहे है और ना ही मत,, जिस दिन बजट पेश हुआ उस दिन विजयवर्गीय ने ना तो मुख्यमंत्री और ना ही वित्त मंत्री से हाथ मिलाए ,, उसके बाद मास्टर प्लान पर भी कैलाश विजयवर्गीय ने अब एक ऐसा बयान दे दिया है सुनिए क्या कहा कैलाश विजयवर्गीय ने सदन में
,अगर इस बयान की चिंगारी ने सही आग पकड़ी होती तो इसकी सियासी लपटें बहुतों की छबि खाक कर देती,,असल में मास्टर प्लान को लेकर जयवर्धन सिंह के सवाल के जवाब में विजयवर्गीय ने कह दिया कि मास्टर प्लान तो तैयार हो गया है और सीएम को सौंप दिया गया है,, अब सवाल ये उठाने लगे है कि मास्टर प्लान फिर हॉल क्यों है सब जानते है,,, कमलनाथ सरकार गिर रही थी और जयवर्धन ने आननफानन में मास्टर प्लान लांच कर दिया था ,, लेकिन शिवराज सरकार ने उसे होल्ड कर दिया ,,, सब ये भी जानते है कि मास्टर प्लान में उद्योपतियों और बिल्डर्स की क्या भूमिका होती है,,अब बेचारे बेबस बिल्डर्स भीं हाथ खींचकर बैठ गए है आखिर मलाई मलाई खिला खिलाकर वो भी थक गए हैं,

Wednesday, February 25, 2026

जेपी अस्पताल में बवाल: प्रदर्शन के बीच बच्चे संग महिला बेहोश

 

भोपाल। भोपाल के जयप्रकाश अस्पताल में मंगलवार को आउटसोर्स स्वास्थ्यकर्मियों का प्रदर्शन उस समय उग्र हो गया, जब अपनी मांगों को लेकर धरना दे रहे कर्मचारियों ने अस्पताल परिसर में नारेबाजी शुरू कर दी। इसी दौरान एक महिला कर्मचारी अपने छोटे बच्चे के साथ अचानक बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ी, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। आसपास मौजूद कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत उसे संभाला और इलाज के लिए अंदर ले जाया गया।

बताया जा रहा है कि आउटसोर्स कर्मचारी वेतन वृद्धि, नियमितीकरण और लंबित भुगतान जैसी मांगों को लेकर विरोध जता रहे थे। प्रदर्शन के दौरान पुलिस मौके पर पहुंची और प्रदर्शनकारियों को हटाने की कोशिश की। इसी बीच पुलिस और कर्मचारियों के बीच तीखी बहस हुई, जो धक्का-मुक्की में बदल गई। घटना के वीडियो भी सामने आए हैं, जिनमें हंगामे का दृश्य देखा जा सकता है।

प्रदर्शनकारी कर्मचारियों का आरोप है कि लंबे समय से उनकी समस्याओं की अनदेखी की जा रही है, जिससे वे मजबूर होकर आंदोलन कर रहे हैं। वहीं पुलिस का कहना है कि अस्पताल की व्यवस्था और मरीजों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई की गई। घटना के बाद कुछ देर तक अस्पताल परिसर में तनाव का माहौल बना रहा, जबकि कर्मचारी अपनी मांगों पर अड़े रहे।

Tuesday, February 24, 2026

गौ-हत्या के आरोपों से बढ़ा आक्रोश, विशेष बैठक की मांग

भोपाल। राजधानी भोपाल के स्लॉटर हाउस में कथित तौर पर गोमांस मिलने के मुद्दे पर सियासत तेज हो गई है। बीजेपी के पार्षद ने इस मामले को गंभीर बताते हुए नगर निगम में विशेष सत्र बुलाने की मांग की है।

बीजेपी पार्षद विलास राव घाड़गे ने महापौर मालती राय को पत्र लिखकर कहा है कि यह मामला केवल धार्मिक आस्था और गो-संवर्धन से जुड़ा नहीं है, बल्कि कानून-व्यवस्था, सामाजिक सौहार्द और नगर प्रशासन की जवाबदेही से भी प्रत्यक्ष रूप से संबंधित है। उन्होंने पत्र में उल्लेख किया कि गौ-हत्या की घटना से नागरिकों में अत्यंत आक्रोश और चिंता व्याप्त है।

पार्षद ने महापौर से आग्रह किया है कि वे अपने विशेषाधिकार का प्रयोग करते हुए इस संवेदनशील विषय पर तत्काल नगर निगम का विशेष सत्र बुलाएं, ताकि मामले पर विस्तार से चर्चा हो सके और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

फिलहाल इस मुद्दे पर नगर निगम प्रशासन की ओर से औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन मामले को लेकर शहर में राजनीतिक और सामाजिक हलचल बढ़ गई है।