भोपाल। मध्यप्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। प्रदेश के करीब डेढ़ लाख शिक्षकों को प्रभावित करने वाला यह मामला अब तूल पकड़ता दिख रहा है। अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा ने इस मुद्दे पर सरकार और शिक्षा विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मोर्चे ने मुख्यमंत्री और लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) को ज्ञापन सौंपकर नॉन-TET पास शिक्षकों को अनिवार्यता से छूट देने की मांग की है। उनका कहना है कि हाल ही में जारी किए गए आदेश न केवल व्यवहारिक रूप से गलत हैं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के भी विपरीत हैं। शिक्षक संगठनों का आरोप है कि 2 मार्च 2026 को DPI और 26 मार्च 2026 को जनजातीय कार्य विभाग द्वारा जारी आदेशों ने शिक्षकों में असमंजस और तनाव की स्थिति पैदा कर दी है। लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों के सामने अब अपनी नौकरी को लेकर चिंता बढ़ गई है। मोर्चे ने सेवा अवधि की गणना का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया है। उनका कहना है कि शिक्षकों की सेवा की गणना उनकी पहली नियुक्ति तिथि से की जानी चाहिए। इससे उन्हें पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य सेवा लाभ मिल सकेंगे, साथ ही पदोन्नति और क्रमोन्नति में भी उनका हक तय होगा। संगठन ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द ही इन आदेशों को वापस नहीं लिया और राहत नहीं दी, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। फिलहाल सरकार की ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन जिस तरह से यह मुद्दा उठ रहा है, उससे साफ है कि आने वाले दिनों में यह बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक विषय बन सकता है।
Wednesday, April 8, 2026
छात्राओं की सुरक्षा पर सवाल, भोपाल में ABVP का हंगामा
भोपाल। राजधानी भोपाल में छात्राओं की सुरक्षा को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यकर्ताओं ने पॉलिटेक्निक चौराहे के पास जमकर प्रदर्शन किया। कॉलेज और छात्रावास के नजदीक संचालित हो रही शराब दुकान के विरोध में कार्यकर्ताओं ने सड़क पर बैठकर चक्काजाम कर दिया, जिससे काफी देर तक यातायात प्रभावित रहा। प्रदर्शन के दौरान माहौल उस वक्त तनावपूर्ण हो गया जब कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया। इस बीच कुछ प्रदर्शनकारियों ने आक्रोश में आकर शराब दुकान पर पत्थरबाजी की और दुकान के बोर्ड को उखाड़कर फेंक दिया। प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं का कहना है कि पॉलिटेक्निक कॉलेज और छात्रावास के पास शराब दुकान संचालित होने से छात्राओं की सुरक्षा पर खतरा बना हुआ है। उनका आरोप है कि इस संबंध में कई बार प्रशासन को शिकायत दी गई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसी के विरोध में उन्हें सड़क पर उतरना पड़ा। प्रदर्शन के बाद कार्यकर्ताओं ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर शराब दुकान हटाने की मांग रखी। प्रशासन की ओर से उन्हें 15 दिन के भीतर कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है। कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि तय समय में कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। फिलहाल पुलिस स्थिति पर नजर बनाए हुए है और इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। कुल मिलाकर, छात्राओं की सुरक्षा से जुड़ा यह मुद्दा अब तूल पकड़ता नजर आ रहा है, जिस पर आने वाले दिनों में प्रशासन की कार्रवाई अहम होगी।
Tuesday, April 7, 2026
नरोत्तम - हेमंत की मुलाकात के सियासी मायने
भोपाल। मध्यप्रदेश की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को 27 साल पुराने मामले में सजा मिलने के बाद अब इस सीट पर उपचुनाव की सुगबुगाहट खुलकर सामने आ गई है। विधानसभा सचिवालय द्वारा सीट को शून्य घोषित किए जाने के बाद यह लगभग तय माना जा रहा है कि दतिया में जल्द ही उपचुनाव होगा।
लेकिन असली कहानी सिर्फ उपचुनाव की नहीं, बल्कि बीजेपी के अगले बड़े दांव की है। सियासी संकेत साफ हैं- दतिया सीट के लिए बीजेपी के पास सबसे मजबूत और भरोसेमंद चेहरा एक ही है, और वो हैं पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा।
कोर्ट के फैसले के बाद से ही नरोत्तम मिश्रा का बंगला एक बार फिर सियासत का पावर सेंटर बनता नजर आ रहा है। मंगलवार सुबह से ही नेताओं का वहां पहुंचना शुरू हुआ। भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष जयपाल सिंह चावड़ा और विधायक शैलेन्द्र जैन की मुलाकात के बाद जब बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल खुद उनके निवास पहुंचे और बंद कमरे में चर्चा हुई, तो सियासी हलचल और तेज हो गई। इसके तुरंत बाद पूर्व मंत्री रामपाल सिंह का पहुंचना इस बात का संकेत देता है कि अंदरखाने कुछ बड़ा पक रहा है।
हालांकि तस्वीर इतनी सीधी भी नहीं है। नरोत्तम मिश्रा को लेकर पार्टी के भीतर दो रास्तों की चर्चा है- एक, दतिया उपचुनाव में उन्हें मैदान में उतारकर सीट पक्की करना, और दूसरा, उन्हें राज्यसभा भेजकर केंद्रीय स्तर पर बड़ी भूमिका देना। विधानसभा चुनाव हारने के बाद से पार्टी उनके लिए उपयुक्त मंच तलाश रही है और अब यह मौका उस तलाश का जवाब बन सकता है।
दिलचस्प यह भी है कि जो चेहरे चुनाव हारने के बाद दूरी बना चुके थे, वे अब फिर से सक्रिय होकर नरोत्तम मिश्रा के करीब नजर आने लगे हैं। यानी सियासत में रिश्तों की वापसी भी इस पूरे खेल का हिस्सा बन चुकी है।
कुल मिलाकर, दतिया सीट सिर्फ एक उपचुनाव नहीं, बल्कि बीजेपी के लिए रणनीतिक फैसले की परीक्षा बन गई है। सवाल सिर्फ इतना नहीं कि उम्मीदवार कौन होगा, बल्कि यह भी है कि पार्टी नरोत्तम मिश्रा पर कौन सा बड़ा दांव खेलने जा रही है।
अब नजर इस बात पर है कि बीजेपी उन्हें मैदान में उतारकर दतिया की सीट साधती है या फिर बड़ा खेल खेलते हुए उन्हें नई राजनीतिक पारी के लिए दिल्ली भेजती है। लेकिन इतना तय है, नरोत्तम मिश्रा की वापसी अब सिर्फ चर्चा नहीं, बल्कि तय मानी जा रही है और वो भी दमदार अंदाज में।
मोहन कैबिनेट के बड़े फैसले,, किसानों के साथ बैतूलवासियों को सौगात...
कांग्रेस विधायक की किस्मत अब HC के हाथ!
नई दिल्ली/भोपाल। मध्यप्रदेश की राजनीति से जुड़ा चर्चित ग्रामीण विकास बैंक धोखाधड़ी मामला अब दिल्ली हाई कोर्ट पहुंच गया है। दतिया से कांग्रेस के पूर्व विधायक राजेंद्र भारती ने अपनी सजा और दोषसिद्धि के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील दायर की है, जिस पर अदालत ने नोटिस जारी कर दिया है। मामले की अगली सुनवाई 15 अप्रैल को तय की गई है। दरअसल, इस पूरे मामले की शुरुआत ग्रामीण विकास बैंक में कथित धोखाधड़ी से जुड़ी जांच से हुई थी। जांच के बाद केस अदालत में पहुंचा, जहां सुनवाई के दौरान राजेंद्र भारती को दोषी पाया गया। नई दिल्ली स्थित राउस एवेन्यू कोर्ट ने उन्हें 3 साल की सजा सुनाई थी। सजा सुनाए जाने के साथ ही सुप्रीम कोर्ट के ‘लिली थॉमस’ फैसले के तहत उनकी विधायकी भी चली गई और वे विधानसभा की सदस्यता के लिए अयोग्य घोषित हो गए। यही वजह रही कि यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से भी बेहद अहम बन गया। अब राजेंद्र भारती ने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख करते हुए अपनी सजा को चुनौती दी है। उन्होंने अदालत से न सिर्फ सजा को रद्द करने की मांग की है, बल्कि दोषसिद्धि पर रोक लगाने की भी अपील की है, ताकि उनकी राजनीतिक स्थिति पर पड़े असर को रोका जा सके। दिल्ली हाई कोर्ट ने उनकी याचिका पर संज्ञान लेते हुए संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर दिया है। अब इस मामले में अगली सुनवाई 15 अप्रैल को होगी, जहां यह तय होगा कि भारती को किसी तरह की राहत मिलती है या नहीं। इस पूरे घटनाक्रम का असर मध्यप्रदेश की सियासत पर भी साफ नजर आ रहा है। एक तरफ कांग्रेस इसे कानूनी लड़ाई के तौर पर देख रही है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक समीकरण भी इस मामले से प्रभावित होते दिख रहे हैं। कुल मिलाकर, अब सबकी नजर 15 अप्रैल की सुनवाई पर टिकी है, जहां यह मामला नया मोड़ ले सकता है।
किसानों को बड़ी राहत: MP में गेहूं बेचने की बुकिंग शुरू
भोपाल। मध्यप्रदेश के लाखों किसानों के लिए राहत की खबर है। मौसम की अनिश्चितता और लगातार बदलते हालात के बीच सरकार ने गेहूं उपार्जन की प्रक्रिया तेज कर दी है। आज से प्रदेशभर में समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने के लिए स्लॉट बुकिंग शुरू हो गई है, जिससे किसान अपनी उपज बेचने की तैयारी कर सकेंगे। प्रदेश में 10 अप्रैल से गेहूं की सरकारी खरीदी शुरू होगी। इस बार सरकार ने साफ कर दिया है कि खरीदी की शुरुआत छोटे किसानों से की जाएगी, ताकि जिन किसानों के पास सीमित उत्पादन है, उन्हें पहले अवसर मिल सके और उन्हें इंतजार न करना पड़े। सरकार ने इस साल गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2625 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। इसके अलावा 40 रुपये प्रति क्विंटल की प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी, जिससे किसानों को उनकी फसल का बेहतर दाम मिल सकेगा। यानी कुल मिलाकर किसानों को बाजार से ज्यादा सुरक्षित और फायदेमंद मूल्य मिलेगा। मौसम की बात करें तो इन दिनों प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश, आंधी और ओलावृष्टि का असर देखने को मिल रहा है। ऐसे हालात में किसानों के लिए फसल को सुरक्षित रखना बड़ी चुनौती बन जाता है। इसी वजह से समय पर खरीदी शुरू होना किसानों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, क्योंकि वे खराब मौसम से पहले या उसके बीच अपनी उपज बेच सकेंगे। सरकार का मानना है कि स्लॉट बुकिंग सिस्टम से खरीदी प्रक्रिया व्यवस्थित रहेगी, भीड़ कम होगी और किसानों को लंबी लाइनों या इंतजार की परेशानी नहीं उठानी पड़ेगी। कुल मिलाकर, मौसम की मार झेल रहे किसानों के लिए यह फैसला राहत भरा साबित हो सकता है—जहां एक तरफ समय पर खरीदी की सुविधा मिलेगी, वहीं दूसरी ओर बेहतर दाम भी सुनिश्चित होंगे।






