भोपाल। मध्यप्रदेश की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को 27 साल पुराने मामले में सजा मिलने के बाद अब इस सीट पर उपचुनाव की सुगबुगाहट खुलकर सामने आ गई है। विधानसभा सचिवालय द्वारा सीट को शून्य घोषित किए जाने के बाद यह लगभग तय माना जा रहा है कि दतिया में जल्द ही उपचुनाव होगा।
लेकिन असली कहानी सिर्फ उपचुनाव की नहीं, बल्कि बीजेपी के अगले बड़े दांव की है। सियासी संकेत साफ हैं- दतिया सीट के लिए बीजेपी के पास सबसे मजबूत और भरोसेमंद चेहरा एक ही है, और वो हैं पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा।
कोर्ट के फैसले के बाद से ही नरोत्तम मिश्रा का बंगला एक बार फिर सियासत का पावर सेंटर बनता नजर आ रहा है। मंगलवार सुबह से ही नेताओं का वहां पहुंचना शुरू हुआ। भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष जयपाल सिंह चावड़ा और विधायक शैलेन्द्र जैन की मुलाकात के बाद जब बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल खुद उनके निवास पहुंचे और बंद कमरे में चर्चा हुई, तो सियासी हलचल और तेज हो गई। इसके तुरंत बाद पूर्व मंत्री रामपाल सिंह का पहुंचना इस बात का संकेत देता है कि अंदरखाने कुछ बड़ा पक रहा है।
हालांकि तस्वीर इतनी सीधी भी नहीं है। नरोत्तम मिश्रा को लेकर पार्टी के भीतर दो रास्तों की चर्चा है- एक, दतिया उपचुनाव में उन्हें मैदान में उतारकर सीट पक्की करना, और दूसरा, उन्हें राज्यसभा भेजकर केंद्रीय स्तर पर बड़ी भूमिका देना। विधानसभा चुनाव हारने के बाद से पार्टी उनके लिए उपयुक्त मंच तलाश रही है और अब यह मौका उस तलाश का जवाब बन सकता है।
दिलचस्प यह भी है कि जो चेहरे चुनाव हारने के बाद दूरी बना चुके थे, वे अब फिर से सक्रिय होकर नरोत्तम मिश्रा के करीब नजर आने लगे हैं। यानी सियासत में रिश्तों की वापसी भी इस पूरे खेल का हिस्सा बन चुकी है।
कुल मिलाकर, दतिया सीट सिर्फ एक उपचुनाव नहीं, बल्कि बीजेपी के लिए रणनीतिक फैसले की परीक्षा बन गई है। सवाल सिर्फ इतना नहीं कि उम्मीदवार कौन होगा, बल्कि यह भी है कि पार्टी नरोत्तम मिश्रा पर कौन सा बड़ा दांव खेलने जा रही है।
अब नजर इस बात पर है कि बीजेपी उन्हें मैदान में उतारकर दतिया की सीट साधती है या फिर बड़ा खेल खेलते हुए उन्हें नई राजनीतिक पारी के लिए दिल्ली भेजती है। लेकिन इतना तय है, नरोत्तम मिश्रा की वापसी अब सिर्फ चर्चा नहीं, बल्कि तय मानी जा रही है और वो भी दमदार अंदाज में।






