भोपाल। मध्यप्रदेश की राजनीति में गुरुवार देर रात उस समय हलचल मच गई जब अचानक विधानसभा सचिवालय खोला गया और देर रात ही एक अहम आदेश जारी कर दिया गया। इस कार्रवाई के बाद सियासी माहौल गरमा गया और विपक्ष ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। दरअसल, दतिया विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने सहकारी बैंक घोटाले के मामले में तीन साल की सजा और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। यह फैसला 2 अप्रैल 2026 को आया। कोर्ट से सजा मिलने के बाद कानून के तहत उनकी विधायकी स्वतः समाप्त हो गई, जिसके चलते विधानसभा सचिवालय ने तत्काल कार्रवाई करते हुए देर रात आदेश जारी कर दिया। सुप्रीम कोर्ट के 2013 के लिली थॉमस फैसले के अनुसार, यदि किसी विधायक या सांसद को दो साल या उससे अधिक की सजा होती है, तो उसकी सदस्यता तुरंत खत्म हो जाती है। इसी नियम के तहत राजेंद्र भारती की सदस्यता 2 अप्रैल 2026 से ही समाप्त मानी गई है। आदेश जारी होते ही दतिया विधानसभा सीट खाली हो गई है और अब यहां उपचुनाव की स्थिति बन गई है। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की हो रही है कि विधानसभा सचिवालय को आधी रात में खोलकर इतनी तेजी से कार्रवाई क्यों की गई। विपक्ष ने इसे मुद्दा बनाते हुए सरकार पर सवाल उठाए हैं और कहा है कि इस तरह की जल्दबाजी कई सवाल खड़े करती है। वहीं सरकार का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया कानून के अनुसार की गई है और इसमें किसी तरह की देरी नहीं की जा सकती थी। इस फैसले के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल और तेज हो गई है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी बयानबाजी और बढ़ने के आसार हैं।





