Friday, February 13, 2026

आधी रात को महिलाओं और बच्चों पर छतरपुर में लाठीचार्ज!

छतरपुर। केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर जिले के बिजावर क्षेत्र में देर रात प्रदर्शन के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई। परियोजना से प्रभावित ग्रामीण बड़ी संख्या में एकत्र होकर मुआवजे और पुनर्वास को लेकर विरोध जता रहे थे। हालात बिगड़ने पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प की स्थिति बनी।

पुलिस ने किया लाठीचार्ज 

प्रशासन के अनुसार भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उनकी मांगों पर सुनवाई नहीं की जा रही, जबकि प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई की गई। घटना के दौरान महिलाओं की मौजूदगी भी बताई जा रही है।

अतिरिक्त बल तैनात, नियंत्रण में हालात

फिलहाल क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है। आधिकारिक तौर पर किसी गंभीर घायल होने की पुष्टि नहीं हुई है। प्रशासन का कहना है कि प्रभावित पक्षों से संवाद की प्रक्रिया जारी है ताकि मामले का समाधान निकाला जा सके।

कांग्रेस नेता ने की मुआवजे की मांग

मामले को लेकर कांग्रेस नेता अरुण यादव ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि छतरपुर के बिजावर में आधी रात महिलाओं और बच्चों पर लाठीचार्ज और वाटर कैनन चलाना निंदनीय और अमानवीय है। उन्होंने कहा कि परियोजना के नाम पर बड़ी संख्या में आदिवासी और दलित परिवारों को विस्थापित किया जा रहा है, जो अपने हक, सम्मानजनक पुनर्वास और न्यायपूर्ण मुआवजे की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी बात सुनने के बजाय दमन का रास्ता अपनाया गया। यादव ने मांग की कि विस्थापितों को पर्याप्त मुआवजा दिया जाए और कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर तत्काल सख्त कदम उठाए जाएं।



जनगणना कांफ्रेंस में मुख्यमंत्री ने अफसरो के सामने रखी शर्त !

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कुशाभाऊ ठाकरे सभागार, भोपाल में आयोजित जनगणना कॉन्फ्रेंस में कहा कि,इस बार की जनगणना भले ही आठवीं है, लेकिन सबसे हटके है। कोविड के कठिन काल में स्वाभाविक रूप से जनगणना संभव नहीं थी, लेकिन अब हमें और अधिक शुद्धता और पारदर्शिता के साथ यह दायित्व निभाना है।गणनाओं की शुद्धता और बारीकियों के लिए प्रशिक्षण हुआ है, अब प्रतिबद्धता और निष्पक्षता सबसे पहली शर्त है। जनगणना के कई अर्थ निकाले जाएंगे, इसलिए स्पष्टता, पारदर्शिता और निष्पक्षता सर्वोपरि रहनी चाहिए।1931 के बाद सामाजिक स्तर की इस प्रकार की जनगणना पहली बार हो रही है, हम सब मिलकर एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाने जा रहे हैं।विकास का कारवां भी बढ़े और व्यवस्थाओं का नियंत्रण भी हाथ में रहे।किसी का मकान, जमीन या दुकान प्रभावित होती है तो उसके मन का लगाव भी समझना होगा, विकास के साथ संवेदनशीलता अनिवार्य है।होली और महाशिवरात्रि जैसे पर्वों पर प्रशासन हाई अलर्ट पर रहे।आदर्श होली ऐसे हो कि लोगों को कष्ट कम हो और सामाजिक समरसता की भावना प्रकट हो।दक्षता के आधार पर परस्पर सौहार्द के बेहतर उदाहरण प्रस्तुत होने चाहिए। * किसान कल्याण वर्ष के रूप में यह वर्ष घोषित है, कृषकों को किसी प्रकार की कठिनाई नहीं आनी चाहिए। नरवाई जलाने की समस्या को स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के आधार पर शून्य तक लाने का प्रयास करें।दलहन-तिलहन के उत्पादन को बढ़ाने की दिशा में ठोस प्रयास करें।

Thursday, February 12, 2026

एमपी के दिग्गज मंत्रियों का किसने मांगा इस्तीफा!

भोपाल। मध्यप्रदेश की सियासत में बजट सत्र से ठीक पहले राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर मंत्रिमंडल के तीन वरिष्ठ सदस्यों—राजेंद्र शुक्ल, कैलाश विजयवर्गीय और विजय शाह—को पद से हटाने की मांग की है। पटवारी ने कहा है कि सरकार को नैतिक आधार पर कार्रवाई करते हुए इन मंत्रियों को तत्काल बर्खास्त करना चाहिए।

पत्र में उठाए गए आरोप

अपने पत्र में पीसीसी चीफ ने आरोप लगाया है कि जिन मुद्दों को लेकर सवाल उठ रहे हैं, उन पर सरकार स्पष्ट स्थिति नहीं ले पा रही है। उनका कहना है कि बजट सत्र जैसे महत्वपूर्ण सत्र से पहले सरकार को जवाबदेही और पारदर्शिता का संदेश देना चाहिए। पटवारी ने यह भी कहा कि यदि सरकार कार्रवाई नहीं करती है तो विपक्ष विधानसभा में इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाएगा।

सियासी बयानबाजी और संभावित असर

इधर, इस मांग को लेकर सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई है। कांग्रेस इसे नैतिकता और जवाबदेही का सवाल बता रही है, जबकि सत्तारूढ़ दल की ओर से अभी तक औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। माना जा रहा है कि बजट सत्र के दौरान यह मुद्दा विधानसभा में गर्मा सकता है और सत्ता-विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल सकती है।



लेबर कोड को लेकर हंगामा: आखिर क्या बदला, किस बात पर नाराज़ हैं ट्रेड यूनियन?

भोपाल। देशभर में आज नए लेबर लॉ (लेबर कोड्स) के विरोध में व्यापक प्रदर्शन और हड़ताल देखने को मिली। केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर आयोजित इस आंदोलन का असर भोपाल सहित कई बड़े शहरों में दिखाई दिया, जहां कर्मचारी संगठनों ने रैली और धरना प्रदर्शन किए। कुछ स्थानों पर बैंकिंग सेवाएं, सरकारी दफ्तर और परिवहन व्यवस्था आंशिक रूप से प्रभावित रहे। मजदूर संगठनों का आरोप है कि नए श्रम कानून कामगारों के अधिकारों को कमजोर करते हैं, जबकि सरकार इन्हें श्रम सुधार की दिशा में बड़ा और जरूरी कदम बता रही है।

क्या है नए लेबर कोड 

केंद्र सरकार ने पुराने 29 श्रम कानूनों को समाहित कर चार नए लेबर कोड तैयार किए हैं, जिनमें वेतन, औद्योगिक संबंध, सामाजिक सुरक्षा और कार्यस्थल सुरक्षा से जुड़े प्रावधान शामिल हैं। सरकार का कहना है कि इससे कानूनों की जटिलता कम होगी और रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा। हालांकि ट्रेड यूनियनों का दावा है कि नए प्रावधानों से कंपनियों को कर्मचारियों की नियुक्ति और छंटनी में अधिक छूट मिल सकती है, जिससे नौकरी की स्थिरता पर असर पड़ेगा और श्रमिक संगठनों के अधिकार सीमित हो सकते हैं।

यूनियन ट्रेड की मांग

प्रदर्शनकारी संगठनों की मुख्य मांगों में नए लेबर कोड को वापस लेने, नौकरी की सुरक्षा सुनिश्चित करने, सभी श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन लागू करने, हड़ताल और संगठन के अधिकार की रक्षा तथा ठेका प्रथा पर नियंत्रण शामिल है। कुछ संगठनों ने पुरानी पेंशन योजना की बहाली और महंगाई पर नियंत्रण की मांग भी उठाई है। यूनियनों ने संकेत दिया है कि यदि सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक कदम नहीं उठाती, तो आंदोलन को और तेज किया जा सकता है, जिससे श्रम सुधार को लेकर सरकार और संगठनों के बीच टकराव बढ़ने की संभावना बनी हुई है।


Wednesday, February 11, 2026

परिवीक्षा अवधि को लेकर अब शिक्षक पहुंचे हाईकोर्ट

*तीन साल परिवीक्षा अवधि और 70-80-90% वेतनमान के विधेयक को हाइकोर्ट में चुनौती, सरकार देगी 4 हफ्तों में जवाब।* आज दिनांक 11-02-2026 मंगलवार को हाईकोर्ट में एक अहम मुद्दे पर सुनवाई हुई। तीन साल परिवीक्षा अवधि और 70-80-90% वेतनमान व्यवस्था लागू करने वाले विधेयक को याचिका "आनन्द कुमार मिश्रा बनाम मध्यप्रदेश सरकार* द्वारा चुनौती दी गई। समान कार्य समान वेतनमान के सिद्धांत को आधार बनाकर मध्यप्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग एवं जनजातीय कार्य विभाग के 1070 शिक्षकों ने श्री आनन्द कुमार मिश्रा के निर्देशन में एकजुट होकर एडवोकेट श्री राहुल दिवाकर के माध्यम से मध्यप्रदेश सरकार द्वारा 2019 में लागू की गई वेतन कटौती व्यवस्था को कानूनी रूप से असंवैधानिक और अमानवीय बताते हुए आज जबलपुर हाईकोर्ट में माननीय मुख्य न्यायाधीश की डिवीजन बेंच में अपना पक्ष रखा। याचिका को सुनने के उपरांत माननीय मुख्य न्यायाधीश ने मध्यप्रदेश सरकार को अपना जवाब दाखिल करने के लिए 4 हफ्तों का समय दिया है। और जवाब दाखिल होने के उपरांत अगली सुनवाई 20 अप्रैल 2026 को नियत की गई है। आपको बताते चलें कि ये समस्त 1070 शिक्षक 2018 में विज्ञपित भर्ती के माध्यम से चयन होने के उपरांत मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों में कार्यरत है। इनकी भर्ती का विज्ञापन सितंबर 2018 में तत्कालीन शिवराज सिंह चौहान सरकार द्वारा जारी किया गया था। परीक्षा और परिणाम जारी होने के उपरांत 2019 में कमलनाथ सरकार ने बीच भर्ती में परिवीक्षा अवधि तीन साल करते हुए 70-80-90% (क्रमशः प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय वर्ष) वेतनमान व्यवस्था लागू कर दी गई। और संबंधित शिक्षकों को इन्हीं नए नियमों के अंतर्गत वेतनमान व्यवस्था के अनुसार वेतन दिया गया। जबकि कई मामलों में सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश है कि एक बार भर्ती शुरू होने के बाद भर्ती के नियम नहीं बदले जा सकते हैं। मध्यप्रदेश सरकार ने ऐसे आदेशों को ताक पर रखते हुए शिक्षक भर्ती 2018 में 70-80-90% वेतनमान और तीन साल परिवीक्षा अवधि का नियम लागू किया है। शिक्षकों द्वारा इन्हीं समस्त बिंदुओं को हाईकोर्ट में प्रस्तुत करते हुए अपना पक्ष रखा और हाईकोट ने मध्यप्रदेश सरकार को 4 हफ्तों में अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी किया है। इसी तरह के एक अन्य मामले में हाईकोर्ट सामान्य प्रशासन विभाग के 70-80-90% वेतनमान और तीन साल परिवीक्षा अवधि संबंधित जारी आदेश दिनांक 12/12/2019 को रद्द कर चुका है। इसी आदेश को आधार बनाकर समस्त विभागों ने अपने विभागीय राजपत्र जारी कर 70,80,90% वेतनमान व्यवस्था लागू की थी। परन्तु 12/12/2019 के आदेश के रद्द होने के बावजूद भी सरकारी विभागों ने कर्मचारियों को 70,80,90% वेतनमान व्यवस्था में बनाए रखना जारी रखा हुआ है। जिससे कर्मचारियों को बार बार उच्च न्यायालय की शरण लेनी पड़ रही है। उम्मीद है कि इस याचिका के माध्यम से इन शिक्षकों को इनका हक (नियुक्ति दिनांक से 100% वेतन एवं ब्याज सहित एरियर्स की राशि) माननीय हाईकोर्ट द्वारा प्रदान किया जायेगा।

Tuesday, February 10, 2026

बीजेपी जिला प्रभारी होंगे सब पर भारी

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खण्डेलवाल एवं क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल ने मंगलवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में संभाग एवं जिला प्रभारियों की बैठक को संबोधित किया। बैठक में जिलाप्रभारी को कहा गया कि वह महीने में काम से कम तीन बार अपने प्रभार के जिलों का दौरा करें,, अजय जमवाल ने स्पष्ट रूप से प्रभारी को कहा कि अगले चुनाव में आपकी भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी... भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा की हर चुनाव में टिकट वितरण में प्रभारीयो की भूमिका महत्वपूर्ण होगी...