Thursday, April 23, 2026

निगम-मंडल में किसे मिलेगा पद? इन नामों पर टिकी नजरें


भोपाल। मध्यप्रदेश में लंबे इंतजार के बाद अब राजनीतिक नियुक्तियों का सिलसिला शुरू होने जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, इसकी शुरुआत आज विभिन्न आयोगों में नियुक्तियों से की जाएगी, जहां कई अहम पदों के लिए नाम लगभग तय हो चुके हैं। जानकारी के अनुसार, अनुसूचित जाति आयोग में कैलाश जाटव के नाम की चर्चा जोरों पर है, जबकि अनुसूचित जनजाति आयोग के लिए भात सिंह नेताम को जिम्मेदारी मिलने की संभावना जताई जा रही है। वहीं युवा आयोग में प्रवीण शर्मा का नाम प्रमुख दावेदार के रूप में सामने आ रहा है। सूत्र बताते हैं कि इन नियुक्तियों को लेकर संगठन और सरकार के बीच लंबे समय से मंथन चल रहा था। क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए नामों का चयन किया गया है, ताकि अलग-अलग वर्गों को प्रतिनिधित्व मिल सके। माना जा रहा है कि आयोगों में नियुक्तियों के बाद जल्द ही निगम-मंडलों और अन्य बोर्ड्स में भी नियुक्तियों की प्रक्रिया तेज होगी। यह पूरी कवायद संगठन में सक्रिय कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देने और राजनीतिक संतुलन साधने की रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। हालांकि, अभी आधिकारिक घोषणा का इंतजार है, लेकिन सियासी गलियारों में इन नामों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। अब नजर इस बात पर है कि सरकार और संगठन कब इन नियुक्तियों पर औपचारिक मुहर लगाते हैं।

आज आएगी राजनैतिक नियुक्तियों की पहली सूची, आयोगों से शुरुआत


भोपाल। मध्यप्रदेश में महीनों से अटकी बीजेपी की निगम-मंडल सूची आखिरकार आज जारी हो सकती है। पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए यह सिर्फ एक सूची नहीं, बल्कि लंबे इंतजार का अंत है- एक ऐसा इंतजार, जो बार-बार उम्मीद जगाता और फिर टलता रहा। सूत्र बताते हैं कि इस सूची के पीछे सिर्फ चयन नहीं, बल्कि सियासी संतुलन की पूरी गणित काम कर रही है। पिछले कई महीनों में नामों को लेकर खींचतान का दौर चलता रहा—कभी किसी नाम पर सहमति नहीं बनी, तो कभी किसी नेता की आपत्ति ने पूरी सूची को रोक दिया। हालात ऐसे रहे कि भोपाल से लेकर दिल्ली तक कई बार फाइलें गईं-आईं, लेकिन हर बार कुछ न कुछ अटक गया। आखिरकार मामला तब आगे बढ़ा जब संघ, संगठन और सरकार के प्रतिनिधियों के बीच भोपाल में लगातार बैठकों का दौर चला। कई स्तरों पर मंथन के बाद अब प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने नामों पर अंतिम सहमति बना ली है। सूत्रों के अनुसार, दिल्ली से भी इस सूची को हरी झंडी मिल चुकी है। इस बार की सूची को लेकर सबसे दिलचस्प बात यह है कि इसमें संतुलन साधने की कोशिश साफ दिखाई देगी। संगठन में सक्रिय कार्यकर्ताओं को जगह देने के साथ-साथ क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों का भी पूरा ध्यान रखा गया है। कुछ नाम ऐसे बताए जा रहे हैं जो सियासी गलियारों को चौंका सकते हैं, जबकि कई चेहरे पहले से चर्चा में बने हुए हैं। दरअसल, निगम-मंडल की ये नियुक्तियां केवल पद बांटने की प्रक्रिया नहीं हैं, बल्कि यह संगठन के भीतर संतुलन साधने, असंतोष को कम करने और आगामी राजनीतिक रणनीति को मजबूत करने का अहम जरिया भी हैं। अब सबकी नजरें आज होने वाली औपचारिक घोषणा पर टिकी हैं—क्योंकि इसी सूची से तय होगा कि पार्टी किसे ‘इनाम’ देती है और किसे अभी और इंतजार करना होगा।

नोटिस के बाद ‘दरबार’ में पेशी: भोपाल में प्रीतम लोधी, आज देंगे सफाई

भोपाल। विवादित बयान से सियासी भूचाल खड़ा करने वाले करैरा विधायक प्रीतम सिंह लोधी आज भोपाल में पार्टी नेतृत्व के सामने पेश होंगे। शाम 5 बजे वे बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से मुलाकात कर नोटिस का जवाब और अपना पक्ष रखेंगे। हाल ही में सामने आए वीडियो में लोधी एक पुलिस अधिकारी के खिलाफ कथित तौर पर अभद्र और धमकी भरी भाषा का इस्तेमाल करते नजर आए थे। सड़क हादसे से शुरू हुआ यह मामला देखते ही देखते सत्ता बनाम सिस्टम की लड़ाई जैसा बन गया। वीडियो वायरल हुआ, पुलिस महकमा नाराज हुआ और मामला सीधे संगठन तक पहुंच गया। दबाव बढ़ा तो बीजेपी ने भी देर नहीं लगाई और प्रदेश अध्यक्ष ने कारण बताओ नोटिस थमा दिया। साफ शब्दों में कहा गया कि यह आचरण पार्टी की छवि और अनुशासन के खिलाफ है। अब नजरें भोपाल की इस मुलाकात पर टिकी हैं। सवाल यह है कि लोधी की सफाई पार्टी को संतुष्ट कर पाएगी या फिर कार्रवाई की गाज गिरेगी? फिलहाल, राजनीति में यह मुलाकात सिर्फ औपचारिकता नहीं मानी जा रही—बल्कि यह तय करेगी कि बयानबाजी की सीमा कहां खत्म होती है और अनुशासन कहां से शुरू।

Wednesday, April 22, 2026

प्रीतम लोधी को बीजेपी ने दिया नोटिस, एक्शन में हेमंत खंडेलवाल..

 


भोपाल। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने विधायक प्रीतम लोधी को नोटिस जारी किया है विवादित बयान को लेकर विधायक प्रीतम लोधी को नोटिस जारी किया गया है,, लोधी ने ट्रेनी आईपीएस अफसर से खराब व्यवहार किया था,, जिसके बाद हाइकमान एक्शन में आ गया था 3 दिन में मांगा स्पष्टीकरण। दरअसल, हाल ही में एक वीडियो सामने आया था, जिसमें विधायक लोधी एक पुलिस अधिकारी के खिलाफ कथित तौर पर अभद्र और धमकी भरी भाषा का इस्तेमाल करते नजर आए। बताया जा रहा है कि यह विवाद एक सड़क हादसे के बाद बढ़ा, जहां विधायक के परिजन से जुड़े मामले में पुलिस कार्रवाई के बाद यह बयानबाजी सामने आई। वीडियो वायरल होते ही मामला तूल पकड़ गया और पुलिस महकमे में भी नाराजगी देखने को मिली। मामले की गंभीरता को देखते हुए पार्टी संगठन ने संज्ञान लिया। जारी नोटिस में कहा गया है कि विधायक का आचरण “अत्यंत आपत्तिजनक” है और यह पार्टी अनुशासन के अनुरूप नहीं है। उन्हें तीन दिन के भीतर अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए गए हैं। नोटिस में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया, तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि प्रीतम सिंह लोधी पहले भी विवादों में रह चुके हैं। इससे पहले उनके एक बयान को लेकर उन्हें पार्टी से बाहर भी किया गया था, हालांकि बाद में उनकी वापसी हो गई थी। इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि लोधी क्या जवाब देते हैं और पार्टी उनके खिलाफ आगे क्या कदम उठाती है।

बयानों से बवाल,, नेताओं पर सवाल



भोपाल। मध्यप्रदेश की सियासत इन दिनों मुद्दों से ज्यादा जुबानों की फिसलन पर अटकी हुई नजर आ रही है। हर कुछ दिनों में कोई न कोई वीडियो सामने आता है, बयान सुर्खियों में छा जाता है, और फिर शुरू हो जाता है वही पुराना सिलसिला- सफाई, सियासत और सन्नाटा। सवाल ये है कि क्या अब यह सब नई सामान्य राजनीति बनती जा रही है?

ताजा मामला करैरा विधायक प्रीतम सिंह लोधी का है। एक सड़क हादसे से शुरू हुआ विवाद उस वक्त सियासी तूफान बन गया, जब उनका एक वीडियो सामने आया- जिसमें वे पुलिस अधिकारी के खिलाफ कथित तौर पर अभद्र और धमकी भरी भाषा का इस्तेमाल करते नजर आए। मामला इतना बढ़ा कि आम तौर पर संयम बरतने वाला पुलिस महकमा भी खुलकर नाराज दिखा।

लेकिन कहानी यहीं से शुरू नहीं होती… यह तो बस ताजा एपिसोड है। इससे पहले मंत्री कुंवर विजय शाह का मामला सामने आया था, जहां एक महिला सैन्य अधिकारी पर की गई टिप्पणी ने ऐसा बवाल मचाया कि बात अदालतों तक जा पहुंची और आखिरकार माफी ही एकमात्र रास्ता बचा।

वहीं बीजेपी के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्भीगीय इस सूची में मजबूती से अपनी मौजूदगी दर्ज कराते रहे हैं। हाल ही में इंदौर में दूषित पानी के मुद्दे पर जब पत्रकारों ने सवाल उठाए, तो जवाब देने के बजाय उनका तेवर ही खबर बन गया। कैमरे में कैद हुई तीखी नोकझोंक ने यह सवाल खड़ा कर दिया कि क्या अब सत्ता के सामने सवाल पूछना भी “जोखिम भरा काम” बनता जा रहा है। यानी मुद्दा था जनता के पानी का, लेकिन बहस पहुंच गई सवाल पूछने की हिम्मत तक। इससे पहले भी विजयवर्गीय महिलाओं को लेकर अपनी टिप्पणी के कारण विवादों में रह चुके हैं। उनके बयान ने राजनीतिक गलियारों से लेकर आम जनता तक बहस छेड़ दी थी—लेकिन कुछ दिन शोर-शराबे के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया।

इसी कड़ी में नरेंद्र कुशवाहा का नाम भी जुड़ता है, जिनका एक वीडियो सामने आया था। उसमें एक महिला अधिकारी से उनका तीखा लहजा चर्चा का विषय बना—और सवाल फिर वही, क्या यह सिर्फ “गुस्सा” था या “गैर-जिम्मेदारी”?

यानी तस्वीर कुछ यूं बनती है- कि सत्ताधारी पक्ष के नेताओं का बयान आता है,, बवाल होता है,, सफाई दी जाती है,, और फिर मामला समय की धूल में दब जाता है। दिलचस्प या कहें अर्थपूर्ण बात यह है कि प्रतीम सिंह लोधी पहले भी विवादों के केंद्र में रह चुके हैं। ब्राह्मण समाज को लेकर टिप्पणी के बाद उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया गया था, लेकिन समय बीतते ही वापसी भी हो गई। इससे यह सवाल और गहरा हो जाता है कि क्या सियासत में स्थायी नाराजगी नाम की कोई चीज बची भी है, या सब कुछ परिस्थितियों के हिसाब से रीसेट हो जाता है?

खड़गे के विवादित बयान पर CM मोहन यादव का बड़ा बयान, की ये मांग



भोपाल। प्रधानमंत्री Narendra Modi पर कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge की कथित विवादित टिप्पणी को लेकर सियासत तेज हो गई है। इस बयान पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने कड़ी आपत्ति जताते हुए खड़गे से सार्वजनिक माफी की मांग की है।

दरअसल, चेन्नई में एक जनसभा के दौरान खड़गे एआईएडीएमके की आलोचना कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी पर तीखा हमला बोलते हुए आपत्तिजनक टिप्पणी की। खड़गे ने सवाल उठाया कि अन्नादुरई की विचारधारा को मानने वाले लोग प्रधानमंत्री मोदी के साथ कैसे खड़े हो सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि एआईएडीएमके अपनी पहचान खो चुकी है और अब वह पीएम मोदी की “मूक-गुलाम” बन गई है।

खड़गे के इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है और बीजेपी ने इसे बड़ा मुद्दा बना लिया है। भोपाल में मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि वे कांग्रेस अध्यक्ष के बयान की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं। उन्होंने कहा कि देश के प्रधानमंत्री के लिए इस तरह की भाषा का इस्तेमाल बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और इसके लिए खड़गे को माफी मांगनी चाहिए।

सीएम ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी लगातार ऐसी गलतियां कर रही है, जिसका खामियाजा उसे खुद भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने कांग्रेस नेताओं को अपने अतीत और आचरण पर विचार करने की सलाह दी और कहा कि मीसा बंदी के दौरान विपक्ष के साथ किए गए व्यवहार के लिए भी कांग्रेस ने आज तक माफी नहीं मांगी है।

मुख्यमंत्री ने आगे आरोप लगाया कि कांग्रेस ने समय-समय पर अलगाववादी तत्वों को बढ़ावा दिया है और अब प्रधानमंत्री के खिलाफ इस तरह की टिप्पणी उसकी सोच को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि चुनावी माहौल में कांग्रेस और उसके सहयोगी दल बौखलाहट में इस तरह के बयान दे रहे हैं।

सीएम मोहन यादव ने दोहराया कि खड़गे को अपने बयान पर माफी मांगनी चाहिए और भविष्य में इस तरह की टिप्पणी से बचना चाहिए। इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब बीजेपी और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासत और गरमाने के आसार हैं।