Tuesday, March 31, 2026

आसमान की मार और सिस्टम की देरी, बीच में फंसा किसान


भोपाल। मध्य प्रदेश में समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं खरीदी इस बार तय समय से देरी से शुरू होने जा रही है। सरकार ने खरीदी की नई तारीखें तय की हैं—चार संभागों में 10 अप्रैल से और बाकी संभागों में 15 अप्रैल से खरीदी शुरू होगी। लेकिन इस फैसले के बीच किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है, क्योंकि खेतों से निकली फसल अभी खुले में ही पड़ी है और मौसम लगातार खराब बना हुआ है। प्रदेश के कई इलाकों में आंधी, बारिश और ओलावृष्टि का खतरा बना हुआ है। ऐसे में लाखों क्विंटल गेहूं खुले में पड़ा होने से उसके खराब होने का डर किसानों को सता रहा है। कई किसानों के पास सुरक्षित भंडारण की सुविधा नहीं है, जिससे उनकी मेहनत पर पानी फिरने का खतरा बढ़ गया है।

इससे किसानों को क्या फायदा?

सरकार द्वारा MSP पर खरीदी से किसानों को तय न्यूनतम कीमत की गारंटी मिलेगी

देरी के कारण मंडियों में भीड़ कम हो सकती है, जिससे प्रक्रिया थोड़ी व्यवस्थित रह सकती है

कुछ किसानों को फसल सुखाने और तैयार करने का अतिरिक्त समय मिला है

 ज्यादा भारी पड़ सकता है नुकसान

खराब मौसम के कारण खुले में रखी फसल खराब होने का खतरा

ओलावृष्टि और बारिश से गुणवत्ता गिरने पर MSP का लाभ भी प्रभावित हो सकता है

भंडारण की कमी के कारण छोटे और सीमांत किसान सबसे ज्यादा प्रभावित

मंडियों में खरीदी देर से शुरू होने पर भुगतान में भी देरी की आशंका

चिंता क्यों बढ़ी?

किसानों का कहना है कि अगर खरीदी समय पर शुरू होती तो फसल सीधे मंडियों में पहुंच जाती और खराब मौसम का असर कम होता। अब देरी के कारण उन्हें अपनी उपज को बचाने के लिए अतिरिक्त इंतजाम करने पड़ रहे हैं, जो हर किसान के बस की बात नहीं है।

सरकार की ओर से MSP खरीदी किसानों के लिए राहत का बड़ा माध्यम है, लेकिन इस बार देरी और खराब मौसम ने हालात मुश्किल बना दिए हैं। खेत से मंडी तक का सफर इस बार किसानों के लिए आसान नहीं, बल्कि चिंता और जोखिम से भरा नजर आ रहा है।

भोपाल में सजी युवा चौपाल, सियासत की नई कहानी लिखने को तैयार नई पीढ़ी

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पहली बार आयोजित युवा विधायक सम्मेलन ने राजनीति के भविष्य की एक झलक पेश की। दो दिनों तक चले इस खास आयोजन में मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के 45 युवा विधायक एक मंच पर नजर आए। सम्मेलन में जहां एक ओर ‘विकसित भारत 2047’ के विजन पर गंभीर और सार्थक मंथन हुआ, वहीं दूसरी ओर कुछ बयानों को लेकर सियासी हलचल भी तेज हो गई। सम्मेलन की शुरुआत उत्साह और पारंपरिक रंगों के साथ हुई। पहले दिन लोकतंत्र में आम नागरिकों की भागीदारी को और मजबूत बनाने और युवा जनप्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर गहन चर्चा की गई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने युवा विधायकों को मार्गदर्शन देते हुए उन्हें जिम्मेदार और दूरदर्शी नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दिया। दूसरे दिन कार्यक्रम में राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह का संबोधन खास रहा। उन्होंने विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सभी राजनीतिक दलों की साझा भागीदारी को जरूरी बताया। हालांकि उनके बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं और माहौल में हल्की सियासी गर्माहट देखने को मिली। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने उनके बयान पर सवाल उठाते हुए सरकार को घेरा, जबकि सत्तापक्ष ने इसे सकारात्मक और भविष्य की दिशा तय करने वाला प्रयास बताया। इस दौरान पक्ष और विपक्ष के बीच विचारों का टकराव भी साफ नजर आया। कुल मिलाकर, यह सम्मेलन सिर्फ एक औपचारिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि यह ऐसा मंच बनकर उभरा जहां नई पीढ़ी के जनप्रतिनिधियों ने न केवल अपने विचार साझा किए, बल्कि देश और प्रदेश की राजनीति की दिशा पर भी संकेत दिए। विजन और विचारों के इस संगम के बीच सियासत की हलचल ने इसे और भी अहम बना दिया।

किस दिन मिलेगा कौन सा मंत्री? बीजेपी ने जारी किया पूरा कैलेंडर

भोपाल। मध्य प्रदेश बीजेपी ने संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय को मजबूत करने के लिए एक नई पहल की है। पार्टी ने अप्रैल महीने के लिए “जनसुनवाई कैलेंडर” जारी किया है, जिसके तहत मोहन कैबिनेट के मंत्री क्रमवार भोपाल स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में बैठकर कार्यकर्ताओं की समस्याएं सुनेंगे। जारी शेड्यूल के मुताबिक, हर दिन तय समय—सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक—मंत्री कार्यालय में मौजूद रहेंगे और विभिन्न जिलों से आने वाले कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद करेंगे। इस दौरान कार्यकर्ता अपनी स्थानीय समस्याएं, संगठनात्मक मुद्दे और विकास से जुड़े सुझाव सीधे मंत्रियों तक पहुंचा सकेंगे। कैलेंडर में साफ तौर पर अलग-अलग तारीखों पर अलग-अलग मंत्रियों की जिम्मेदारी तय की गई है। इसमें खेल एवं युवा कल्याण, नगरीय विकास, स्वास्थ्य, पंचायत, ऊर्जा, शिक्षा, कृषि सहित कई विभागों के मंत्री शामिल हैं, जो अपने-अपने दिन पर उपस्थित रहेंगे। साथ ही, कार्यप्रणाली को सुचारू बनाए रखने के लिए प्रदेश पदाधिकारियों को भी जिम्मेदारी सौंपी गई है। समन्वय की भूमिका तय करते हुए वरिष्ठ नेता लोकेंद्र पाराशर को उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल से जुड़े समन्वय का जिम्मा दिया गया है। इसी तरह अन्य मंत्रियों के लिए भी अलग-अलग पदाधिकारियों की तैनाती की गई है। इस पहल का उद्देश्य संगठन और सरकार के बीच सीधा संवाद स्थापित करना, कार्यकर्ताओं की समस्याओं का त्वरित समाधान करना और जमीनी स्तर पर फीडबैक को मजबूत करना है। बीजेपी इसे संगठनात्मक मजबूती के साथ-साथ जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम मान रही है।

क्या खास है इस कैलेंडर में:

अप्रैल भर मंत्री तय शेड्यूल के अनुसार कार्यालय में बैठेंगे

रोजाना 11 से 1 बजे तक जनसुनवाई

अलग-अलग विभागों के मंत्री अलग-अलग दिन

कार्यकर्ताओं को सीधे मंत्री से मिलने का मौका

समन्वय के लिए पदाधिकारियों की तैनाती

यह व्यवस्था पार्टी के अंदर संवाद को नई दिशा देने और कार्यकर्ताओं के साथ सीधा जुड़ाव मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है।शिश के रूप में देखी जा रही है।

Monday, March 30, 2026

जल्द आ जाएगी निगम मंडलों की बड़ी सूची ! सत्ता - संगठन और संघ में मंथन ..

जल्दी मध्य प्रदेश में निगम मंडलों की सूची जारी होने वाली है निगम मंडलों को लेकर महत्वपूर्ण बैठक राजधानी भोपाल में फिलहाल चल रही है, इस बैठक में संगठन और सरकार के साथ-साथ संघ के प्रतिनिधि में मौजूद हैं, माना जा रहा है कि तीन-चार नाम को लेकर पेंच लगातार फंसा हुआ है, जिन पर आज फैसला ले लिए जाएंगे, इतना ही नहीं हारे हुए नेताओं को निगम मंडल में जगह न दिए जाने का भी फैसला ले लिया गया है...अगले एक दो दिनों में निगम मंडलों की पहली जंबो सूची जारी हो जाएगी

Sunday, March 29, 2026

एमपी सरकार ने किया "बैंक ऑफ बड़ौदा" को ब्लैक लिस्ट

ये ख़बर सुनकर आपको हैरानी होगी लेकिन सच यही है कि अब मध्य प्रदेश में बैंक ऑफ बड़ौदा को सरकार ने ब्लैक लिस्ट कर दिया,, कृषि विभाग की करोड़ो की राशि का ये मामला है जिसे सरकार ने बैंक से रिसीव हेड में रखने के लिए कहा था ,लेकिन बैंक इसमें असफल रहा जिसके कारण सरकार को भारी वित्तीय हानि हुई है..

गांव-गांव दस्तक देगी बीजेपी, जनता से सीधा हिसाब-किताब



भोपाल। मध्य प्रदेश में संगठन को जमीनी स्तर तक और मजबूत करने के लिए बीजेपी ने बड़ा अभियान शुरू करने की तैयारी कर ली है। 7 से 12 अप्रैल के बीच प्रदेशभर में व्यापक स्तर पर सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे, जिनमें मंत्री, विधायक और सांसद सीधे गांव-बस्तियों में पहुंचकर लोगों से संवाद करेंगे। इस अभियान के तहत हर विधानसभा क्षेत्र के करीब 50 बड़े गांवों को चुना गया है, जहां बीजेपी के सम्मेलन आयोजित होंगे। इन सम्मेलनों का मुख्य उद्देश्य विभिन्न वर्गों के लोगों से सीधा संपर्क स्थापित करना और उन्हें पार्टी की विचारधारा तथा सरकार की योजनाओं से जोड़ना है। कार्यक्रम के दौरान गांवों के सार्वजनिक स्थलों पर स्वच्छता अभियान भी चलाया जाएगा, जिससे सामाजिक सहभागिता को बढ़ावा मिले। साथ ही चौपालों के जरिए केंद्र सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी, ताकि आम जनता तक सरकारी कामकाज की जानकारी सीधे पहुंचे। बीजेपी इस अभियान के जरिए न सिर्फ संगठनात्मक पकड़ मजबूत करना चाहती है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी पहुंच को और गहरा करने की रणनीति पर भी काम कर रही है। माना जा रहा है कि यह पहल आने वाले समय में पार्टी के लिए राजनीतिक रूप से भी अहम साबित हो सकती है।