Thursday, March 26, 2026

फिर खुलेंगी व्यापम की फाइलें? सुप्रीम कोर्ट सख्त



भोपाल/दिल्ली। बहुचर्चित व्यापम घोटाले को लेकर एक बार फिर मामला सुर्खियों में आ गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए सीबीआई और मध्यप्रदेश सरकार से जवाब मांगा है कि 320 पन्नों की शिकायत पर अब तक क्या कार्रवाई की गई। यह मामला पूर्व विधायक पारस सकलेचा की याचिका पर सामने आया है, जिसमें घोटाले से जुड़े कई बिंदुओं पर दोबारा जांच की मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्र और जस्टिस एनवी अंजरिया शामिल हैं, इस मामले की सुनवाई कर रही है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि जांच और चार्जशीट की स्थिति को लेकर विस्तृत एफिडेविट दाखिल किया जाए। इसके साथ ही कोर्ट ने यह जानना चाहा है कि इतनी बड़ी शिकायत पर अब तक क्या ठोस कार्रवाई हुई है। गौरतलब है कि इससे पहले इंदौर हाईकोर्ट इस याचिका को खारिज कर चुका है, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के बाद एक बार फिर व्यापम घोटाले की फाइलें खुलने की संभावना जताई जा रही है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 16 अप्रैल को होगी, जहां सीबीआई और राज्य सरकार को अपना पक्ष रखना होगा। इस घटनाक्रम के बाद यह माना जा रहा है कि अगर कोर्ट संतुष्ट नहीं होता है, तो व्यापम से जुड़े पुराने मामलों में फिर से जांच की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा सकता है।







छात्रों के लिए खुशखबरी, छुट्टियों का कैलेंडर घोषित




भोपाल। मध्यप्रदेश में आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए स्कूलों का अवकाश कैलेंडर जारी कर दिया गया है। स्कूल शिक्षा विभाग ने प्रदेश के सभी सरकारी और मान्यता प्राप्त विद्यालयों के लिए छुट्टियों की आधिकारिक घोषणा कर दी है। जारी आदेश के अनुसार, इस बार ग्रीष्मकालीन अवकाश 1 मई से शुरू होकर 15 जून 2026 तक रहेगा। यानी करीब डेढ़ महीने तक प्रदेश के सभी स्कूल बंद रहेंगे। वहीं, त्योहारों को लेकर भी छुट्टियों की तारीखें तय कर दी गई हैं। दशहरा अवकाश 19 अक्टूबर से 21 अक्टूबर 2026 तक रहेगा, जबकि दिवाली की छुट्टियां 6 नवंबर से 10 नवंबर 2026 तक घोषित की गई हैं। इन दिनों में प्रदेश के सभी स्कूलों में अवकाश रहेगा। इसके अलावा सर्दियों के लिए भी छुट्टियों का ऐलान कर दिया गया है। शीतकालीन अवकाश 31 दिसंबर 2026 से 4 जनवरी 2027 तक रहेगा। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी इस कैलेंडर से छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों को पूरे साल की छुट्टियों की स्पष्ट जानकारी मिल जाएगी, जिससे वे अपनी पढ़ाई और अन्य गतिविधियों की बेहतर योजना बना सकेंगे। यह आदेश प्रदेश के सभी स्कूलों पर लागू होगा और इसके अनुसार ही पूरे सत्र में शैक्षणिक गतिविधियां संचालित की जाएंगी।

Wednesday, March 25, 2026

मध्यप्रदेश में संविदा कर्मचारियों को लेकर आया बड़ा अपडेट

 


भोपाल। मध्यप्रदेश में संविदा कर्मचारियों के अधिकारों को लेकर अब सरकार सख्त नजर आ रही है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने राज्य के सभी विभागों, निगम-मंडलों, विश्वविद्यालयों, स्थानीय निकायों, आयोगों, प्राधिकरणों और अन्य संस्थाओं से स्पष्टीकरण मांगा है कि संविदा नीति 2023 अब तक पूरी तरह लागू क्यों नहीं की गई। दरअसल, 22 जुलाई 2023 को राज्य सरकार ने संविदा कर्मचारियों के लिए नई नीति जारी की थी। इस नीति में संविदा कर्मचारियों को कई महत्वपूर्ण सुविधाएं देने का प्रावधान किया गया था, लेकिन अब तक कई विभागों में इनका सही तरीके से पालन नहीं हुआ है। इसी को लेकर सामान्य प्रशासन विभाग ने सख्ती दिखाते हुए विस्तृत जानकारी मांगी है। सरकार द्वारा जारी इस नीति के तहत संविदा कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन के अनुसार वेतन समकक्षता, अनुकम्पा नियुक्ति, सेवानिवृत्ति पर ग्रेच्युटी, अवकाश सुविधा, वार्षिक वेतन वृद्धि और अन्य लाभ दिए जाने हैं। इसके अलावा कुछ मामलों में नियमित कर्मचारियों की तरह सुविधाएं देने और भविष्य में भर्ती प्रक्रियाओं में भी संविदा कर्मचारियों को प्राथमिकता देने का प्रावधान किया गया है। हालांकि, जमीनी स्तर पर स्थिति अलग दिखाई दे रही है। जानकारी के अनुसार, कई विभागों में केवल वेतन समकक्षता लागू की गई है, जबकि अनुकम्पा नियुक्ति, ग्रेच्युटी और अन्य सुविधाएं अब भी लंबित हैं। इसके चलते बड़ी संख्या में प्रकरण अटके हुए हैं और कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है। इतना ही नहीं, कई विभागों और उनकी योजनाओं, परियोजनाओं, विश्वविद्यालयों और नगर निगमों में काम कर रहे संविदा कर्मचारियों को अभी तक वेतन समकक्षता का पूरा लाभ भी नहीं मिल पाया है। कुछ मामलों में वेतन निर्धारण में भी विसंगतियां सामने आई हैं, जिससे कर्मचारियों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल सका है। संविदा कर्मचारी संगठनों का कहना है कि प्रदेश में हजारों प्रकरण ऐसे हैं, जिनमें कर्मचारियों को ग्रेच्युटी और अनुकम्पा नियुक्ति का लाभ नहीं मिला है। कई कर्मचारी इन मामलों को लेकर न्यायालय तक पहुंच चुके हैं और आदेश मिलने के बाद भी विभागों द्वारा कार्रवाई में देरी की जा रही है। इसी को देखते हुए सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और सचिव स्तर के अधिकारियों को निर्देश देते हुए एक तय प्रारूप में जानकारी मांगी है। विभागों से पूछा गया है कि उन्होंने नीति के प्रावधान लागू किए हैं या नहीं, और यदि नहीं किए हैं तो इसके स्पष्ट कारण बताएं। सरकार ने यह जानकारी प्राथमिकता के आधार पर मांगी है, जिससे साफ संकेत मिलते हैं कि अब इस मामले में जल्द ही ठोस कार्रवाई हो सकती है। कुल मिलाकर, सरकार के इस कदम को संविदा कर्मचारियों के हित में एक बड़ा निर्णय माना जा रहा है। अब देखने वाली बात यह होगी कि विभाग इस पर कितनी जल्दी अमल करते हैं और संविदा कर्मचारियों को उनके अधिकार कब तक मिल पाते हैं।

VIP नहीं, आम आदमी जैसा अंदाज- ऐसे मनाया CM ने अपना जन्मदिन


भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने जन्मदिन के मौके पर सागर जिले का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने सादगी और जनसंपर्क का संदेश देते हुए किसान हरिदास रैकवार के खेत पर बने घर में पहुंचकर भोजन किया। मुख्यमंत्री का यह दौरा खासा चर्चा में रहा, क्योंकि उन्होंने अपने जन्मदिन को औपचारिक कार्यक्रमों से अलग आम लोगों के बीच मनाने का फैसला किया। सागर पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री सीधे किसान हरिदास रैकवार के खेत पर बने मकान में पहुंचे, जहां उन्होंने परिवार के साथ बैठकर सादा भोजन किया और आत्मीय बातचीत की। मुख्यमंत्री ने इस दौरान किसान परिवार की समस्याएं सुनीं और खेती-किसानी से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने प्रदेश सरकार द्वारा किसानों के लिए चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी भी दी और लाभ मिलने की स्थिति के बारे में फीडबैक लिया। स्थानीय लोगों में मुख्यमंत्री के इस कदम को लेकर खास उत्साह देखने को मिला। ग्रामीणों ने इसे सरकार और आम जनता के बीच बेहतर संवाद की पहल बताया। गौरतलब है कि सागर दौरे के दौरान मुख्यमंत्री अन्य विकास कार्यों और कार्यक्रमों में भी शामिल हुए। उनके इस दौरे को ग्रामीण क्षेत्रों में सीधा संवाद और जमीनी स्तर पर हालात समझने की पहल के तौर पर देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री का यह अंदाज—जन्मदिन पर किसान के घर भोजन करना—राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर एक मजबूत संदेश देता है कि सरकार जनता के साथ खड़ी है और उनकी समस्याओं को समझने के लिए सीधे उनके बीच पहुंच रही है।





क्या दिग्विजय को दे दी है कांग्रेस ने 2028 की कमान !

प्रदेश की सियासत में पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह एक बार फिर सक्रिय हो गए हैं? राजनीतिक गलियारों में ये चर्चाएं तेज हो गई हैं. उधर, भाजपा इसे अलग की नजरिए से देख रही है,, अब विजय का रामलाल के दर्शन करने जाना उनकी नर्मदा यात्रा की याद दिला रहा है,, हालांकि सवाल यह है कि दिग्विजय सिंह राज्यसभा की दावेदारी की मंशा अब भी तो नहीं रख रहे... देश के अन्य राज्यों समेत मध्य प्रदेश में लगातार चुनावों में हार के बाद कांग्रेस ने आगामी 2028 के विधानसभा चुनाव के लिए तैयारियां शुरू कर दी है. बड़ी बात यह है कि प्रदेश की सियासत में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह एक बार फिर सक्रिय हो गए हैं. दिग्विजय सिंह बीते महीनो में लगातार सक्रिय रहे है,, दिग्विजय सिंह अयोध्या रामलला के दर्शन के लिए जा रहे हैं,, माना जा रहा है कि 2028 में दिग्विजय सिंह अपने बेटे जयवर्धन सिंह को मुख्यमंत्री बनाने की पूरी कोशिश में लगे हुए हैं, इसके पहले कांग्रेस के पचमढ़ी प्रशिक्षण शिविर, भोपाल स्थित प्रदेश कांग्रेस कार्यालय और दिल्ली स्थित एआईसीसी हेड क्वार्टर में बड़े नेताओं के सामने चुनावी तैयारी के प्लान को लेकर अपना प्रेजेंटेशन दे चुके हैं. अब फिर से अटकलें तेज हो गई है कि दिग्विजय की नीति पर मध्य प्रदेश कांग्रेस आगे बढ़ रही है.,,अब इस पर सियासी बयानबाजी भी शुरू हो गई है...

Tuesday, March 24, 2026

भोपाल में शिक्षकों का बड़ा प्रदर्शन, खून से लिखा पत्र, ये हैं प्रमुख मांगें



भोपाल। राजधानी भोपाल में शिक्षक भर्ती को लेकर एक बार फिर बड़ा आंदोलन देखने को मिला। शिक्षक भर्ती वर्ग-2 और वर्ग-3 में पदवृद्धि की मांग को लेकर प्रदेशभर से आए अभ्यर्थियों ने अंबेडकर पार्क में जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी शामिल हुए, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी मौजूद रहे। अभ्यर्थियों ने थाली बजाकर अनोखे तरीके से विरोध जताया। इतना ही नहीं, प्रदर्शन के दौरान मुख्यमंत्री के नाम खून से पत्र लिखकर अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने की कोशिश की गई। अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने परीक्षा में 80 से 88 प्रतिशत तक अंक हासिल किए हैं, इसके बावजूद उन्हें अब तक नियुक्ति नहीं मिली है। उनका आरोप है कि सरकार पर्याप्त पद नहीं निकाल रही, जबकि प्रदेश में शिक्षकों की भारी कमी है।विधानसभा में पेश आंकड़ों का हवाला देते हुए अभ्यर्थियों ने बताया कि मध्यप्रदेश में कुल 2 लाख 89 हजार शिक्षक पद स्वीकृत हैं, जिनमें से करीब 1 लाख 74 हजार 419 पदों पर ही शिक्षक कार्यरत हैं। यानी लगभग 1 लाख 15 हजार 678 पद अब भी खाली पड़े हैं, खासकर वर्ग-2 और वर्ग-3 में। अभ्यर्थियों ने यह भी बताया कि प्रदेश के 1,968 स्कूल ऐसे हैं जहां सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे पढ़ाई चल रही है, जबकि करीब 46 हजार स्कूलों में केवल दो शिक्षक पदस्थ हैं। ऐसे में शिक्षा व्यवस्था पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। Pradrshankariyo की प्रमुख मांग है कि शिक्षक भर्ती वर्ग-2 और वर्ग-3 में पदों की संख्या बढ़ाई जाए और लंबे समय से इंतजार कर रहे करीब 50 हजार चयनित अभ्यर्थियों को जल्द नियुक्ति दी जाए। इसके साथ ही खाली पड़े सभी पदों पर चरणबद्ध तरीके से भर्ती प्रक्रिया पूरी करने की मांग भी उठाई गई। अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।