Saturday, May 23, 2026

इस बार एमपी बीजेपी में राज्यसभा के लिए बड़ी सुगबुगाहट!

 


भोपाल। मध्यप्रदेश बीजेपी में राज्यसभा चुनाव को लेकर अंदरखाने हलचल तेज हो गई है। पार्टी भले अभी खुलकर कुछ नहीं कह रही, लेकिन भोपाल से लेकर दिल्ली तक बैठकों और नामों की चर्चाओं ने सियासी गलियारों का तापमान बढ़ा दिया है। इस बार बीजेपी सिर्फ सीट भरने नहीं, बल्कि बड़े सामाजिक और राजनीतिक संदेश देने की रणनीति पर काम करती दिखाई दे रही है। सूत्रों के मुताबिक मोहन सरकार के दो वरिष्ठ मंत्रियों के नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। संगठन और सरकार में सक्रिय इन चेहरों को दिल्ली भेजने के विकल्प पर पार्टी मंथन कर रही है। हालांकि अंतिम फैसला केंद्रीय नेतृत्व के स्तर पर होना है, लेकिन दावेदारों की सक्रियता लगातार बढ़ती नजर आ रही है। सबसे ज्यादा चर्चा आदिवासी प्रतिनिधित्व को लेकर है। मौजूदा राज्यसभा सांसद सुमेर सिंह सोलंकी एक बार फिर मौका पाने के लिए प्रयासरत बताए जा रहे हैं। लेकिन पार्टी के भीतर इस बार नए आदिवासी चेहरे को आगे लाने की भी चर्चा तेज है। बीजेपी आगामी चुनावों से पहले आदिवासी वोट बैंक को बड़ा संदेश देने की तैयारी में मानी जा रही है। वहीं केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन की सीट को लेकर भी सस्पेंस बना हुआ है। सूत्रों का दावा है कि पार्टी इस सीट पर फिर किसी बाहरी लेकिन राष्ट्रीय स्तर के चेहरे को मौका दे सकती है। यानी मध्यप्रदेश से राज्यसभा भेजकर राष्ट्रीय राजनीति के समीकरण साधने की तैयारी भी चल रही है। दिलचस्प बात यह है कि इस बार बीजेपी में दावेदारों की संख्या ज्यादा और सीटें सीमित हैं। ऐसे में संगठन अनुभव, सामाजिक समीकरण और केंद्रीय नेतृत्व के भरोसे — तीनों का संतुलन साधने की कोशिश कर रहा है। यही वजह है कि कई बड़े नेता इन दिनों दिल्ली और भोपाल के बीच ज्यादा सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। कुल मिलाकर बीजेपी में राज्यसभा को लेकर “साइलेंट पॉलिटिक्स” तेज हो चुकी है। अब नजर सिर्फ इस बात पर है कि पार्टी संगठन के भरोसेमंद चेहरों पर दांव लगाएगी या फिर किसी नए नाम से सबको चौंकाएगी।

राज्यसभा के लिए "नाथ के साथ" दिल्ली


भोपाल। मध्यप्रदेश में राज्यसभा चुनाव की सरगर्मी के बीच कांग्रेस की इकलौती सीट पर सबसे ज्यादा चर्चा अगर किसी नाम की है, तो वो है पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ। पार्टी के भीतर भले कई चेहरे दावेदारी कर रहे हों, लेकिन सियासी गलियारों में सबसे मजबूत पकड़ अब भी “नाथ परिवार” की मानी जा रही है। यही वजह है कि राज्यसभा की इस एक सीट को लेकर कांग्रेस में अंदरखाने मंथन तेज हो गया है। 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के खाते में एक सीट आना लगभग तय माना जा रहा है। लेकिन इस सीट पर उम्मीदवार कौन होगा, यही सबसे बड़ा सवाल बन गया है। सूत्रों की मानें तो क्रॉस वोटिंग के डर और संगठनात्मक पकड़ को देखते हुए पार्टी का एक बड़ा वर्ग कमलनाथ के नाम पर सहमति बनाने की कोशिश में जुटा है। दरअसल, कमलनाथ सिर्फ पूर्व मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि प्रदेश कांग्रेस में सबसे मजबूत राजनीतिक नेटवर्क रखने वाले नेताओं में गिने जाते हैं। विधायकों पर पकड़, संसाधन जुटाने की क्षमता और दिल्ली दरबार तक सीधी पहुंच उन्हें बाकी दावेदारों से अलग खड़ा करती है। यही वजह है कि जब भी कांग्रेस मुश्किल में होती है, नजरें फिर “नाथ फैक्टर” पर टिक जाती हैं। सियासी चर्चा यह भी है कि अगर कमलनाथ राज्यसभा जाते हैं, तो छिंदवाड़ा से लेकर भोपाल तक कांग्रेस की राजनीति में बड़ा संदेश जाएगा। पार्टी के भीतर इसे “अनुभव बनाम प्रयोग” की लड़ाई के तौर पर भी देखा जा रहा है। राहुल गांधी की नई टीम युवा चेहरों को आगे बढ़ाना चाहती है, लेकिन मध्यप्रदेश में संगठन की जमीनी हकीकत अब भी कमलनाथ के इर्द-गिर्द घूमती दिखाई देती है। हालांकि दिग्विजय सिंह, अरुण यादव, जीतू पटवारी और कमलेश्वर पटेल जैसे नेताओं के नाम भी चर्चा में हैं, लेकिन पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि इस समय कांग्रेस किसी “रिस्क” के मूड में नहीं दिख रही। यही कारण है कि कमलनाथ का नाम लगातार सबसे ऊपर चल रहा है। दिलचस्प बात यह भी है कि पिछले कुछ महीनों में कमलनाथ और उनके बेटे नकुलनाथ की राजनीतिक सक्रियता फिर बढ़ी है। दिल्ली से लेकर छिंदवाड़ा तक लगातार बैठकों और रणनीतिक चर्चाओं ने यह संकेत दिए हैं कि “नाथ परिवार” अभी भी प्रदेश कांग्रेस की धुरी बना हुआ है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है — क्या कांग्रेस हाईकमान एक बार फिर मध्यप्रदेश में कमलनाथ पर भरोसा जताएगा? या फिर पार्टी किसी नए चेहरे पर दांव लगाकर बड़ा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश करेगी? फिलहाल कांग्रेस की इस एक सीट ने पूरे प्रदेश की राजनीति का तापमान बढ़ा दिया है।

हनीट्रेप में एमपी के कौनसे माननीय!


भोपाल। मध्यप्रदेश की राजनीति में इन दिनों मौसम गर्मी से नहीं, बल्कि “Honeytrap 2.0” की फुसफुसाहटों से ज्यादा तप रहा है। सत्ता के गलियारों में अचानक पुराने चैट डिलीट होने लगे हैं, कुछ माननीयों ने फोन बदल लिए हैं, तो कुछ अब हर कॉल पर “भाई रिकॉर्डिंग तो नहीं हो रही?” पूछकर बात शुरू कर रहे हैं। अब “हनीट्रैप पार्ट-2” ने फिर कई बड़े चेहरों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। इस बार चर्चा सिर्फ अफसरों या कारोबारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि कुछ माननीयों और रसूखदार नेताओं के नाम भी सत्ता के कॉरिडोर में तैरते बताए जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक इस पूरे नेटवर्क का तरीका बेहद फिल्मी लेकिन खतरनाक था। पहले सोशल मीडिया या जान-पहचान के जरिए संपर्क, फिर दोस्ती, फिर निजी मुलाकातें और वीडियो कॉल… और उसके बाद शुरू होता था “वीडियो वाले रिश्तों” का असली खेल। इस पूरे मामले में सागर की “मिस्ट्री गर्ल” रेशू उर्फ अभिलाषा चौधरी का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है। उसके कथित ऑडियो और चैट सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में बेचैनी और बढ़ गई है। कहा जा रहा है कि उसके संपर्क सिर्फ एक शहर तक सीमित नहीं थे, बल्कि भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर और रीवा तक फैले हुए थे। सबसे ज्यादा सनसनी उस दावे ने फैलाई है, जिसमें 100 से ज्यादा आपत्तिजनक वीडियो होने की चर्चा है। हालांकि जांच एजेंसियों ने किसी विधायक या नेता का नाम आधिकारिक तौर पर सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन सत्ता के गलियारों में हर कोई यही जानना चाहता है — “आखिर वो माननीय कौन हैं?” सूत्र यह भी बता रहे हैं कि कुछ वीडियो को लेकर कथित सौदेबाजी और “मैनेजमेंट” की कोशिशें भी हुईं। यही वजह है कि अब SIT गठन की चर्चाएं भी तेज हैं और कई लोग डर रहे हैं कि कहीं अगला खुलासा राजनीतिक भूचाल न ले आए।फिलहाल जांच जारी है… लेकिन भोपाल की राजनीति में इन दिनों सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला शब्द शायद यही है -“भाई, चैट डिलीट कर देना…”

Friday, May 22, 2026

मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के लिए अधिसूचना जारी,, कमलनाथ की दिल्ली की तैयारी..

मध्यप्रदेश में खाली होने वाली तीन राज्यसभा सीटों के लिए चुनावी तारीख घोषित हो गई है.. 10 राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों को लेकर चुनाव होना है। चुनाव आयोग ने चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है। चुनाव आयोग की ओर से जानकारी दी गई है कि 10 राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों पर 18 जून 2026 को चुनाव कराया जाएगा. मध्य प्रदेश की तीन सीटों पर होगा राज्यसभा चुनाव होंगे असल।में दिग्विजय सिंह ,जॉर्ज कुरियन और सुमेर सिंह सोलंकी की राज्यसभा सीट हो रही है खाली। सूत्रों की माने तो कमलनाथ ये उनके परिवार को कोई सदस्य दिग्विजय की जगह राज्यसभा जा सकता है ,,हालांकि जीतू पटवारी भी कोशिश में लगे है,,, दूसरी तरफ बीजेपी में भी कैलाश विजयवर्गीय को राज्यसभा भेजने के कयास है ,, हालांकि अंदरखाने की खबर ये है कि प्रहलाद पटेल में कोशिश में जुटे हैं

Thursday, May 21, 2026

कहां अटका बीजेपी की प्रदेश कार्यसमिति का गठन?


भोपाल। मध्यप्रदेश बीजेपी की नई प्रदेश कार्यसमिति का गठन अब तक नहीं हो पाने से सियासी गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने मई में ओरछा में प्रदेश कार्यसमिति की बैठक कराने के संकेत दिए थे, लेकिन मई खत्म होने को है और अब तक नई टीम का ऐलान नहीं हो पाया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर बीजेपी की नई कार्यसमिति का गठन कहां अटक गया है। दरअसल, इस बार संगठन प्रदेश कार्यसमिति को छोटा लेकिन ज्यादा प्रभावी बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक नई कार्यसमिति में केवल 106 सदस्यों को जगह देने की तैयारी है। यही फैसला अब संगठन के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है, क्योंकि सीमित जगह में वरिष्ठ नेताओं, पुराने कार्यकर्ताओं, नए चेहरों और क्षेत्रीय समीकरणों के बीच संतुलन बैठाना आसान नहीं माना जा रहा। पार्टी संगठन इस बार कार्यसमिति में युवाओं, सक्रिय कार्यकर्ताओं और जमीन पर काम करने वाले नेताओं को मौका देने के मूड में दिखाई दे रहा है। वहीं कई वरिष्ठ नेता भी अपने समर्थकों को संगठन में जगह दिलाने के लिए सक्रिय बताए जा रहे हैं। ऐसे में नामों को लेकर लगातार मंथन और अंदरूनी चर्चा का दौर चल रहा है। सूत्रों की मानें तो प्रदेश और जिला कार्यसमितियों को लेकर अधिकांश नाम लगभग तय हो चुके हैं, लेकिन अंतिम सूची पर सहमति बनने में वक्त लग रहा है। संगठन कोई ऐसा संदेश नहीं देना चाहता जिससे किसी गुट या बड़े नेता की नाराजगी सामने आए। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बीजेपी इस बार संगठन में कम लेकिन मजबूत टीम के फार्मूले पर काम कर रही है। लेकिन दिग्गज नेताओं की लंबी फेहरिस्त और समर्थकों को साधने की कोशिशों ने प्रदेश कार्यसमिति के गठन को फिलहाल उलझा दिया है। अब नजर इस बात पर है कि प्रदेश नेतृत्व कब तक इस बहुप्रतीक्षित टीम का ऐलान करता है।

Wednesday, May 20, 2026

गेहूं बेचने वाले किसानों को सरकार ने दी बड़ी राहत

 


भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने गेहूं बेचने वाले किसानों को बड़ी राहत दी है। जिन किसानों ने 23 मई तक स्लॉट बुक कर लिया है, उनसे अब 28 मई तक गेहूं खरीदा जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यह घोषणा करते हुए कहा कि सरकार किसान कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और किसी भी किसान का गेहूं खरीदी से नहीं छूटेगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि कई किसानों ने स्लॉट तो बुक कर लिए थे, लेकिन खरीदी केंद्रों पर लंबी लाइन और अन्य व्यवस्थागत कारणों से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। किसानों की इसी समस्या को देखते हुए सरकार ने खरीदी की अंतिम तारीख बढ़ाने का फैसला लिया है। सीएम मोहन यादव ने कहा कि इस साल मध्यप्रदेश ने गेहूं खरीदी में अपना ही रिकॉर्ड तोड़ दिया है। पिछले साल प्रदेश में करीब 77 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया था, जबकि इस बार सरकार 100 लाख मीट्रिक टन गेहूं उपार्जन का लक्ष्य हासिल करने जा रही है। अब तक करीब 91 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा जा चुका है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरे देश में सबसे ज्यादा किसानों से गेहूं खरीदने वाला राज्य मध्यप्रदेश बना है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे चिंता न करें, सरकार सभी स्लॉट बुक किसानों का गेहूं खरीदेगी। डॉ. मोहन यादव ने कहा कि वैश्विक चुनौतियों, भंडारण, बारदाना और ट्रांसपोर्ट जैसी दिक्कतों के बावजूद सरकार ने व्यवस्थाएं मजबूत की हैं। खरीदी केंद्रों पर किसानों को 2625 रुपए प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया जा रहा है। सरकार के इस फैसले से उन हजारों किसानों को राहत मिलेगी, जो स्लॉट बुक होने के बावजूद समय पर गेहूं नहीं बेच पा रहे थे।