Saturday, February 21, 2026

राजधानी भोपाल में घेराव से हिंसा तक: BJYM और कांग्रेस कार्यकर्ताओं में झड़प


भोपाल। राजधानी भोपाल की सड़कों पर उस समय सियासी तापमान अचानक बढ़ गया, जब भारतीय जनता युवा मोर्चा ने कांग्रेस कार्यालयों के घेराव का आह्वान किया। प्रदेशभर में इस आह्वान का असर देखने को मिला — विदिशा से लेकर उज्जैन और ग्वालियर तक कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए।

मामला हाल ही में हुए AI इम्पैक्ट समिट के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं के एक विवादित प्रदर्शन से जुड़ा है। युवा मोर्चा ने इसे विरोध का आधार बनाया और कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।

बैरिकेड्स, वॉटर कैनन और नारेबाजी

भोपाल में रेड क्रॉस अस्पताल के पास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। बैरिकेड्स लगाए गए, पुलिस बल तैनात रहा और हालात बिगड़ने की आशंका में वॉटर कैनन भी तैयार रखा गया।

युवा मोर्चा के अध्यक्ष श्याम टेलर के नेतृत्व में कार्यकर्ता आगे बढ़े। जैसे-जैसे भीड़ कांग्रेस कार्यालय की ओर बढ़ी, नारेबाजी तेज होती गई। कुछ कार्यकर्ता बैरिकेड्स पर चढ़ गए। पुलिस ने भीड़ को रोकने के लिए वॉटर कैनन का सहारा लिया, लेकिन प्रदर्शनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं दिखे।

टकराव में बदली सियासत

आखिरकार जब प्रदर्शनकारी कांग्रेस कार्यालय के पास पहुंचे, तो माहौल और गरमा गया। दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। पहले तीखी बहस हुई, फिर हालात बिगड़ते चले गए। पत्थर और लाठियां चलने लगीं। अफरा-तफरी के बीच कई लोग घायल हो गए।

सड़क पर एक ओर कांग्रेस कार्यकर्ता “राहुल गांधी जिंदाबाद” के नारे लगा रहे थे, तो दूसरी ओर बीजेपी कार्यकर्ता विरोध दर्ज करा रहे थे। बीच में पुलिस का कड़ा पहरा था।

आरोप-प्रत्यारोप और धरने की तैयारी

पूर्व मंत्री पीसी शर्मा घटनास्थल पर पहुंचे और युवा मोर्चा कार्यकर्ताओं पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने तत्काल एफआईआर दर्ज करने की मांग की और कहा कि कई कांग्रेस कार्यकर्ता घायल हुए हैं, जिनमें कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है।

कांग्रेस नेताओं ने हबीबगंज थाने में शांतिपूर्ण धरने की घोषणा की है। उनका कहना है कि जब तक दोषियों पर कार्रवाई नहीं होगी, आंदोलन जारी रहेगा।

राजधानी में फिलहाल हालात काबू में बताए जा रहे हैं, लेकिन राजनीतिक बयानबाजी और विरोध-प्रदर्शन के बीच प्रदेश की सियासत में एक बार फिर टकराव की तस्वीर साफ दिखाई दे रही है।

एमपी वोटर लिस्ट अपडेट: सत्यापन के बाद घटे 34 लाख नाम, नई सूची प्रकाशित



भोपाल। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया पूरी होने के बाद मध्यप्रदेश की अंतिम मतदाता सूची आज आधिकारिक रूप से प्रकाशित कर दी गई। व्यापक सत्यापन, गणना पत्रों की डिजिटल एंट्री और दावे-आपत्तियों के निपटारे के बाद प्रदेश में कुल  5,39,81,065 मतदाता अंतिम सूची में शामिल किए गए हैं।

निर्वाचन अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक आंकड़ों में प्रदेश में 5,74,06,143 मतदाता दर्ज थे। पुनरीक्षण के दौरान 5,31,31,983 मतदाताओं से गणना पत्र प्राप्त हुए, जिनका डेटा पूरी तरह डिजिटल किया गया। सत्यापन, मृत एवं स्थानांतरित मतदाताओं के नाम विलोपित करने और डुप्लीकेट प्रविष्टियों को हटाने के बाद करीब 34 लाख नाम कम हुए और अंतिम सूची तैयार की गई।

जेंडर आधारित आंकड़े

अंतिम मतदाता सूची के अनुसार - 

2,89,04,975 - पुरुष मतदाता

2,60,75,186 - महिला मतदाता

904 - थर्ड जेंडर मतदाता

इन सभी को मिलाकर कुल 5,39,81,065 मतदाता दर्ज किए गए हैं।

पूरी तरह डिजिटल हुआ डेटा

अधिकारियों ने बताया कि इस बार मतदाता सूची को पूरी तरह डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपडेट किया गया है। बूथ स्तर तक सत्यापन कराया गया और प्राप्त सभी दावे-आपत्तियों का नियमानुसार निराकरण किया गया। प्रशासन, कर्मचारियों, मीडिया और राजनीतिक दलों के सहयोग से प्रक्रिया को पारदर्शी ढंग से पूरा किया गया।

ऐसे चेक करें अपना नाम

मतदाता अपने नाम की पुष्टि निम्न तरीकों से कर सकते हैं —

1. Voters’ Service Portal पर जाकर EPIC नंबर या नाम से खोज करें।

2. संबंधित जिले की CEO वेबसाइट पर विवरण देखें।

3. अपने बूथ लेवल अधिकारी (BLO) से संपर्क कर सूची में नाम की पुष्टि करें।

यदि नाम सूची में नहीं मिलता है या किसी प्रकार की त्रुटि है, तो संबंधित प्रपत्र के माध्यम से सुधार या नाम जोड़ने का आवेदन किया जा सकता है।

अंतिम मतदाता सूची जारी होने के साथ ही प्रदेश में चुनावी तैयारियों को नई गति मिल गई है। निर्वाचन अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे समय रहते अपने नाम और विवरण की जांच अवश्य कर लें, ताकि मतदान के दिन किसी प्रकार की असुविधा न हो।

राहुल के दौरे के पहले युवा हेमंत और अभिजीत पर बीजेपी की नजर !

अमेरिका के साथ ट्रेड डील के विरोध में मध्य प्रदेश में बड़ा आयोजन होने जा रहा है,, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे किसान महासम्मेलन के लिए एमपी आ रहे है,, लेकिन इसके पहले बीजेपी मध्य प्रदेश में कांग्रेस को बड़ा झटका देने की तैयारी में है,, एमपी के दो युवा विधायक बीजेपी के संपर्क में हैं,,इन्हीं के कारण एमपी बीजेपी की नियुक्तियां और मंत्रीमंडल विस्तार रुका हुआ है ,,बताया जा रहा है कि विजय शाह के रिप्लेसमेंट के लिए उनके ही भतीजे अभिजीत शाह को बीजेपी में लाने की तैयारी है वहीं दूसरी तरफ हेमंत कटारे को लेकर भी इसी तरह की चर्चाएं है ,हेमंत का परिवार सिंधिया गुट से जुड़ा रहा है लेकिन हेमंत, सिंधिया के साथ बीजेपी में नहीं गए थे पर अब खबर आ रही है कि वो बड़ी डील के साथ बीजेपी में जाने की तैयारी में हैं,,

Friday, February 20, 2026

विजयवर्गीय और कटारे ,दो पार्टी एक कहानी !

हमें तो अपनों ने लूटा गैरों में कहां दम था, मेरी कश्ती थी डूबी वहां जहां पानी कम था ये शेर एमपी की सियासत के दो बड़े चेहरों कैलाश विजयवर्गीय और हेमंत कटारे पर मुफीद बैठता है, असल में ये दोनों नेता ही अपने अपने कप्तानों की बेवफाई के मारे है, ऊपर से सितम ये है कि कोच और सेलेक्टर भी खिलाफत में हैं,, असल में मध्य प्रदेश विधानसभा में सत्तापक्ष के मुखिया मोहन यादव हैं तो सत्तापक्ष में संसदीय कार्यमंत्री की हैसियत से नंबर दो पर कैलाश विजयवर्गीय है,, इसी तरह कांग्रेस विधायक दल के मुखिया उमंग सिंघार है और उपनेता हेमंत कटारे है ,, सब जानते है कि मोहन को कैलाश रास नहीं आ रहे और उमंग को कटारे नहीं भा रहे...हेमंत कटारे और कैलाश दोनों की ही मीडिया में अपनी लोकप्रियता है और उतनी ही क्षेत्र में सक्रियता भी ,, लेकिन दोनों की अपनी कमजोरियां भी हैं ,दोनों अपनी जुबान पर काबू नहीं रख पाते, लेकिन सच ये भी है कि दिल के साफ लोगो के साथ अक्सर ऐसा होता है,, खैर मैदान कोई भी हो कप्तान का सम्मान जरूरी है,, फिर वो मैदान सियासत को जा या खेल का..बस सियासत में आपके पास एक मौका होता है कि आप कूटनीति से कप्तान को निबटा दें और सामने यस बॉस भी कहते रहे लेकिन अगर आप ये नहीं कर सकते तो आपकी कहानी भी उमा भारती का इतिहास दोहरा सकती है,, कांग्रेस में तो चल भी जाता है लेकिन बीजेपी में नहीं,,चलिए हेमंत ने तो अपने पद इस्तीफा दे दिया ,, अब देखना है कैलाश जी के संदर्भ में आगे क्या होता है ...कहते है ना राजनीति ...... चीज होती है

सरकार के आंकड़े साफ, लेकिन जवाब धुंधले?

भोपाल। पूर्व मंत्री एवं कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से हुई मौतों को लेकर सरकार पर तीखा तंज कसा है। उन्होंने कहा कि कागज़ों में सब कुछ “नियंत्रण में” दिखाया जा रहा है, लेकिन मौतों के आंकड़े ही आपस में मेल नहीं खा रहे। एक जगह 20, दूसरी जगह 32—आखिर सच किसे माना जाए?

जयवर्धन सिंह ने कहा कि जिस इंदौर को स्वच्छता का प्रतीक बताया जाता है, वहां पीने का पानी ही सवालों के घेरे में है। उन्होंने आरोप लगाया कि अगर 32 लोगों की जान गई है तो मुआवजा केवल 20 परिवारों तक ही क्यों सीमित रहा? क्या बाकी परिवार सरकारी गिनती में शामिल नहीं हैं?

उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि सरकार शायद “छवि बचाने” में ज्यादा गंभीर है, बजाय लोगों की जान बचाने के।

प्रमुख मांगें:

  • मृतकों की सही और अंतिम संख्या सार्वजनिक की जाए।
  • सभी पीड़ित परिवारों को समान रूप से पूरा मुआवजा दिया जाए।
  • पूरे मामले की उच्च स्तरीय और स्वतंत्र जांच हो।
  • लापरवाही के दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
  • विधानसभा में इस मुद्दे पर विस्तृत और पारदर्शी चर्चा कराई जाए।

जयवर्धन सिंह ने कहा कि यह मामला सिर्फ आंकड़ों का अंतर नहीं, बल्कि जवाबदेही और न्याय का है। सच सामने आना ही चाहिए, चाहे वह कितना भी असहज क्यों न हो।



मध्यप्रदेश दौरे पर राहुल गांधी-खड़गे, इस बड़े मुद्दे पर कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन!


भोपाल। 24 फरवरी को राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे मध्यप्रदेश दौरे पर रहेंगे। राजधानी भोपाल में आयोजित कांग्रेस के किसान सम्मेलन में दोनों शीर्ष नेता शामिल होंगे। यह सम्मेलन अमेरिका के साथ प्रस्तावित ट्रेड डील के विरोध में आयोजित किया जा रहा है।

कांग्रेस का कहना है कि इस ट्रेड डील से किसानों, खासकर मक्का और सोयाबीन उत्पादकों पर असर पड़ सकता है। मध्यप्रदेश देश के प्रमुख मक्का और सोयाबीन उत्पादक राज्यों में से एक है, इसलिए इस मुद्दे को लेकर पार्टी राज्य में बड़ा जनआंदोलन खड़ा करने की तैयारी में है।

सम्मेलन में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता और बड़ी संख्या में किसान शामिल होने की संभावना है। पार्टी इसे किसान हितों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम के रूप में पेश कर रही है।

छह राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष के साथ बैठक हुई है उसमें तय किया गया की 24 तारीख को भोपाल में किसानों के मुद्दे पर प्रदर्शन होगा।