Sunday, May 10, 2026

बरगी क्रूज हादसे के बाद जागी सरकार, अब न्यायिक जांच के भरोसे तलाशे जाएंगे जवाब




भोपाल। जबलपुर के बरगी बांध में हुए दर्दनाक क्रूज हादसे के कई दिन बाद आखिरकार मध्यप्रदेश सरकार ने न्यायिक जांच आयोग के गठन का फैसला लिया है। हादसे में हुई जनहानि और सुरक्षा व्यवस्थाओं पर उठते सवालों के बीच अब सरकार ने हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति संजय द्विवेदी की अध्यक्षता में एकल सदस्यीय जांच आयोग गठित किया है। हालांकि बड़ा सवाल यही है कि क्या इस जांच के बाद हादसे के जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी या मामला सिर्फ जांच तक ही सीमित रह जाएगा।

सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक आयोग तीन महीने के भीतर अपनी जांच पूरी कर रिपोर्ट राज्य शासन को सौंपेगा। आयोग हादसे के कारणों, जिम्मेदार अधिकारियों और सुरक्षा व्यवस्थाओं में हुई लापरवाही की जांच करेगा। इसके साथ ही राहत और बचाव कार्यों की समीक्षा भी की जाएगी।

सरकार ने जांच के लिए तय किए ये बड़े बिंदु

आयोग यह जांच करेगा कि हादसा किन परिस्थितियों में हुआ और इसके लिए कौन जिम्मेदार था। साथ ही प्रदेश में संचालित सभी नौकाओं, क्रूज और जल क्रीड़ा गतिविधियों की सुरक्षा व्यवस्था का ऑडिट भी किया जाएगा। जांच में “इनलैंड वेसल एक्ट 2021” और “आईएमएस बोट सेफ्टी गाइडलाइंस 2017” के पालन की भी पड़ताल होगी। इसके अलावा सरकार प्रदेश में नाव और क्रूज संचालन के लिए एक समान SOP और क्विक रिस्पॉन्स टीम बनाने की तैयारी में भी है।

उठ रहे कई सवाल

हादसे के बाद लगातार यह सवाल उठ रहे थे कि आखिर सुरक्षा इंतजामों में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई। क्या क्रूज संचालन के दौरान नियमों का पालन किया जा रहा था? क्या यात्रियों की सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम थे? और सबसे बड़ा सवाल—क्या इस हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई होगी? अब निगाहें न्यायिक आयोग की रिपोर्ट पर टिक गई हैं। देखना होगा कि यह जांच सिर्फ कागजों तक सीमित रहती है या फिर हादसे के जिम्मेदारों तक कार्रवाई की आंच भी पहुंचती है।

पदों को अनहोल्ड करने की मांग, OBC अभ्यर्थियों ने खोला मोर्चा


भोपाल। मध्यप्रदेश में 13 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण विवाद के चलते भर्ती प्रक्रियाओं में फंसे अभ्यर्थियों का गुस्सा अब खुलकर सामने आने लगा है। राजधानी भोपाल के अंबेडकर पार्क में शुक्रवार को विभिन्न विभागों के 13% ओबीसी होल्ड से प्रभावित अभ्यर्थियों ने प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने भर्ती परीक्षाएं पास कर लीं, लेकिन 13 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण होल्ड होने के कारण पिछले 6 वर्षों से नियुक्ति नहीं मिल पा रही है। इससे हजारों युवाओं का भविष्य अधर में लटक गया है। अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि लंबे समय से सरकार सिर्फ आश्वासन दे रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि कई अभ्यर्थी उम्र सीमा पार करने की स्थिति में पहुंच चुके हैं और मानसिक व आर्थिक परेशानी झेल रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थियों ने अनोखे तरीके से विरोध जताते हुए अपने खून से राष्ट्रपति के नाम पत्र लिखा। पत्र में मांग की गई कि 13 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण को जल्द अनहोल्ड कर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी कराई जाए, ताकि चयनित अभ्यर्थियों को जॉइनिंग मिल सके। अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द फैसला नहीं हुआ, तो आंदोलन को और बड़ा रूप दिया जाएगा। उनका कहना है कि वर्षों की मेहनत और परीक्षा पास करने के बाद भी नियुक्ति नहीं मिलना युवाओं के साथ अन्याय है।




Saturday, May 9, 2026

जंबो कार्यसमिति को हेमंत की ना



भोपाल। मध्यप्रदेश भाजपा की नई प्रदेश कार्यसमिति को लेकर संगठन के भीतर हलचल तेज हो गई है। पार्टी ने भले ही कार्यसमिति की पहली बैठक के आयोजन स्थल के तौर पर ओरछा का नाम तय कर दिया हो, लेकिन अब तक नई कार्यसमिति के सदस्यों के नामों पर अंतिम सहमति नहीं बन पाई है। ऐसे में कार्यसमिति गठन और बैठक दोनों को लेकर संगठन के भीतर लगातार मंथन चल रहा है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल पहले ही ऐलान कर चुके हैं कि नई प्रदेश कार्यसमिति की पहली बैठक ओरछा में राम राजा सरकार के दरबार में आयोजित की जाएगी। लेकिन बैठक से पहले संगठनात्मक संतुलन साधना पार्टी नेतृत्व के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, इस बार भाजपा प्रदेश नेतृत्व कार्यसमिति का आकार सीमित रखने के पक्ष में है। पार्टी संविधान के प्रावधानों के तहत प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल कार्यसमिति को छोटी और प्रभावी टीम के रूप में तैयार करना चाहते हैं। बताया जा रहा है कि प्रदेश कार्यसमिति में कुल सदस्यों की संख्या करीब 106 तक सीमित रखने की तैयारी है, जबकि विशेष आमंत्रित सदस्यों की संख्या भी 30 प्रतिशत से ज्यादा न हो, इस पर जोर दिया जा रहा है। इसी के तहत लगभग 32 विशेष आमंत्रित सदस्यों तक सीमित रखने पर चर्चा चल रही है। हालांकि, छोटे आकार की कार्यसमिति बनाने की कोशिश ने संगठन के भीतर समीकरणों को और जटिल बना दिया है। नए और पुराने नेताओं के बीच संतुलन, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व, जातीय और सामाजिक समीकरणों को साधने में पार्टी नेतृत्व को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। कई नेता अपने समर्थकों को कार्यसमिति में जगह दिलाने के लिए सक्रिय बताए जा रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कार्यसमिति गठन में हो रही देरी इसी अंदरूनी खींचतान और सीमित जगह के कारण है। फिलहाल स्थिति यह है कि बैठक का स्थान तय हो चुका है, लेकिन कार्यसमिति के चेहरे अब भी तय नहीं हो पाए हैं। ऐसे में अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि भाजपा नेतृत्व कब नई प्रदेश कार्यसमिति का औपचारिक ऐलान करता है।

भोपाल और इंदौर विकास प्राधिकरण दिग्गजों की लड़ाई में अटके

 


भोपाल। मध्यप्रदेश में निगम-मंडलों की नियुक्तियों का दौर जारी है, लेकिन बड़े शहरों के विकास प्राधिकरणों में नियुक्तियां अब भी अटकी हुई हैं। ग्वालियर और जबलपुर विकास प्राधिकरण में नियुक्तियों के बाद अब सबसे ज्यादा चर्चा भोपाल और इंदौर विकास प्राधिकरण को लेकर हो रही है, जहां दिग्गज नेताओं के बीच खींचतान खुलकर सामने आती दिख रही है। सूत्रों के मुताबिक, भोपाल विकास प्राधिकरण के लिए कई बड़े नेताओं ने अपने-अपने समर्थकों के नाम आगे बढ़ाए हैं। इनमें केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव खेमे के नेताओं के नाम प्रमुख बताए जा रहे हैं। हालांकि, जिस नाम पर लगभग सहमति बनती नजर आई, उसका स्थानीय मंत्रियों विश्वास सारंग और कृष्णा गौर द्वारा विरोध किए जाने की चर्चा है। यही वजह है कि अब तक भोपाल विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष के नाम पर अंतिम मुहर नहीं लग पाई है। उधर इंदौर में भी हालात अलग नहीं हैं। यहां मंत्री कैलाश विजयवर्गीय समर्थक और मुख्यमंत्री खेमे के नेताओं के बीच पद को लेकर अंदरूनी टकराव की चर्चा तेज है। देवास में भी इसी तरह के समीकरण बनने की बात सामने आ रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा में आमतौर पर नियुक्तियों को लेकर खुला टकराव कम दिखाई देता था, लेकिन इस बार हालात बदले हुए नजर आ रहे हैं। लंबे समय बाद भी भोपाल और इंदौर जैसे बड़े विकास प्राधिकरणों के लिए नाम तय न होना इसी ओर इशारा कर रहा है। इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने भी भाजपा पर तंज कसा है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि भाजपा में अब “एक अनार सौ बीमार” जैसे हालात बन गए हैं और पदों के लिए अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आ रही है। हालांकि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने दावा किया है कि भोपाल और इंदौर विकास प्राधिकरण के अध्यक्षों के नाम जल्द घोषित कर दिए जाएंगे। लेकिन फिलहाल पार्टी के भीतर चल रही खींचतान और दिग्गजों के बीच शक्ति संतुलन की राजनीति अलग ही कहानी बयां कर रही है।

Thursday, May 7, 2026

एक्शन मोड में सीएम डॉ. मोहन यादव, एमपी के अफसरों की लेंगे क्लास

 


भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार अब प्रशासनिक कामकाज को लेकर बड़े स्तर पर समीक्षा की तैयारी में जुट गई है। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव 15 मई के बाद विभागवार हाई लेवल समीक्षा बैठकें करेंगे। पहले यह बैठक 6 मई के आसपास प्रस्तावित थी, लेकिन अब इसे आगे बढ़ाकर 15 मई के बाद आयोजित करने की तैयारी की गई है। सूत्रों के मुताबिक यह सिर्फ सामान्य समीक्षा बैठक नहीं होगी, बल्कि जनता से जुड़े 45 बड़े मुद्दों, लंबित योजनाओं और नीतिगत फैसलों को लेकर विस्तृत कार्ययोजना बनाई जाएगी। मुख्यमंत्री चुनिंदा विभागों के साथ अलग-अलग बैठक कर अगले एक साल के लक्ष्य तय करेंगे और काम की समय सीमा भी निर्धारित की जाएगी। सरकार का फोकस सिर्फ योजनाओं की प्रगति पर नहीं, बल्कि नीतियों में बदलाव, प्रशासनिक सुधार और दूरगामी फैसलों पर रहेगा। बताया जा रहा है कि किन विभागों के साथ किन विषयों पर चर्चा होगी, इसके लिए अलग से विस्तृत शेड्यूल तैयार किया गया है। बैठकों में आम जनता से जुड़े मुद्दों—जैसे बिजली, पानी, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, निवेश, कृषि और शहरी विकास—को प्राथमिकता दी जाएगी। मुख्यमंत्री विभागों से ग्राउंड रिपोर्ट भी मांग सकते हैं, ताकि योजनाओं के असर और कमियों की समीक्षा की जा सके। सरकारी सूत्रों का कहना है कि मोहन सरकार अगले एक साल के लिए प्रशासनिक रोडमैप तैयार करने की दिशा में काम कर रही है और यही वजह है कि इस समीक्षा प्रक्रिया को बेहद अहम माना जा रहा है।





रामनिवास रावत पर भरोसा, सिंधिया खेमे को बड़ा सियासी संदेश


भोपाल। मध्यप्रदेश की राजनीति में इन दिनों रामनिवास रावत सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। कांग्रेस छोड़ भाजपा में आए पूर्व मंत्री रामनिवास रावत को वन विकास निगम का अध्यक्ष बनाए जाने के बाद सियासी हलकों में नए समीकरणों की चर्चा तेज हो गई है। खास बात यह है कि रावत को यह जिम्मेदारी ऐसे समय मिली है, जब पार्टी के भीतर इसे लेकर विरोध की बातें भी सामने आती रही हैं।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया खेमे की नाराजगी के बावजूद संगठन और सरकार ने रामनिवास रावत पर भरोसा जताया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव लगातार अलग-अलग मंचों से उनकी तारीफ करते नजर आ रहे हैं। इतना ही नहीं, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने भी खुलकर उनका समर्थन किया।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा संगठन ने रामनिवास रावत को आगे कर एक स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की है कि पार्टी में शामिल होने वाले नेताओं को सिर्फ जगह ही नहीं, बल्कि राजनीतिक महत्व भी दिया जाएगा। यही वजह है कि मुख्यमंत्री के भाषणों में भी रावत का जिक्र प्रमुखता से देखने को मिल रहा है।

उधर ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में सांसद भरत सिंह यादव और रामनिवास रावत की बढ़ती नजदीकियां भी चर्चा में हैं। दोनों नेताओं की जोड़ी को क्षेत्रीय राजनीति में नए समीकरण के तौर पर देखा जा रहा है।

इसी बीच निगम-मंडलों की नियुक्तियों में सिंधिया समर्थकों को अपेक्षित जगह न मिलने की चर्चा भी राजनीतिक गलियारों में गर्म है। कई नेता अब तक शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात तक नहीं कर पाए हैं, जबकि रामनिवास रावत जैसे नेताओं को लगातार राजनीतिक महत्व मिलता दिख रहा है।

कुल मिलाकर, मध्यप्रदेश में चल रही निगम-मंडल नियुक्तियों के बीच रामनिवास रावत का उभरता कद भाजपा की अंदरूनी राजनीति और बदलते शक्ति संतुलन की नई कहानी लिखता नजर आ रहा है।