Friday, April 10, 2026

एमपी में बैगा महोत्सव की तैयारी तेज, सीएम ने दिए अहम निर्देश



भोपाल। मध्यप्रदेश में जनजातीय संस्कृति और परंपराओं को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार एक बार फिर बड़े आयोजन की तैयारी में है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल स्थित समत्व भवन में आयोजित बैठक में आगामी बैगा महोत्सव और जनजातीय सांस्कृतिक कार्यक्रमों को लेकर विस्तृत समीक्षा की। बैठक में जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह और मुख्य सचिव अनुराग जैन सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि बालाघाट में प्रस्तावित इस महोत्सव को भव्य और व्यवस्थित तरीके से आयोजित किया जाए, ताकि प्रदेश की समृद्ध जनजातीय विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल सके।

जनजातीय संस्कृति को मिलेगा मंच

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस तरह के आयोजन न सिर्फ परंपराओं को सहेजने का माध्यम हैं, बल्कि जनजातीय समाज को मुख्यधारा से जोड़ने का भी महत्वपूर्ण जरिया हैं। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि कार्यक्रम में स्थानीय कलाकारों, लोक नृत्य, पारंपरिक संगीत और हस्तशिल्प को प्रमुखता दी जाए।

बालाघाट बनेगा आयोजन का केंद्र

आगामी महीनों में बालाघाट में होने वाला यह महोत्सव प्रदेश के प्रमुख जनजातीय आयोजनों में शामिल होगा। इसमें विशेष रूप से बैगा जनजाति की परंपराओं, जीवनशैली और सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित किया जाएगा।

पर्यटन और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

सरकार का मानना है कि इस आयोजन से न सिर्फ जनजातीय कला और संस्कृति को पहचान मिलेगी, बल्कि पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे और हस्तशिल्प को नया बाजार मिलेगा।

तैयारियों पर विशेष जोर

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आयोजन स्थल, व्यवस्थाओं और सुरक्षा के सभी पहलुओं पर समय रहते तैयारी सुनिश्चित की जाए, ताकि कार्यक्रम सफल और आकर्षक बन सके।

भोपाल में तालाब किनारे अवैध निर्माण पर सख्ती


भोपाल। राजधानी भोपाल में अतिक्रमण के खिलाफ प्रशासन का अभियान तेज हो गया है। नगर निगम, राजस्व, पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीम ने बड़ा तालाब के कैचमेंट एरिया में बने अवैध निर्माणों पर कार्रवाई करते हुए बुलडोजर चलाया। कार्रवाई के दौरान करीब 8 हजार वर्गफीट में बने एक अवैध फार्महाउस को ध्वस्त किया गया। प्रशासन ने कुल 4 स्थानों को चिन्हित कर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की है।

कैचमेंट एरिया में बड़े पैमाने पर अतिक्रमण

तहसीलदार हर्ष विक्रम सिंह के मुताबिक, भोज वेटलैंड एक रामसर साइट है, जिसके लिए एफटीएल (फुल टैंक लेवल) निर्धारित किया गया है। इसी आधार पर 50 मीटर के दायरे को चिन्हित कर कार्रवाई की जा रही है। जांच में अब तक 63 अवैध निर्माण पाए गए हैं, जिनमें 44 निजी भूमि पर 19 शासकीय भूमि पर निर्माण शामिल हैं। इसके अलावा 121 झुग्गियां भी अवैध रूप से बनी पाई गईं।

तय शेड्यूल के तहत कार्रवाई

प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने के लिए चरणबद्ध योजना बनाई है। 10-11 अप्रैल को अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई। 15-16 अप्रैल को शासकीय भूमि पर कार्रवाई प्रस्तावित। आज की कार्रवाई में करीब 3 अतिक्रमण हटाए गए, जिनमें प्रमुख रूप से फार्महाउस शामिल है।

शहरभर में चलेगा अभियान

अतिक्रमण प्रभारी महेश गौड़ ने बताया कि कैचमेंट एरिया में अवैध निर्माण किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। लालघाटी क्षेत्र में ही आज 10 स्थानों पर कार्रवाई की गई है और आने वाले दिनों में शहर के अन्य हिस्सों में भी अभियान जारी रहेगा।



Thursday, April 9, 2026

प्रशासनिक सर्जरी: 14 जिलों में नए कलेक्टर, 26 IAS अधिकारियों का तबादला

 


भोपाल। मध्य प्रदेश में बड़े स्तर पर प्रशासनिक फेरबदल करते हुए सामान्य प्रशासन विभाग ने 26 आईएएस अधिकारियों के तबादले किए हैं। इस बदलाव में 14 जिलों के कलेक्टर बदले गए हैं, जिससे प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।

प्रमुख नियुक्तियां और तबादले

प्रियंक मिश्रा – कलेक्टर, भोपाल

कौशलेन्द्र विक्रम सिंह – सचिव, मुख्यमंत्री

प्रतिभा पाल – कलेक्टर, सागर

संदीप जी.आर. – श्रम आयुक्त, इंदौर

नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी – कलेक्टर, रीवा

राजीव रंजन मीना – कलेक्टर, धार

सोमेश मिश्रा – कलेक्टर, नर्मदापुरम

अर्पित वर्मा – कलेक्टर, शिवपुरी

डॉ. सौरभ संजय सोनवणे – कलेक्टर, बैतूल

डॉ. योगेश तुकाराम भरसट – कलेक्टर, झाबुआ

नेहा मीना – कलेक्टर, सिवनी

प्रताप नारायण यादव – कलेक्टर, दमोह

राहुल नामदेव धोटे – कलेक्टर, मंडला

शीला दाहिमा – कलेक्टर, श्योपुर

बिदिशा मुखर्जी – कलेक्टर, मैहर

राखी सहाय – कलेक्टर, उमरिया

अन्य महत्वपूर्ण पदस्थापनाएं

अभिषेक सिंह – आयुक्त, लोक शिक्षण

शिल्पा गुप्ता – सचिव, गृह विभाग

श्रीकांत बनोठ – कमिश्नर, नर्मदापुरम संभाग

कृष्ण गोपाल तिवारी – आयुक्त, सामाजिक न्याय

रवीन्द्र कुमार चौधरी – अपर सचिव

सोनिया मीना – अपर सचिव


सरकार के इस बड़े फेरबदल को प्रशासनिक कसावट, बेहतर मॉनिटरिंग और जमीनी स्तर पर कामकाज को तेज करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।






पुलिस कॉन्स्टेबल भर्ती का फाइनल रिजल्ट जारी, यहां देखें अपना रिजल्ट


 


भोपाल। मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन बोर्ड (MPESB) ने पुलिस कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा 2025 का फाइनल रिजल्ट जारी कर दिया है। अभ्यर्थी आधिकारिक वेबसाइट esb.mp.gov.in पर जाकर अपना रिजल्ट और स्कोरकार्ड देख सकते हैं। इस भर्ती परीक्षा में सुनील मीना ने टॉप किया है। वहीं टॉप-5 में अंकित रघुवंशी, दीपक जाट, आदर्श सेन और सूरज मसीह ने भी जगह बनाई है। बोर्ड ने मेरिट सूची और उम्मीदवारों के स्कोरकार्ड वेबसाइट पर अपलोड कर दिए हैं। यह परीक्षा अक्टूबर से दिसंबर 2025 के बीच आयोजित की गई थी।

इतने पदों पर भर्ती

इस भर्ती प्रक्रिया के तहत कुल 7500 पदों पर नियुक्तियां की जानी थीं। परीक्षा में 9 लाख 78 हजार 59 अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया, जिनमें से योग्य उम्मीदवारों का चयन किया गया है।

आरक्षण के चलते कुछ पद होल्ड

बोर्ड ने फिलहाल 6525 पदों पर अंतिम परिणाम घोषित किया है, जबकि OBC आरक्षण से जुड़े मामले के चलते करीब 13% पदों को होल्ड पर रखा गया है।

रिजल्ट 87:13 फॉर्मूले के आधार पर जारी किया गया है।

 ऐसे देखें रिजल्ट

उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट esb.mp.gov.in पर जाकर अपना आवेदन नंबर और अन्य डिटेल्स दर्ज कर रिजल्ट चेक कर सकते हैं। यहां देखें अपना result






MSP पर खरीदी शुरू, पहले दिन नहीं पहुंचे किसान


भोपाल। मध्य प्रदेश में आज से समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं खरीदी की प्रक्रिया शुरू हो गई है। पहले चरण में इंदौर, उज्जैन, भोपाल और नर्मदापुरम संभागों में खरीदी की शुरुआत की गई है, जबकि बाकी संभागों में कल से प्रक्रिया शुरू होगी। सरकार ने इस बार किसानों को बड़ा फायदा देने के लिए गेहूं का समर्थन मूल्य 2625 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, साथ ही 40 रुपये प्रति क्विंटल प्रोत्साहन राशि अलग से देने का निर्णय लिया है। यह प्रोत्साहन राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाएगी। प्रदेशभर में इस बार 3627 उपार्जन केंद्र बनाए गए हैं और सरकार ने 78 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य रखा है, जो पिछले साल की तुलना में अधिक है। खरीदी के लिए अब तक 19 लाख 4 हजार 651 किसानों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। सरकार ने खरीदी केंद्रों पर किसानों के लिए पेयजल, छाया और बैठने की व्यवस्था करने के भी निर्देश दिए हैं। साथ ही भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा कई स्थानों पर किसानों का सम्मान कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। लेकिन खरीदी के पहले ही दिन व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। भोपाल समेत कई केंद्रों पर किसान नहीं पहुंचे। बताया जा रहा है कि स्लॉट बुकिंग सिस्टम में तकनीकी दिक्कतों के कारण किसान अपनी बारी तय नहीं कर पा रहे हैं, जिससे वे केंद्रों तक नहीं पहुंच सके। किसानों का कहना है कि स्लॉट बुकिंग सही तरीके से काम नहीं कर रही है, जिसके चलते उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, प्रशासन का दावा है कि तकनीकी समस्याओं को जल्द ठीक कर लिया जाएगा और खरीदी प्रक्रिया सुचारू रूप से जारी रहेगी। अब देखना होगा कि सरकार इस शुरुआती अव्यवस्था को कितनी जल्दी सुधार पाती है, ताकि किसानों को किसी तरह की परेशानी न हो और खरीदी लक्ष्य समय पर पूरा किया जा सके।


छतरपुर से जीतू पटवारी का सरकार पर हमला

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने छतरपुर दौरे के दौरान सरकार पर किसानों को लेकर बड़ा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने गेहूं खरीदी की तारीख घोषित कर किसानों के साथ धोखा किया है। पटवारी ने कहा कि खरीदी 10 तारीख से शुरू करने की घोषणा के बावजूद उससे पहले ही लाखों क्विंटल गेहूं किसान औने-पौने दामों में बेचने को मजबूर हो गए। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या किसानों को 3100 रुपये प्रति क्विंटल धान का भाव मिल रहा है? क्या गेहूं 2700 रुपये में खरीदा जा रहा है? और क्या सोयाबीन का 6000 रुपये भाव किसानों को मिल रहा है? पटवारी ने सरकार पर आरोप लगाया कि घोषणाएं अलग हैं और जमीनी हकीकत अलग, जिससे किसान लगातार नुकसान झेल रहे हैं।



Wednesday, April 8, 2026

शिक्षकों का सरकार पर दबाव, TET अनिवार्यता हटाने की मांग


भोपाल। मध्यप्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। प्रदेश के करीब डेढ़ लाख शिक्षकों को प्रभावित करने वाला यह मामला अब तूल पकड़ता दिख रहा है। अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा ने इस मुद्दे पर सरकार और शिक्षा विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मोर्चे ने मुख्यमंत्री और लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) को ज्ञापन सौंपकर नॉन-TET पास शिक्षकों को अनिवार्यता से छूट देने की मांग की है। उनका कहना है कि हाल ही में जारी किए गए आदेश न केवल व्यवहारिक रूप से गलत हैं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के भी विपरीत हैं। शिक्षक संगठनों का आरोप है कि 2 मार्च 2026 को DPI और 26 मार्च 2026 को जनजातीय कार्य विभाग द्वारा जारी आदेशों ने शिक्षकों में असमंजस और तनाव की स्थिति पैदा कर दी है। लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों के सामने अब अपनी नौकरी को लेकर चिंता बढ़ गई है। मोर्चे ने सेवा अवधि की गणना का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया है। उनका कहना है कि शिक्षकों की सेवा की गणना उनकी पहली नियुक्ति तिथि से की जानी चाहिए। इससे उन्हें पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य सेवा लाभ मिल सकेंगे, साथ ही पदोन्नति और क्रमोन्नति में भी उनका हक तय होगा। संगठन ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द ही इन आदेशों को वापस नहीं लिया और राहत नहीं दी, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। फिलहाल सरकार की ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन जिस तरह से यह मुद्दा उठ रहा है, उससे साफ है कि आने वाले दिनों में यह बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक विषय बन सकता है।