Friday, July 3, 2026

हेमंत खंडेलवाल के एक साल का कार्यकाल कितनी मिसाल,कितने सवाल !

मध्य प्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने प्रदेश अध्यक्ष के रूप में अपना एक साल पूरा कर लिया है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर उनका यह एक साल का कार्यकाल कैसा रहा? क्या वे संगठन को नई दिशा देने में सफल रहे या फिर उनके सामने अभी भी कई चुनौतियां मौजूद हैं?
जब हेमंत खंडेलवाल को प्रदेश भाजपा की कमान सौंपी गई थी, तब पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने की थी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सरकार काम कर रही थी, वहीं संगठन को भी नई ऊर्जा देने की जरूरत महसूस की जा रही थी।
अपने एक साल के कार्यकाल में हेमंत खंडेलवाल ने संगठनात्मक गतिविधियों पर विशेष जोर दिया। बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं से संवाद, विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन और संगठन के विस्तार पर उनका फोकस दिखाई दिया। पार्टी के भीतर कार्यकर्ताओं के बीच सक्रियता बढ़ाने के प्रयास भी किए गए।


हेमंत खंडेलवाल ने भाजपा कार्यालय में सरकार के मंत्रियों के बैठने की व्यवस्था शुरू की 

हेमंत खंडेलवाल की कार्यकाल में ही क्षेत्रीय स्तर के राजनीतिक विवाद उलझे 

सागर ,रीवा ,ग्वालियर, चंबल गुना में नेताओं में आपस में समन्वय बड़ा 

हेमंत ने आते ही सबसे ज्यादा जोर अनुशासन पर दिया 

हेमंत खंडेलवाल ने कार्यकर्ताओं को पोस्टर राजनीति से दूर रहने की सलाह दी गई 

खंडेलवाल ने प्रदेश अध्यक्ष होने के साथ-साथ अपने क्षेत्र बैतूल पर भी पूरा फोकस किया 
राजनीतिक दृष्टि से देखें तो भाजपा ने इस दौरान अपने जनाधार को बनाए रखने और संगठन को मजबूत रखने की दिशा में काम किया। प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर खंडेलवाल लगातार जिलों के दौरे करते रहे और स्थानीय इकाइयों के साथ संवाद स्थापित करने की कोशिश की। इसका फायदा संगठनात्मक मजबूती के रूप में देखने को मिला।
हालांकि विपक्ष का आरोप रहा कि भाजपा सरकार और संगठन जनता के मुद्दों पर अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सके। कांग्रेस ने बेरोजगारी, महंगाई, किसानों और स्थानीय समस्याओं को लेकर सरकार और संगठन दोनों को घेरने की कोशिश की। ऐसे में प्रदेश अध्यक्ष के रूप में खंडेलवाल को राजनीतिक जवाबदेही और संगठनात्मक संतुलन दोनों संभालने पड़े।

हेमंत खंडेलवाल का पहला साल विवादों से अपेक्षाकृत दूर और संगठन केंद्रित रहा। उन्होंने आक्रामक बयानबाजी की बजाय संगठनात्मक मजबूती पर ज्यादा ध्यान दिया। यही वजह है कि भाजपा के भीतर उन्हें एक समन्वयकारी नेता के रूप में देखा जाने लगा है।लेकिन चुनौतियां अभी भी कम नहीं हैं। आगामी चुनावों की तैयारियां, कार्यकर्ताओं की अपेक्षाएं, सरकार के प्रदर्शन को जनता तक पहुंचाना और विपक्ष के आरोपों का जवाब देना आने वाले समय में उनकी सबसे बड़ी परीक्षा होगी।

Saturday, June 6, 2026

**दिग्गजों को पछाड़कर रजनीश अग्रवाल बने राज्यसभा उम्मीदवार-इनसाइड स्टोरी

मध्य प्रदेश की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने मध्य प्रदेश से रजनीश अग्रवाल को राज्यसभा उम्मीदवार घोषित किया है। उनकी उम्मीदवारी इसलिए चर्चा में है क्योंकि पार्टी में कई बड़े और चर्चित नेताओं के नाम चल रहे थे, लेकिन संगठन में लंबे समय से काम कर रहे रजनीश अग्रवाल पर नेतृत्व ने भरोसा जताया। एमपी बीजेपी के कई दिग्गज राज्यसभा की दौड़ में थे,, इनमे कैलाश विजयवर्गीय ,नरोत्तम मिश्रा और अरविंद भदौरिया जैसे नाम शामिल थे,, बीजेपी इस बार सामान्य चेहरे को मौका देना चाहती थी,, हेमन्त खंडेलवाल ने इन नामो के साथ ही रजनीश अग्रवाल का नाम भी आगे बढ़ाया,, दिल्ली ने कैलाश विजयवर्गीय के नाम को साफ नकार दिया,, नरोत्तम दतिया से उपचुनाव लड़ना चाहते है ,, भदौरिया को लेकर अमित शाह राजी नही थे ,, ऐसे में चौथे नाम रजनीश अग्रवाल पर सहमति बनी ... रजनीश अग्रवाल सागर जिले के मंडी बामोरा क्षेत्र से आते हैं और भाजपा संगठन में बूथ प्रबंधन व चुनावी रणनीति के विशेषज्ञ माने जाते हैं। वे वर्तमान में मध्य प्रदेश भाजपा में प्रदेश मंत्री की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। पार्टी के भीतर उनकी पहचान एक ऐसे संगठनकर्ता की है जो वर्षों से पर्दे के पीछे रहकर चुनावी मशीनरी को मजबूत करते रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, उनकी उम्मीदवारी का एक बड़ा संदेश यह भी है कि भाजपा ने चुनावी राजनीति के बड़े चेहरों के बजाय संगठन में लगातार काम करने वाले कार्यकर्ता को प्राथमिकता दी है। साथ ही, बुंदेलखंड क्षेत्र को प्रतिनिधित्व देने की दृष्टि से भी यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वे भाजपा की ओर से बुंदेलखंड से राज्यसभा पहुंचने वाले पहले नेता बन सकते हैं। भाजपा ने मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए तरुण चुग और रजनीश अग्रवाल को उम्मीदवार बनाया है। जिन सीटों पर चुनाव हो रहा है, उनमें वर्तमान राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह की सीट भी शामिल है **मुख्य बिंदु:** * भाजपा ने रजनीश अग्रवाल को राज्यसभा उम्मीदवार घोषित किया। * संगठन और बूथ प्रबंधन के विशेषज्ञ माने जाते हैं। * कई चर्चित दिग्गज नेताओं के बीच उन्हें टिकट मिला। * बुंदेलखंड को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने का बड़ा संदेश। * सागर जिले से राज्यसभा पहुंचने वाले पहले नेता बनने की संभावना।

Sunday, May 31, 2026

राज्यसभा रेस में पचौरी की एंट्री?


भोपाल। मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल लगातार बढ़ती जा रही है। सूत्रों के मुताबिक बीजेपी तीसरे उम्मीदवार के तौर पर पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे सुरेश पचौरी के नाम पर गंभीरता से विचार कर रही है। माना जा रहा है कि पचौरी को मैदान में उतारकर बीजेपी कांग्रेस के परंपरागत वोट बैंक और पुराने कांग्रेस नेटवर्क में भी संदेश देना चाहती है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यदि सुरेश पचौरी उम्मीदवार बनते हैं तो कांग्रेस के कई पुराने नेता और उनके समर्थक खुलकर बीजेपी के पक्ष में सक्रिय हो सकते हैं। खासकर उन क्षेत्रों में जहां पचौरी का वर्षों तक प्रभाव रहा है, वहां इसका राजनीतिक असर देखने को मिल सकता है। हालांकि बीजेपी की रणनीति पूरी तरह कांग्रेस के उम्मीदवार पर भी निर्भर मानी जा रही है। सूत्रों की मानें तो यदि कांग्रेस कमलनाथ परिवार से किसी सदस्य को राज्यसभा चुनाव में उतारती है, तो बीजेपी तीसरा उम्मीदवार उतारने के फैसले पर पुनर्विचार कर सकती है। पार्टी फिलहाल कांग्रेस की चाल का इंतजार कर रही है। बीजेपी अगर सुरेश पचौरी को मैदान में उतारती है तो यह सिर्फ एक चुनावी फैसला नहीं होगा, बल्कि कांग्रेस को उसके ही पुराने गढ़ में चुनौती देने की रणनीति भी होगी। दूसरी ओर कांग्रेस के सामने भी चुनौती होगी कि वह राज्यसभा चुनाव को सिर्फ संख्या बल का नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश का चुनाव बनाए। मध्य प्रदेश की राजनीति में कभी कांग्रेस के लिए वोट मांगने वाले सुरेश पचौरी अब बीजेपी के लिए राज्यसभा की लड़ाई लड़ें, इससे बड़ा सियासी प्रतीक शायद ही कोई हो। राजनीति में न स्थायी दोस्त होते हैं और न स्थायी दुश्मन, लेकिन राज्यसभा चुनाव ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि दल बदलने के बाद भी नेताओं की राजनीतिक उपयोगिता खत्म नहीं होती, बल्कि कई बार और बढ़ जाती है। फिलहाल राज्यसभा चुनाव को लेकर तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है, लेकिन इतना तय है कि बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही उम्मीदवारों के जरिए बड़ा राजनीतिक संदेश देने की तैयारी में हैं। अब सबकी नजर कांग्रेस की अगली चाल और बीजेपी के अंतिम फैसले पर टिकी हुई है।

दिल्ली का टिकट नहीं, एमपी की कमान! राज्यसभा रेस से दूर रहेंगे जीतू पटवारी?


भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर हलचल तेज है। इस बीच कांग्रेस खेमे से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। सूत्रों के मुताबिक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी राज्यसभा चुनाव में पार्टी के उम्मीदवार नहीं होंगे। बताया जा रहा है कि पटवारी ने खुद पार्टी हाईकमान के सामने चुनाव लड़ने को लेकर ज्यादा उत्साह नहीं दिखाया और संगठन में अपनी भूमिका को प्राथमिकता देने की बात कही है। हालांकि कांग्रेस की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन दिल्ली से भोपाल तक सियासी गलियारों में इस चर्चा ने जोर पकड़ लिया है। क्योंकि पिछले कुछ दिनों से जीतू पटवारी का नाम संभावित उम्मीदवारों में सबसे आगे माना जा रहा था। राजनीतिक जानकारों की मानें तो कांग्रेस फिलहाल मध्य प्रदेश में संगठन को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। ऐसे में पार्टी शायद जीतू पटवारी को प्रदेश की राजनीति में ही सक्रिय रखना चाहती है। आगामी नगरीय निकाय और पंचायत चुनावों के साथ-साथ 2028 विधानसभा चुनाव की तैयारियों को देखते हुए कांग्रेस किसी बड़े संगठनात्मक बदलाव के मूड में नहीं दिख रही। पटवारी के नाम के पीछे हटने की खबरों के बाद अब कांग्रेस के भीतर नए नामों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। पार्टी ऐसे चेहरे की तलाश में है जो संगठन, क्षेत्रीय संतुलन और जातीय समीकरण तीनों पर फिट बैठे। यही वजह है कि दिल्ली दरबार में कई दावेदारों की सक्रियता भी बढ़ गई है। कांग्रेस में राज्यसभा की सीट हमेशा सम्मान से ज्यादा संदेश की राजनीति मानी जाती है। इस बार भी तस्वीर कुछ ऐसी ही दिखाई दे रही है। भोपाल में नेता समर्थकों को आश्वस्त कर रहे हैं, तो दिल्ली में समर्थक अपने नेताओं को। राज्यसभा की एक सीट ने कांग्रेस के कई नेताओं की धड़कनें बढ़ा दी हैं। लेकिन फिलहाल ऐसा लग रहा है कि जीतू पटवारी ने इस दौड़ में शामिल होने से पहले ही अपने कदम पीछे खींच लिए हैं। अब सवाल यह है कि यह त्याग है, रणनीति है या फिर पार्टी का कोई बड़ा सियासी गणित? फिलहाल कांग्रेस ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं, लेकिन इतना तय है कि जीतू पटवारी के नाम को लेकर बनी चर्चा अब नई दिशा में मुड़ती नजर आ रही है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि कांग्रेस राज्यसभा के लिए किस चेहरे पर दांव लगाती है और उसके पीछे का राजनीतिक संदेश क्या होगा।

Saturday, May 30, 2026

सिंधिया समर्थक मंत्रियों पर भड़के पन्नालाल शाक्य

विधायक पन्नालाल शाक्य ने अपनी ही सरकार के 2 मंत्रियों पर तीखी टिप्पणी की है। शहर में खराब बिजली व्यवस्था की शिकायत लेकर वे बिजली कंपनी के दफ्तर पहुंचे थे। वहां उन्होंने ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर और जिले के प्रभारी मंत्री गोविंद सिंह राजपूत की कार्यशैली पर सवाल उठाए। शाक्य ने ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर पर निशाना साधते हुए कहा कि वे दिखावे की राजनीति करते हैं। उन्होंने कहा कि पहले तो इस क्षेत्र को बदनामी से बचाओ। वो ऊर्जा मंत्री तो भगवान का बंदा है। मंत्री कभी बिजली के पोल पर चढ़ जाते हैं, तो कभी नाली में उतर जाते हैं, लेकिन जनता को दिखावा नहीं बल्कि काम करने वाला जनसेवक चाहिए।उन्होंने कहा कि वे भोपाल जाकर मुख्यमंत्री से ऐसे 'नाकारा' मंत्री को हटाने का अनुरोध करेंगे, जो सरकार की छवि खराब कर रहे हैं। पन्नालाल शाक्य ने जिले के प्रभारी मंत्री गोविंद सिंह राजपूत पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि प्रभारी मंत्री खुद को 'महाराजा' ज्योतिरादित्य सिंधिया से भी बड़ा समझते हैं। शाक्य ने एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि हवाई पट्टी पर प्रभारी मंत्री ने उन्हें "चलो हटो" कहकर किनारे कर दिया था। इन दिनों के राजनीतिक घटनाक्रम साफ तौर पर बता रहे हैं कि पुराने भाजपाइयों के निशाने पर अब सिंधिया समर्थक आ गए हैं और यही कारण है कि कांग्रेस अब इस पर बार-बार चुटकी ले रही है गुना विधायक पन्नालाल शाक्य अपनी बेबाकी के लिए जाने जाते रहे है,लेकिन पिछले कुछ दिनों से ऐसा माना जा रहा था कि वह ज्योतिरादित्य सिंधिया के संदर्भ में अपना रवैया बदल रहे हैं लेकिन शनिवार के घटनाक्रम ने एक बार फिर असल तस्वीर सामने ला दी है

Friday, May 29, 2026

किसानों की मेहनत रंग लाई, गेहूं उपार्जन में MP अव्वल

भोपाल। मध्यप्रदेश ने इस साल गेहूं उपार्जन में नया रिकॉर्ड बनाते हुए देशभर में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। प्रदेश में समर्थन मूल्य पर बड़े पैमाने पर गेहूं खरीदी होने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों को बधाई दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों की मेहनत और सरकार की योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के कारण मध्यप्रदेश लगातार कृषि क्षेत्र में नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार लगातार किसान हित में फैसले ले रही है। सरकार का फोकस सिर्फ समर्थन मूल्य पर खरीदी तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों को समय पर भुगतान, बेहतर व्यवस्थाएं और कृषि को लाभ का धंधा बनाने पर भी काम किया जा रहा है। प्रदेश में इस बार गेहूं खरीदी ने नया रिकॉर्ड बनाया है। सरकार के मुताबिक लाखों किसानों से समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदा गया है और भुगतान की प्रक्रिया भी तेजी से पूरी की जा रही है। गेहूं उपार्जन केंद्रों पर किसानों के लिए पेयजल, छाया, हेल्प डेस्क और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश पहले ही दिए गए थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश अब देश के प्रमुख कृषि राज्यों में अपनी अलग पहचान बना चुका है। सरकार लगातार सिंचाई, भंडारण, आधुनिक तकनीक और समर्थन मूल्य व्यवस्था को मजबूत करने पर काम कर रही है, ताकि किसानों को उनकी उपज का बेहतर दाम मिल सके। सरकार ने इस बार छोटे और सीमांत किसानों को प्राथमिकता देते हुए खरीदी व्यवस्था को आसान बनाने पर विशेष जोर दिया। प्रदेशभर में हजारों उपार्जन केंद्र बनाए गए और स्लॉट बुकिंग से लेकर भुगतान तक की प्रक्रिया को डिजिटल माध्यम से जोड़ा गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और उनकी समृद्धि ही राज्य के विकास की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भी किसान कल्याण और कृषि विकास से जुड़े फैसले लगातार लिए जाते रहेंगे।