Sunday, April 26, 2026

भोपाल में ‘मन की बात’ सुनने पहुंचे सीएम, महिला आरक्षण-किसानों पर दिए संकेत


भोपाल। राजधानी भोपाल में रविवार को प्रधानमंत्री Narendra Modi के ‘मन की बात’ कार्यक्रम को लेकर विशेष आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री Mohan Yadav वीआईपी रोड स्थित चाय लीला पहुंचे, जहां उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं और आम लोगों के साथ बैठकर कार्यक्रम सुना। कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि “कई कारणों से ‘मन की बात’ सुनना चाहिए, क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी ने देश के हर वर्ग की बात को लोगों के दिल तक पहुंचाया है।” उन्होंने कहा कि आम जनता के बीच बैठकर कार्यक्रम सुनना उनके लिए सुखद अनुभव रहा।

जल गंगा संवर्धन अभियान पर जोर

सीएम ने बताया कि मध्यप्रदेश में “जल गंगा संवर्धन अभियान” लगातार चल रहा है। इसके तहत नदियों, तालाबों, नहरों, कुओं, वन क्षेत्रों और ग्रामीण इलाकों में व्यापक काम किया जा रहा है। यह अभियान 30 जून तक जारी रहेगा। उन्होंने दावा किया कि इस अभियान में प्रदेश देशभर में बेहतर स्थिति में है।

महिला आरक्षण और विधानसभा सत्र

विधानसभा के प्रस्तावित विशेष सत्र को लेकर मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद से कांग्रेस ने महिलाओं के साथ न्याय नहीं किया। प्रधानमंत्री मोदी महिलाओं को आरक्षण दिलाना चाहते हैं, लेकिन विपक्ष के कारण इसमें देरी हुई। उन्होंने कहा कि जनता और विधानसभा तक यह संदेश पहुंचाने के लिए विशेष सत्र बुलाया गया है और आने वाले समय में महिलाओं को आरक्षण जरूर मिलेगा।

किसानों के मुद्दे पर भी बयान

सीएम मोहन यादव ने किसानों के मुद्दे पर भी सरकार की प्राथमिकता दोहराई। उन्होंने कहा कि हाल ही में अधिकारियों के साथ बैठक कर सभी कलेक्टरों को जरूरी निर्देश दिए गए हैं। किसान बड़ी संख्या में खरीदी केंद्रों पर पहुंच रहे हैं और सरकार सिंचाई, बिजली और अन्य सुविधाओं पर लगातार काम कर रही है। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि “55 साल तक किसानों के साथ अन्याय हुआ। कांग्रेस के समय में गेहूं के दाम 2000 रुपए से कम होते थे, ना पर्याप्त बिजली मिलती थी और ना पानी।” 

कुल मिलाकर ‘मन की बात’ कार्यक्रम के बहाने सियासी संदेश भी साफ नजर आया, जहां मुख्यमंत्री ने केंद्र की योजनाओं को आगे बढ़ाते हुए विपक्ष पर तीखा हमला बोला।




Saturday, April 25, 2026

विकास प्राधिकरणों के लिए नाम तय,, स्थानीय मंत्रियों के समर्थकों को मौका!

मप्र में प्राधिकरणों के अध्यक्ष के नामों पर जल्द मुहर लग सकती है,, बड़े मंत्री अपने-अपने करीबियों को जगह दिलवाने में कामयाब नजर आ रहे है,, इंदौर और उज्जैन में सीएम मोहन यादव के समर्थकों को जगह मिल रही है... इन नाम की जोरदार चर्चा,,,,,,,,,, ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, *देवास विकास प्राधिकरण- बहादुर सिंह मुकाती* *जबलपुर विकास प्राधिकरण- संदीप जैन* (कैबिनेट मंत्री राकेश सिंह के सबसे खास और पुराने समर्थक) मंत्री के इशारों पर करते हैं सभी काम* *ग्वालियर विकास प्राधिकरण- मधुसूदन भदौरिया* *उज्जैन विकास प्राधिकरण- रवि सोलंकी* *रतलाम विकास प्राधिकरण- मनोज पोरवाल* *कटनी विकास प्राधिकरण- शशांक श्रीवास्तव* *ओरछा विकास प्राधिकरण- अखिलेश अयाची* *विंध्य विकास प्राधिकरण- पंचूलाल प्रजापति* *भोपाल विकास प्राधिकरण- चेतन सिंह* *इंदौर विकास प्राधिकरण- बहुत ही चौकाने वाला नाम* *इन सभी प्राधिकरणों में अध्यक्षों के साथ एक या दो उपाध्यक्ष की नियुक्ति होने की संभावना है*

Friday, April 24, 2026

निगम मंडल में नियुक्तियों का सिलसिला जारी, सिंधिया समर्थकों को बड़ा झटका

 



भोपाल। मध्यप्रदेश में लंबे इंतजार के बाद अब निगम-मंडलों और प्राधिकरणों में नियुक्तियों का दौर रफ्तार पकड़ चुका है। सरकार लगातार अहम पदों पर नियुक्तियां कर संगठनात्मक और प्रशासनिक संतुलन साधने में जुटी है। इसी कड़ी में केशव सिंह बघेल को कुक्कुट एवं पशुधन विकास निगम का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। इसे ग्रामीण और पशुपालन से जुड़े क्षेत्र में सरकार के फोकस के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं, ग्वालियर में भी बड़ी नियुक्ति करते हुए ग्वालियर व्यापार मेला प्राधिकरण में नई टीम की घोषणा की गई है। आदेश के मुताबिक अशोक जादौन को प्राधिकरण का अध्यक्ष और उदयवीर सिंह गुर्जर को उपाध्यक्ष बनाया गया है। सरकार के इस फैसले को ग्वालियर व्यापार मेले के बेहतर संचालन और व्यवस्थाओं को और मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। ग्वालियर मेला प्रदेश का प्रमुख आयोजन है, जहां हर साल बड़ी संख्या में व्यापारी और लोग शामिल होते हैं। राजनीतिक जानकारों की मानें तो इन नियुक्तियों के जरिए सरकार क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन साधने के साथ-साथ संगठन से जुड़े सक्रिय चेहरों को भी जिम्मेदारी दे रही है। कुल मिलाकर साफ है कि प्रदेश में अब नियुक्तियों का पहिया तेजी से घूम रहा है और आने वाले दिनों में कई और नामों पर मुहर लगने की संभावना है।

निगम मंडल की दावेदारी से बाहर हुए सभी वर्तमान विधायक

भोपाल। मध्यप्रदेश में निगम-मंडलों में नियुक्तियों का सिलसिला जारी है और आज चार और नामों पर मुहर लगने की तैयारी है। सूत्रों के मुताबिक, इस बार की नियुक्तियों में पार्टी ने साफ संकेत दे दिया है कि वर्तमान विधायकों और चुनाव हार चुके नेताओं को जगह नहीं दी जाएगी। जानकारी के अनुसार, इस सूची में वरिष्ठ नेताओं को प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि सक्रिय संगठनात्मक कार्यकर्ताओं को भी मौका देने पर जोर है। इसी बीच सिंधिया समर्थक मानी जाने वाली Imarti Devi और Mahendra Singh Sisodia को इस चरण में जगह नहीं मिलने की चर्चा है। वहीं, पूर्व मंत्री Ram Niwas Rawat का नाम भी फिलहाल अटका हुआ बताया जा रहा है, जिस पर अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। सूत्रों का कहना है कि पार्टी इस बार नियुक्तियों के जरिए संगठन में संतुलन साधने और नए चेहरों को अवसर देने की रणनीति पर काम कर रही है। यही वजह है कि मौजूदा विधायकों और हालिया चुनाव में हार चुके नेताओं को फिलहाल सूची से दूर रखा जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में इन संभावित नामों और फैसलों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। अब नजर इस बात पर टिकी है कि आखिर आज जारी होने वाली सूची में किन चेहरों को जिम्मेदारी मिलती है और कौन इंतजार में ही रह जाता है।

आज ही जारी होगी शहरीय विकास प्राधिकरण की भी लिस्ट

मध्यप्रदेश में लंबे समय से अटकी शहरी विकास प्राधिकरणों की नियुक्तियों को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। भारतीय जनता पार्टी अब से कुछ ही देर में उज्जैन, रतलाम, देवास और इंदौर के शहरी विकास प्राधिकरणों की सूची जारी करने जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, इन नियुक्तियों का पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं को काफी समय से इंतजार था, जो अब खत्म होने वाला है। पिछले कई महीनों से इन नामों को लेकर संगठन और सरकार के बीच मंथन जारी था और कई दौर की चर्चाओं के बाद सूची को अंतिम रूप दिया गया है। बताया जा रहा है कि इस सूची में क्षेत्रीय संतुलन, जातीय समीकरण और संगठन में सक्रिय कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दी गई है। साथ ही कुछ नए चेहरों को मौका देकर संगठन को मजबूती देने की रणनीति पर भी काम किया गया है। राजनीतिक हलकों में इन नियुक्तियों को लेकर हलचल तेज है और कई नामों को लेकर पहले से ही अटकलें लगाई जा रही हैं। अब नजर इस बात पर टिकी है कि आखिर किन चेहरों को जिम्मेदारी मिलती है और किन्हें इंतजार करना पड़ेगा। यह नियुक्तियां न सिर्फ संगठनात्मक संतुलन के लिहाज से अहम हैं, बल्कि आने वाले राजनीतिक समीकरणों पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है।

Thursday, April 23, 2026

MP times की खबर पर लगी मुहर, निगम मंडल की लिस्ट जारी



भोपाल। मध्यप्रदेश में लंबे इंतजार के बाद राजनीतिक नियुक्तियों की शुरुआत हो गई है। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने चार अहम आयोगों के अध्यक्षों के नाम फाइनल कर दिए हैं, जिससे साफ है कि सरकार अब नियुक्तियों की प्रक्रिया को तेजी देने के मूड में है। जारी लिस्ट के अनुसार, अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष पद पर कैलाश जाटव का नाम तय किया गया है। महिला आयोग की कमान रेखा यादव को सौंपी गई है। वहीं अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष के रूप में रामलाल रौतेल को जिम्मेदारी दी गई है, जबकि बाल संरक्षण आयोग का अध्यक्ष डॉ. निवेदिता शर्मा को बनाया गया है। इन नियुक्तियों को सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। लंबे समय से लंबित पड़ी इन नियुक्तियों को लेकर संगठन और सरकार के बीच लगातार मंथन चल रहा था, जिसके बाद अब इन नामों पर सहमति बनी है। माना जा रहा है कि आयोगों में नियुक्तियों के साथ ही अब निगम-मंडलों और अन्य बोर्ड्स में भी जल्द ही नियुक्तियों का सिलसिला तेज होगा। इससे पार्टी संगठन में सक्रिय कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देने के साथ-साथ राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश की जा रही है। राजनीतिक गलियारों में इन नियुक्तियों को लेकर चर्चा तेज हो गई है और अब नजर आगे आने वाली निगम-मंडल सूची पर टिकी हुई है।

निगम-मंडल में किसे मिलेगा पद? इन नामों पर टिकी नजरें


भोपाल। मध्यप्रदेश में लंबे इंतजार के बाद अब राजनीतिक नियुक्तियों का सिलसिला शुरू होने जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, इसकी शुरुआत आज विभिन्न आयोगों में नियुक्तियों से की जाएगी, जहां कई अहम पदों के लिए नाम लगभग तय हो चुके हैं। जानकारी के अनुसार, अनुसूचित जाति आयोग में कैलाश जाटव के नाम की चर्चा जोरों पर है, जबकि अनुसूचित जनजाति आयोग के लिए भात सिंह नेताम को जिम्मेदारी मिलने की संभावना जताई जा रही है। वहीं युवा आयोग में प्रवीण शर्मा का नाम प्रमुख दावेदार के रूप में सामने आ रहा है। सूत्र बताते हैं कि इन नियुक्तियों को लेकर संगठन और सरकार के बीच लंबे समय से मंथन चल रहा था। क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए नामों का चयन किया गया है, ताकि अलग-अलग वर्गों को प्रतिनिधित्व मिल सके। माना जा रहा है कि आयोगों में नियुक्तियों के बाद जल्द ही निगम-मंडलों और अन्य बोर्ड्स में भी नियुक्तियों की प्रक्रिया तेज होगी। यह पूरी कवायद संगठन में सक्रिय कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देने और राजनीतिक संतुलन साधने की रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। हालांकि, अभी आधिकारिक घोषणा का इंतजार है, लेकिन सियासी गलियारों में इन नामों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। अब नजर इस बात पर है कि सरकार और संगठन कब इन नियुक्तियों पर औपचारिक मुहर लगाते हैं।