Tuesday, February 10, 2026
बीजेपी जिला प्रभारी होंगे सब पर भारी
मोहन कैबिनेट की बैठक संपन्न , कृषि कैबिनेट होगी बालाघाट में
भोपाल में चयनित शिक्षकों का बवाल, पहले प्रदर्शन फिर भूख हड़ताल, अब कराया मुंडन
भोपाल। शिक्षक भर्ती को लेकर मध्यप्रदेश में चयनित अभ्यर्थियों का आक्रोश सड़कों पर दिखाई दे रहा है। राजधानी भोपाल में भूख हड़ताल पर बैठे चयनित अभ्यर्थियों ने मंगलवार को मुंडन कराकर विरोध जताया। आंदोलन लगातार दूसरे दिन भी जारी है।
पैदल मार्च निकालकर DPI कार्यालय का घेराव
सोमवार को अभ्यर्थियों ने पैदल मार्च निकालते हुए लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) कार्यालय का घेराव किया था। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि प्रदेश में शिक्षकों की भारी कमी होने के बावजूद भर्ती प्रक्रिया में पदों की संख्या कम रखी गई है।
हजारों पद खाली, भर्ती सीमित
जानकारी के अनुसार फिलहाल कुल 13 हजार पदों पर भर्ती प्रक्रिया चल रही है। इनमें लगभग 10 हजार पद माध्यमिक शिक्षक के और करीब 3 हजार पद प्राथमिक शिक्षक के हैं। अभ्यर्थियों का आरोप है कि यह संख्या जरूरत के मुकाबले बेहद कम है और भर्ती परीक्षाएं ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रही हैं।
25 हजार पदों पर भर्ती की मांग
चयनित अभ्यर्थी भर्ती पदों की संख्या बढ़ाकर 25 हजार करने की मांग कर रहे हैं। साथ ही भर्ती प्रक्रिया का दूसरा चरण जल्द शुरू करने की मांग भी प्रमुख रूप से उठाई जा रही है।
अर्धनग्न होकर जताया विरोध
सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए अभ्यर्थियों ने अर्धनग्न होकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, उनका आंदोलन जारी रहेगा।
विजय शाह मामले में नया मोड़: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टली, सरकार की चुप्पी बरकरार
भोपाल। कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर मंत्री विजय शाह के विवादित बयान से जुड़े मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई नहीं हो सकी। अब इस मामले की अगली सुनवाई 20 फरवरी को होगी। यह प्रकरण चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सूचीबद्ध था, लेकिन एसआईआर (स्पेशल इंवेस्टिगेशन रिपोर्ट) से संबंधित एक अन्य मामले की सुनवाई लंबी चलने के कारण विजय शाह प्रकरण पर सुनवाई नहीं हो पाई।
दो हफ्ते में मांगा था जबाव
गौरतलब है कि इससे पहले 19 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह दो सप्ताह के भीतर एसआईटी (विशेष जांच दल) की रिपोर्ट के आधार पर यह निर्णय ले कि मंत्री विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति दी जाए या नहीं। कोर्ट ने साफ तौर पर कहा था कि मामले में कानून के अनुसार जल्द निर्णय लिया जाना चाहिए।
20 फरवरी को होगी अगली सुनवाई
हालांकि, निर्धारित समयसीमा बीत जाने के बावजूद राज्य सरकार की ओर से न तो कोई दस्तावेज और न ही कोई रिपोर्ट सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पेश की गई। इसे लेकर कोर्ट में कोई ठोस प्रगति सामने नहीं आई। मंत्री विजय शाह के बयान को लेकर पहले से ही राजनीतिक और सामाजिक हलकों में विवाद बना हुआ है। अब सबकी नजरें 20 फरवरी को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जिसमें राज्य सरकार के रुख और कोर्ट की आगे की कार्रवाई पर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
Monday, February 9, 2026
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Sunday, February 8, 2026
भारत–अमेरिका ट्रेड डील पर BJP–Congress आमने-सामने, किसानों को लेकर सियासी घमासान
भोपाल। भारत–अमेरिका ट्रेड डील को लेकर मध्यप्रदेश में सियासत लगातार गरमाती जा रही है। इस अंतरराष्ट्रीय समझौते को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के बीच तीखी जुबानी जंग छिड़ गई है, जिसमें दोनों नेता किसानों के हितों को लेकर एक-दूसरे पर सवाल उठा रहे हैं। जहां कांग्रेस इस डील को किसान विरोधी बता रही है, वहीं बीजेपी इसे राष्ट्रहित और कृषि क्षेत्र के लिए फायदेमंद कदम बता रही है। इस मुद्दे पर प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और बयानबाजी का दौर लगातार जारी है।
ये डील किसान विरोधी- पटवारी
जीतू पटवारी ने इस समझौते को किसान विरोधी बताते हुए कहा कि अमेरिका में किसानों को भारी सब्सिडी मिलती है, जबकि भारतीय किसानों को कम सहायता मिलती है। ऐसे में यह डील भारतीय किसानों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है। उन्होंने सरकार से टैरिफ सूची, नॉन-टैरिफ शर्तें और प्रभाव रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की। पटवारी ने आशंका जताई कि सोयाबीन तेल और पोल्ट्री फीड के जरिए आयात बढ़ने से मध्य प्रदेश के किसानों की आमदनी प्रभावित होगी। उन्होंने MSP की सुरक्षा की लिखित गारंटी भी मांगी और विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी।
कृषि मंत्री ने बताया राष्ट्रहित और संतुलित सौदा
वहीं केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह समझौता राष्ट्रहित में संतुलित तरीके से किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सोयाबीन, मक्का, गेहूं, चावल, डेयरी और दालों जैसे संवेदनशील उत्पादों को डील से बाहर रखा गया है। शिवराज ने कहा कि अमेरिका से अनाज और डेयरी उत्पाद भारत में नहीं आएंगे, जबकि भारतीय चाय, कॉफी, फल और मसालों को अमेरिकी बाजार में शून्य शुल्क पर निर्यात की सुविधा मिलेगी। उन्होंने बताया कि इस समझौते से MSME, टेक्सटाइल, जेम्स एंड ज्वेलरी और ऑटो सेक्टर को नए अवसर मिलेंगे। कृषि मंत्री ने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की दूरदर्शी नीति से उनके आरोप टिक नहीं पाए।
सियासी बहस के बीच किसानों की चिंता
फिलहाल भारत–अमेरिका ट्रेड डील को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच सियासी टकराव लगातार तेज होता जा रहा है। एक तरफ सरकार इसे किसानों और देश के विकास के लिए जरूरी कदम बता रही है, तो वहीं विपक्ष इसे अन्नदाता के हितों के खिलाफ समझौता करार दे रहा है। दोनों पक्ष अपने-अपने दावे और तर्क रख रहे हैं, लेकिन अब तक सरकार की ओर से सभी सवालों के स्पष्ट जवाब सामने नहीं आए हैं। ऐसे में आने वाला वक्त ही तय करेगा कि यह डील वास्तव में किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें वैश्विक बाजार से जोड़ने में मददगार साबित होगी या फिर इसका बोझ देश के अन्नदाता को उठाना पड़ेगा। फिलहाल किसान, विशेषज्ञ और राजनीतिक दल सभी इस समझौते के असर पर नजर बनाए हुए हैं।







