Saturday, March 28, 2026

बड़ा फैसला, किसानों को बोनस देने जा रही सरकार

 


भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने किसानों के हित में बड़ा फैसला लेते हुए गेहूं उपार्जन को लेकर अहम घोषणा की है। अब किसानों को समर्थन मूल्य (MSP) के साथ बोनस भी दिया जाएगा, जिससे उन्हें उनकी उपज का बेहतर दाम मिल सकेगा। सरकार के अनुसार, प्रदेश के भोपाल, इंदौर, उज्जैन और नर्मदापुरम संभाग में 1 अप्रैल से गेहूं खरीदी शुरू होगी, जबकि बाकी जिलों में 7 अप्रैल से समर्थन मूल्य पर खरीदी की जाएगी। इस बार सरकार ने किसानों को राहत देते हुए प्रति क्विंटल 40 रुपए का बोनस देने का निर्णय लिया है। इससे किसानों की आमदनी में सीधा फायदा होने की उम्मीद है। बताया जा रहा है कि अब तक 19 लाख से ज्यादा किसान पंजीयन करा चुके हैं, जिससे साफ है कि इस बार बड़ी संख्या में किसान उपार्जन प्रक्रिया में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस फैसले को लेकर सोशल मीडिया पर लिखा कि “किसानों की मेहनत का सम्मान हमारी प्राथमिकता है” और सरकार हर संभव प्रयास कर रही है कि किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य मिल सके। सरकार के इस फैसले को किसानों के लिए बड़ी राहत और प्रोत्साहन के रूप में देखा जा रहा है। इससे न सिर्फ किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि कृषि क्षेत्र को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। कुल मिलाकर, गेहूं उपार्जन के इस फैसले से प्रदेश के लाखों किसानों को सीधा लाभ मिलने वाला है और यह सरकार की किसान हितैषी नीति को दर्शाता है।

पत्रकारों को लेकर संसद में गूंजी आवाज, जानें क्या है पूरा मामला?

 


भोपाल। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ कहे जाने वाले पत्रकारों की समस्याएं एक बार फिर संसद में गूंज उठीं। नर्मदापुरम-नरसिंहपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद दर्शन सिंह चौधरी ने पत्रकारों के अधिकार, सुरक्षा और सम्मान को लेकर गंभीर मुद्दे उठाए और सरकार से ठोस नीति बनाने की मांग की। सांसद ने संसद में कहा कि पत्रकार लोकतंत्र की रीढ़ हैं, लेकिन विडंबना यह है कि आज वही सबसे ज्यादा असुरक्षित और उपेक्षित वर्ग बनते जा रहे हैं। कई पत्रकार बिना किसी सुरक्षा कवच के जोखिम भरी परिस्थितियों में काम करते हैं, लेकिन उनके लिए न तो पर्याप्त बीमा सुविधा है और न ही स्थायी सामाजिक सुरक्षा। उन्होंने सरकार से “पत्रकार सुरक्षा एवं कल्याण नीति” बनाने की मांग की, जिसमें पत्रकारों को बीमा, स्वास्थ्य सुविधाएं, रेल यात्रा में छूट, बच्चों की शिक्षा में सहायता, आवास और अन्य संस्थागत सुविधाएं दी जा सकें। इसके साथ ही टोल प्लाजा पर भी छूट देने की बात कही गई, ताकि फील्ड में काम करने वाले पत्रकारों को राहत मिल सके। सांसद ने यह भी कहा कि सशक्त और स्वतंत्र पत्रकारिता ही मजबूत लोकतंत्र की असली नींव होती है। ऐसे में पत्रकारों को सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल देना सरकार की जिम्मेदारी है। लंबे समय बाद संसद में इस तरह से पत्रकारों के मुद्दे उठाए जाने से मीडिया जगत में उम्मीद जगी है। खासतौर पर छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में काम करने वाले पत्रकार, जो सीमित संसाधनों और ज्यादा जोखिम के साथ काम करते हैं, उनके लिए यह पहल बेहद अहम मानी जा रही है। अब देखना होगा कि सरकार इस मांग पर कितना गंभीरता से कदम उठाती है और क्या वाकई पत्रकारों को वह सुरक्षा और सम्मान मिल पाता है, जिसके वे हकदार हैं।

मध्यप्रदेश सरकार ने कर्मचारियों-पेंशनरों को दी बड़ी राहत

 


भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने कर्मचारियों और पेंशनरों को बड़ी राहत देते हुए कैशलेस स्वास्थ्य बीमा योजना लागू करने की तैयारी कर ली है। इस योजना के तहत प्रदेश के लाखों शासकीय कर्मचारी और पेंशनर अब बिना नकद भुगतान के इलाज की सुविधा ले सकेंगे। जानकारी के अनुसार, इस योजना में करीब 11 लाख से अधिक कर्मचारियों और पेंशनरों को शामिल किया जाएगा। इसके लिए सरकार द्वारा स्वास्थ्य बीमा का पूरा ढांचा तैयार किया जा रहा है, जिससे लाभार्थियों को बेहतर और आसान चिकित्सा सुविधाएं मिल सकें। योजना के तहत प्रत्येक कर्मचारी को मूल वेतन का एक प्रतिशत प्रति माह अंशदान करना होगा। इसके बदले उन्हें निर्धारित अस्पतालों में कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी। गंभीर बीमारियों और आपातकालीन स्थिति में भी इलाज आसान हो सकेगा। सरकार इस योजना को आयुष्मान भारत जैसी व्यवस्थाओं की तर्ज पर लागू करने की तैयारी में है। इसमें प्रदेश के सरकारी और निजी अस्पतालों को शामिल किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक लोगों को सुविधा मिल सके। बताया जा रहा है कि योजना के सफल संचालन के लिए आईटी सिस्टम, हेल्थ कार्ड और अस्पतालों की सूची तैयार की जा रही है। साथ ही इलाज की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए मॉनिटरिंग सिस्टम भी विकसित किया जाएगा। इस योजना के लागू होने से कर्मचारियों और पेंशनरों को इलाज के दौरान आर्थिक बोझ से राहत मिलेगी और उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी। सरकार का मानना है कि यह योजना प्रदेश के लाखों परिवारों के लिए सुरक्षा कवच साबित होगी और स्वास्थ्य सेवाओं तक उनकी पहुंच को और मजबूत करेगी।

Thursday, March 26, 2026

फिर खुलेंगी व्यापम की फाइलें? सुप्रीम कोर्ट सख्त



भोपाल/दिल्ली। बहुचर्चित व्यापम घोटाले को लेकर एक बार फिर मामला सुर्खियों में आ गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए सीबीआई और मध्यप्रदेश सरकार से जवाब मांगा है कि 320 पन्नों की शिकायत पर अब तक क्या कार्रवाई की गई। यह मामला पूर्व विधायक पारस सकलेचा की याचिका पर सामने आया है, जिसमें घोटाले से जुड़े कई बिंदुओं पर दोबारा जांच की मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्र और जस्टिस एनवी अंजरिया शामिल हैं, इस मामले की सुनवाई कर रही है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि जांच और चार्जशीट की स्थिति को लेकर विस्तृत एफिडेविट दाखिल किया जाए। इसके साथ ही कोर्ट ने यह जानना चाहा है कि इतनी बड़ी शिकायत पर अब तक क्या ठोस कार्रवाई हुई है। गौरतलब है कि इससे पहले इंदौर हाईकोर्ट इस याचिका को खारिज कर चुका है, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के बाद एक बार फिर व्यापम घोटाले की फाइलें खुलने की संभावना जताई जा रही है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 16 अप्रैल को होगी, जहां सीबीआई और राज्य सरकार को अपना पक्ष रखना होगा। इस घटनाक्रम के बाद यह माना जा रहा है कि अगर कोर्ट संतुष्ट नहीं होता है, तो व्यापम से जुड़े पुराने मामलों में फिर से जांच की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा सकता है।







छात्रों के लिए खुशखबरी, छुट्टियों का कैलेंडर घोषित




भोपाल। मध्यप्रदेश में आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए स्कूलों का अवकाश कैलेंडर जारी कर दिया गया है। स्कूल शिक्षा विभाग ने प्रदेश के सभी सरकारी और मान्यता प्राप्त विद्यालयों के लिए छुट्टियों की आधिकारिक घोषणा कर दी है। जारी आदेश के अनुसार, इस बार ग्रीष्मकालीन अवकाश 1 मई से शुरू होकर 15 जून 2026 तक रहेगा। यानी करीब डेढ़ महीने तक प्रदेश के सभी स्कूल बंद रहेंगे। वहीं, त्योहारों को लेकर भी छुट्टियों की तारीखें तय कर दी गई हैं। दशहरा अवकाश 19 अक्टूबर से 21 अक्टूबर 2026 तक रहेगा, जबकि दिवाली की छुट्टियां 6 नवंबर से 10 नवंबर 2026 तक घोषित की गई हैं। इन दिनों में प्रदेश के सभी स्कूलों में अवकाश रहेगा। इसके अलावा सर्दियों के लिए भी छुट्टियों का ऐलान कर दिया गया है। शीतकालीन अवकाश 31 दिसंबर 2026 से 4 जनवरी 2027 तक रहेगा। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी इस कैलेंडर से छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों को पूरे साल की छुट्टियों की स्पष्ट जानकारी मिल जाएगी, जिससे वे अपनी पढ़ाई और अन्य गतिविधियों की बेहतर योजना बना सकेंगे। यह आदेश प्रदेश के सभी स्कूलों पर लागू होगा और इसके अनुसार ही पूरे सत्र में शैक्षणिक गतिविधियां संचालित की जाएंगी।

Wednesday, March 25, 2026

मध्यप्रदेश में संविदा कर्मचारियों को लेकर आया बड़ा अपडेट

 


भोपाल। मध्यप्रदेश में संविदा कर्मचारियों के अधिकारों को लेकर अब सरकार सख्त नजर आ रही है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने राज्य के सभी विभागों, निगम-मंडलों, विश्वविद्यालयों, स्थानीय निकायों, आयोगों, प्राधिकरणों और अन्य संस्थाओं से स्पष्टीकरण मांगा है कि संविदा नीति 2023 अब तक पूरी तरह लागू क्यों नहीं की गई। दरअसल, 22 जुलाई 2023 को राज्य सरकार ने संविदा कर्मचारियों के लिए नई नीति जारी की थी। इस नीति में संविदा कर्मचारियों को कई महत्वपूर्ण सुविधाएं देने का प्रावधान किया गया था, लेकिन अब तक कई विभागों में इनका सही तरीके से पालन नहीं हुआ है। इसी को लेकर सामान्य प्रशासन विभाग ने सख्ती दिखाते हुए विस्तृत जानकारी मांगी है। सरकार द्वारा जारी इस नीति के तहत संविदा कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन के अनुसार वेतन समकक्षता, अनुकम्पा नियुक्ति, सेवानिवृत्ति पर ग्रेच्युटी, अवकाश सुविधा, वार्षिक वेतन वृद्धि और अन्य लाभ दिए जाने हैं। इसके अलावा कुछ मामलों में नियमित कर्मचारियों की तरह सुविधाएं देने और भविष्य में भर्ती प्रक्रियाओं में भी संविदा कर्मचारियों को प्राथमिकता देने का प्रावधान किया गया है। हालांकि, जमीनी स्तर पर स्थिति अलग दिखाई दे रही है। जानकारी के अनुसार, कई विभागों में केवल वेतन समकक्षता लागू की गई है, जबकि अनुकम्पा नियुक्ति, ग्रेच्युटी और अन्य सुविधाएं अब भी लंबित हैं। इसके चलते बड़ी संख्या में प्रकरण अटके हुए हैं और कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है। इतना ही नहीं, कई विभागों और उनकी योजनाओं, परियोजनाओं, विश्वविद्यालयों और नगर निगमों में काम कर रहे संविदा कर्मचारियों को अभी तक वेतन समकक्षता का पूरा लाभ भी नहीं मिल पाया है। कुछ मामलों में वेतन निर्धारण में भी विसंगतियां सामने आई हैं, जिससे कर्मचारियों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल सका है। संविदा कर्मचारी संगठनों का कहना है कि प्रदेश में हजारों प्रकरण ऐसे हैं, जिनमें कर्मचारियों को ग्रेच्युटी और अनुकम्पा नियुक्ति का लाभ नहीं मिला है। कई कर्मचारी इन मामलों को लेकर न्यायालय तक पहुंच चुके हैं और आदेश मिलने के बाद भी विभागों द्वारा कार्रवाई में देरी की जा रही है। इसी को देखते हुए सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और सचिव स्तर के अधिकारियों को निर्देश देते हुए एक तय प्रारूप में जानकारी मांगी है। विभागों से पूछा गया है कि उन्होंने नीति के प्रावधान लागू किए हैं या नहीं, और यदि नहीं किए हैं तो इसके स्पष्ट कारण बताएं। सरकार ने यह जानकारी प्राथमिकता के आधार पर मांगी है, जिससे साफ संकेत मिलते हैं कि अब इस मामले में जल्द ही ठोस कार्रवाई हो सकती है। कुल मिलाकर, सरकार के इस कदम को संविदा कर्मचारियों के हित में एक बड़ा निर्णय माना जा रहा है। अब देखने वाली बात यह होगी कि विभाग इस पर कितनी जल्दी अमल करते हैं और संविदा कर्मचारियों को उनके अधिकार कब तक मिल पाते हैं।