Friday, July 3, 2026
हेमंत खंडेलवाल के एक साल का कार्यकाल कितनी मिसाल,कितने सवाल !
Saturday, June 6, 2026
**दिग्गजों को पछाड़कर रजनीश अग्रवाल बने राज्यसभा उम्मीदवार-इनसाइड स्टोरी
Sunday, May 31, 2026
राज्यसभा रेस में पचौरी की एंट्री?
भोपाल। मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल लगातार बढ़ती जा रही है। सूत्रों के मुताबिक बीजेपी तीसरे उम्मीदवार के तौर पर पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे सुरेश पचौरी के नाम पर गंभीरता से विचार कर रही है। माना जा रहा है कि पचौरी को मैदान में उतारकर बीजेपी कांग्रेस के परंपरागत वोट बैंक और पुराने कांग्रेस नेटवर्क में भी संदेश देना चाहती है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यदि सुरेश पचौरी उम्मीदवार बनते हैं तो कांग्रेस के कई पुराने नेता और उनके समर्थक खुलकर बीजेपी के पक्ष में सक्रिय हो सकते हैं। खासकर उन क्षेत्रों में जहां पचौरी का वर्षों तक प्रभाव रहा है, वहां इसका राजनीतिक असर देखने को मिल सकता है। हालांकि बीजेपी की रणनीति पूरी तरह कांग्रेस के उम्मीदवार पर भी निर्भर मानी जा रही है। सूत्रों की मानें तो यदि कांग्रेस कमलनाथ परिवार से किसी सदस्य को राज्यसभा चुनाव में उतारती है, तो बीजेपी तीसरा उम्मीदवार उतारने के फैसले पर पुनर्विचार कर सकती है। पार्टी फिलहाल कांग्रेस की चाल का इंतजार कर रही है। बीजेपी अगर सुरेश पचौरी को मैदान में उतारती है तो यह सिर्फ एक चुनावी फैसला नहीं होगा, बल्कि कांग्रेस को उसके ही पुराने गढ़ में चुनौती देने की रणनीति भी होगी। दूसरी ओर कांग्रेस के सामने भी चुनौती होगी कि वह राज्यसभा चुनाव को सिर्फ संख्या बल का नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश का चुनाव बनाए। मध्य प्रदेश की राजनीति में कभी कांग्रेस के लिए वोट मांगने वाले सुरेश पचौरी अब बीजेपी के लिए राज्यसभा की लड़ाई लड़ें, इससे बड़ा सियासी प्रतीक शायद ही कोई हो। राजनीति में न स्थायी दोस्त होते हैं और न स्थायी दुश्मन, लेकिन राज्यसभा चुनाव ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि दल बदलने के बाद भी नेताओं की राजनीतिक उपयोगिता खत्म नहीं होती, बल्कि कई बार और बढ़ जाती है। फिलहाल राज्यसभा चुनाव को लेकर तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है, लेकिन इतना तय है कि बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही उम्मीदवारों के जरिए बड़ा राजनीतिक संदेश देने की तैयारी में हैं। अब सबकी नजर कांग्रेस की अगली चाल और बीजेपी के अंतिम फैसले पर टिकी हुई है।
दिल्ली का टिकट नहीं, एमपी की कमान! राज्यसभा रेस से दूर रहेंगे जीतू पटवारी?
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर हलचल तेज है। इस बीच कांग्रेस खेमे से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। सूत्रों के मुताबिक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी राज्यसभा चुनाव में पार्टी के उम्मीदवार नहीं होंगे। बताया जा रहा है कि पटवारी ने खुद पार्टी हाईकमान के सामने चुनाव लड़ने को लेकर ज्यादा उत्साह नहीं दिखाया और संगठन में अपनी भूमिका को प्राथमिकता देने की बात कही है। हालांकि कांग्रेस की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन दिल्ली से भोपाल तक सियासी गलियारों में इस चर्चा ने जोर पकड़ लिया है। क्योंकि पिछले कुछ दिनों से जीतू पटवारी का नाम संभावित उम्मीदवारों में सबसे आगे माना जा रहा था। राजनीतिक जानकारों की मानें तो कांग्रेस फिलहाल मध्य प्रदेश में संगठन को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। ऐसे में पार्टी शायद जीतू पटवारी को प्रदेश की राजनीति में ही सक्रिय रखना चाहती है। आगामी नगरीय निकाय और पंचायत चुनावों के साथ-साथ 2028 विधानसभा चुनाव की तैयारियों को देखते हुए कांग्रेस किसी बड़े संगठनात्मक बदलाव के मूड में नहीं दिख रही। पटवारी के नाम के पीछे हटने की खबरों के बाद अब कांग्रेस के भीतर नए नामों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। पार्टी ऐसे चेहरे की तलाश में है जो संगठन, क्षेत्रीय संतुलन और जातीय समीकरण तीनों पर फिट बैठे। यही वजह है कि दिल्ली दरबार में कई दावेदारों की सक्रियता भी बढ़ गई है। कांग्रेस में राज्यसभा की सीट हमेशा सम्मान से ज्यादा संदेश की राजनीति मानी जाती है। इस बार भी तस्वीर कुछ ऐसी ही दिखाई दे रही है। भोपाल में नेता समर्थकों को आश्वस्त कर रहे हैं, तो दिल्ली में समर्थक अपने नेताओं को। राज्यसभा की एक सीट ने कांग्रेस के कई नेताओं की धड़कनें बढ़ा दी हैं। लेकिन फिलहाल ऐसा लग रहा है कि जीतू पटवारी ने इस दौड़ में शामिल होने से पहले ही अपने कदम पीछे खींच लिए हैं। अब सवाल यह है कि यह त्याग है, रणनीति है या फिर पार्टी का कोई बड़ा सियासी गणित? फिलहाल कांग्रेस ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं, लेकिन इतना तय है कि जीतू पटवारी के नाम को लेकर बनी चर्चा अब नई दिशा में मुड़ती नजर आ रही है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि कांग्रेस राज्यसभा के लिए किस चेहरे पर दांव लगाती है और उसके पीछे का राजनीतिक संदेश क्या होगा।
Saturday, May 30, 2026
सिंधिया समर्थक मंत्रियों पर भड़के पन्नालाल शाक्य
Friday, May 29, 2026
किसानों की मेहनत रंग लाई, गेहूं उपार्जन में MP अव्वल
भोपाल। मध्यप्रदेश ने इस साल गेहूं उपार्जन में नया रिकॉर्ड बनाते हुए देशभर में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। प्रदेश में समर्थन मूल्य पर बड़े पैमाने पर गेहूं खरीदी होने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों को बधाई दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों की मेहनत और सरकार की योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के कारण मध्यप्रदेश लगातार कृषि क्षेत्र में नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार लगातार किसान हित में फैसले ले रही है। सरकार का फोकस सिर्फ समर्थन मूल्य पर खरीदी तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों को समय पर भुगतान, बेहतर व्यवस्थाएं और कृषि को लाभ का धंधा बनाने पर भी काम किया जा रहा है। प्रदेश में इस बार गेहूं खरीदी ने नया रिकॉर्ड बनाया है। सरकार के मुताबिक लाखों किसानों से समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदा गया है और भुगतान की प्रक्रिया भी तेजी से पूरी की जा रही है। गेहूं उपार्जन केंद्रों पर किसानों के लिए पेयजल, छाया, हेल्प डेस्क और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश पहले ही दिए गए थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश अब देश के प्रमुख कृषि राज्यों में अपनी अलग पहचान बना चुका है। सरकार लगातार सिंचाई, भंडारण, आधुनिक तकनीक और समर्थन मूल्य व्यवस्था को मजबूत करने पर काम कर रही है, ताकि किसानों को उनकी उपज का बेहतर दाम मिल सके। सरकार ने इस बार छोटे और सीमांत किसानों को प्राथमिकता देते हुए खरीदी व्यवस्था को आसान बनाने पर विशेष जोर दिया। प्रदेशभर में हजारों उपार्जन केंद्र बनाए गए और स्लॉट बुकिंग से लेकर भुगतान तक की प्रक्रिया को डिजिटल माध्यम से जोड़ा गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और उनकी समृद्धि ही राज्य के विकास की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भी किसान कल्याण और कृषि विकास से जुड़े फैसले लगातार लिए जाते रहेंगे।




