Thursday, March 12, 2026
हेमंत कटारे बनेंगे राज्यसभा सांसद !
एमपी में राज्यसभा की एक सीट पर सस्पेंस, कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग का डर क्यों सता रहा है ,इसके पीछे का बड़ा कारण सामने आने लगा है,, एमपी विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के उपनेता के तेवर पार्टी को ये सोचने के लिए मजबूर कर रहे हैं,, हेमंत कटारे के तेवर लगातार बागी होते जा रहे हैं ,जिसके बाद माना जा रहा है कि राज्यसभा की कांग्रेस की एक सीट अब सुरक्षित नहीं है...
मध्यप्रदेश में 19 जून को राज्यसभा की तीन सीटों के लिए चुनाव होने जा रहा है। इनमें दो सीटें भाजपा के पास हैं, जिन पर डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी और जॉर्ज कुरियन सांसद हैं। वहीं एक सीट कांग्रेस के खाते की है, जिस पर फिलहाल दिग्विजय सिंह सांसद हैं। दिग्विजय सिंह पहले ही राज्यसभा जाने से इनकार कर चुके हैं, जिसके बाद कांग्रेस में इस सीट के लिए कई दावेदार सामने आ गए हैं।
कांग्रेस में बढ़ी दावेदारी
दिग्विजय सिंह के इनकार के बाद कांग्रेस के भीतर इस सीट के लिए कई नेताओं ने दावा ठोक दिया है। इनमें प्रमुख नाम हैं:
जीतू पटवारी – प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष
मीनाक्षी नटराजन – पूर्व सांसद
कमलनाथ – पूर्व मुख्यमंत्री
अरुण यादव – पूर्व केंद्रीय मंत्री
कमलेश्वर पटेल – पूर्व मंत्री, विंध्य क्षेत्र का बड़ा चेहरा
सज्जन सिंह वर्मा और प्रदीप अहिरवार – दलित वर्ग के नेता
दलित वर्ग से किसी नेता को राज्यसभा भेजने की मांग भी उठ रही है। इस संबंध में कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने पत्र लिखकर मांग की है।
कांग्रेस को क्यों है खतरा
कांग्रेस के भीतर सबसे बड़ा डर क्रॉस वोटिंग का है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक यदि 5–6 विधायक भी इधर-उधर हो गए तो कांग्रेस की सीट खतरे में पड़ सकती है।
बताया जा रहा है कि भाजपा की ओर से विधायकों को अगले चुनाव में टिकट और अन्य ऑफर देने की चर्चा भी पार्टी के अंदर चल रही है।
विधानसभा के आंकड़े
मध्यप्रदेश विधानसभा में फिलहाल भाजपा के पास 164 विधायक हैं। यदि भाजपा को एक-दो अतिरिक्त समर्थन मिल जाता है तो उसके लिए समीकरण और मजबूत हो सकते हैं। कांग्रेस को आशंका है कि उसके कुछ विधायक क्रॉस वोटिंग कर सकते हैं।
पहले भी हो चुकी है क्रॉस वोटिंग
2022 के राष्ट्रपति चुनाव में भी मध्यप्रदेश में बड़े पैमाने पर क्रॉस वोटिंग देखने को मिली थी। उस समय विपक्ष के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा को अपेक्षा से काफी कम वोट मिले थे। अनुमान था कि उन्हें करीब 103 वोट मिलेंगे, लेकिन उन्हें केवल 79 वोट ही मिले। माना गया कि लगभग 19–20 विधायकों ने पार्टी लाइन से हटकर मतदान किया था।
विपक्ष और भाजपा के बयान
इस मुद्दे पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि भाजपा हमेशा तोड़फोड़ की राजनीति करती है, लेकिन कांग्रेस के विधायक मजबूत हैं और राज्यसभा सीट कांग्रेस की ही रहेगी।
वहीं भाजपा विधायक अभिलाष पांडे का कहना है कि भाजपा के पास पर्याप्त विधायक हैं और पार्टी अपने संगठन और काम पर भरोसा करती है।
जीत का गणित
इस बार राज्यसभा चुनाव 230 विधायकों के गणित पर होगा। एक उम्मीदवार को जीतने के लिए लगभग 58 वोटों की जरूरत होगी। ऐसे में थोड़ी सी भी क्रॉस वोटिंग पूरे चुनाव का समीकरण बदल सकती है।
निष्कर्ष:
मध्यप्रदेश की इस राज्यसभा सीट पर चुनाव से पहले ही राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस के भीतर कई दावेदार हैं, वहीं क्रॉस वोटिंग की आशंका ने पार्टी की चिंता बढ़ा दी है। अब सभी की नजर 19 जून को होने वाले मतदान पर टिकी हुई है।
Tuesday, March 10, 2026
विजयपुर में विजयी कौन !
विजयपुर विधानसभा क्षेत्र को लेकर सियासी असमंजस की स्थिति तो बन ही गई है साथ में लगातार सियासी बयानबाजी भी जारी है,विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा का चुनाव हाईकोर्ट द्वारा शून्य करने के मामले को कांग्रेस ने इसे आदिवासियों का हक छीनने का मामला बताया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि भाजपा को यह कभी स्वीकार नहीं होगा कि एक आदिवासी व्यक्ति सामान्य सीट से विधायक कैसे बन गया। हम सुप्रीम कोर्ट में अपील कर कानूनी तरीके से फिर से कांग्रेस का विधायक बनवाएंगे।
विजयपुर विधानसभा को लेकर हाई कोर्ट के निर्णय के बाद कांग्रेस के तमाम बड़े चेहरे मुकेश मल्होत्रा के समर्थन में कूद गए हैं,नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि देश में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां गंभीर आरोपों के बावजूद सत्ता पक्ष के नेताओं को राहत मिल जाती है। लेकिन हमें कोर्ट से उम्मीद है। मामले में राज्यसभा सदस्य विवेक तन्खा ने कहा कि विजयपुर विधान सभा के चुनाव याचिका में कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा को सर्वोच्च न्यायालय में अपील प्रस्तुत करके स्थगन आदेश प्राप्त करने का मौका प्रदान किया है।
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि हाई कोर्ट ने भाजपा और रामनिवास रावत के साथ न्याय किया है। भाजपा इस फैसले का स्वागत करती है। हम हमेशा से न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करते हैं और आगे भी कोर्ट जो आदेश देगा हम उसका पालन करेंगे।फैसले के विरोध मे कांग्रेस नेताओं के बयान पर भी बीजेपी पलटवार करती नजर आ रही है
एमपी की सियासत और न्यायिक व्यवस्था में ये पहली बार हुआ है कि किसी विधायक की विधायकी सीधे अदालत के आदेश से चली गई और हारे हुए प्रत्याशी को विधायकी मिल गई हो,,हालांकि फैसला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में अपील तक होल्ड पर है लेकिन इसने एमपी की सियासत को गरमा दिया है
Friday, March 6, 2026
एमपी में किसानों की बल्ले बल्ले, गेहूं खरीदी पर डबल लाभ...
मध्यप्रदेश के किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गेहूं खरीदी को लेकर बड़ा ऐलान किया है। अब किसानों को गेहूं बेचने पर पहले से ज्यादा पैसा मिलेगा। दरअसल, मुख्यमंत्री Dr. Mohan Yadav ने मुख्यमंत्री निवास में Bharatiya Kisan Sangh के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर किसानों से जुड़े कई बड़े फैसले लिए। बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हित में लगातार काम कर रही है और उन्हें उनकी फसल का अच्छा दाम दिलाने की कोशिश कर रही है। सरकार ने फैसला लिया है कि इस साल गेहूं खरीदी पर किसानों को ज्यादा दाम मिलेगा। केंद्र सरकार ने गेहूं का MSP 2585 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है।
इसके ऊपर मध्यप्रदेश सरकार 40 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस देगी। यानी अब किसानों को गेहूं का 2625 रुपये प्रति क्विंटल दाम मिलेगा। केंद्र सरकार ने गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2585 रुपए प्रति क्विंटल तय किया है। इस पर मध्यप्रदेश सरकार 40 रुपए प्रति क्विंटल का बोनस देगी। इस तरह अब प्रदेश के किसानों को गेहूं बेचने पर कुल 2625 रुपए प्रति क्विंटल मिलेंगे। सरकार के इस फैसले से किसानों को सीधा फायदा होगा और उनकी आमदनी बढ़ेगी। सरकार का कहना है कि किसानों को उनकी फसल का बेहतर दाम दिलाने के लिए यह फैसला लिया गया है। इससे प्रदेश के लाखों गेहूं उत्पादक किसानों को राहत मिलेगी।
इसके अलावा सरकार ने गेहूं खरीदी के लिए पंजीयन की अंतिम तारीख 7 मार्च से बढ़ाकर 10 मार्च कर दी है, ताकि जिन किसानों का रजिस्ट्रेशन नहीं हो पाया है, उन्हें भी मौका मिल सके। सरकार ने उड़द की खेती को बढ़ावा देने के लिए 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने की भी घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने किसानों से उड़द लगाने की अपील की है, ताकि उन्हें इसका फायदा मिल सके। साथ ही किसानों को राहत देने के लिए सिंचाई के लिए दिन में बिजली देने का भी फैसला लिया गया है, जिससे किसानों को रात में खेतों में जाकर पानी देने की परेशानी कम होगी। सरकार के इन फैसलों से प्रदेश के लाखों किसानों को फायदा मिलने की उम्मीद है।
आखिर ऐसा क्या हुआ कि भोपाल में पालकों ने DEO ऑफिस का घेराव कर दिया?
राजधानी भोपाल में निजी स्कूलों की फीस और अन्य शुल्कों की मनमानी को लेकर अभिभावकों का गुस्सा फूट पड़ा। मप्र पालक संघ के बैनर तले बड़ी संख्या में पालकों ने जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया और जमकर नारेबाजी की।
पालकों का आरोप है कि निजी स्कूल फीस, बस चार्ज और किताबों के नाम पर मनमानी वसूली कर रहे हैं, जबकि प्रशासन कार्रवाई करने से बच रहा है। प्रदर्शनकारियों ने ‘शिक्षा माफिया’ के खिलाफ सख्त कदम उठाने और फीस अधिनियम को सख्ती से लागू करने की मांग की।
वहीं जिला शिक्षा अधिकारी एन.के. अहिरवार ने कहा कि रेट में बदलाव के कारण पहले जारी की गई सूची वापस ली गई थी। अब हर जिले को इस मामले में जिम्मेदारी दी गई है और पालकों की शिकायतों का समाधान किया जाएगा।
पालक संघ ने चेतावनी दी है कि अगर निजी स्कूलों की मनमानी पर जल्द रोक नहीं लगी तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
बीजेपी प्रशिक्षण शिविर में हेमंत खंडेलवाल ने नियुक्तियों पर कह दी बड़ी बात
भोपाल
बीजेपी के प्रशिक्षण महाअभियान की तैयारियां भले तेज बताई जा रही हों, लेकिन संगठन के अंदर फिलहाल सबसे ज्यादा चर्चा लंबित नियुक्तियों को लेकर है। जिला स्तर की कार्यशालाओं से पहले संगठन में खाली पड़े पदों को भरने की कवायद तेज हो गई है।
सूत्रों के मुताबिक कई जिलों और पार्टी के अलग-अलग मोर्चों में अभी भी नियुक्तियां बाकी हैं। ऐसे में कार्यशालाओं से पहले इन्हें पूरा करने की कोशिशें तेज कर दी गई हैं। हाल ही में आयोजित वर्कशॉप में प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने भी 16 मार्च तक शेष नियुक्तियां पूरी करने की बात कही।
खंडेलवाल ने बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम मंडल से लेकर जिला स्तर तक आयोजित किए जाएंगे। आज की कार्यशाला उन वक्ताओं के लिए है, जो आगे जिलों और मंडलों में जाकर कार्यकर्ताओं को अलग-अलग विषयों पर प्रशिक्षण देंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा विचारधारा आधारित पार्टी है, इसलिए समय-समय पर कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया जाता है।
उन्होंने यह भी माना कि नए दौर में सोशल मीडिया का महत्व बढ़ा है, इसलिए प्रशिक्षण में इस पर भी खास फोकस रहेगा। वहीं राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि प्रशिक्षण से पहले नियुक्तियों की यह हलचल भी कम दिलचस्प नहीं है—अब देखना यह है कि 16 मार्च तक सभी पद भरते हैं या फिर यह ‘कसरत’ ही सुर्खियां बटोरती रहती है।
Tuesday, March 3, 2026
एमपी बीजेपी के नए संगठन महामंत्री की नियुक्ति का फार्मूला तय
एमपी बीजेपी में संगठन महामंत्री पद को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। हितानंद शर्मा की रवानगी के बाद अब सबकी नजर 13-14 मार्च को होने वाली राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की केंद्रीय टोली की बैठक पर टिकी है।खबर है कि संघ सीधे अपने प्रचारक को भेजने के बजाय किसी अनुषांगिक संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी को भाजपा में संगठन महामंत्री बनाकर नई रणनीति का संकेत दे सकता है। अगर ऐसा होता है तो यह संघ-भाजपा तालमेल की परंपरागत व्यवस्था में अहम बदलाव माना जायेगा |
पूरे देश में भारतीय जनता पार्टी और संघ लगातार प्रयोग करते नजर आ रहा है और अब एक नए प्रयोग की बड़ी एमपी बीजेपी संगठन में है, माना जा रहा है की एमपी बीजेपी का नया प्रदेश संगठन महामंत्री संघ के आनुषंगिक संगठन से हो सकता है|
ये चर्चाएं जोरो पर
एमपी में बीजेपी संगठन महामंत्री की नियुक्ति को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है
संघ 13-14 मार्च को केंद्रीय बैठक में नए संगठन महामंत्री पर चर्चा करेगा।
इस बार संघ अनुषांगिक संगठन से किसी वरिष्ठ पदाधिकारी को चुन सकता है।
संगठन महामंत्री भाजपा और संघ के बीच समन्वय बनाए रखता है।
संघ इस वर्ष अपने 100 वर्ष पूरे करने जा रहा है। इसी के तहत संगठनात्मक ढांचे को और चुस्त-दुरुस्त करने पर मंथन चल रहा है।एमपी बीजेपी में हमने देखा है कि इस साल कई बदलाव हुए हैं,, प्रांत प्रचारक के पद को खत्म कर संभागीय प्रचारक नियुक्त किए गए हैं
ये हुए बड़े बदलाव
प्रांत प्रचारक की जगह संभाग प्रचारक की नई व्यवस्था पर विचार
जिम्मेदारियों का विकेंद्रीकरण
छोटे-छोटे क्षेत्र में बेहतर संपर्क और निगरानी
50-58 वर्ष आयु वर्ग के अनुभवी पदाधिकारियों को नई जिम्मेदारी
संघ से वैचारिक रूप से जुड़े लगभग 40 से अधिक प्रमुख संगठन सक्रिय हैं, जिन्हें सामूहिक रूप से संघ परिवार या विचार परिवार कहा जाता है। माना जा रहा है कि अगला संगठन महामंत्री इन्हीं परिवारों में से किसी एक का सदस्य होगा
संघ के प्रमुख अनुषांगिक संगठन
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद
भारतीय मजदूर संघ
भारतीय किसान संघ
विश्व हिंदू परिषद
सेवा भारती
राष्ट्र सेविका समिति
बीजेपी में बतौर राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की नियुक्ति के बाद ही हर स्तर पर नए प्रयोग की परंपरा शुरू हो गई है आने वाले दिनों में मध्य प्रदेश में इसका असर दिखना शुरू होने वाला है
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