Friday, February 20, 2026

सरकार के आंकड़े साफ, लेकिन जवाब धुंधले?

भोपाल। पूर्व मंत्री एवं कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से हुई मौतों को लेकर सरकार पर तीखा तंज कसा है। उन्होंने कहा कि कागज़ों में सब कुछ “नियंत्रण में” दिखाया जा रहा है, लेकिन मौतों के आंकड़े ही आपस में मेल नहीं खा रहे। एक जगह 20, दूसरी जगह 32—आखिर सच किसे माना जाए?

जयवर्धन सिंह ने कहा कि जिस इंदौर को स्वच्छता का प्रतीक बताया जाता है, वहां पीने का पानी ही सवालों के घेरे में है। उन्होंने आरोप लगाया कि अगर 32 लोगों की जान गई है तो मुआवजा केवल 20 परिवारों तक ही क्यों सीमित रहा? क्या बाकी परिवार सरकारी गिनती में शामिल नहीं हैं?

उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि सरकार शायद “छवि बचाने” में ज्यादा गंभीर है, बजाय लोगों की जान बचाने के।

प्रमुख मांगें:

  • मृतकों की सही और अंतिम संख्या सार्वजनिक की जाए।
  • सभी पीड़ित परिवारों को समान रूप से पूरा मुआवजा दिया जाए।
  • पूरे मामले की उच्च स्तरीय और स्वतंत्र जांच हो।
  • लापरवाही के दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
  • विधानसभा में इस मुद्दे पर विस्तृत और पारदर्शी चर्चा कराई जाए।

जयवर्धन सिंह ने कहा कि यह मामला सिर्फ आंकड़ों का अंतर नहीं, बल्कि जवाबदेही और न्याय का है। सच सामने आना ही चाहिए, चाहे वह कितना भी असहज क्यों न हो।



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