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Thursday, February 26, 2026

एमपी टाइम्स की मुहिम का असर, अतिथि शिक्षकों के लिए आई खुशखबरी...जताया हमारा आभार


भोपाल।मध्यप्रदेश के लोक शिक्षण संचालनालय ने अतिथि शिक्षकों की लंबी अनुपस्थिति को लेकर पूर्व में जारी किए गए आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है। इस संबंध में 26 फरवरी 2026 को नया आदेश जारी किया गया है।

पूर्व आदेश में प्रावधान किया गया था कि यदि कोई अतिथि शिक्षक बिना सूचना लगातार 7 दिवस तक अनुपस्थित रहता है तो उसकी सेवा समाप्त की जा सकती है। इस प्रावधान को लेकर प्रदेश के विभिन्न जिलों में आपत्तियां और विरोध सामने आए थे। अतिथि शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुनील परिहार ने एमपी टाइम्स का आभार जताया है... और लिखा है #MP टाइम्स समाचार पत्र को हृदय से धन्यवाद। आपने भी अतिथि शिक्षकों के खिलाफ हुए शोषणकारी आदेश को निरस्त करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई । उम्मीद करते हैं इसी तरह से सहयोग करते रहेंगे । सुनील परिहार प्रदेश अध्यक्ष अतिथि शिक्षक समन्वय समिति



ताजा निर्देशों के अनुसार अब अतिथि शिक्षकों की उपस्थिति एवं अनुपस्थिति के संबंध में आगे की कार्रवाई एजुकेशन पोर्टल 3.0 पर आवश्यक तकनीकी व्यवस्था उपलब्ध होने के पश्चात की जाएगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस संबंध में पृथक दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।

आदेश की प्रतिलिपि सभी जिला शिक्षा अधिकारियों, कलेक्टरों तथा संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को प्रेषित कर दी गई है। फिलहाल पूर्व प्रावधान निरस्त होने से अतिथि शिक्षकों को अस्थायी राहत मिली है।



Thursday, February 12, 2026

एमपी के दिग्गज मंत्रियों का किसने मांगा इस्तीफा!

भोपाल। मध्यप्रदेश की सियासत में बजट सत्र से ठीक पहले राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर मंत्रिमंडल के तीन वरिष्ठ सदस्यों—राजेंद्र शुक्ल, कैलाश विजयवर्गीय और विजय शाह—को पद से हटाने की मांग की है। पटवारी ने कहा है कि सरकार को नैतिक आधार पर कार्रवाई करते हुए इन मंत्रियों को तत्काल बर्खास्त करना चाहिए।

पत्र में उठाए गए आरोप

अपने पत्र में पीसीसी चीफ ने आरोप लगाया है कि जिन मुद्दों को लेकर सवाल उठ रहे हैं, उन पर सरकार स्पष्ट स्थिति नहीं ले पा रही है। उनका कहना है कि बजट सत्र जैसे महत्वपूर्ण सत्र से पहले सरकार को जवाबदेही और पारदर्शिता का संदेश देना चाहिए। पटवारी ने यह भी कहा कि यदि सरकार कार्रवाई नहीं करती है तो विपक्ष विधानसभा में इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाएगा।

सियासी बयानबाजी और संभावित असर

इधर, इस मांग को लेकर सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई है। कांग्रेस इसे नैतिकता और जवाबदेही का सवाल बता रही है, जबकि सत्तारूढ़ दल की ओर से अभी तक औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। माना जा रहा है कि बजट सत्र के दौरान यह मुद्दा विधानसभा में गर्मा सकता है और सत्ता-विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल सकती है।



Tuesday, February 10, 2026

भोपाल में चयनित शिक्षकों का बवाल, पहले प्रदर्शन फिर भूख हड़ताल, अब कराया मुंडन


भोपाल। शिक्षक भर्ती को लेकर मध्यप्रदेश में चयनित अभ्यर्थियों का आक्रोश सड़कों पर दिखाई दे रहा है। राजधानी भोपाल में भूख हड़ताल पर बैठे चयनित अभ्यर्थियों ने मंगलवार को मुंडन कराकर विरोध जताया। आंदोलन लगातार दूसरे दिन भी जारी है।

पैदल मार्च निकालकर DPI कार्यालय का घेराव

सोमवार को अभ्यर्थियों ने पैदल मार्च निकालते हुए लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) कार्यालय का घेराव किया था। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि प्रदेश में शिक्षकों की भारी कमी होने के बावजूद भर्ती प्रक्रिया में पदों की संख्या कम रखी गई है।

हजारों पद खाली, भर्ती सीमित

जानकारी के अनुसार फिलहाल कुल 13 हजार पदों पर भर्ती प्रक्रिया चल रही है। इनमें लगभग 10 हजार पद माध्यमिक शिक्षक के और करीब 3 हजार पद प्राथमिक शिक्षक के हैं। अभ्यर्थियों का आरोप है कि यह संख्या जरूरत के मुकाबले बेहद कम है और भर्ती परीक्षाएं ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रही हैं।

25 हजार पदों पर भर्ती की मांग

चयनित अभ्यर्थी भर्ती पदों की संख्या बढ़ाकर 25 हजार करने की मांग कर रहे हैं। साथ ही भर्ती प्रक्रिया का दूसरा चरण जल्द शुरू करने की मांग भी प्रमुख रूप से उठाई जा रही है।

अर्धनग्न होकर जताया विरोध

सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए अभ्यर्थियों ने अर्धनग्न होकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, उनका आंदोलन जारी रहेगा।




Thursday, February 5, 2026

विजय शाह विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने MP सरकार को लगाई फटकार, 2 हफ्ते में फैसला जरूरी



भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री विजय शाह के एक विवादित बयान को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा है। यह टिप्पणी कर्नल सोफिया कुरैशी से जुड़ी थी, जिसे अदालत ने गंभीर प्रकृति का माना। पहले इस पर हाई कोर्ट ने FIR दर्ज करने के आदेश दिए थे, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले की निगरानी अपने हाथ में ली।

SIT जांच और रिपोर्ट

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर इस मामले की जांच के लिए विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया था। SIT ने जांच पूरी कर अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। अब सवाल यह है कि मंत्री विजय शाह के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के लिए सरकार अभियोजन की अनुमति देती है या नहीं।

सरकार की देरी पर कोर्ट नाराज़

जांच पूरी होने के बावजूद राज्य सरकार की ओर से अब तक कोई स्पष्ट फैसला नहीं लिया गया है। इसी देरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराज़गी जताई है। अदालत ने कहा कि मामले को लटकाना स्वीकार्य नहीं है।

दो हफ्ते की अंतिम मोहलत

सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को साफ निर्देश देते हुए कहा है कि दो हफ्ते के भीतर यह तय किया जाए कि मंत्री विजय शाह के खिलाफ मुकदमा चलाया जाएगा या नहीं। कोर्ट ने संकेत दिए कि आगे और देरी पर सख्ती बढ़ सकती है।

माफी पर भी सवाल

मंत्री विजय शाह की ओर से पहले दी गई माफी को भी सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल पर्याप्त नहीं माना है। अदालत का मानना है कि सिर्फ माफी से मामला खत्म नहीं किया जा सकता।

सियासी असर तेज

इस पूरे मामले को लेकर प्रदेश की राजनीति में भी हलचल है। विपक्ष सरकार पर हमलावर है, वहीं आने वाले दिनों में यह विवाद राजनीतिक रूप से और गर्माने के संकेत दे रहा है।