चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार सिंगरौली में आदिवासियों की ज़मीन उद्योगपति गौतम अडानी को देने के मुद्दे पर सरकार को घेर रहे थे। जैसे ही “अडानी” नाम बार-बार गूंजा, सत्ता पक्ष ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। अध्यक्ष ने भी सदन में मौजूद नहीं किसी व्यक्ति का नाम लेने पर आपत्ति जता दी।
इसी बीच संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने नेता प्रतिपक्ष को नसीहत दे डाली। बस फिर क्या था—सियासी पारा उबल पड़ा। विपक्ष ने इसे असंसदीय शब्द बताते हुए कड़ा विरोध किया और मंत्री से माफी की मांग पर अड़ गया। जवाब में नेता प्रतिपक्ष ने भी तीखे शब्दों में पलटवार किया।
सदन का माहौल ऐसा बना कि राज्यपाल के अभिभाषण की चर्चा शोर में दब गई। आधे घंटे में तीन बार कार्यवाही स्थगित हुई और पूरे दिन में कुल सात बार सदन की कार्यवाही रोकनी पड़ी। विपक्ष ने आरोप लगाया कि यह आदिवासी समाज का अपमान है, जबकि सत्ता पक्ष इसे बयान की गलत व्याख्या बता रहा है।
सियासी गलियारों में चर्चा है कि अभिभाषण पर बहस कम और विवादित शब्द पर बहस ज़्यादा होती रही। जनता उम्मीद कर रही थी कि विकास, बजट और नीतियों पर सार्थक चर्चा होगी, लेकिन चौथे दिन की कार्यवाही शब्दों की तल्खी और आरोप-प्रत्यारोप के नाम रही।
अब देखना यह है कि अगली बैठक में चर्चा पटरी पर लौटती है या फिर सदन में सियासी तापमान यूं ही उबलता रहेगा।
हालांकि मामले का पटापेक्ष तब हो गया जब सीएम मोहन यादव ने ही बड़ा दिल दिखाते हुए माफी मांगी,, जिसके बाद सदन की कार्यवाही आगे बढ़ी |
