Sunday, March 29, 2026

बड़ी खबर! अब एक क्लिक में खत्म होगी पेंशन की परेशानी


भोपाल। मध्य प्रदेश के लाखों पेंशनर्स के लिए राहत भरी खबर है। राज्य सरकार ने पेंशन प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए नई गाइडलाइन जारी की है। नई व्यवस्था के लागू होने के बाद पेंशन से जुड़े काम अब डिजिटल माध्यम से “एक क्लिक” पर पूरे किए जा सकेंगे। सरकार के निर्देशानुसार 1 अप्रैल से पेंशन प्रकरणों का निपटारा सेंट्रलाइज्ड सेल के माध्यम से किया जाएगा। इससे अब पेंशनर्स को बार-बार जिला कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और उनकी फाइलों का निराकरण तेजी से हो सकेगा। नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक संभाग में अप्रूवल अधिकारी और क्रिएटर की नियुक्ति की गई है, जो पेंशन प्रकरणों की प्रोसेसिंग और स्वीकृति का काम देखेंगे। इससे कार्यप्रणाली में एकरूपता आएगी और अनावश्यक देरी पर रोक लगेगी। सरकार का उद्देश्य है कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों को समय पर पेंशन मिले और उन्हें किसी प्रकार की प्रशासनिक परेशानी का सामना न करना पड़े। इस डिजिटल और केंद्रीकृत सिस्टम से न सिर्फ पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि पेंशनर्स का समय और मेहनत भी बचेगी। नई पहल को प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है, जिससे प्रदेश के हजारों पेंशनर्स को सीधा लाभ मिलेगा।

एमपी बीजेपी के नेताओं को सौगात ,, एल्डरमैनो की घोषणा

भोपाल। मध्यप्रदेश में एल्डरमैन की बड़ी घोषणा हो गई है,25 जिलों के 123 नगर परिषदों में नियुक्ति की गई है, हर नगर परिषद में 4-4 एल्डरमैन तय किए गए है,कुल सैकड़ों पदों पर राजनीतिक नियुक्ति आखिर हो ही गई है, सरकार ने ी नामों की लिस्ट जारी कर दी है,चंबल और बुंदेलखंड की लिस्ट फिलहाल होल्ड की गई है,कुछ जिलों में नियुक्ति पर रोक से सस्पेंस बना हुआ है,संगठन और सरकार के बीच संतुलन साधने की कोशिश दिख रही है, निकाय राजनीति में चुनाव के पहले इसे बड़ा कदम।माना जा रहा है,स्थानीय नेताओं को बड़ा मौका दिया गया है...

Saturday, March 28, 2026

बड़ा फैसला, किसानों को बोनस देने जा रही सरकार

 


भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने किसानों के हित में बड़ा फैसला लेते हुए गेहूं उपार्जन को लेकर अहम घोषणा की है। अब किसानों को समर्थन मूल्य (MSP) के साथ बोनस भी दिया जाएगा, जिससे उन्हें उनकी उपज का बेहतर दाम मिल सकेगा। सरकार के अनुसार, प्रदेश के भोपाल, इंदौर, उज्जैन और नर्मदापुरम संभाग में 1 अप्रैल से गेहूं खरीदी शुरू होगी, जबकि बाकी जिलों में 7 अप्रैल से समर्थन मूल्य पर खरीदी की जाएगी। इस बार सरकार ने किसानों को राहत देते हुए प्रति क्विंटल 40 रुपए का बोनस देने का निर्णय लिया है। इससे किसानों की आमदनी में सीधा फायदा होने की उम्मीद है। बताया जा रहा है कि अब तक 19 लाख से ज्यादा किसान पंजीयन करा चुके हैं, जिससे साफ है कि इस बार बड़ी संख्या में किसान उपार्जन प्रक्रिया में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस फैसले को लेकर सोशल मीडिया पर लिखा कि “किसानों की मेहनत का सम्मान हमारी प्राथमिकता है” और सरकार हर संभव प्रयास कर रही है कि किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य मिल सके। सरकार के इस फैसले को किसानों के लिए बड़ी राहत और प्रोत्साहन के रूप में देखा जा रहा है। इससे न सिर्फ किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि कृषि क्षेत्र को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। कुल मिलाकर, गेहूं उपार्जन के इस फैसले से प्रदेश के लाखों किसानों को सीधा लाभ मिलने वाला है और यह सरकार की किसान हितैषी नीति को दर्शाता है।

पत्रकारों को लेकर संसद में गूंजी आवाज, जानें क्या है पूरा मामला?

 


भोपाल। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ कहे जाने वाले पत्रकारों की समस्याएं एक बार फिर संसद में गूंज उठीं। नर्मदापुरम-नरसिंहपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद दर्शन सिंह चौधरी ने पत्रकारों के अधिकार, सुरक्षा और सम्मान को लेकर गंभीर मुद्दे उठाए और सरकार से ठोस नीति बनाने की मांग की। सांसद ने संसद में कहा कि पत्रकार लोकतंत्र की रीढ़ हैं, लेकिन विडंबना यह है कि आज वही सबसे ज्यादा असुरक्षित और उपेक्षित वर्ग बनते जा रहे हैं। कई पत्रकार बिना किसी सुरक्षा कवच के जोखिम भरी परिस्थितियों में काम करते हैं, लेकिन उनके लिए न तो पर्याप्त बीमा सुविधा है और न ही स्थायी सामाजिक सुरक्षा। उन्होंने सरकार से “पत्रकार सुरक्षा एवं कल्याण नीति” बनाने की मांग की, जिसमें पत्रकारों को बीमा, स्वास्थ्य सुविधाएं, रेल यात्रा में छूट, बच्चों की शिक्षा में सहायता, आवास और अन्य संस्थागत सुविधाएं दी जा सकें। इसके साथ ही टोल प्लाजा पर भी छूट देने की बात कही गई, ताकि फील्ड में काम करने वाले पत्रकारों को राहत मिल सके। सांसद ने यह भी कहा कि सशक्त और स्वतंत्र पत्रकारिता ही मजबूत लोकतंत्र की असली नींव होती है। ऐसे में पत्रकारों को सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल देना सरकार की जिम्मेदारी है। लंबे समय बाद संसद में इस तरह से पत्रकारों के मुद्दे उठाए जाने से मीडिया जगत में उम्मीद जगी है। खासतौर पर छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में काम करने वाले पत्रकार, जो सीमित संसाधनों और ज्यादा जोखिम के साथ काम करते हैं, उनके लिए यह पहल बेहद अहम मानी जा रही है। अब देखना होगा कि सरकार इस मांग पर कितना गंभीरता से कदम उठाती है और क्या वाकई पत्रकारों को वह सुरक्षा और सम्मान मिल पाता है, जिसके वे हकदार हैं।

मध्यप्रदेश सरकार ने कर्मचारियों-पेंशनरों को दी बड़ी राहत

 


भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने कर्मचारियों और पेंशनरों को बड़ी राहत देते हुए कैशलेस स्वास्थ्य बीमा योजना लागू करने की तैयारी कर ली है। इस योजना के तहत प्रदेश के लाखों शासकीय कर्मचारी और पेंशनर अब बिना नकद भुगतान के इलाज की सुविधा ले सकेंगे। जानकारी के अनुसार, इस योजना में करीब 11 लाख से अधिक कर्मचारियों और पेंशनरों को शामिल किया जाएगा। इसके लिए सरकार द्वारा स्वास्थ्य बीमा का पूरा ढांचा तैयार किया जा रहा है, जिससे लाभार्थियों को बेहतर और आसान चिकित्सा सुविधाएं मिल सकें। योजना के तहत प्रत्येक कर्मचारी को मूल वेतन का एक प्रतिशत प्रति माह अंशदान करना होगा। इसके बदले उन्हें निर्धारित अस्पतालों में कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी। गंभीर बीमारियों और आपातकालीन स्थिति में भी इलाज आसान हो सकेगा। सरकार इस योजना को आयुष्मान भारत जैसी व्यवस्थाओं की तर्ज पर लागू करने की तैयारी में है। इसमें प्रदेश के सरकारी और निजी अस्पतालों को शामिल किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक लोगों को सुविधा मिल सके। बताया जा रहा है कि योजना के सफल संचालन के लिए आईटी सिस्टम, हेल्थ कार्ड और अस्पतालों की सूची तैयार की जा रही है। साथ ही इलाज की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए मॉनिटरिंग सिस्टम भी विकसित किया जाएगा। इस योजना के लागू होने से कर्मचारियों और पेंशनरों को इलाज के दौरान आर्थिक बोझ से राहत मिलेगी और उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी। सरकार का मानना है कि यह योजना प्रदेश के लाखों परिवारों के लिए सुरक्षा कवच साबित होगी और स्वास्थ्य सेवाओं तक उनकी पहुंच को और मजबूत करेगी।

Thursday, March 26, 2026

फिर खुलेंगी व्यापम की फाइलें? सुप्रीम कोर्ट सख्त



भोपाल/दिल्ली। बहुचर्चित व्यापम घोटाले को लेकर एक बार फिर मामला सुर्खियों में आ गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए सीबीआई और मध्यप्रदेश सरकार से जवाब मांगा है कि 320 पन्नों की शिकायत पर अब तक क्या कार्रवाई की गई। यह मामला पूर्व विधायक पारस सकलेचा की याचिका पर सामने आया है, जिसमें घोटाले से जुड़े कई बिंदुओं पर दोबारा जांच की मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्र और जस्टिस एनवी अंजरिया शामिल हैं, इस मामले की सुनवाई कर रही है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि जांच और चार्जशीट की स्थिति को लेकर विस्तृत एफिडेविट दाखिल किया जाए। इसके साथ ही कोर्ट ने यह जानना चाहा है कि इतनी बड़ी शिकायत पर अब तक क्या ठोस कार्रवाई हुई है। गौरतलब है कि इससे पहले इंदौर हाईकोर्ट इस याचिका को खारिज कर चुका है, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के बाद एक बार फिर व्यापम घोटाले की फाइलें खुलने की संभावना जताई जा रही है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 16 अप्रैल को होगी, जहां सीबीआई और राज्य सरकार को अपना पक्ष रखना होगा। इस घटनाक्रम के बाद यह माना जा रहा है कि अगर कोर्ट संतुष्ट नहीं होता है, तो व्यापम से जुड़े पुराने मामलों में फिर से जांच की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा सकता है।