Thursday, February 12, 2026

एमपी के दिग्गज मंत्रियों का किसने मांगा इस्तीफा!

भोपाल। मध्यप्रदेश की सियासत में बजट सत्र से ठीक पहले राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर मंत्रिमंडल के तीन वरिष्ठ सदस्यों—राजेंद्र शुक्ल, कैलाश विजयवर्गीय और विजय शाह—को पद से हटाने की मांग की है। पटवारी ने कहा है कि सरकार को नैतिक आधार पर कार्रवाई करते हुए इन मंत्रियों को तत्काल बर्खास्त करना चाहिए।

पत्र में उठाए गए आरोप

अपने पत्र में पीसीसी चीफ ने आरोप लगाया है कि जिन मुद्दों को लेकर सवाल उठ रहे हैं, उन पर सरकार स्पष्ट स्थिति नहीं ले पा रही है। उनका कहना है कि बजट सत्र जैसे महत्वपूर्ण सत्र से पहले सरकार को जवाबदेही और पारदर्शिता का संदेश देना चाहिए। पटवारी ने यह भी कहा कि यदि सरकार कार्रवाई नहीं करती है तो विपक्ष विधानसभा में इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाएगा।

सियासी बयानबाजी और संभावित असर

इधर, इस मांग को लेकर सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई है। कांग्रेस इसे नैतिकता और जवाबदेही का सवाल बता रही है, जबकि सत्तारूढ़ दल की ओर से अभी तक औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। माना जा रहा है कि बजट सत्र के दौरान यह मुद्दा विधानसभा में गर्मा सकता है और सत्ता-विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल सकती है।



लेबर कोड को लेकर हंगामा: आखिर क्या बदला, किस बात पर नाराज़ हैं ट्रेड यूनियन?

भोपाल। देशभर में आज नए लेबर लॉ (लेबर कोड्स) के विरोध में व्यापक प्रदर्शन और हड़ताल देखने को मिली। केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर आयोजित इस आंदोलन का असर भोपाल सहित कई बड़े शहरों में दिखाई दिया, जहां कर्मचारी संगठनों ने रैली और धरना प्रदर्शन किए। कुछ स्थानों पर बैंकिंग सेवाएं, सरकारी दफ्तर और परिवहन व्यवस्था आंशिक रूप से प्रभावित रहे। मजदूर संगठनों का आरोप है कि नए श्रम कानून कामगारों के अधिकारों को कमजोर करते हैं, जबकि सरकार इन्हें श्रम सुधार की दिशा में बड़ा और जरूरी कदम बता रही है।

क्या है नए लेबर कोड 

केंद्र सरकार ने पुराने 29 श्रम कानूनों को समाहित कर चार नए लेबर कोड तैयार किए हैं, जिनमें वेतन, औद्योगिक संबंध, सामाजिक सुरक्षा और कार्यस्थल सुरक्षा से जुड़े प्रावधान शामिल हैं। सरकार का कहना है कि इससे कानूनों की जटिलता कम होगी और रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा। हालांकि ट्रेड यूनियनों का दावा है कि नए प्रावधानों से कंपनियों को कर्मचारियों की नियुक्ति और छंटनी में अधिक छूट मिल सकती है, जिससे नौकरी की स्थिरता पर असर पड़ेगा और श्रमिक संगठनों के अधिकार सीमित हो सकते हैं।

यूनियन ट्रेड की मांग

प्रदर्शनकारी संगठनों की मुख्य मांगों में नए लेबर कोड को वापस लेने, नौकरी की सुरक्षा सुनिश्चित करने, सभी श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन लागू करने, हड़ताल और संगठन के अधिकार की रक्षा तथा ठेका प्रथा पर नियंत्रण शामिल है। कुछ संगठनों ने पुरानी पेंशन योजना की बहाली और महंगाई पर नियंत्रण की मांग भी उठाई है। यूनियनों ने संकेत दिया है कि यदि सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक कदम नहीं उठाती, तो आंदोलन को और तेज किया जा सकता है, जिससे श्रम सुधार को लेकर सरकार और संगठनों के बीच टकराव बढ़ने की संभावना बनी हुई है।


Wednesday, February 11, 2026

परिवीक्षा अवधि को लेकर अब शिक्षक पहुंचे हाईकोर्ट

*तीन साल परिवीक्षा अवधि और 70-80-90% वेतनमान के विधेयक को हाइकोर्ट में चुनौती, सरकार देगी 4 हफ्तों में जवाब।* आज दिनांक 11-02-2026 मंगलवार को हाईकोर्ट में एक अहम मुद्दे पर सुनवाई हुई। तीन साल परिवीक्षा अवधि और 70-80-90% वेतनमान व्यवस्था लागू करने वाले विधेयक को याचिका "आनन्द कुमार मिश्रा बनाम मध्यप्रदेश सरकार* द्वारा चुनौती दी गई। समान कार्य समान वेतनमान के सिद्धांत को आधार बनाकर मध्यप्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग एवं जनजातीय कार्य विभाग के 1070 शिक्षकों ने श्री आनन्द कुमार मिश्रा के निर्देशन में एकजुट होकर एडवोकेट श्री राहुल दिवाकर के माध्यम से मध्यप्रदेश सरकार द्वारा 2019 में लागू की गई वेतन कटौती व्यवस्था को कानूनी रूप से असंवैधानिक और अमानवीय बताते हुए आज जबलपुर हाईकोर्ट में माननीय मुख्य न्यायाधीश की डिवीजन बेंच में अपना पक्ष रखा। याचिका को सुनने के उपरांत माननीय मुख्य न्यायाधीश ने मध्यप्रदेश सरकार को अपना जवाब दाखिल करने के लिए 4 हफ्तों का समय दिया है। और जवाब दाखिल होने के उपरांत अगली सुनवाई 20 अप्रैल 2026 को नियत की गई है। आपको बताते चलें कि ये समस्त 1070 शिक्षक 2018 में विज्ञपित भर्ती के माध्यम से चयन होने के उपरांत मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों में कार्यरत है। इनकी भर्ती का विज्ञापन सितंबर 2018 में तत्कालीन शिवराज सिंह चौहान सरकार द्वारा जारी किया गया था। परीक्षा और परिणाम जारी होने के उपरांत 2019 में कमलनाथ सरकार ने बीच भर्ती में परिवीक्षा अवधि तीन साल करते हुए 70-80-90% (क्रमशः प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय वर्ष) वेतनमान व्यवस्था लागू कर दी गई। और संबंधित शिक्षकों को इन्हीं नए नियमों के अंतर्गत वेतनमान व्यवस्था के अनुसार वेतन दिया गया। जबकि कई मामलों में सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश है कि एक बार भर्ती शुरू होने के बाद भर्ती के नियम नहीं बदले जा सकते हैं। मध्यप्रदेश सरकार ने ऐसे आदेशों को ताक पर रखते हुए शिक्षक भर्ती 2018 में 70-80-90% वेतनमान और तीन साल परिवीक्षा अवधि का नियम लागू किया है। शिक्षकों द्वारा इन्हीं समस्त बिंदुओं को हाईकोर्ट में प्रस्तुत करते हुए अपना पक्ष रखा और हाईकोट ने मध्यप्रदेश सरकार को 4 हफ्तों में अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी किया है। इसी तरह के एक अन्य मामले में हाईकोर्ट सामान्य प्रशासन विभाग के 70-80-90% वेतनमान और तीन साल परिवीक्षा अवधि संबंधित जारी आदेश दिनांक 12/12/2019 को रद्द कर चुका है। इसी आदेश को आधार बनाकर समस्त विभागों ने अपने विभागीय राजपत्र जारी कर 70,80,90% वेतनमान व्यवस्था लागू की थी। परन्तु 12/12/2019 के आदेश के रद्द होने के बावजूद भी सरकारी विभागों ने कर्मचारियों को 70,80,90% वेतनमान व्यवस्था में बनाए रखना जारी रखा हुआ है। जिससे कर्मचारियों को बार बार उच्च न्यायालय की शरण लेनी पड़ रही है। उम्मीद है कि इस याचिका के माध्यम से इन शिक्षकों को इनका हक (नियुक्ति दिनांक से 100% वेतन एवं ब्याज सहित एरियर्स की राशि) माननीय हाईकोर्ट द्वारा प्रदान किया जायेगा।

Tuesday, February 10, 2026

बीजेपी जिला प्रभारी होंगे सब पर भारी

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खण्डेलवाल एवं क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल ने मंगलवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में संभाग एवं जिला प्रभारियों की बैठक को संबोधित किया। बैठक में जिलाप्रभारी को कहा गया कि वह महीने में काम से कम तीन बार अपने प्रभार के जिलों का दौरा करें,, अजय जमवाल ने स्पष्ट रूप से प्रभारी को कहा कि अगले चुनाव में आपकी भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी... भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा की हर चुनाव में टिकट वितरण में प्रभारीयो की भूमिका महत्वपूर्ण होगी...

मोहन कैबिनेट की बैठक संपन्न , कृषि कैबिनेट होगी बालाघाट में

मोहन कैबिनेट की महत्वपूर्ण बैठक में मंगलवार को बेहद महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए,कैबिनेट बैठक में तय हुआ है कि अगली कृषि कैबिनेट बैठक बालाघाट में आयोजित की जाएगी।यह कैबिनेट बालाघाट क्षेत्र के समग्र विकास में नई भूमिका निभाएगी। एक अन्य महत्व्पूर्ण निर्णय ने तय हुआ कि जहां चिड़ियाघर (जू) बनाए जाते हैं, वहीं एक रेस्क्यू सेंटर भी बनाया जाएगा, ताकि घायल पशुओं का उपचार कर उन्हें स्वस्थ होने तक जू परिसर में रखा जा सके। इसके अलावा इन प्रस्तावों को भी मिली मंजूरी गेहूं पंजीयन की तिथि 7 फरवरी से 7 मार्च निर्धारित की गई है। वर्ष 2026–27 के लिए केंद्र सरकार द्वारा घोषित ₹2585 प्रति क्विंटल एमएसपी, पिछले वर्ष से ₹160 अधिक है। * समर्थन मूल्य पर विक्रय का भुगतान किसानों के आधार-लिंक्ड बैंक खातों में प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। * टीबी उन्मूलन में मध्य प्रदेश देश के शीर्ष पांच राज्यों में शामिल हो गया है। सिकल सेल के लिए व्यापक स्क्रीनिंग और उपचार सुविधाएं विकसित की गई हैं। * गुड़ी पड़वा पर्व को पूरे प्रदेश में उत्साहपूर्वक मनाने का निर्णय लिया गया है। * मध्य प्रदेश की नई पेंशन योजना में तलाकशुदा पुत्री को भी शामिल करने का प्रावधान किया गया है। * उच्च न्यायालय में कंप्यूटर ऑपरेटर सहित संबंधित संवर्गों की आयु सीमा में 5 वर्ष की वृद्धि कर इसे 45 वर्ष किया गया है। * आहार अनुदान योजना, एकीकृत छात्रावास योजना और सीएम राइज स्कूल सहित सभी योजनाओं की निरंतरता को स्वीकृति दी है।

भोपाल में चयनित शिक्षकों का बवाल, पहले प्रदर्शन फिर भूख हड़ताल, अब कराया मुंडन


भोपाल। शिक्षक भर्ती को लेकर मध्यप्रदेश में चयनित अभ्यर्थियों का आक्रोश सड़कों पर दिखाई दे रहा है। राजधानी भोपाल में भूख हड़ताल पर बैठे चयनित अभ्यर्थियों ने मंगलवार को मुंडन कराकर विरोध जताया। आंदोलन लगातार दूसरे दिन भी जारी है।

पैदल मार्च निकालकर DPI कार्यालय का घेराव

सोमवार को अभ्यर्थियों ने पैदल मार्च निकालते हुए लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) कार्यालय का घेराव किया था। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि प्रदेश में शिक्षकों की भारी कमी होने के बावजूद भर्ती प्रक्रिया में पदों की संख्या कम रखी गई है।

हजारों पद खाली, भर्ती सीमित

जानकारी के अनुसार फिलहाल कुल 13 हजार पदों पर भर्ती प्रक्रिया चल रही है। इनमें लगभग 10 हजार पद माध्यमिक शिक्षक के और करीब 3 हजार पद प्राथमिक शिक्षक के हैं। अभ्यर्थियों का आरोप है कि यह संख्या जरूरत के मुकाबले बेहद कम है और भर्ती परीक्षाएं ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रही हैं।

25 हजार पदों पर भर्ती की मांग

चयनित अभ्यर्थी भर्ती पदों की संख्या बढ़ाकर 25 हजार करने की मांग कर रहे हैं। साथ ही भर्ती प्रक्रिया का दूसरा चरण जल्द शुरू करने की मांग भी प्रमुख रूप से उठाई जा रही है।

अर्धनग्न होकर जताया विरोध

सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए अभ्यर्थियों ने अर्धनग्न होकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, उनका आंदोलन जारी रहेगा।