Tuesday, February 24, 2026

मोहन कैबिनेट के बड़े फैसले

मोहन कैबिनेट की आज की बैठक किसानों के मुद्दे पर फोकस रही,, एक तरफ जहा मंगलवार को कांग्रेस किसान महाचौपाल लगा रही थी ,, वही विधानसभा में हुई मोहन कैबिनेट की बैठक में किसानों के लिए जमकर खुशखबरी आई.. ये रहे मोहन कैबिनेट के बड़े फैसले *मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक में लिए गए निर्णय-* * किसान कल्याण वर्ष में कृषकों के लिए लगभग 10 हजार 500 करोड़ रूपये की 5 योजनाओं की निरंतरता की स्वीकृति * पीएम राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के लिए 2,014 करोड़ 83 लाख रूपये की स्वीकृति * प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना में "पर ड्रॉप-मोर-क्रॉप" के लिए 2,393 करोड़ 97 लाख रूपये की स्वीकृति * राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन के लिए 3,285 करोड़ 49 लाख रूपये की स्वीकृति * नेशनल मिशन ऑन नेचरल फार्मिंग के लिए 1011 करोड़ 59 लाख रूपये की स्वीकृति * राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन ऑयल सीड के लिए 1,793 करोड़ 87 लाख रूपये स्वीकृत * भावांतर योजना में सरसों उपार्जन की स्वीकृति * खनिज अन्वेषण एवं विकास हेतु भवन निर्माण के लिए 34 करोड़ 2 लाख रूपये की स्वीकृति * मध्यप्रदेश प्रशासनिक पुनर्गठन आयोग के प्रावधानों के परिवर्तन की स्वीकृति

Monday, February 23, 2026

सीएम मोहन यादव की किसानों के लिए बड़ी घोषणा

*भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वर्तमान में चल रहे विधानसभा सत्र के दौरान सोमवार को सदन में कृषक कल्याण वर्ष 2026 पर वक्तव्य दिया। उन्होंने कहा कि किसानों का सशक्तिकरण ही हमारे प्रदेश के सर्वांगीण विकास की आधारशिला है। इसी संकल्प के साथ हमारी सरकार ने वर्ष 2026 को "कृषक कल्याण वर्ष" के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कृषक कल्याण वर्ष में हम किसानों को 'अन्नदाता' के साथ-साथ 'ऊर्जादाता' और 'उद्यमी' भी बनाने की दिशा में बढ़ रहे हैं। किसान खुशहाल होंगे, तभी "समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश" का सपना साकार होगा। सरकार की यह पहल न केवल मध्यप्रदेश को देश का खाद्य भंडार बनाए रखेगी, वरन् इसे एक वैश्विक एग्री-एक्सपोर्ट हब (ग्लोबल एग्री-एक्सपोर्ट हब) के रूप में भी स्थापित करेगी। *भावान्तर योजना-सरसों वर्ष 2026* मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सदन को बताया कि इस वर्ष सरसों के रकबे में पूर्व वर्ष की तुलना में लगभग 28 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और द्वितीय अग्रिम अनुमान अनुसार अनुमानित उत्पादन 15.71 लाख मीट्रिक टन है। कृषि उपजों के लिए सरकार की मूल्य नीति का उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करना है, ताकि प्रदेश में सरसों के उत्पादन को प्रोत्साहन मिल सके। उन्होंने कहा कि वर्तमान में सरसों की माह जनवरी की औसत मण्डी दरें 6000 रूपए प्रति क्विंटल हैं तथा सरसों का भारत सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 6200 रूपए प्रति क्विंटल हैं। इसी तारतम्य में सरसों का उपार्जन भारत सरकार की प्राइस डिफिसिट पेमेंट स्कीम (भावांतर योजना) के नियत प्रावधानों अनुसार एवं पात्रता के अनुसार कृषकों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने का निर्णय हमारी सरकार ने लिया है। इसी संदर्भ में भारत सरकार को विधिवत् प्रस्ताव भी भेज दिया गया है। इस योजना अंतर्गत एफएक्यू सरसों को न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम राशि मिलने की प्रतिपूर्ति के लिए एक योजना प्रस्तावित की गई है। भावांतर योजना अन्तर्गत पंजीकृत किसानों के सरसों के रकबे एवं राज्य की औसत उत्पादकता के मान से उनकी पात्रतानुसार भुगतान किया जायेगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि पूरे देश में भावांतर योजना- सोयाबीन का सफल क्रियान्वयन एकमात्र मध्यप्रदेश सरकार द्वारा ही किया गया है। भावांतर योजना सोयाबीन के अंतर्गत लगभग 6.86 लाख किसानों के बैंक खातों में लगभग 1492 करोड़ रूपए डीबीटी के जरिए सीधे हस्तांतरित किए गए हैं। सरसों की फसल में भावांतर की राशि भी किसानों के बैंक खातों में डीबीटी के जरिए मंडी बोर्ड द्वारा अंतरित किए जाएंगे। इस राशि की प्रतिपूर्ति प्रथमतः राज्य मूल्य स्थिरीकरण कोष से की जायेगी। *उड़द प्रोत्साहन योजना-वर्ष 2026* मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सदन को बताया कि हम किसानों को मूंग के स्थान पर उड़द का उत्पादन बढ़ाने की दिशा में प्रयासरत हैं। मध्यप्रदेश में दलहनी फसलों के संतुलित उत्पादन, किसानों की आय में वृद्धि, फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने एवं ग्रीष्मकालीनमूंग फसल का अधिक उत्पादन के कारण उत्पन्न उपार्जन तथा विपणन समस्याओं के निराकरण की चुनौतियों के दृष्टिगत उड़द की ग्रीष्मकालीन फसल पर हमारी सरकार द्वारा प्रति किसान 600 रूपए प्रति क्विंटल बोनस के रूप में देने का निर्णय लिया जा रहा है। मूंग की जगह उड़द उगाने को प्रोत्साहित करने के लिए यह प्रोत्साहन राशि न्यूनतम समर्थन मूल्य के अतिरिक्त दी जायेगी। *चना, मसूर एवं तुअर का उपार्जन प्रस्ताव* मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सदन में कहा कि प्रदेश में चना एवं मसूर की फसल का प्राइस सपोर्ट स्कीम के अंतर्गत चने के लिए 6.49 लाख मीट्रिक टन एवं मसूर के लिए 6.01 लाख मीट्रिक टन उपार्जन का प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा गया है। उन्होंने बताया कि तय न्यूनतम समर्थन मूल्य पर चना एवं मसूर के उपार्जन के लिए 24 मार्च से 30 मई 2026 तक की अवधि प्रस्तावित की गई है। इसके लिए 20 फरवरी से 16 मार्च 2026 तक किसानों के पंजीयन की कार्यवाही फिलहाल प्रचलन में है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में खरीफ फसल तुअर का प्राइस सपोर्ट स्कीम अंतर्गत केन्द्रीय एजेंसियों (नाफेड एवं एनसीसीएफ) द्वारा सीधे उपार्जन के लिए 1.31 लाख मीट्रिक टन का प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार किसानों की बेहतरी के लिए हर जरूरी कदम उठा रही है। किसानों को सिंचाई के लिए भरपूर मात्रा में बिजली, पानी और कृषि ऋण मुहैया कराने के साथ-साथ उन्हें फसल विविधीकरण अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।

इस बात से नाराज है उपनेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे! इस्तीफा देने की बताई वजह

भोपाल। मध्यप्रदेश की सियासत में उस वक्त हलचल तेज हो गई जब उप नेता प्रतिपक्ष पद से इस्तीफे को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच कांग्रेस विधायक हेमंत कटारे ने खुलकर अपनी बात रखी। कटारे ने दो टूक कहा कि उन्होंने अपना इस्तीफा संगठन को भेजा था और अब तक वापस नहीं लिया है। उन्होंने बताया कि त्यागपत्र कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को भेजा गया है और पार्टी जो भी फैसला करेगी, वह उन्हें मंजूर होगा। उनके इस बयान के बाद सियासी गलियारों में चर्चाओं का दौर और तेज हो गया है।

सदन में ठुकराया गया स्थगन प्रस्ताव

कटारे ने अपनी नाराजगी भी जाहिर की। उन्होंने कहा कि सदन में स्थगन प्रस्ताव लाने के लिए उन्होंने रातभर तैयारी की, लेकिन जब वक्त आया तो प्रस्ताव को स्वीकार ही नहीं किया गया। उन्होंने तल्ख अंदाज में सवाल उठाया—क्या सदन सरकार के इशारे पर चलेगा? क्या विपक्ष की आवाज को दबाया जा रहा है? हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि नेता प्रतिपक्ष से उनका कोई विवाद नहीं है और वे उन्हें अपना बड़ा भाई मानते हैं।

बीजेपी विधायक को कांग्रेस ज्वाइन की कही बात

बीजेपी से ऑफर की चर्चाओं पर भी कटारे ने चुटीला अंदाज अपनाया। उन्होंने बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा पर तंज कसते हुए कहा कि पहले वे कहते थे पार्टी में वैकेंसी है, अब कह रहे हैं कि कोई वैकेंसी नहीं है। कटारे ने पलटवार करते हुए कहा—अगर शर्मा चाहें तो कांग्रेस के दरवाजे खुले हैं, उनका स्वागत है। यहां तक कि 2028 में उन्हें कांग्रेस मंत्री भी बनाया जा सकता है।

कटारे के इस बयान ने साफ कर दिया है कि मामला सिर्फ इस्तीफे तक सीमित नहीं, बल्कि इसके पीछे सियासी संदेश भी छिपा है। अब सबकी नजरें पार्टी नेतृत्व के अगले कदम पर टिकी हैं।

30 सेकेंड का खूनी खेल: 27 वार कर नाबालिगों ने मचाई सनसनी

भोपाल। राजधानी में नाबालिगों की बढ़ती हिंसा एक बार फिर चिंता का विषय बन गई है। टीला जमालपुरा थाना क्षेत्र में 16 फरवरी को स्नूकर क्लब के भीतर दो नाबालिगों ने 10वीं कक्षा के एक छात्र पर चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। अब इस वारदात का सीसीटीवी फुटेज सामने आया है, जिसमें दिख रहा है कि महज 30 सेकेंड के भीतर छात्र पर 27 वार किए गए।

हमले में छात्र के एक हाथ की दो उंगलियां कट गईं, जबकि दूसरे हाथ में भी गंभीर चोट आई है। जानकारी के मुताबिक, कुछ दिन पहले छात्र और आरोपियों के बीच विवाद हुआ था, जिसका बदला लेने के लिए इस घटना को अंजाम दिया गया। घायल छात्र का इलाज जारी है और उसकी हालत पर डॉक्टर नजर बनाए हुए हैं।

वारदात के बाद आरोपियों ने फिल्मी गाना लगाकर अपना वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, जिससे साफ है कि वे इलाके में अपना खौफ जमाना चाहते थे। पुलिस ने दोनों नाबालिगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है, लेकिन परिजनों का आरोप है कि केस मामूली धाराओं में दर्ज किया गया है। फिलहाल पुलिस सीसीटीवी के आधार पर आगे की जांच कर रही है।

Sunday, February 22, 2026

Good News नन्हे कदमों की आहट से कूनो में गूंजी दहाड़


श्योपुर। मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से एक बार फिर बड़ी खुशखबरी सामने आई है। दक्षिण अफ्रीका से लाई गई मादा चीता गामिनी ने तीन शावकों को जन्म दिया है। पार्क प्रबंधन के अनुसार तीनों शावक पूर्ण रूप से स्वस्थ हैं और लगातार निगरानी में रखे गए हैं।

यह उपलब्धि एक बार फिर देश में चीतों के पुनर्वास अभियान को मजबूती देती नजर आ रही है। ताजा जन्म के बाद कूनो में शावकों की संख्या बढ़कर 27 हो गई है। वहीं कूनो में कुल चीतों की संख्या अब 35 हो गई है। गांधीसागर सहित पूरे भारत में चीतों का आंकड़ा बढ़कर 38 तक पहुंच गया है।

वन विभाग के अधिकारियों ने इसे संरक्षण की दिशा में सकारात्मक संकेत बताया है। कूनो में लगातार बढ़ती संख्या से यह स्पष्ट है कि यहां का वातावरण चीतों के अनुकूल साबित हो रहा है।




बदलते एमपी की बदलती सियासत,, फूलों की जगह पत्थर फेंकते नेता

सियासत की ये नई अदा तो देखिए फूल नहीं अब पत्थर फेंकिए.. कहते है कि वक्त के साथ साथ रीत भी बदलती है,, लेकिन इस तरह बदलती है ,ये किसी ने भी नहीं सोचा होगा,, भारतीय जनता युवा मोर्चा के नए अध्यक्ष बने हैं श्याम टेलर ,,और इनकी अगुवाई में कल जो पीसीसी कार्यालय पर हुआ वो बता रहा है कि अनुशासन की मिसाल देने वाली पार्टी की युवा तरुणाई किस दिशा में जा रही है,, ये भूल रहे हैं कि हम एमपी में रहते हैं,, बिहार और यूपी में नहीं...एमपी पुलिस भी अजब गजब नहीं है,, कांग्रेसी प्रदर्शन करने निकले तो पीसीसी के आसपास ही बैरिकेटिंग करके रोक दिया जाता है लेकिन बीजेपी कार्यकर्ताओं को कांग्रेस दफ्तर तक पहुंचने ही नहीं दिया गया ,बल्कि वो उत्पात करते रहे,और पुलिस तमाशबीन बनी रही,, वैसे कमजोर होती कांग्रेस को भी जागना होगा क्योंकि अब उनकी घर में घुसकर पिटाई हो रही है... तुम्हारे कदमों के नीचे जमीन नहीं कमाल है तुम्हे अब भी यकीन नहीं मैं इन बेपनाह अंधेरों को सुबह कैसे कहूं मैं इन नजारों का अंधा तमाशबीन नहीं अनुराग @highlight Indian National Congress - Madhya Pradesh BJP Madhya Pradesh