Wednesday, February 4, 2026

गेहूं का पैसा चाहिए? तो 7 फरवरी से पहले जरूर सुधार लें ये गलती




भोपाल। मध्यप्रदेश में रबी सीजन के तहत समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं खरीदी के लिए किसानों का पंजीयन 7 फरवरी 2026 से शुरू होगा, जो 7 मार्च 2026 तक चलेगा। राज्य आपूर्ति निगम के नियमों के अनुसार, पंजीयन के समय किसान के आधार कार्ड और खसरा (भूमि रिकॉर्ड) में नाम और उसकी स्पेलिंग बिल्कुल एक जैसी होना जरूरी है। अगर नाम में कोई अंतर है, तो किसान को पहले तहसील कार्यालय से सत्यापन कराना होगा।


जांच के लिए डाले जाएंगे ₹1 

खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के निर्देश पर इस बार पंजीयन के दौरान ही किसानों के आधार से जुड़े बैंक खाते में 1-1 रुपये भेजकर वेरिफिकेशन किया जाएगा। इसका मकसद यह है कि बाद में गेहूं का भुगतान करते समय कोई तकनीकी समस्या न आए।


किसानों की सुविधा के लिए पंजीयन दो श्रेणियों में किया जाएगा

मुफ्त पंजीयन केंद्र:

- ग्राम पंचायत

- जनपद पंचायत

- तहसील कार्यालय

- सहकारी समिति


शुल्क वाले केंद्र:

- MP ऑनलाइन कियोस्क

- CSC सेंटर

- लोक सेवा केंद्र

- साइबर कैफे

यहां अधिकतम ₹50 शुल्क लिया जाएगा।


गेहूं का MSP बढ़ा

इस बार गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2585 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है, जो पिछले साल के मुकाबले 160 रुपये ज्यादा है। पूरे प्रदेश में 3186 खरीदी केंद्र बनाए गए हैं।


इन खातों में नहीं होगा भुगतान

गेहूं की राशि सीधे किसान के आधार-लिंक बैंक खाते में दी जाएगी।

इन खातों में भुगतान नहीं होगा—

- संयुक्त खाता

- निष्क्रिय खाता

- फिनो, एयरटेल, पेटीएम जैसे पेमेंट बैंक खाते

अगर आधार से मोबाइल नंबर या बैंक खाता लिंक नहीं है, तो किसान समय रहते आधार केंद्र, बैंक या पोस्ट ऑफिस में अपडेट करा लें।


 पंजीयन के लिए जरूरी दस्तावेज

- मूल आधार कार्ड (आधार से मोबाइल नंबर लिंक होना जरूरी)

- वोटर आईडी या अन्य पहचान पत्र

- खसरा-खतौनी / भूमि रिकॉर्ड

- सिकमी या बटाईदार किसानों के लिए अनुबंध पत्र

- वन पट्टाधारी किसानों के लिए पट्टे का प्रमाण

- बैंक पासबुक (नाम और IFSC कोड साफ दिखना चाहिए)

Tuesday, February 3, 2026

मोहन-शिवराज की मुलाकात,, क्या बनेगी बात

केंद्रीय कृषि मंत्री और मध्य प्रदेश के पूर्वमुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान आज भोपाल में मुख्यमंत्री मोहन यादव से मुलाकात करने पहुंचे ,केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने एमपी को मिलने वाली बड़ी राशि रोक रखी है,,, और वित्तीय वर्ष खत्म होने जा रहा है,, ये स्थिति दोनों बड़े नेताओं के आपसी टकराव से बनी है ,,जिसके बाद एमपी बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल सक्रिय हुए है,, वो रायसेन सांसद खेल महोत्सव में पहुंचे और पूर्व सीएम से चर्चा की जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए है ,,जिसके बाद ही शिवराज सीएम हाउस पहुंचे और मुख्यमंत्री मोहन यादव से चर्चा की ,,माना जा रहा है अब मध्य प्रदेश का केंद्रीय कृषि मंत्रालय द्वारा रोका गया पैसा जल्द मिल जाएगी,, उल्लेखनीय है कि अब वित्तीय वर्ष भी खत्म होने वाला है ऐसे में राज्य सरकार को जल्द से जल्द पैसा मिलने की दरकार है!

किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी, मोहन कैबिनेट में हुआ बड़ा फैसला, मिलने जा रही ये सौगात

 


भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार 2026 को कृषि वर्ष के रूप में मना रही है। इसी कड़ी में किसानों के हित में आज मोहन कैबिनेट ने बड़ा फैसला लिया है। जिससे प्रदेश के किसानों के चेहरे खिल उठें है। प्रदेश सरकार ने भावांतर योजना को पूरी तरह से लागू करने के निर्देश दिए है। इस योजना के तहत प्रदेश सरकार 2 महीने के अंदर तत्काल भुगतान करने की भी बात कही गई है। 


7 लाख से ज्यादा किसानों को हुआ भुगतान

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी कैबिनेट मंत्री चैतन्य काश्यप ने देते हुए बताया कि सरकार की भावांतर योजना के तहत करीब 7 लाख किसानों को 15 हजार करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। यह भुगतान किसानों को दो महीने के भीतर किया गया है। मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य है जिसने भावांतर योजना को पूर्णता लागू किया। प्रदेश सरकार द्वारा भावांतर योजना का भुगतान तत्काल 2 माह के अंदर किया गया।


भावांतर भुगतान योजना क्या है?

मध्यप्रदेश में भावांतर भुगतान योजना का मुख्य लाभ ऐसे किसानों को दिया जाता है जो सोयाबीन या अन्य फसलों की कीमत मंडी में न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम हो जाती है, तो सरकार MSP और विक्रय मूल्य के अंतर की राशि को सीधे किसानों के बैंक खातों में जमा करती है। इससे किसानों को फसल बेचने पर उचित मूल्य सुनिश्चित होता है और उन्हें घाटे से सुरक्षा मिलती है, जिससे उनकी आय में स्थिरता आती है।


प्रदेश को मिली ये सौगात

कैबिनेट मंत्री चैतन्य काश्यप ने जानकारी देते हुए आगे बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 29 जनवरी को महाकाल लोक की तर्ज पर पशुपतिनाथ लोक का लोकार्पण किया गया। प्रदेश ने पहली बार भोपाल में 30 जनवरी को पुष्प महोत्सव आयोजित किया। यह केवल फूलों की प्रदर्शनी नहीं बल्कि फूलों के माध्यम से मध्य प्रदेश के किसानों की आमदनी बढाने का एक उत्सव था।


बैठक में लिए गए ये फैसले

सरदार सरोवर परियोजना से विस्थापित आदिवासी बंधुओं के 25,602 परिवारों को पूर्व में आवासीय पट्टे प्रदान किए गए थे, जिनकी रजिस्ट्री नहीं हो सकी थी। अब सरकार द्वारा इन सभी आवासों की रजिस्ट्री निःशुल्क कराने का निर्णय लिया गया है। कैबिनेट में 2 सिंचाई परियोजनाओं (धनवाही और बरही) को स्वीकृति दी गई है। वर्ष 2026-27 से लेकर 2030-31तक के लिए कई विभागों की विभिन्न योजनाओं की निरंतरता का निर्णय लिया गया। राज्य समाज कल्याण बोर्ड के कर्मचारियों को महिला एवं बाल विकास में विलय करने की स्वीकृति मिली।

केंद्रीय बजट में MP की बल्ले-बल्ले, CM यादव ने बताया खास, जानें प्रदेश को क्या-क्या मिला...

भोपाल। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक फरवरी रविवार को यूनियन बजट 2026-27 पेश किया। जिसके बाद बजट को लेकर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार को प्रेस कांफ्रेंस की। इस पीसी में सीएम डॉ. मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने इसको दूरदर्शी और सभी वर्गों के लिए उपयोगी बताया। 


बजट में भविष्य की तैयारी 

सीएम ने जानकारी देते हुए बताया कि मध्य प्रदेश में बेरोजगारी की दर घटकर डेढ़ प्रतिशत तक रह गई है और तेजी से इसमें सुधार हो रहा है। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय बजट पर कहा है कि मध्य प्रदेश और केंद्र सरकार का बजट एक आत्मा से तालमेल करते हुए चल रहा है। बजट में निवेशकों के विश्वास को कायम रखने का काम किया गया है। केंद्रीय बजट सिर्फ कागजीकरण नहीं है बल्कि भविष्य को लेकर तैयार किया गया प्लान है।


यूनियन बजट में मध्यप्रदेश को क्या मिला?

मुख्यमंत्री ने यूनियन बजट का उल्लेख करते हुए कहा कि बजट में मध्यप्रदेश को 15 हजार करोड़ की रेल योजनाएं मिली है। हेल्थ टूरिज्म के क्षेत्र में प्रदेश को और काम करने का और मौका मिलेगा। मुख्यमंत्री ने केंद्रित बजट को पर्यटन के लिहाज से प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण बताया। जिससे भोपाल, जबलपुर, इंदौर जैसे शहरों के लिए अब और ज्यादा पैसा मिलेगा। 


विकसित भारत की दिशा तय करेगा बजट

बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खण्डेलवाल ने बजट को लेकर कहा कि केंद्रीय बजट आने वाले 10 वर्षों में भारत के विकास की दिशा तय करेगा। जिन क्षेत्रों में दुनिया के केवल दो-तीन देशों का दबदबा है, उन रणनीतिक उत्पादों के निर्माण पर बजट में विशेष ध्यान दिया गया है। बजट में पहली बार अलग माल गाड़ी कॉरिडोर बनाने की बात की गई है, जिससे लॉजिस्टिक्स खर्च कम होगा और व्यापार बढ़ेगा।


एमपी का घटा बजट!

केंद्र के बजट को लेकर पूरे देश में बीजेपी बड़े चेहरों के सहारे बजट की विशेषताएं बता रही है, इसी कड़ी में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने बजट की विशेषताएं बताई जरूर,लेकिन मध्य प्रदेश के लिए मिलने वाली राशियों में हुई कटौती सरकार के लिए चुनौती जरूर रहेगी।

Saturday, November 22, 2025

एमपी बीजेपी की तीन नई नियुक्तियां खड़े करती कई सवाल !

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की टीम में तीन नई नियुक्तियां की गई हैं। यह नियुक्तियां साफ दर्शा रही है की लगातार पार्टी पर सत्ता हावी होते जा रही है निगम मंडल के दावेदारों को पार्टी में नए पदों का सृजन करके रेस से बाहर कर दिया गया है,, वही खंडेलवाल के कई करीबी और मेहनतकश पार्टी के चेहरे अब भी जिम्मेदारी की राह टक रहे हैं,,
हेमंत की टीम में प्रदेश कार्यालय व्यवस्था प्रभारी, प्रदेश मोर्चा प्रभारी और प्रदेश प्रकोष्ठ प्रभारी की नई जिम्मेदारी तीन पार्टी नेताओं को सौंपी गई है। उधर एक अन्य मामले में बीजेपी ने देवास जिले के पार्टी पदाधिकारी प्रीतम सिंह सोलंकी को पार्टी से निष्कासित कर दिया है। लेकिन इन नियुक्तियों को कई दूसरे समीकरण से जोड़कर देखा जा रहा है प्रदेश अध्यक्ष खंडेलवाल द्वारा जारी नियुक्ति पत्र के अनुसार प्रदेश मोर्चा प्रभारी की जिम्मेदारी मनोरंजन मिश्रा को सौंपी गई है। मिश्रा बीजेपी के सभी अलग-अलग मोर्चा के प्रभारी के रूप में काम करेंगे। साथ ही प्रदेश प्रकोष्ठ प्रभारी का जिम्मा आशुतोष तिवारी को सौंपा गया है। तिवारी भी मिश्रा की तरह बीजेपी के सभी प्रकोष्ठों के प्रभारी के रूप में जिम्मेदारी निभाएंगे। संगठन में जितेंद्र लिटोरिया को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपते हुए उन्हें कार्यालय व्यवस्था प्रभारी बनाया गया है। वे प्रदेश कार्यालय के साथ जिलों के कार्यालयों की व्यवस्था का प्रबंधन भी देखेंगे।

Wednesday, November 19, 2025

मध्य प्रदेश में क्यों बन रही सियासी असंमजस की स्थिति !

मध्यप्रदेश मैं सियासी कयासो का दौर जारी है , लेकिन इस दफा ये कयास बीजेपी सरकार और संगठन को लेकर ज्यादा है ना कि कांग्रेस को लेकर... मोहन कैबिनेट में समन्वय की कमी की खबर आम हो गई है,, मुख्यमंत्री मोहन यादव के दिल्ली दौरे भी चर्चाओ में है ,, एक बार फिर कैबिनेट में सीनियर मंत्रियों की अनुपस्थिति इन कयासों को और बल दे रही है..
भोपाल से लेकर दिल्ली तक भाजपा नेताओं की मुलाकातों का दौर जारी है, , एक बार फिर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की है, इसके पहले भाजपा प्रदेश अध्यक्ष समेत अन्य नेता मुख्यमंत्री निवास पर कई बैठक कर चुके हैं लेकिन ना ही निगम मंडल को लेकर फैसला हो पा रहे हैं, और ना ही भाजपा के दो महत्वपूर्ण मोर्चो को लेकर.. चर्चा यहां तक है की भाजपा के नये राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद कई सीनियर मंत्रियों को राष्ट्रीय संगठन में भेजा जा सकता है, , प्रहलाद पटेल और कैलाश विजयवर्गीया जैसे मंत्री पहले भी पश्चिम बंगाल और नॉर्थ ईस्ट की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं.. वैसे भी सीनियर मंत्रियों की कुछ मामलों में नाराजगी लगातार चर्चा में रही है कैलाश विजयवर्गीय और प्रहलाद पटेल की पिछली कैबिनेट में अनुपस्थित भी चर्चा में रही ! वैसे निगम मंडलों को लेकर रामनिवास रावत इमरती देवी अरविंद भदौरिया नरेंद्र बिरथरे जितेंद्र लटूरिया जैसे नाम को फाइनल हुए नंबर सा हो गया है लेकिन बाकी नाम को लेकर टकराव की स्थिति लगातार बनी हुई है.. क्योंकि प्रवीण शर्मा ब्राह्मण चेहरा है ऐसे में महिला मोर्चा के अध्यक्ष के लिए रीति पाठक का नाम तय हो जाने के बाद भी घोषित नहीं किया जा सका ! मध्य प्रदेश में संघ का सरकार से टकराव भी सामने आया और यही कारण है कि सरकार को दो बड़े फैसले वापस लेने पड़े, एक तरफ उज्जैन लैंड पूलिंग मामले में सरकार बैक फुट पर आई .. इसी तरह के हालात ओंकारेश्वर को लेकर भी बने.. अगर ब्यूरोक्रेसी को लेकर भी बात करें तो कहीं ना कहीं मंत्रियों की अफसरो से टकराव की चर्चा लगातार जारी है वहीं मुख्य सचिव लगातार निर्णायक भूमिका में नजर आ रहे हैं..