Wednesday, November 19, 2025
मध्य प्रदेश में क्यों बन रही सियासी असंमजस की स्थिति !
मध्यप्रदेश मैं सियासी कयासो का दौर जारी है , लेकिन इस दफा ये कयास बीजेपी सरकार और संगठन को लेकर ज्यादा है ना कि कांग्रेस को लेकर... मोहन कैबिनेट में समन्वय की कमी की खबर आम हो गई है,, मुख्यमंत्री मोहन यादव के दिल्ली दौरे भी चर्चाओ में है ,, एक बार फिर कैबिनेट में सीनियर मंत्रियों की अनुपस्थिति इन कयासों को और बल दे रही है..
भोपाल से लेकर दिल्ली तक भाजपा नेताओं की मुलाकातों का दौर जारी है, , एक बार फिर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की है, इसके पहले भाजपा प्रदेश अध्यक्ष समेत अन्य नेता मुख्यमंत्री निवास पर कई बैठक कर चुके हैं लेकिन ना ही निगम मंडल को लेकर फैसला हो पा रहे हैं, और ना ही भाजपा के दो महत्वपूर्ण मोर्चो को लेकर..
चर्चा यहां तक है की भाजपा के नये राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद कई सीनियर मंत्रियों को राष्ट्रीय संगठन में भेजा जा सकता है, , प्रहलाद पटेल और कैलाश विजयवर्गीया जैसे मंत्री पहले भी पश्चिम बंगाल और नॉर्थ ईस्ट की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं.. वैसे भी सीनियर मंत्रियों की कुछ मामलों में नाराजगी लगातार चर्चा में रही है कैलाश विजयवर्गीय और प्रहलाद पटेल की पिछली कैबिनेट में अनुपस्थित भी चर्चा में रही !
वैसे निगम मंडलों को लेकर रामनिवास रावत इमरती देवी अरविंद भदौरिया नरेंद्र बिरथरे जितेंद्र लटूरिया जैसे नाम को फाइनल हुए नंबर सा हो गया है लेकिन बाकी नाम को लेकर टकराव की स्थिति लगातार बनी हुई है.. क्योंकि प्रवीण शर्मा ब्राह्मण चेहरा है ऐसे में महिला मोर्चा के अध्यक्ष के लिए रीति पाठक का नाम तय हो जाने के बाद भी घोषित नहीं किया जा सका !
मध्य प्रदेश में संघ का सरकार से टकराव भी सामने आया और यही कारण है कि सरकार को दो बड़े फैसले वापस लेने पड़े, एक तरफ उज्जैन लैंड पूलिंग मामले में सरकार बैक फुट पर आई .. इसी तरह के हालात ओंकारेश्वर को लेकर भी बने..
अगर ब्यूरोक्रेसी को लेकर भी बात करें तो कहीं ना कहीं मंत्रियों की अफसरो से टकराव की चर्चा लगातार जारी है वहीं मुख्य सचिव लगातार निर्णायक भूमिका में नजर आ रहे हैं..
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