Tuesday, February 3, 2026

किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी, मोहन कैबिनेट में हुआ बड़ा फैसला, मिलने जा रही ये सौगात

 


भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार 2026 को कृषि वर्ष के रूप में मना रही है। इसी कड़ी में किसानों के हित में आज मोहन कैबिनेट ने बड़ा फैसला लिया है। जिससे प्रदेश के किसानों के चेहरे खिल उठें है। प्रदेश सरकार ने भावांतर योजना को पूरी तरह से लागू करने के निर्देश दिए है। इस योजना के तहत प्रदेश सरकार 2 महीने के अंदर तत्काल भुगतान करने की भी बात कही गई है। 


7 लाख से ज्यादा किसानों को हुआ भुगतान

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी कैबिनेट मंत्री चैतन्य काश्यप ने देते हुए बताया कि सरकार की भावांतर योजना के तहत करीब 7 लाख किसानों को 15 हजार करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। यह भुगतान किसानों को दो महीने के भीतर किया गया है। मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य है जिसने भावांतर योजना को पूर्णता लागू किया। प्रदेश सरकार द्वारा भावांतर योजना का भुगतान तत्काल 2 माह के अंदर किया गया।


भावांतर भुगतान योजना क्या है?

मध्यप्रदेश में भावांतर भुगतान योजना का मुख्य लाभ ऐसे किसानों को दिया जाता है जो सोयाबीन या अन्य फसलों की कीमत मंडी में न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम हो जाती है, तो सरकार MSP और विक्रय मूल्य के अंतर की राशि को सीधे किसानों के बैंक खातों में जमा करती है। इससे किसानों को फसल बेचने पर उचित मूल्य सुनिश्चित होता है और उन्हें घाटे से सुरक्षा मिलती है, जिससे उनकी आय में स्थिरता आती है।


प्रदेश को मिली ये सौगात

कैबिनेट मंत्री चैतन्य काश्यप ने जानकारी देते हुए आगे बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 29 जनवरी को महाकाल लोक की तर्ज पर पशुपतिनाथ लोक का लोकार्पण किया गया। प्रदेश ने पहली बार भोपाल में 30 जनवरी को पुष्प महोत्सव आयोजित किया। यह केवल फूलों की प्रदर्शनी नहीं बल्कि फूलों के माध्यम से मध्य प्रदेश के किसानों की आमदनी बढाने का एक उत्सव था।


बैठक में लिए गए ये फैसले

सरदार सरोवर परियोजना से विस्थापित आदिवासी बंधुओं के 25,602 परिवारों को पूर्व में आवासीय पट्टे प्रदान किए गए थे, जिनकी रजिस्ट्री नहीं हो सकी थी। अब सरकार द्वारा इन सभी आवासों की रजिस्ट्री निःशुल्क कराने का निर्णय लिया गया है। कैबिनेट में 2 सिंचाई परियोजनाओं (धनवाही और बरही) को स्वीकृति दी गई है। वर्ष 2026-27 से लेकर 2030-31तक के लिए कई विभागों की विभिन्न योजनाओं की निरंतरता का निर्णय लिया गया। राज्य समाज कल्याण बोर्ड के कर्मचारियों को महिला एवं बाल विकास में विलय करने की स्वीकृति मिली।

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