Monday, May 18, 2026

मोहन कैबिनेट की समीक्षा में मंत्रियों का छलका दर्द?

 


भोपाल। मध्यप्रदेश की सत्ता और संगठन ने जब मोहन कैबिनेट के मंत्रियों का रिपोर्ट कार्ड खोलकर देखा, तो कई मंत्रियों का दर्द और नाराजगी भी बाहर आ गई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश की मौजूदगी में हुई हाई प्रोफाइल समीक्षा बैठक में मंत्रियों ने न सिर्फ विभागीय अफसरों पर सवाल उठाए, बल्कि अपने ही पार्टी नेताओं और कैबिनेट सहयोगियों को लेकर भी शिकायतें कर डालीं। सूत्रों के मुताबिक समीक्षा बैठक में सरकार से ज्यादा “सिस्टम” कटघरे में नजर आया। कई मंत्रियों ने खुलकर कहा कि उनके विभागों के अफसर उनकी सुनते ही नहीं हैं। कुछ मंत्रियों ने आरोप लगाया कि अधिकारी पार्टी नेताओं के काम में अड़ंगा डालते हैं और जनप्रतिनिधियों को गंभीरता से नहीं लेते। सबसे ज्यादा चर्चा स्वास्थ्य, शिक्षा और महिला एवं बाल विकास विभाग को लेकर रही। इन विभागों के मंत्रियों ने अपने अफसरों की कार्यशैली पर नाराजगी जताई। वहीं कैबिनेट मंत्री संपत्तिया उइके ने अपने प्रभार वाले जिले में मंत्री नागर सिंह चौहान के रवैये को लेकर अप्रत्यक्ष नाराजगी जाहिर की। इससे साफ संकेत मिले कि सरकार के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं चल रहा। बैठक में एक मंत्री की शिकायत ने माहौल और गर्म कर दिया। मंत्री ने कहा कि विभागीय अफसर उन्हें मुख्यमंत्री तक से आसानी से नहीं मिलने देते। इस पर बैठक में मौजूद शीर्ष नेतृत्व ने नाराजगी जताई और अफसरशाही पर सवाल खड़े हुए।संगठन भी कई मंत्रियों के रवैये से असंतुष्ट नजर आया। जिला कोर कमेटियों को गंभीरता से नहीं लेने, जिलों में कम सक्रिय रहने और संगठन से तालमेल कमजोर होने पर मंत्रियों को सीधे तौर पर फटकार मिली। कुछ मंत्रियों ने प्रभार वाले जिलों में रात्रि विश्राम नहीं करने के ऐसे कारण गिनाए कि बैठक में मौजूद नेता भी हैरान रह गए। इस पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने साफ नाराजगी जताई। राजनीतिक गलियारों में अब सबसे ज्यादा चर्चा इसी बात की है कि क्या यह सिर्फ “रिव्यू मीटिंग” थी या फिर आने वाले मंत्रिमंडल फेरबदल की शुरुआती पटकथा। जिस तरह मंत्रियों की परफॉर्मेंस पर सवाल उठे और संगठन ने सख्त रुख दिखाया, उससे कई मंत्रियों की बेचैनी बढ़ गई है। सूत्रों का दावा है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और शिवप्रकाश कुछ मंत्रियों की कार्यशैली से बिल्कुल संतुष्ट नजर नहीं आए। इनमें दो महिला मंत्रियों के नाम भी चर्चा में बताए जा रहे हैं। ऐसे में अब सत्ता के गलियारों में यह सवाल तेजी से तैर रहा है कि क्या मोहन सरकार जल्द बड़ा राजनीतिक संदेश देने की तैयारी में है।

Sunday, May 17, 2026

हेमंत और मोहन ने बनाया मंत्रियों का रिपोर्ट कार्ड


भोपाल। मध्यप्रदेश की सियासत में इन दिनों सिर्फ मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाएं ही नहीं, बल्कि मंत्रियों की परफॉर्मेंस पर भी मंथन शुरू हो गया है। राजधानी भोपाल में शनिवार को करीब 8 घंटे तक चली हाई प्रोफाइल बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने मंत्रियों के कामकाज का रिपोर्ट कार्ड देखा। सत्ता और संगठन दोनों ने मिलकर मंत्रियों से उनके विभागों की उपलब्धियां, टारगेट और जमीनी सक्रियता का हिसाब मांगा।मुख्यमंत्री निवास में हुई इस बैठक में बीजेपी के राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश, प्रदेश प्रभारी डॉ. महेंद्र सिंह, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और संगठन के कई वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे। पहले दिन करीब 20 मंत्रियों के साथ विस्तार से चर्चा हुई, जबकि बाकी मंत्रियों के साथ सोमवार को समीक्षा की जाएगी। बैठक में मंत्रियों के प्रभार वाले जिलों में उनके दौरे, संगठनात्मक कार्यक्रमों में भागीदारी और स्थानीय नेताओं के साथ समन्वय पर विशेष फोकस रहा। संगठन ने मंत्रियों से यह भी पूछा कि जिलों में पार्टी और सरकार के बीच तालमेल किस स्तर पर काम कर रहा है। यानी साफ संकेत हैं कि अब सिर्फ विभाग संभालना ही नहीं, बल्कि राजनीतिक सक्रियता भी मंत्रियों की परफॉर्मेंस का हिस्सा होगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्कूलों, स्वास्थ्य केंद्रों, आंगनबाड़ी, गेहूं खरीदी और सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं की जमीनी प्रगति की जानकारी ली। चुनाव के समय जनता से किए गए वादों पर सरकार कितना आगे बढ़ी है, इसका भी आंकलन किया गया। मंत्रियों से उनके विभागों की उपलब्धियों और भविष्य के टारगेट पर भी विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपेक्षाओं के मुताबिक पेट्रोल-डीजल बचत, सार्वजनिक परिवहन के उपयोग, वर्चुअल मीटिंग और वर्क फ्रॉम होम जैसे मुद्दों पर भी जोर दिया गया। सरकार और संगठन दोनों स्तर पर कार्यशैली को ज्यादा प्रभावी और समन्वित बनाने की रणनीति पर चर्चा हुई। राजनीतिक तौर पर सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की रही कि बैठक के दौरान मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल की अटकलें भी तेज रहीं। हालांकि बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने साफ कहा कि फिलहाल मंत्रिमंडल विस्तार पर कोई चर्चा नहीं हुई है। लेकिन जिस तरह मंत्रियों के कामकाज और संगठन से तालमेल की समीक्षा हुई, उससे सत्ता के गलियारों में कई राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं। मंत्रियों के रिव्यू के तुरंत बाद बीजेपी कोर कमेटी की बैठक भी वर्चुअल माध्यम से आयोजित की जा रही है। वहीं सोमवार को नवनियुक्त निगम-मंडल अध्यक्षों का प्रशिक्षण कार्यक्रम रखा गया है, जिसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और संगठन के वरिष्ठ नेता उन्हें जनता से संवाद, व्यवहार और संगठनात्मक अनुशासन को लेकर मार्गदर्शन देंगे। सियासी गलियारों में अब चर्चा इस बात की है कि क्या यह सिर्फ समीक्षा बैठक है… या फिर आने वाले बड़े राजनीतिक बदलावों की भूमिका तैयार की जा रही है।





Saturday, May 16, 2026

देवास पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट में बड़ी कार्रवाई, SDOP समेत 3 अधिकारी निलंबित

 



देवास जिले के टोंकखुर्द क्षेत्र में पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण ब्लास्ट मामले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। घटना के बाद लापरवाही सामने आने पर राज्य शासन और उज्जैन संभाग प्रशासन ने तीन अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। उज्जैन संभागायुक्त ने नायब तहसीलदार रवि शर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया है। आदेश में कहा गया है कि विस्फोटक सामग्री के संबंध में प्रशासनिक निरीक्षण में गंभीर लापरवाही और अनियमितता बरती गई, जिसके कारण यह घटना हुई। इसके अलावा टप्पा चिड़ावद तहसील टोंकखुर्द के नायब तहसीलदार पर अपने कर्तव्यों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया गया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय कलेक्टर कार्यालय देवास रहेगा। वहीं राज्य शासन के गृह विभाग ने सोनकच्छ SDOP दीपा मांडवे को भी निलंबित कर दिया है। शासन के आदेश में कहा गया है कि पटाखा फैक्ट्री के संचालन और निरीक्षण को लेकर समय-समय पर जारी निर्देशों का पालन नहीं किया गया और वरिष्ठ कार्यालय को रिपोर्ट भी नहीं भेजी गई। इसके साथ ही तहसीलदार स्तर पर भी कार्रवाई की गई है। प्रशासन ने साफ किया है कि मामले में जिम्मेदारी तय कर आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी। गौरतलब है कि 14 मई को देवास जिले के टोंकखुर्द क्षेत्र स्थित पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट हुआ था, जिसमें कई लोगों की मौत हुई थी और कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। घटना के बाद से प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे थे।




“तुमने नर्मदा परिक्रमा की है क्या?” दिग्विजय सिंह ने उषा ठाकुर को पढ़ाया ‘सनातन का पाठ’


इंदौर। मध्यप्रदेश की राजनीति में शनिवार सुबह उस वक्त दिलचस्प नजारा देखने को मिला, जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की भाजपा नेत्री और पूर्व मंत्री उषा ठाकुर से सनातन धर्म को लेकर बहस हो गई। बातचीत के दौरान दिग्विजय सिंह ने उषा ठाकुर को “सनातन का पाठ” पढ़ाते हुए कई सवाल पूछ डाले। दरअसल, दिग्विजय सिंह इंदौर के रेसीडेंसी कोठी में रुके हुए थे। सुबह बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता उनसे मिलने पहुंचे थे। इसी दौरान भाजपा नेत्री उषा ठाकुर भी वहां पहुंच गईं। बताया जा रहा है कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच सनातन धर्म और हिंदुत्व को लेकर चर्चा शुरू हो गई। इसी बीच दिग्विजय सिंह वहां पहुंचे और बातचीत में शामिल हो गए। उन्होंने उषा ठाकुर से कहा, “मैं सनातन धर्म को मानने वाला हूं। आप तो पहले हिंदू-हिंदू करती थीं, मेरे कहने पर ही आपने सनातन शब्द स्वीकार किया।” बातचीत के दौरान दिग्विजय सिंह ने उषा ठाकुर से सवाल किया, “तुमने नर्मदा परिक्रमा की है क्या? तुम एकादशी का व्रत करती हो क्या?” इस पर उषा ठाकुर ने सिर हिलाकर ‘नहीं’ में जवाब दिया। इसके बाद उन्होंने कहा कि “आप व्यक्तिगत रूप से पक्के सनातनी हैं, लेकिन सार्वजनिक रूप से स्वीकार नहीं करते।” उषा ठाकुर की इस बात पर दिग्विजय सिंह ने तुरंत जवाब दिया, “सार्वजनिक रूप से ही तो कह रहा हूं।” दोनों नेताओं के बीच हुई यह बातचीत अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई है। कांग्रेस इसे दिग्विजय सिंह के “सनातन प्रेम” का उदाहरण बता रही है, जबकि भाजपा खेमे में भी इस बातचीत को लेकर अलग-अलग चर्चाएं हो रही हैं।




Friday, May 15, 2026

हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, बोला- मंदिर है भोजशाला

भोपाल/धार। मध्यप्रदेश के धार स्थित भोजशाला विवाद पर हाईकोर्ट ने बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। इंदौर बेंच ने अपने फैसले में साफ कहा कि भोजशाला एक मंदिर है। कोर्ट ने एएसआई की सर्वे रिपोर्ट, पुरातात्विक साक्ष्य और ऐतिहासिक दस्तावेजों के आधार पर यह निर्णय दिया। 

क्या है भोजशाला विवाद?

धार की भोजशाला को हिंदू पक्ष मां वाग्देवी यानी सरस्वती का मंदिर और प्राचीन संस्कृत शिक्षा केंद्र मानता रहा है। वहीं मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता रहा है। इसी को लेकर वर्षों से विवाद चल रहा था। यह मामला तब ज्यादा चर्चाओं में आया जब एएसआई ने भोजशाला परिसर का सर्वे किया। सर्वे रिपोर्ट में मंदिर शैली के अवशेष, देवी-देवताओं की मूर्तियां, संस्कृत शिलालेख और कई धार्मिक प्रतीक मिलने की बात कही गई थी। 

कोर्ट ने क्या कहा?

हाईकोर्ट ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्य यह साबित करते हैं कि भोजशाला मूल रूप से मंदिर है। कोर्ट ने 2003 के उस आदेश को भी निरस्त कर दिया, जिसमें मुस्लिम पक्ष को वहां नमाज की अनुमति दी गई थी। कोर्ट ने यह भी माना कि यह स्थल राजा भोज के समय का महत्वपूर्ण धार्मिक और शैक्षणिक केंद्र रहा है। 

फैसले के बाद बढ़ाई गई सुरक्षा

फैसले के बाद धार में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। हिंदू पक्ष ने फैसले का स्वागत किया है, जबकि मुस्लिम पक्ष ने कहा है कि वह सुप्रीम कोर्ट जा सकता है। 

Thursday, May 14, 2026

किसानों की बढ़ेगी कमाई! केंद्र सरकार का बड़ा फैसला

 


भोपाल। खरीफ सीजन से पहले किसानों के लिए राहत भरी खबर आई है। केंद्र सरकार ने विपणन वर्ष 2026-27 के लिए 14 खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है। इससे किसानों को अपनी फसल का ज्यादा दाम मिलेगा और उनकी आमदनी बढ़ने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक में यह फैसला लिया गया। सरकार का कहना है कि MSP बढ़ाने का उद्देश्य किसानों को उनकी लागत का बेहतर फायदा दिलाना और खेती को लाभ का सौदा बनाना है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इससे अन्नदाता किसानों को सीधा फायदा मिलेगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताते हुए कहा कि केंद्र सरकार लगातार किसानों के हित में फैसले ले रही है। माना जा रहा है कि MSP बढ़ने से धान, सोयाबीन, मक्का समेत खरीफ फसलों की खेती करने वाले किसानों को राहत मिलेगी। खासकर मध्यप्रदेश जैसे कृषि प्रधान राज्य में इसका बड़ा असर देखने को मिल सकता है। किसान अब उम्मीद कर रहे हैं कि फसल बेचने पर उन्हें पहले से बेहतर दाम मिलेंगे और खेती की बढ़ती लागत का कुछ बोझ कम होगा।