भोपाल। मध्यप्रदेश की सत्ता और संगठन ने जब मोहन कैबिनेट के मंत्रियों का रिपोर्ट कार्ड खोलकर देखा, तो कई मंत्रियों का दर्द और नाराजगी भी बाहर आ गई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश की मौजूदगी में हुई हाई प्रोफाइल समीक्षा बैठक में मंत्रियों ने न सिर्फ विभागीय अफसरों पर सवाल उठाए, बल्कि अपने ही पार्टी नेताओं और कैबिनेट सहयोगियों को लेकर भी शिकायतें कर डालीं। सूत्रों के मुताबिक समीक्षा बैठक में सरकार से ज्यादा “सिस्टम” कटघरे में नजर आया। कई मंत्रियों ने खुलकर कहा कि उनके विभागों के अफसर उनकी सुनते ही नहीं हैं। कुछ मंत्रियों ने आरोप लगाया कि अधिकारी पार्टी नेताओं के काम में अड़ंगा डालते हैं और जनप्रतिनिधियों को गंभीरता से नहीं लेते। सबसे ज्यादा चर्चा स्वास्थ्य, शिक्षा और महिला एवं बाल विकास विभाग को लेकर रही। इन विभागों के मंत्रियों ने अपने अफसरों की कार्यशैली पर नाराजगी जताई। वहीं कैबिनेट मंत्री संपत्तिया उइके ने अपने प्रभार वाले जिले में मंत्री नागर सिंह चौहान के रवैये को लेकर अप्रत्यक्ष नाराजगी जाहिर की। इससे साफ संकेत मिले कि सरकार के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं चल रहा। बैठक में एक मंत्री की शिकायत ने माहौल और गर्म कर दिया। मंत्री ने कहा कि विभागीय अफसर उन्हें मुख्यमंत्री तक से आसानी से नहीं मिलने देते। इस पर बैठक में मौजूद शीर्ष नेतृत्व ने नाराजगी जताई और अफसरशाही पर सवाल खड़े हुए।संगठन भी कई मंत्रियों के रवैये से असंतुष्ट नजर आया। जिला कोर कमेटियों को गंभीरता से नहीं लेने, जिलों में कम सक्रिय रहने और संगठन से तालमेल कमजोर होने पर मंत्रियों को सीधे तौर पर फटकार मिली। कुछ मंत्रियों ने प्रभार वाले जिलों में रात्रि विश्राम नहीं करने के ऐसे कारण गिनाए कि बैठक में मौजूद नेता भी हैरान रह गए। इस पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने साफ नाराजगी जताई। राजनीतिक गलियारों में अब सबसे ज्यादा चर्चा इसी बात की है कि क्या यह सिर्फ “रिव्यू मीटिंग” थी या फिर आने वाले मंत्रिमंडल फेरबदल की शुरुआती पटकथा। जिस तरह मंत्रियों की परफॉर्मेंस पर सवाल उठे और संगठन ने सख्त रुख दिखाया, उससे कई मंत्रियों की बेचैनी बढ़ गई है। सूत्रों का दावा है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और शिवप्रकाश कुछ मंत्रियों की कार्यशैली से बिल्कुल संतुष्ट नजर नहीं आए। इनमें दो महिला मंत्रियों के नाम भी चर्चा में बताए जा रहे हैं। ऐसे में अब सत्ता के गलियारों में यह सवाल तेजी से तैर रहा है कि क्या मोहन सरकार जल्द बड़ा राजनीतिक संदेश देने की तैयारी में है।

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