भोपाल। मध्यप्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी तापमान तेजी से बढ़ रहा है और इस बार पूरी नजर एक ही नाम पर टिक गई है—निर्मला सप्रे। यह चुनाव सिर्फ सीटों का गणित नहीं, बल्कि निष्ठा और रणनीति की परीक्षा बनता जा रहा है। कांग्रेस खेमे में इस वक्त सबसे ज्यादा चर्चा इसी बात की है कि निर्मला सप्रे का वोट आखिर किस ओर जाएगा। सियासी गलियारों में यह सवाल तैर रहा है कि वह कांग्रेस के साथ खड़ी रहेंगी या फिर बीजेपी के पक्ष में झुकाव दिखाएंगी। यही एक वोट पूरे चुनाव की दिशा बदल सकता है। दरअसल, राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग की आशंका हमेशा बनी रहती है, लेकिन इस बार कांग्रेस ने पहले से ही अपनी रणनीति को ज्यादा सतर्क और कानूनी आधार पर मजबूत करने की तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, अगर वोटिंग में कोई ‘खेल’ होता है, तो उसे सीधे कोर्ट तक ले जाने की तैयारी है। यही वजह है कि कांग्रेस चाहती है कि वोटिंग के बाद स्थिति पूरी तरह साफ हो और यह सामने आए कि निर्मला सप्रे ने आखिर किसे वोट दिया। हालांकि राज्यसभा चुनाव में वोटिंग गोपनीय होती है, लेकिन पार्टी के भीतर इसे लेकर दबाव और निगरानी दोनों बढ़ा दी गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव अब ‘नंबर गेम’ से ज्यादा ‘नर्व गेम’ बन गया है, जहां हर विधायक की वफादारी परख में है। खासतौर पर निर्मला सप्रे का नाम इसलिए चर्चा में है क्योंकि उनका रुख आखिरी वक्त तक सस्पेंस बनाए हुए है। उधर बीजेपी भी पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और कोशिश में है कि कोई भी मौका हाथ से न जाने पाए। कुल मिलाकर, राज्यसभा चुनाव अब एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहां एक वोट न सिर्फ नतीजा बदल सकता है, बल्कि सियासी रिश्तों की असली तस्वीर भी सामने ला सकता है। आने वाले वक्त में यह साफ हो जाएगा कि निर्मला सप्रे किस पाले में खड़ी हैं, लेकिन फिलहाल मध्यप्रदेश की राजनीति में यह ‘एक वोट’ सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है।

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