भोपाल। मध्यप्रदेश में महीनों से अटकी बीजेपी की निगम-मंडल सूची आखिरकार आज जारी हो सकती है। पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए यह सिर्फ एक सूची नहीं, बल्कि लंबे इंतजार का अंत है- एक ऐसा इंतजार, जो बार-बार उम्मीद जगाता और फिर टलता रहा। सूत्र बताते हैं कि इस सूची के पीछे सिर्फ चयन नहीं, बल्कि सियासी संतुलन की पूरी गणित काम कर रही है। पिछले कई महीनों में नामों को लेकर खींचतान का दौर चलता रहा—कभी किसी नाम पर सहमति नहीं बनी, तो कभी किसी नेता की आपत्ति ने पूरी सूची को रोक दिया। हालात ऐसे रहे कि भोपाल से लेकर दिल्ली तक कई बार फाइलें गईं-आईं, लेकिन हर बार कुछ न कुछ अटक गया। आखिरकार मामला तब आगे बढ़ा जब संघ, संगठन और सरकार के प्रतिनिधियों के बीच भोपाल में लगातार बैठकों का दौर चला। कई स्तरों पर मंथन के बाद अब प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने नामों पर अंतिम सहमति बना ली है। सूत्रों के अनुसार, दिल्ली से भी इस सूची को हरी झंडी मिल चुकी है। इस बार की सूची को लेकर सबसे दिलचस्प बात यह है कि इसमें संतुलन साधने की कोशिश साफ दिखाई देगी। संगठन में सक्रिय कार्यकर्ताओं को जगह देने के साथ-साथ क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों का भी पूरा ध्यान रखा गया है। कुछ नाम ऐसे बताए जा रहे हैं जो सियासी गलियारों को चौंका सकते हैं, जबकि कई चेहरे पहले से चर्चा में बने हुए हैं। दरअसल, निगम-मंडल की ये नियुक्तियां केवल पद बांटने की प्रक्रिया नहीं हैं, बल्कि यह संगठन के भीतर संतुलन साधने, असंतोष को कम करने और आगामी राजनीतिक रणनीति को मजबूत करने का अहम जरिया भी हैं। अब सबकी नजरें आज होने वाली औपचारिक घोषणा पर टिकी हैं—क्योंकि इसी सूची से तय होगा कि पार्टी किसे ‘इनाम’ देती है और किसे अभी और इंतजार करना होगा।

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