भोपाल। मध्य प्रदेश में “स्कूल चलें हम” अभियान और राज्य स्तरीय प्रवेशोत्सव की आज से शुरुआत हो गई है। राजधानी भोपाल में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्वयं बच्चों का स्कूल में प्रवेश करवाकर अभियान का शुभारंभ किया। यह अभियान 1 अप्रैल से 4 अप्रैल तक पूरे प्रदेश में चलाया जाएगा, जिसमें अधिक से अधिक बच्चों को स्कूल से जोड़ने और नामांकन बढ़ाने पर विशेष फोकस रहेगा। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में ड्रॉपआउट को शून्य करने का लक्ष्य रखा गया है और इस दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष नामांकन में करीब 19.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो शिक्षा के प्रति बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।सीएम ने यह भी कहा कि सरकारी स्कूलों में सुविधाओं के विस्तार के चलते अब बच्चों का रुझान बढ़ रहा है। “सांदीपनि” स्कूलों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि बेहतर शिक्षा और आधुनिक सुविधाओं के कारण कई छात्र निजी स्कूल छोड़कर सरकारी स्कूलों में प्रवेश ले रहे हैं। प्रदेश में अब तक 369 सांदीपनि स्कूल स्थापित किए जा चुके हैं, जहां गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। सरकार द्वारा विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए साइकिल, किताबें, ड्रेस, लैपटॉप और स्कूटी जैसी योजनाएं भी संचालित की जा रही हैं। सीएम ने बताया कि 75% से अधिक अंक लाने वाले छात्रों को लैपटॉप दिए जाते हैं, वहीं उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को स्कूटी भी प्रदान की जा रही है। इसके लिए बजट में विशेष प्रावधान किया गया है। वहीं स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने बताया कि पूरे प्रदेश में इस अभियान को “प्रवेशोत्सव” के रूप में मनाया जा रहा है। अब तक करीब 1 करोड़ बच्चों का पंजीयन हो चुका है और सरकार ने 1 करोड़ 40 लाख नामांकन का लक्ष्य तय किया है। उन्होंने कहा कि अगले 4 महीनों में बच्चों को साइकिल, किताब और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। यदि गणवेश समय पर तैयार नहीं हो पाती है, तो डीबीटी के माध्यम से राशि सीधे विद्यार्थियों के खातों में दी जाएगी।
अभियान में क्या-क्या होगा?
घर-घर जाकर बच्चों का नामांकन
रैलियां और जागरूकता कार्यक्रम
स्कूलों में स्वागत समारोह
ड्रॉपआउट बच्चों को फिर से जोड़ने की कोशिश
जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी
“स्कूल चलें हम” अभियान सिर्फ एक नामांकन ड्राइव नहीं, बल्कि हर बच्चे को शिक्षा से जोड़ने का एक बड़ा सामाजिक संकल्प है। सरकार की कोशिश है कि प्रदेश का कोई भी बच्चा स्कूल से दूर न रहे और शिक्षा के जरिए उसका भविष्य मजबूत हो सके।

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