Tuesday, March 24, 2026
एमपी बीजेपी में फार्मूला तय,, इसी हफ्ते होगी ये नियुक्तियां!
Monday, March 23, 2026
भोपाल में LPG वितरण का नया नियम, हर सेक्टर का हिस्सा तय
भोपाल। शहर में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई को व्यवस्थित करने के लिए नई व्यवस्था लागू की गई है। अब अलग-अलग सेक्टर को तय प्रतिशत के आधार पर सिलेंडर आवंटित किए जाएंगे, ताकि जरूरी सेवाओं को प्राथमिकता मिल सके और जमाखोरी पर रोक लगाई जा सके।nई व्यवस्था के तहत सबसे ज्यादा प्राथमिकता शैक्षणिक और चिकित्सा संस्थानों को दी गई है। इन्हें कुल आवंटन का 30 प्रतिशत हिस्सा मिलेगा और उनकी जरूरत के अनुसार पूरी आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। इसके बाद 35 प्रतिशत हिस्सा आवश्यक सेवाओं के लिए तय किया गया है, जिसमें पुलिस, सुरक्षा बल, सरकारी सेवाएं, महिला एवं बाल विकास संस्थान और आश्रय स्थल शामिल हैं। होटल, रेस्टोरेंट, कैंटीन, ढाबा और स्ट्रीट फूड कारोबारियों को तीसरी प्राथमिकता में रखा गया है। इनमें होटल और रेस्टोरेंट को 9-9 प्रतिशत, जबकि ढाबा और स्ट्रीट फूड को 7 प्रतिशत गैस मिलेगी। उद्योगों के लिए भी अलग प्रावधान किया गया है। फूड प्रोसेसिंग, पॉल्ट्री और डेयरी जैसे उद्योगों को 5 प्रतिशत आवंटन मिलेगा, जबकि अन्य उद्योग और उपयोगकर्ताओं के लिए भी 5 प्रतिशत हिस्सा तय किया गया है। सप्लाई के लिए 5 किलो, 19 किलो, 47.5 किलो और 425 किलो के सिलेंडर उपलब्ध कराए जाएंगे। साथ ही जमाखोरी रोकने के लिए सख्त नियम लागू किए गए हैं। अब उपभोक्ताओं को पिछले तीन महीनों की खपत के आधार पर ही सिलेंडर मिलेंगे। ऑनलाइन बुकिंग और रिकॉर्ड रखना अनिवार्य कर दिया गया है, और तय सीमा से अधिक सिलेंडर नहीं दिए जाएंगे। Nई व्यवस्था का उद्देश्य जरूरी सेवाओं को बिना बाधा गैस उपलब्ध कराना और बाजार में संतुलन बनाए रखना है।
भोपाल बजट: जेब पर राहत, वादों की फिर नई लिस्ट तैयार
भोपाल। शहर की सरकार यानी नगर निगम ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए करीब 3938 करोड़ 45 लाख रुपए का बजट पेश कर दिया है। इस बार की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि किसी भी तरह का नया टैक्स नहीं बढ़ाया गया है, हालांकि परिसीमन शुल्क बढ़ाने की तैयारी से आम उपभोक्ताओं पर असर पड़ सकता है।बजट में शहर के विकास के लिए बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने पर खास जोर दिया गया है। सीवेज सिस्टम सुधार, पानी की बेहतर व्यवस्था, सड़कों का निर्माण और ट्रैफिक सुधार जैसे मुद्दों को प्राथमिकता दी गई है। स्वच्छ भारत मिशन के लिए 84 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, वहीं सड़कों के निर्माण के लिए 30 करोड़ रुपए रखे गए हैं। इसके अलावा शहर के हर वार्ड को 50 लाख रुपए देने का ऐलान किया गया है, जिससे स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है। Naगर निगम ने स्ट्रीट लाइट, पार्क, सामुदायिक भवन और विश्राम घाटों के विकास के लिए भी बजट में प्रावधान किया है। साथ ही कोकता में ट्रांसपोर्ट नगर विकसित करने और शहर में अलग-अलग जगहों पर फैले व्यापार को व्यवस्थित करने के लिए नए बाजार विकसित करने की योजना भी सामने रखी गई है।बजट में सांस्कृतिक पहचान को बढ़ावा देने के लिए झील महोत्सव आयोजित करने और गुरु तेग बहादुर जी के नाम पर म्यूजियम बनाने का प्रस्ताव भी शामिल किया गया है।हालांकि, बजट पेश होने से पहले और उसके दौरान नगर निगम के सदन में जमकर हंगामा देखने को मिला। गोमांस और गौमाता के मुद्दे पर सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई, यहां तक कि गौमाता को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग भी उठी। अनुदान को लेकर भी विवाद हुआ, जब नेता प्रतिपक्ष ने निष्क्रिय समितियों को राशि देने पर सवाल खड़े किए, जिस पर महापौर और विपक्ष के बीच बहस हो गई।हंगामे और विरोध के बावजूद अंततः बजट को बहुमत के आधार पर पारित कर दिया गया। सत्ता पक्ष ने इस बजट को हर वर्ग के लिए राहत देने वाला और शहर के विकास को गति देने वाला बताया, जबकि विपक्ष ने इसे पिछले साल के बजट की पुनरावृत्ति बताते हुए सवाल उठाए। कुल मिलाकर नगर निगम ने इस बजट के जरिए शहर के विकास का एक बड़ा खाका पेश किया है, लेकिन असली चुनौती इन योजनाओं को जमीन पर उतारने की है। पिछले बजट के कई वादे अब भी अधूरे हैं, ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस बार की घोषणाएं हकीकत बनती हैं या फिर कागजों तक ही सीमित रह जाती हैं।





