Sunday, March 1, 2026

*नागलवाड़ी में कल बैठेगी मोहन की किसान सरकार*

मप्र में साल 2026..किसान कल्याण वर्ष के लिए समर्पित है..किसान हित में सभी वो कदम जो किसान और कृषि के लिए आश्यक हैं, पूर्ण योजना के साथ उठाए जा रहें हैं.. इसी सिलसिले में मार्च की दो तारीख को प्रदेश की पहली कृषि कैबिनेट वनवासी बाहुल्य बडवानी के नागलवाड़ी में होने जा रही है..सरकार बैठेगी और किसानों से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण निर्णयों पर हामी की अंतिम मुहर चस्पा होगी.. इस स्थान के चयन के पीछे भी एक गहरी मंशा है.. दरअसल निमाड़ क्षेत्र के विकास के लिए यह बैठक , मील का पत्थर साबित होगी..निमाड़ के जिले..खरगोन, खंडवा, बडवानी, बुरहानपुर के साथ साथ धार,झाबुआ अलीराजपुर जिले के लिए यह बैठक काफी अहम है.. उसके अतिरिक्त नागलवाड़ी स्थित आठ सौ वर्ष प्राचीन भिलट देव मंदिर का जनजातीय आस्था में विशेष महत्व है.. कैबिनेट में लिए जाने फैसलों से फायदा तो सम्पूर्ण प्रदेश के अन्नदाताओं का होगा ही. साथ ही अन्य कुछ ऐसे कदमों पर विचार एवं निर्णय लिया जाएगा जो किसानों और पशुपालकों के विकास में अहम भूमिका अदा करेंगे। इसके साथ साथ सीएम डॉ मोहन यादव जनजातीय समाज के जुलवानिया में आयोजित भगोरिया हाट की परम्परा का हिस्सा भी बनेंगे..कुल मिलाकर यह दो तारीख मध्यप्रदेश के विकास के लिए महत्वपूर्ण साबित होने वाली है।

Saturday, February 28, 2026

नितिन नवीन से मिले हेमंत और मोहन, बड़े राजनैतिक निर्णय की तैयारी..

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने आज बीजेपी की राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की,, दोनों नेताओं की एक साथ राष्ट्रीय अध्यक्ष से मुलाकात के कईं मायने निकाले जा रहे हैं,, माना जा रहा है कि एमपी को लेकर लंबे समय से टल रहे कुछ बड़े राजनीतिक निर्णय जल्द हो सकते है ,कहा ये जा रहा है कि निगम मंडलों में नियुक्ति के पहले मंत्रिमंडल में बदलाव किया जा सकता है ,,हालांकि जो भी निर्णय होंगे वो तय भले ही पहले से हो लेकिन मूर्त रूप होलाष्टक के बाद लेंगे...

Friday, February 27, 2026

एमपी में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर बड़ी खबर !

मध्य प्रदेश में मोहन मंत्रिमंडल को लेकर बड़ी खबर है,, बड़वानी में होने वाली मोहन कैबिनेट की बैठक कुछ मंत्रियों के लिए उनकी आखिरी कैबिनेट हो सकती है ,, पुख्ता सूत्रों से खबर आ रही है आज कुछ बड़े चेहरों के सियासी भविष्य पर बड़े फैसले होने जा रहे हैं,एक मंत्री ने दबी जुबान से आज की रात को सियासी कत्ल की रात करार दे दिया है,, माना जा रहा है होलाष्टक के बाद सीधे आधा दर्जन चेहरों की छुट्टी तय है... सीएम मोहन यादव दिल्ली में है ,,और आज उनकी बेहद महत्वपूर्ण बैठक है,, विधानसभा सत्र में हुए घटनाक्रम को मुख्यमंत्री दिल्ली को अवगत कराएंगे..अब देखना ये है कि होलाष्टक के बाद होने वाले मंत्रिमंडल बदलाव में कौन बचेगा और कौन हटेगा

एमपी विधानसभा की कार्यवाही अनिश्चित काल के लिए स्थगित,,यहां जनता नहीं सरकार के लिए चलता है सदन !

विधायक जी का उल्टा होकर शीर्षासन करना,,संसदीय कार्यमंत्री का नेता प्रतिपक्ष को औकात दिखाना,, मंत्रीजी का अपने सीएम को ही मास्टर प्लान पर उलझाना,, उपनेता प्रतिपक्ष का इस्तीफा देकर अपने ही नेता प्रतिपक्ष पर सवाल खड़े करना... इसके अलावा एक ऐसा बजट पारित हो जाना जिसमें नयापन कम और कर्जे लेने की जरूरत ज्यादा नजर आती है,, कुछ इस तरह की कहानी रही है एमपी विधानसभा के बजट सत्र की... मध्यप्रदेश विधानसभा का इस बार का बजट सत्र कागज़ों में वित्तीय बहस का मंच था, लेकिन हकीकत में यह सियासी रंगमंच ज्यादा साबित हुआ। राज्यपाल के अभिभाषण से औपचारिक शुरुआत हुई, सरकार ने उपलब्धियों और योजनाओं का खाका पेश किया, पर सदन की असली गूंज आंकड़ों से नहीं, आरोपों और विरोध से सुनाई दी। सत्ता पक्ष विकास का दावा करता रहा, तो विपक्ष हर दावे की बुनियाद पर सवाल उठाता रहा। बहसें हुईं, बजट पारित भी हुआ, लेकिन इस सत्र को याद रखा जाएगा उसके प्रतीकों के लिए—मास्क, इस्तीफा और शीर्षासन। सत्र की शुरुआत से ही तेवर तल्ख थे। बेरोजगारी, किसानों का फसल भुगतान, लंबित भर्तियां, महंगाई और कानून-व्यवस्था—इन मुद्दों पर विपक्ष ने सरकार को लगातार घेरा। जब बजट पेश हुआ तो सत्ता पक्ष ने इसे “विकास का विजन डॉक्यूमेंट” बताया, वहीं विपक्ष ने इसे “कागजी उपलब्धियों का पुलिंदा” कहकर खारिज कर दिया। आंकड़ों की जंग चली, तर्कों के तीर चले और कई बार शोर-शराबे के बीच कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। इस सत्र को सबसे अलग बनाया विरोध के अनोखे अंदाज ने। एक दिन विपक्षी विधायकों ने डोनाल्ड ट्रंप और नरेंद्र मोदी के मास्क पहनकर सरकार पर निशाना साधा। यह प्रतीकात्मक संदेश था कि प्रदेश की नीतियां केंद्र से अलग नहीं हैं। तस्वीरें तेजी से वायरल हुईं और सदन के भीतर की राजनीति, सोशल मीडिया की सुर्खियों में बदल गई। सत्र के बीच एक और बड़ा सियासी मोड़ आया—उपनेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे का इस्तीफा। वजहों पर आधिकारिक बयान सीमित रहे, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे विपक्ष की अंदरूनी रणनीति और समीकरणों से जोड़कर देखा गया। इससे विपक्ष की एकजुटता पर सवाल भी उठे और सियासी अटकलों का दौर शुरू हो गया। समापन के दिन विरोध ने नया दृश्य रच दिया। कांग्रेस विधायक बाबू जंडेल ने शीर्षासन कर प्रदर्शन किया। उनका आरोप था कि उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर राजनीतिक दबाव का परिणाम हैं। सदन परिसर में किया गया यह शीर्षासन देखते ही देखते पूरे सत्र की सबसे चर्चित तस्वीर बन गया। इधर कटौती प्रस्तावों पर बहस हुई, विभागवार मांगें पारित हुईं और अंततः बहुमत के दम पर बजट पास हो गया। सत्ता पक्ष ने इसे ऐतिहासिक उपलब्धि बताया, तो विपक्ष ने इसे जमीनी सच्चाई से दूर करार दिया। आखिर में अध्यक्ष ने कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी। यह सत्र एक बार फिर यह संकेत दे गया कि अब विधानसभा की राजनीति सिर्फ भाषणों तक सीमित नहीं—यह प्रतीकों, प्रदर्शन और संदेशों की भी राजनीति बन चुकी है। अब असली फैसला सदन से बाहर, जनता की अदालत में होना है।

कैलाश विजयवर्गीय का हुआ हृदय परिवर्तन !

एमपी की सियासत में दिग्विजय सिंह और कैलाश विजयवर्गीय दो ऐसे नाम हैं जो हमेशा हलचल मचाते रहते है ,,अब कैलाश विजयवर्गीय का सोशल मीडिया पोस्ट जमकर चर्चाओं में है ,, उन्होंने अपने अकाउंट से कबीर का दोहा पोस्ट किया है और लिखा है "बुरा जो देखन मै चला मुझसे बुरा ना कोय " इस पोस्ट के कई मायने निकाले जा रहे है ,पिछले दिनों विजयवर्गीय के अधिकांश बयान अपने मुखिया के ही खिलाफ आ रहे थे ,ऐसे में अब ऐसा लग रहा है कि सफेद कबूतर उड़ गए है और दोनों में सुलह हो गई है। ,,चलिए अब ये कह सकते है "देर आए दुरुस्त आए "

विधानसभा में विधायक जी क्यों खड़े हुए सिर के बल

भोपाल मध्यप्रदेश विधानसभा में उस वक्त अजीब नज़ारा देखने को मिला जब कांग्रेस विधायक बाबू जंडेल विरोध जताने के लिए सदन में ही शीर्षासन करने लगे। अपने ऊपर दर्ज एफआईआर के खिलाफ उन्होंने अनोखे अंदाज़ में प्रदर्शन किया और सरकार पर झूठे मुकदमे दर्ज कराने का आरोप लगाया।

विधायक बाबू जंडेल ने कहा कि उन्होंने केवल एक समारोह में पटाखा चलाया था, लेकिन उनके खिलाफ बंदूक चलाने का केस दर्ज कर दिया गया। उनका दावा है कि यह कार्रवाई राजनीतिक बदले की भावना से की गई है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, “मैं सरकार से नहीं डरने वाला, सच के लिए लड़ता रहूंगा।”

सदन में विधायक के इस ‘उल्टे प्रदर्शन’ से सियासी पारा चढ़ गया। सत्ता पक्ष ने इसे नाटक करार दिया, तो वहीं कांग्रेस ने इसे लोकतांत्रिक विरोध बताया। अब यह मुद्दा विधानसभा से निकलकर प्रदेश की राजनीति में गर्म बहस का कारण बन गया है।