Friday, February 27, 2026
एमपी विधानसभा की कार्यवाही अनिश्चित काल के लिए स्थगित,,यहां जनता नहीं सरकार के लिए चलता है सदन !
विधायक जी का उल्टा होकर शीर्षासन करना,,संसदीय कार्यमंत्री का नेता प्रतिपक्ष को औकात दिखाना,, मंत्रीजी का अपने सीएम को ही मास्टर प्लान पर उलझाना,, उपनेता प्रतिपक्ष का इस्तीफा देकर अपने ही नेता प्रतिपक्ष पर सवाल खड़े करना... इसके अलावा एक ऐसा बजट पारित हो जाना जिसमें नयापन कम और कर्जे लेने की जरूरत ज्यादा नजर आती है,, कुछ इस तरह की कहानी रही है एमपी विधानसभा के बजट सत्र की...
मध्यप्रदेश विधानसभा का इस बार का बजट सत्र कागज़ों में वित्तीय बहस का मंच था, लेकिन हकीकत में यह सियासी रंगमंच ज्यादा साबित हुआ। राज्यपाल के अभिभाषण से औपचारिक शुरुआत हुई, सरकार ने उपलब्धियों और योजनाओं का खाका पेश किया, पर सदन की असली गूंज आंकड़ों से नहीं, आरोपों और विरोध से सुनाई दी। सत्ता पक्ष विकास का दावा करता रहा, तो विपक्ष हर दावे की बुनियाद पर सवाल उठाता रहा। बहसें हुईं, बजट पारित भी हुआ, लेकिन इस सत्र को याद रखा जाएगा उसके प्रतीकों के लिए—मास्क, इस्तीफा और शीर्षासन।
सत्र की शुरुआत से ही तेवर तल्ख थे। बेरोजगारी, किसानों का फसल भुगतान, लंबित भर्तियां, महंगाई और कानून-व्यवस्था—इन मुद्दों पर विपक्ष ने सरकार को लगातार घेरा। जब बजट पेश हुआ तो सत्ता पक्ष ने इसे “विकास का विजन डॉक्यूमेंट” बताया, वहीं विपक्ष ने इसे “कागजी उपलब्धियों का पुलिंदा” कहकर खारिज कर दिया। आंकड़ों की जंग चली, तर्कों के तीर चले और कई बार शोर-शराबे के बीच कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
इस सत्र को सबसे अलग बनाया विरोध के अनोखे अंदाज ने। एक दिन विपक्षी विधायकों ने डोनाल्ड ट्रंप और नरेंद्र मोदी के मास्क पहनकर सरकार पर निशाना साधा। यह प्रतीकात्मक संदेश था कि प्रदेश की नीतियां केंद्र से अलग नहीं हैं। तस्वीरें तेजी से वायरल हुईं और सदन के भीतर की राजनीति, सोशल मीडिया की सुर्खियों में बदल गई।
सत्र के बीच एक और बड़ा सियासी मोड़ आया—उपनेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे का इस्तीफा। वजहों पर आधिकारिक बयान सीमित रहे, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे विपक्ष की अंदरूनी रणनीति और समीकरणों से जोड़कर देखा गया। इससे विपक्ष की एकजुटता पर सवाल भी उठे और सियासी अटकलों का दौर शुरू हो गया।
समापन के दिन विरोध ने नया दृश्य रच दिया। कांग्रेस विधायक बाबू जंडेल ने शीर्षासन कर प्रदर्शन किया। उनका आरोप था कि उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर राजनीतिक दबाव का परिणाम हैं। सदन परिसर में किया गया यह शीर्षासन देखते ही देखते पूरे सत्र की सबसे चर्चित तस्वीर बन गया।
इधर कटौती प्रस्तावों पर बहस हुई, विभागवार मांगें पारित हुईं और अंततः बहुमत के दम पर बजट पास हो गया। सत्ता पक्ष ने इसे ऐतिहासिक उपलब्धि बताया, तो विपक्ष ने इसे जमीनी सच्चाई से दूर करार दिया।
आखिर में अध्यक्ष ने कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी। यह सत्र एक बार फिर यह संकेत दे गया कि अब विधानसभा की राजनीति सिर्फ भाषणों तक सीमित नहीं—यह प्रतीकों, प्रदर्शन और संदेशों की भी राजनीति बन चुकी है। अब असली फैसला सदन से बाहर, जनता की अदालत में होना है।
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