भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा का बजट सत्र पहले ही दिन सियासी संग्राम में बदल गया। राज्यपाल मंगूभाई पटेल के अभिभाषण के दौरान कांग्रेस विधायकों ने जोरदार हंगामा किया और इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों का मुद्दा उठाया। विपक्ष का आरोप था कि इतने गंभीर मामले को भाषण में जगह तक नहीं दी गई।
राज्यपाल ने अपने संबोधन में सरकार की उपलब्धियों, निवेश, कृषि वर्ष 2026 और 2047 तक 2 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य जैसे दावों का जिक्र किया। लेकिन विपक्ष का कहना था कि जमीनी हकीकत और भाषण के दावों में बड़ा अंतर है।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने नल-जल योजना और दूषित पानी से हुई मौतों को सरकार की नाकामी बताते हुए कर्ज पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग दोहराई। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी सरकार को सीधे कठघरे में खड़ा किया। हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
तीन मंत्रियों की बर्खास्तगी की मांग, विपक्ष ने खोला मोर्चा
कांग्रेस ने साफ कहा है कि हाल की घटनाओं और विवादित बयानों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। विपक्ष ने तीन मंत्रियों की बर्खास्तगी की मांग करते हुए सरकार पर नैतिक जवाबदेही से बचने का आरोप लगाया। कांग्रेस का कहना है कि जब तक कार्रवाई नहीं होती, सदन से सड़क तक आंदोलन जारी रहेगा।
वहीं सत्ता पक्ष ने विपक्ष के प्रदर्शन को राजनीतिक ड्रामा करार दिया है। लेकिन साफ है कि बजट सत्र की शुरुआत ही टकराव और तीखे हमलों के साथ हो चुकी है।





