भोपाल। मध्य प्रदेश का विधानसभा का बजट सत्र शुरू हो गया है। राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने औपचारिक भाषण दे दिया, अब असली मुकाबला 18 फरवरी को होगा, जब वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा 4.8 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश करेंगे। आंकड़ा बड़ा है, लेकिन जनता के हिस्से क्या आएगा—यह हर साल की तरह बड़ा सवाल है।
इस बार विपक्ष खाली हाथ नहीं आया है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने साफ कहा है—सरकार कर्ज पर कर्ज ले रही है, तो जनता को हिसाब भी देना होगा। श्वेत पत्र की मांग दरअसल उस खाते की पड़ताल है, जिसमें उधार तो बढ़ता जा रहा है, लेकिन विकास का बैलेंस उतना साफ नजर नहीं आता।
सिंघार ने याद दिलाया कि किसान आयात नीति से परेशान हैं, युवा आत्मनिर्भरता के वादों का इंतजार कर रहे हैं, महिलाएं सुरक्षा को लेकर सवाल पूछ रही हैं, दूषित पानी से मौतें हो रही हैं और गर्मी से पहले ही जल संकट दस्तक दे रहा है। ऐसे में सवाल यह है कि बजट में राहत की बारिश होगी या फिर आंकड़ों की आतिशबाज़ी?
अब देखना दिलचस्प होगा कि 4.8 लाख करोड़ के इस बजट में आम जनता को कितनी राहत मिलती है और विपक्ष के सवालों का जवाब सरकार कितनी मजबूती से दे पाती है। फिलहाल बजट सत्र की शुरुआत के साथ ही सियासी तापमान बढ़ना तय माना जा रहा है।

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