Sunday, February 8, 2026

अलकेश आर्य बने नर्मदा पुरम भारतीय जनता पार्टी के जिला प्रभारी

भारतीय जनता पार्टी ने बैतूल के पूर्व विधायक अलकेश आर्य पर फिर भरोसा जताया है,,अलकेश बीजेपी संगठन में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके है,, आर्य बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के करीबी माने जाते है,, अलकेश की नियुक्ति पर नर्मदापुरम के शीर्ष नेताओं ने खुशी जताई है,, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सीतासरन शर्मा ने कहा है कि अलकेश आर्य जैसे अनुभवी नेता का लाभ नर्मदापुरम के कार्यकर्ताओं को भरपूर मिलेगा

किसी के आगे पीछे घूमने की जरूरत नहीं:हेमंत खंडेलवाल

एमपी बीजेपीं के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल का बड़ा बयान आया है ,,उन्होंने बीजेपी कार्यकर्ताओं को सीधा संदेश दिया है उन्होंने कहा है कि किसी को किसी के आगे पीछे घूमने की जरूरत नहीं है,,उन्होंने पूरे प्रदेश के कार्यकर्ताओं को कहा है कि भोपाल के चक्कर लगाने की भी आवश्यकता नहीं है,, सभी की अपनी अहमियत है और उसके अनुसार सभीं को जिम्मेदारियां दी जाएंगी

भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व की सख्ती और मोहन - शिवराज की बढ़ती नजदीकियों के मायने !

मध्य प्रदेश भारतीय जनता पार्टी में इन दिनों सब कुछ बदला बदला सा नजर आ रहा है ,, भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज अचानक बेहद सक्रिय हो गए है,, सत्ता और संगठन पहले जिस तरह सिर्फ एक चेहरे के आसपास घूम रहा था अब वो तस्वीर बदली है,, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की सक्रियता के साथ केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी एमपी में बेहद सक्रिय नजर आ रहे है,, अजय जामवाल भी लगातार बैठके ले रहे है,, धड़ाधड़ निर्णय लिए जा रहे हैं,, इसी बीच वर्तमान सीएम डॉ मोहन यादव और पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान के बीच बैठकों का दौर जारी है,,माना जा रहा है थर्ड एजेंसियों की फीड बैक रिपोर्ट के बाद एमपी को लेकर केंद्रीय नेतृत्व सख्त हुआ है,,,एक बेहद विश्वसनीय संस्थान की रिपोर्ट के अनुसार एमपी में वर्तमान में चुनाव होते है तो बीजेपी की सीटें कम हो सकती है और उसी के बाद ये तस्वीर बदली बदली नजर आने लगी है..

Saturday, February 7, 2026

एमपी में बीजेपी ने की जिला प्रभारीयो की घोषणा,, प्रभारी बनाए गए नेता नहीं रहेंगे निगम मंडल के दावेदार

भोपाल
BJP संगठन में लगातार सक्रिय गतिविधियां बनी हुई है,, एमपी बीजेपी केप्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने संगठन में जिले प्रभारियों की सूची को हरी झंडी दी है,,62 संगठनात्मक जिलों के जिला प्रभारी घोषित किए गए हैं भोपाल जिले के जसवंत सिंह हाड़ा प्रभारी बनाए गए है राजेश सोलंकी को इंदौर जिले की जिम्मेदारी दी गई है, पूर्व सांसद आलोक संजर को भी प्रभारी बनाया गया है गोपी कृष्ण नेमा ग्वालियर जिले का प्रभारी बनाया गया है| माना जा रहा है इनमें से कई नाम निगम मंडलों में दावेदार थे,, कुछ विधायकों को भी प्रभारी बनाया गया है,, सभी बड़े नेताओं के समर्थक सूची में एडजस्ट किए गए हैं |

अचानक मुख्यमंत्री मोहन यादव क्यों पहुंचे दिल्ली !

मध्य प्रदेश में लगातार सियासी उठा पटक जारी है, मंत्री विजय शाह के मामले में सरकार के सामने धर्म संकट की स्थिति खड़ी हो गई है,, ऐसे में मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव शनिवार को अचानक दिल्ली रवाना हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ विजय शाह मामले में 9 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है,, इन परिस्थितियों में मुख्यमंत्री शीर्ष नेतृत्व से चर्चा कर सकते हैं... दूसरी तरफ निगम मंडलों में नियुक्तियों को लेकर भी लगातार चर्चाओं का दौर जारी है,, माना जा रहा है कि मंत्रिमंडल विस्तार और निगम मंडल दोनों को मिलाकर एक बैलेंस फार्मूला बनाया जा रहा है इसी बीच मंत्री विजय शाह ने एक बार फिर माफी मांग ली है,, मामले में सरकार पूरी तरह आश्वस्त नहीं है कि माफी से काम चल जायेगा और शायद यही कारण है कि मुखिया की दिल्ली तक दौड़ जारी है, क्योंकि विजय शाह जितने उलझते जायेंगे कैलाश विजयवर्गीय उतने सुरक्षित होते जायेंगे,, यही कारण है की टकराव की इस सियासत में बीजेपी के कर्ताधर्ता एक अलग ही उलझन में उलझ गए है,,

ओला‑उबर यूजर्स ध्यान दें: राइड ढूंढ रहे हैं तो हो सकती है दिक्कत, जानिए क्यों


भोपाल। 7 फरवरी को देशभर में ओला, उबर और रैपिडो ड्राइवरों ने हड़ताल का ऐलान किया है। इस हड़ताल के कारण कई शहरों में टैक्सी और बाइक‑टैक्सी सेवाओं में व्यवधान आ सकता है। यात्रियों को वैकल्पिक इंतजाम करने और समय से पहले निकलने की सलाह दी गई है।

इस हड़ताल को यूनियनों ने “All India Breakdown” का नाम दिया है। इसे कई गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियनों ने समर्थन दिया है। यूनियन का कहना है कि यह हड़ताल ड्राइवरों के अधिकार और पारदर्शिता की मांग को लेकर की गई है।

ड्राइवर क्यों हड़ताल पर हैं?

ड्राइवरों का कहना है कि उन्हें किराया और कमाई में पारदर्शिता नहीं मिल रही। कंपनियां किराया तय करने का तरीका बदलती रहती हैं, जिससे उनकी मेहनत के अनुसार आमदनी कम हो जाती है। इसके अलावा, कई ड्राइवर मानते हैं कि गिग इकोनॉमी में उनका आर्थिक सुरक्षा का अधिकार कमजोर है।

ड्राइवरों की मुख्य मांगें

  • सरकार द्वारा न्यूनतम किराया तय करना, जिससे कमाई स्थिर हो।
  • कमर्शियल वाहनों के नियमों में साफ़ और पारदर्शी व्यवस्था।
  • ड्राइवरों की आर्थिक सुरक्षा और आमदनी में स्थिरता।

यूनियन का कहना है कि जब तक ये मांगें पूरी नहीं होंगी, ड्राइवर देशभर में हड़ताल और आंदोलन जारी रख सकते हैं।

सेवाओं पर असर

हड़ताल के दौरान ड्राइवर ऐप से ऑफलाइन रहेंगे, जिससे ओला, उबर और रैपिडो की सेवाओं में बाधा आ सकती है। खासकर सुबह और शाम के पीक आवर्स में यात्रियों को परेशानी हो सकती है।

यात्रियों के लिए सुझाव

  • वैकल्पिक टैक्सी या पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करें।
  • ऐप की बुकिंग समय से पहले चेक करें।
  • एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन जैसी जगहों पर समय से पहले पहुंचें।