भोपाल। मध्यप्रदेश में अफसरों और जनप्रतिनिधियों के बीच बढ़ते टकराव का मामला अब केंद्र सरकार तक पहुंच गया है। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए मुख्य सचिव को पत्र लिखकर अधिकारियों को व्यवहार और प्रक्रिया का पालन कराने के निर्देश दिए हैं। केंद्र की ओर से जारी ऑफिस मेमोरेंडम में साफ कहा गया है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच आधिकारिक कामकाज में शिष्टाचार और निर्धारित प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है। DoPT ने सभी मंत्रालयों, विभागों और राज्यों के मुख्य सचिवों से कहा है कि वे इस संबंध में जारी दिशा-निर्देशों को राज्य, संभाग और जिला स्तर तक लागू कराएं। डिप्टी सेक्रेटरी स्तर से जारी इस पत्र में खास तौर पर जोर दिया गया है कि अधिकारी जनप्रतिनिधियों के पत्रों और संवाद का विनम्रता से जवाब दें। साथ ही यह भी कहा गया है कि सांसदों और विधायकों के साथ व्यवहार में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखना जरूरी है। सूत्रों के मुताबिक, हाल के दिनों में मध्यप्रदेश में अफसरों और नेताओं के बीच विवादों के कई मामले सामने आए थे, जिसके बाद यह मामला केंद्र तक पहुंचा। ऐसे में DoPT की यह चिट्ठी एक तरह से प्रशासनिक अनुशासन और राजनीतिक समन्वय बनाए रखने का स्पष्ट संदेश मानी जा रही है। कुल मिलाकर, केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि प्रशासनिक तंत्र और जनप्रतिनिधियों के बीच टकराव की स्थिति से बचते हुए मर्यादित और जवाबदेह कार्यशैली अपनाना जरूरी है। केंद्र ने कहा है कि अधिकारियों को तय प्रोटोकॉल का पालन हर हाल में करना होगा। सरकार ने चेतावनी दी है कि जनप्रतिनिधियों के पत्रों का समय पर और विनम्र जवाब देना अनिवार्य है। बार-बार आ रही शिकायतों को केंद्र ने गंभीर संकेत मानते हुए राज्य सरकार से जवाब भी मांगा है।

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