भोपाल। मध्यप्रदेश में राज्यसभा चुनाव की सरगर्मी के बीच कांग्रेस की इकलौती सीट पर सबसे ज्यादा चर्चा अगर किसी नाम की है, तो वो है पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ। पार्टी के भीतर भले कई चेहरे दावेदारी कर रहे हों, लेकिन सियासी गलियारों में सबसे मजबूत पकड़ अब भी “नाथ परिवार” की मानी जा रही है। यही वजह है कि राज्यसभा की इस एक सीट को लेकर कांग्रेस में अंदरखाने मंथन तेज हो गया है। 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के खाते में एक सीट आना लगभग तय माना जा रहा है। लेकिन इस सीट पर उम्मीदवार कौन होगा, यही सबसे बड़ा सवाल बन गया है। सूत्रों की मानें तो क्रॉस वोटिंग के डर और संगठनात्मक पकड़ को देखते हुए पार्टी का एक बड़ा वर्ग कमलनाथ के नाम पर सहमति बनाने की कोशिश में जुटा है। दरअसल, कमलनाथ सिर्फ पूर्व मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि प्रदेश कांग्रेस में सबसे मजबूत राजनीतिक नेटवर्क रखने वाले नेताओं में गिने जाते हैं। विधायकों पर पकड़, संसाधन जुटाने की क्षमता और दिल्ली दरबार तक सीधी पहुंच उन्हें बाकी दावेदारों से अलग खड़ा करती है। यही वजह है कि जब भी कांग्रेस मुश्किल में होती है, नजरें फिर “नाथ फैक्टर” पर टिक जाती हैं। सियासी चर्चा यह भी है कि अगर कमलनाथ राज्यसभा जाते हैं, तो छिंदवाड़ा से लेकर भोपाल तक कांग्रेस की राजनीति में बड़ा संदेश जाएगा। पार्टी के भीतर इसे “अनुभव बनाम प्रयोग” की लड़ाई के तौर पर भी देखा जा रहा है। राहुल गांधी की नई टीम युवा चेहरों को आगे बढ़ाना चाहती है, लेकिन मध्यप्रदेश में संगठन की जमीनी हकीकत अब भी कमलनाथ के इर्द-गिर्द घूमती दिखाई देती है। हालांकि दिग्विजय सिंह, अरुण यादव, जीतू पटवारी और कमलेश्वर पटेल जैसे नेताओं के नाम भी चर्चा में हैं, लेकिन पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि इस समय कांग्रेस किसी “रिस्क” के मूड में नहीं दिख रही। यही कारण है कि कमलनाथ का नाम लगातार सबसे ऊपर चल रहा है। दिलचस्प बात यह भी है कि पिछले कुछ महीनों में कमलनाथ और उनके बेटे नकुलनाथ की राजनीतिक सक्रियता फिर बढ़ी है। दिल्ली से लेकर छिंदवाड़ा तक लगातार बैठकों और रणनीतिक चर्चाओं ने यह संकेत दिए हैं कि “नाथ परिवार” अभी भी प्रदेश कांग्रेस की धुरी बना हुआ है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है — क्या कांग्रेस हाईकमान एक बार फिर मध्यप्रदेश में कमलनाथ पर भरोसा जताएगा? या फिर पार्टी किसी नए चेहरे पर दांव लगाकर बड़ा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश करेगी? फिलहाल कांग्रेस की इस एक सीट ने पूरे प्रदेश की राजनीति का तापमान बढ़ा दिया है।

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