Thursday, May 14, 2026

दिल्ली में मंथन, भोपाल में टेंशन! बड़े बदलाव के संकेत

 

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का दिल्ली दौरा भले “सरकारी” बताया जा रहा हो, लेकिन भाजपा के भीतर इसे सत्ता संतुलन और राजनीतिक मैनेजमेंट के बड़े मिशन के तौर पर देखा जा रहा है। दिल्ली में आज सीएम की कई बड़े नेताओं से मुलाकात प्रस्तावित है और इधर भोपाल से लेकर दिल्ली तक भाजपा के कई नेता ऐसे सक्रिय हो गए हैं, जैसे मंत्रिमंडल की शपथ बस अब होने ही वाली हो। सूत्रों की मानें तो दिल्ली में भाजपा संगठन और केंद्रीय नेतृत्व के साथ होने वाली बैठकों में सिर्फ विकास योजनाओं की चर्चा नहीं होगी, बल्कि कैबिनेट विस्तार, निगम-मंडल नियुक्तियां और सत्ता में क्षेत्रीय-सामाजिक संतुलन जैसे मुद्दों पर भी मंथन हो सकता है। यही वजह है कि कई पूर्व मंत्री और वरिष्ठ विधायक दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं। कोई “अनुभव” का हवाला दे रहा है, तो कोई “संगठन के प्रति समर्पण” याद दिला रहा है। सबसे ज्यादा चर्चा सिंधिया समर्थक और पूर्व मंत्री प्रभुराम चौधरी को लेकर है। सत्ता के गलियारों में चर्चा है कि मोहन यादव कैबिनेट में उन्हें जगह देकर सिंधिया खेमे को बड़ा संदेश दे सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो इसे सिर्फ मंत्रिमंडल विस्तार नहीं, बल्कि भाजपा के अंदरूनी शक्ति संतुलन की नई चाल माना जाएगा। खास बात यह है कि मोहन कैबिनेट में अब तक सिंधिया समर्थकों की भूमिका को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं, ऐसे में प्रभुराम की एंट्री कई राजनीतिक संकेत दे सकती है। इधर, दिल्ली में राजनीतिक समीकरण साधे जा रहे हैं, उधर मुख्यमंत्री प्रशासनिक सख्ती का संदेश देने में भी पीछे नहीं हैं। बताया जा रहा है कि सीएम दिल्ली से ही वर्चुअल माध्यम से करीब 45 अहम मुद्दों पर समीक्षा बैठक करेंगे। शहरी विकास, पेयजल, धार्मिक पर्यटन, औद्योगिक विकास और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर अफसरों से जवाब-तलब होगा। भाजपा के भीतर फिलहाल माहौल ऐसा है कि कोई नेता फोन साइलेंट नहीं रख रहा। दिल्ली में किसकी मुलाकात कितनी देर चली, कौन किसके बंगले पर पहुंचा और कौन बाहर निकलते समय मुस्कुरा रहा था — यही आज की सबसे बड़ी राजनीतिक चर्चा बनी हुई है।

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