Friday, April 24, 2026

निगम मंडल की दावेदारी से बाहर हुए सभी वर्तमान विधायक

भोपाल। मध्यप्रदेश में निगम-मंडलों में नियुक्तियों का सिलसिला जारी है और आज चार और नामों पर मुहर लगने की तैयारी है। सूत्रों के मुताबिक, इस बार की नियुक्तियों में पार्टी ने साफ संकेत दे दिया है कि वर्तमान विधायकों और चुनाव हार चुके नेताओं को जगह नहीं दी जाएगी। जानकारी के अनुसार, इस सूची में वरिष्ठ नेताओं को प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि सक्रिय संगठनात्मक कार्यकर्ताओं को भी मौका देने पर जोर है। इसी बीच सिंधिया समर्थक मानी जाने वाली Imarti Devi और Mahendra Singh Sisodia को इस चरण में जगह नहीं मिलने की चर्चा है। वहीं, पूर्व मंत्री Ram Niwas Rawat का नाम भी फिलहाल अटका हुआ बताया जा रहा है, जिस पर अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। सूत्रों का कहना है कि पार्टी इस बार नियुक्तियों के जरिए संगठन में संतुलन साधने और नए चेहरों को अवसर देने की रणनीति पर काम कर रही है। यही वजह है कि मौजूदा विधायकों और हालिया चुनाव में हार चुके नेताओं को फिलहाल सूची से दूर रखा जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में इन संभावित नामों और फैसलों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। अब नजर इस बात पर टिकी है कि आखिर आज जारी होने वाली सूची में किन चेहरों को जिम्मेदारी मिलती है और कौन इंतजार में ही रह जाता है।

आज ही जारी होगी शहरीय विकास प्राधिकरण की भी लिस्ट

मध्यप्रदेश में लंबे समय से अटकी शहरी विकास प्राधिकरणों की नियुक्तियों को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। भारतीय जनता पार्टी अब से कुछ ही देर में उज्जैन, रतलाम, देवास और इंदौर के शहरी विकास प्राधिकरणों की सूची जारी करने जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, इन नियुक्तियों का पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं को काफी समय से इंतजार था, जो अब खत्म होने वाला है। पिछले कई महीनों से इन नामों को लेकर संगठन और सरकार के बीच मंथन जारी था और कई दौर की चर्चाओं के बाद सूची को अंतिम रूप दिया गया है। बताया जा रहा है कि इस सूची में क्षेत्रीय संतुलन, जातीय समीकरण और संगठन में सक्रिय कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दी गई है। साथ ही कुछ नए चेहरों को मौका देकर संगठन को मजबूती देने की रणनीति पर भी काम किया गया है। राजनीतिक हलकों में इन नियुक्तियों को लेकर हलचल तेज है और कई नामों को लेकर पहले से ही अटकलें लगाई जा रही हैं। अब नजर इस बात पर टिकी है कि आखिर किन चेहरों को जिम्मेदारी मिलती है और किन्हें इंतजार करना पड़ेगा। यह नियुक्तियां न सिर्फ संगठनात्मक संतुलन के लिहाज से अहम हैं, बल्कि आने वाले राजनीतिक समीकरणों पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है।

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