भोपाल। मध्य प्रदेश में समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं खरीदी इस बार तय समय से देरी से शुरू होने जा रही है। सरकार ने खरीदी की नई तारीखें तय की हैं—चार संभागों में 10 अप्रैल से और बाकी संभागों में 15 अप्रैल से खरीदी शुरू होगी। लेकिन इस फैसले के बीच किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है, क्योंकि खेतों से निकली फसल अभी खुले में ही पड़ी है और मौसम लगातार खराब बना हुआ है। प्रदेश के कई इलाकों में आंधी, बारिश और ओलावृष्टि का खतरा बना हुआ है। ऐसे में लाखों क्विंटल गेहूं खुले में पड़ा होने से उसके खराब होने का डर किसानों को सता रहा है। कई किसानों के पास सुरक्षित भंडारण की सुविधा नहीं है, जिससे उनकी मेहनत पर पानी फिरने का खतरा बढ़ गया है।
इससे किसानों को क्या फायदा?
सरकार द्वारा MSP पर खरीदी से किसानों को तय न्यूनतम कीमत की गारंटी मिलेगी
देरी के कारण मंडियों में भीड़ कम हो सकती है, जिससे प्रक्रिया थोड़ी व्यवस्थित रह सकती है
कुछ किसानों को फसल सुखाने और तैयार करने का अतिरिक्त समय मिला है
ज्यादा भारी पड़ सकता है नुकसान
खराब मौसम के कारण खुले में रखी फसल खराब होने का खतरा
ओलावृष्टि और बारिश से गुणवत्ता गिरने पर MSP का लाभ भी प्रभावित हो सकता है
भंडारण की कमी के कारण छोटे और सीमांत किसान सबसे ज्यादा प्रभावित
मंडियों में खरीदी देर से शुरू होने पर भुगतान में भी देरी की आशंका
चिंता क्यों बढ़ी?
किसानों का कहना है कि अगर खरीदी समय पर शुरू होती तो फसल सीधे मंडियों में पहुंच जाती और खराब मौसम का असर कम होता। अब देरी के कारण उन्हें अपनी उपज को बचाने के लिए अतिरिक्त इंतजाम करने पड़ रहे हैं, जो हर किसान के बस की बात नहीं है।
सरकार की ओर से MSP खरीदी किसानों के लिए राहत का बड़ा माध्यम है, लेकिन इस बार देरी और खराब मौसम ने हालात मुश्किल बना दिए हैं। खेत से मंडी तक का सफर इस बार किसानों के लिए आसान नहीं, बल्कि चिंता और जोखिम से भरा नजर आ रहा है।

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