भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पहली बार आयोजित युवा विधायक सम्मेलन ने राजनीति के भविष्य की एक झलक पेश की। दो दिनों तक चले इस खास आयोजन में मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के 45 युवा विधायक एक मंच पर नजर आए। सम्मेलन में जहां एक ओर ‘विकसित भारत 2047’ के विजन पर गंभीर और सार्थक मंथन हुआ, वहीं दूसरी ओर कुछ बयानों को लेकर सियासी हलचल भी तेज हो गई। सम्मेलन की शुरुआत उत्साह और पारंपरिक रंगों के साथ हुई। पहले दिन लोकतंत्र में आम नागरिकों की भागीदारी को और मजबूत बनाने और युवा जनप्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर गहन चर्चा की गई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने युवा विधायकों को मार्गदर्शन देते हुए उन्हें जिम्मेदार और दूरदर्शी नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दिया। दूसरे दिन कार्यक्रम में राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह का संबोधन खास रहा। उन्होंने विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सभी राजनीतिक दलों की साझा भागीदारी को जरूरी बताया। हालांकि उनके बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं और माहौल में हल्की सियासी गर्माहट देखने को मिली। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने उनके बयान पर सवाल उठाते हुए सरकार को घेरा, जबकि सत्तापक्ष ने इसे सकारात्मक और भविष्य की दिशा तय करने वाला प्रयास बताया। इस दौरान पक्ष और विपक्ष के बीच विचारों का टकराव भी साफ नजर आया। कुल मिलाकर, यह सम्मेलन सिर्फ एक औपचारिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि यह ऐसा मंच बनकर उभरा जहां नई पीढ़ी के जनप्रतिनिधियों ने न केवल अपने विचार साझा किए, बल्कि देश और प्रदेश की राजनीति की दिशा पर भी संकेत दिए। विजन और विचारों के इस संगम के बीच सियासत की हलचल ने इसे और भी अहम बना दिया।

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