भोपाल। महाशिवरात्रि के मौके पर भोपाल में ऐसा आयोजन हुआ जिसने धार्मिक और सामाजिक हलकों में हलचल मचा दी। किन्नर धर्म सम्मेलन के मंच से एक ओर देश की पहली किन्नर शंकराचार्य की घोषणा की गई, तो दूसरी ओर 60 किन्नरों की ‘घर वापसी’ कराने का दावा भी किया गया। आयोजकों का कहना है कि मुस्लिम धर्म अपना चुके कुछ किन्नरों ने शुद्धिकरण प्रक्रिया के बाद दोबारा हिंदू धर्म स्वीकार किया। हालांकि प्रशासनिक स्तर पर इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
4 जगद्गुरु और 5 महामंडलेश्वर घोषित
सम्मेलन के दौरान किन्नर परंपरा के तहत चार जगद्गुरुओं और पांच महामंडलेश्वरों की घोषणा की गई। मंच से कहा गया कि यह फैसला किन्नर समाज की धार्मिक व्यवस्था को संगठित और मजबूत बनाने के लिए लिया गया है। कार्यक्रम में वैदिक मंत्रोच्चार, पूजा-अर्चना और पारंपरिक अनुष्ठानों के साथ पदों की औपचारिक घोषणा की गई।
हिमांगी सखी बनीं देश की पहली किन्नर शंकराचार्य, पुष्कर होगा पीठ
सम्मेलन का सबसे अहम क्षण तब आया जब हिमांगी सखी को देश की पहली किन्नर शंकराचार्य घोषित किया गया। वे मां वैष्णो किन्नर अखाड़ा की प्रमुख हैं और लंबे समय से किन्नर समाज में धार्मिक नेतृत्व की भूमिका निभा रही हैं। उन्हें पहली किन्नर भागवत कथा वाचक के रूप में भी जाना जाता है। मूल रूप से मुंबई से संबंध रखने वाली हिमांगी सखी का पीठ अब पुष्कर में स्थापित होगा। इससे पहले वे महामंडलेश्वर और जगद्गुरु के पद पर भी रह चुकी हैं। इस घोषणा के साथ किन्नर समाज ने धार्मिक इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया है।

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