वाशिंगटन. अमेरिका के प्रेसिडेंट इलेक्ट डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि चीन को जब्त अमेरिकी अंडरवाटर ड्रोन को अपने पास रख लेना चाहिए। ट्रम्प ने ट्वीट कर रहा, "हमें चीन को बता देना चाहिए कि हमें वह ड्रोन नहीं चाहिए जिसे चीन ने चुराया है, उसे यह अपने पास ही रख लेना चाहिए।" ट्रम्प का यह बयान बीजिंग के उस रवैये के बाद सामने आया है जिसमें उसने कहा था कि विवादित साउथ चाइना सी में जब्त यूएस ड्रोन को वह 'वाजिब तरीकों' से लौटाने को राजी है। ट्रम्प के ट्वीट को चीन को लेकर उनकी बढ़ती तल्खी के तौर पर देखा जा रहा है। दोनों देशों के बीच गंभीर सैन्य टकराव जैसे हालात...
- न्यूज एजेंसी के मुताबिक, ट्रम्प के ट्वीट के पहले पेंटागन की तरफ से जारी बयान में कहा गया था कि अमेरिका ड्रोन की वापसी को लेकर चीन के साथ एक समझ बनाने के करीब पहुंच गया है।
- पेंटागन के स्पोक्सपर्सन पीटर कुक ने कहा था, 'चीन सरकार से सीधे कॉन्टेक्ट कर हमने यह तय कर लिया है कि चीन अमेरिका को ड्रोन लौटा देगा।'
- हालांकि पेंटागन ने यह आरोप भी लगाया था कि चीन ने साउथ चाइना सी में 15 दिसंबर को अमेरिकी ड्रोन (यूएस नेवी का ओशेनोग्राफिक सर्वे शिप) को गैरकानूनी तरीकों से अपने कब्जे में लिया।
- अमेरिका ने इस मामले में एक फॉर्मल डिप्लोमेटिक कम्प्लेन्ट दर्ज कराई थी।
- इस घटना को दुनिया की दो बड़ी शक्तियों के बीच गंभीर सैन्य टकराव जैसे हालात माना जा रहा है।
ट्रम्प ने किए 2 ट्वीट
- डोनाल्ड ट्रम्प ने इस मसले पर 2 ट्वीट किए हैं। अपने पहले ट्वीट में ट्रम्प ने चीन पर अमेरिकी ड्रोन चोरी का आरोप लगाया।
- लिखा, 'चीन ने इंटरनेशनल वाटर्स में यूएस नेवी के रिसर्च ड्रोन को चुरा लिया है, उन्होंने उसे पानी से निकाला और चीन ले गए, ऐसा पहले कभी नहीं हुआ।'
क्या था ड्रोन का मकसद?
- अमेरिका के डिफेंस डिपार्टमेंट के एक ऑफिशियल के मुताबिक, अंडरवाटर ड्रोन को सुबिक घाटी से 50 km दूर अंतरराष्ट्रीय जल सीमा में पकड़ा गया था।
- 'चीन द्वारा जब्त किए गए ड्रोन का इस्तेमाल समुद्र के पानी में खारापन और तापमान की जांच के लिए किया जा रहा था।'
चीन बोला- मामले को बेवजह तूल दे रहा अमेरिका
- चीन ने शनिवार को कहा था, 'अमेरिका इस मामले को बेवजह तूल दे रहा है।'
- इसके साथ बीजिंग ने यह भी कहा था कि वह अमेरिकी ड्रोन को 'वाजिब तरीकों' के तहत लौटा देगा।
- चीन की डिफेंस मिनिस्ट्री के स्पोक्सपर्सन सीनियर कर्नल यांग युजुन ने अमेरिका के आरोपों को खारिज करते हुए कहा था, 'चीन ने जहाजों के सेफ नेविगेशन के लिए अंडरवाटर ग्लाइडर को जब्त किया था।'
चीन-यूएस के बीच तनाव की 2 और अहम वजहें
-माना जा रहा है कि ड्रोन विवाद से दोनों देशों के डिप्लोमैटिक रिलेशन अपने सबसे बुरे दौर में पहुंच गए हैं।
- एक्सपर्ट का कहना है, 'ड्रोन को जब्त करना दोनों देशों के बीच बेहद अहम मिलिट्री घटना है। इससे पहले 2001 में यूएस नेवी का सर्विलांस एयरक्राफ्ट और चीन का एक फाइटर जेट टकराए थे, जिसमें चीनी पायलट की मौत हो गई थी।'
- वैसे तनाव की 2 और अहम वजहें भी हैं। पहला- ताइवान मु्द्दा, दूसरा-साउथ चाइना सी मुद्दा।
1. ताइवान मुद्दा
- ट्रम्प ने इसी महीने ताइवान के प्रेसिडेंट तसाई इंग-वेन से फोन पर बात की थी। जिस पर चीन ने एतराज जताया था।
- चीन ने ट्रम्प के उस कदम को अपनी 'वन चाइना' पॉलिसी पर अमेरिका के पहले के रुख में बदलाव के तौर पर देखा।
- चीन ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि वह 'वन चाइना' पॉलिसी पर अपने पहले के रुख को न बदले।
- चीन यह मानता है कि ताइवान उसका हिस्सा है जो उससे अलग हो गया और आखिर में ताइवान चीन का हिस्सा बन जाएगा।
- चीन ने ताइवान को यह ऑफर दिया था कि अगर वह खुद को चीन का हिस्सा मान ले तो उसे ऑटोनॉमी (स्वायत्तता) दे दी जाएगी, लेकिन ताइवान ने इसे ठुकरा दिया।
2. साउथ साइना सी मुद्दा
- साउथ चाइना सी को लेकर भी दोनों देशों के बीच विवाद है। बीजिंग इस पर अपना दावा करता है।
- फिलीपींस, वियतनाम, मलेशिया, ताइवान और ब्रुनेई साउथ चाइना सी पर बीजिंग के दावे के खिलाफ हैं।
- अमेरिका, चीन पर इस एरिया का सैन्यीकरण करने का आरोप लगाता रहा है।
- साउथ चाइना सी का करीब 35 लाख स्क्वायर km का एरिया विवादित है। इसमें तेल और गैस के बड़े भंडार दबे हुए हैं।
- अमेरिका के मुताबिक, इस इलाके में 213 अरब बैरल तेल और 900 ट्रिलियन क्यूबिक फीट नेचुरल गैस का भंडार है।
- वियतनाम इस इलाके में भारत को तेल खोजने की कोशिशों में शामिल होने का न्योता दे चुका है। इस समुद्री रास्ते से हर साल 7 ट्रिलियन डॉलर का बिजनेस होता है।
- चीन ने 2013 के आखिर में एक बड़े प्रोजेक्ट के जरिए पानी में डूबे रीफ एरिया को आर्टिफिशियल आइलैंड में बदल दिया था।
- न्यूज एजेंसी के मुताबिक, ट्रम्प के ट्वीट के पहले पेंटागन की तरफ से जारी बयान में कहा गया था कि अमेरिका ड्रोन की वापसी को लेकर चीन के साथ एक समझ बनाने के करीब पहुंच गया है।
- पेंटागन के स्पोक्सपर्सन पीटर कुक ने कहा था, 'चीन सरकार से सीधे कॉन्टेक्ट कर हमने यह तय कर लिया है कि चीन अमेरिका को ड्रोन लौटा देगा।'
- हालांकि पेंटागन ने यह आरोप भी लगाया था कि चीन ने साउथ चाइना सी में 15 दिसंबर को अमेरिकी ड्रोन (यूएस नेवी का ओशेनोग्राफिक सर्वे शिप) को गैरकानूनी तरीकों से अपने कब्जे में लिया।
- अमेरिका ने इस मामले में एक फॉर्मल डिप्लोमेटिक कम्प्लेन्ट दर्ज कराई थी।
- इस घटना को दुनिया की दो बड़ी शक्तियों के बीच गंभीर सैन्य टकराव जैसे हालात माना जा रहा है।
ट्रम्प ने किए 2 ट्वीट
- डोनाल्ड ट्रम्प ने इस मसले पर 2 ट्वीट किए हैं। अपने पहले ट्वीट में ट्रम्प ने चीन पर अमेरिकी ड्रोन चोरी का आरोप लगाया।
- लिखा, 'चीन ने इंटरनेशनल वाटर्स में यूएस नेवी के रिसर्च ड्रोन को चुरा लिया है, उन्होंने उसे पानी से निकाला और चीन ले गए, ऐसा पहले कभी नहीं हुआ।'
क्या था ड्रोन का मकसद?
- अमेरिका के डिफेंस डिपार्टमेंट के एक ऑफिशियल के मुताबिक, अंडरवाटर ड्रोन को सुबिक घाटी से 50 km दूर अंतरराष्ट्रीय जल सीमा में पकड़ा गया था।
- 'चीन द्वारा जब्त किए गए ड्रोन का इस्तेमाल समुद्र के पानी में खारापन और तापमान की जांच के लिए किया जा रहा था।'
चीन बोला- मामले को बेवजह तूल दे रहा अमेरिका
- चीन ने शनिवार को कहा था, 'अमेरिका इस मामले को बेवजह तूल दे रहा है।'
- इसके साथ बीजिंग ने यह भी कहा था कि वह अमेरिकी ड्रोन को 'वाजिब तरीकों' के तहत लौटा देगा।
- चीन की डिफेंस मिनिस्ट्री के स्पोक्सपर्सन सीनियर कर्नल यांग युजुन ने अमेरिका के आरोपों को खारिज करते हुए कहा था, 'चीन ने जहाजों के सेफ नेविगेशन के लिए अंडरवाटर ग्लाइडर को जब्त किया था।'
चीन-यूएस के बीच तनाव की 2 और अहम वजहें
-माना जा रहा है कि ड्रोन विवाद से दोनों देशों के डिप्लोमैटिक रिलेशन अपने सबसे बुरे दौर में पहुंच गए हैं।
- एक्सपर्ट का कहना है, 'ड्रोन को जब्त करना दोनों देशों के बीच बेहद अहम मिलिट्री घटना है। इससे पहले 2001 में यूएस नेवी का सर्विलांस एयरक्राफ्ट और चीन का एक फाइटर जेट टकराए थे, जिसमें चीनी पायलट की मौत हो गई थी।'
- वैसे तनाव की 2 और अहम वजहें भी हैं। पहला- ताइवान मु्द्दा, दूसरा-साउथ चाइना सी मुद्दा।
1. ताइवान मुद्दा
- ट्रम्प ने इसी महीने ताइवान के प्रेसिडेंट तसाई इंग-वेन से फोन पर बात की थी। जिस पर चीन ने एतराज जताया था।
- चीन ने ट्रम्प के उस कदम को अपनी 'वन चाइना' पॉलिसी पर अमेरिका के पहले के रुख में बदलाव के तौर पर देखा।
- चीन ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि वह 'वन चाइना' पॉलिसी पर अपने पहले के रुख को न बदले।
- चीन यह मानता है कि ताइवान उसका हिस्सा है जो उससे अलग हो गया और आखिर में ताइवान चीन का हिस्सा बन जाएगा।
- चीन ने ताइवान को यह ऑफर दिया था कि अगर वह खुद को चीन का हिस्सा मान ले तो उसे ऑटोनॉमी (स्वायत्तता) दे दी जाएगी, लेकिन ताइवान ने इसे ठुकरा दिया।
2. साउथ साइना सी मुद्दा
- साउथ चाइना सी को लेकर भी दोनों देशों के बीच विवाद है। बीजिंग इस पर अपना दावा करता है।
- फिलीपींस, वियतनाम, मलेशिया, ताइवान और ब्रुनेई साउथ चाइना सी पर बीजिंग के दावे के खिलाफ हैं।
- अमेरिका, चीन पर इस एरिया का सैन्यीकरण करने का आरोप लगाता रहा है।
- साउथ चाइना सी का करीब 35 लाख स्क्वायर km का एरिया विवादित है। इसमें तेल और गैस के बड़े भंडार दबे हुए हैं।
- अमेरिका के मुताबिक, इस इलाके में 213 अरब बैरल तेल और 900 ट्रिलियन क्यूबिक फीट नेचुरल गैस का भंडार है।
- वियतनाम इस इलाके में भारत को तेल खोजने की कोशिशों में शामिल होने का न्योता दे चुका है। इस समुद्री रास्ते से हर साल 7 ट्रिलियन डॉलर का बिजनेस होता है।
- चीन ने 2013 के आखिर में एक बड़े प्रोजेक्ट के जरिए पानी में डूबे रीफ एरिया को आर्टिफिशियल आइलैंड में बदल दिया था।

No comments:
Post a Comment