Tuesday, April 7, 2026
मोहन कैबिनेट के बड़े फैसले,, किसानों के साथ बैतूलवासियों को सौगात...
कांग्रेस विधायक की किस्मत अब HC के हाथ!
नई दिल्ली/भोपाल। मध्यप्रदेश की राजनीति से जुड़ा चर्चित ग्रामीण विकास बैंक धोखाधड़ी मामला अब दिल्ली हाई कोर्ट पहुंच गया है। दतिया से कांग्रेस के पूर्व विधायक राजेंद्र भारती ने अपनी सजा और दोषसिद्धि के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील दायर की है, जिस पर अदालत ने नोटिस जारी कर दिया है। मामले की अगली सुनवाई 15 अप्रैल को तय की गई है। दरअसल, इस पूरे मामले की शुरुआत ग्रामीण विकास बैंक में कथित धोखाधड़ी से जुड़ी जांच से हुई थी। जांच के बाद केस अदालत में पहुंचा, जहां सुनवाई के दौरान राजेंद्र भारती को दोषी पाया गया। नई दिल्ली स्थित राउस एवेन्यू कोर्ट ने उन्हें 3 साल की सजा सुनाई थी। सजा सुनाए जाने के साथ ही सुप्रीम कोर्ट के ‘लिली थॉमस’ फैसले के तहत उनकी विधायकी भी चली गई और वे विधानसभा की सदस्यता के लिए अयोग्य घोषित हो गए। यही वजह रही कि यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से भी बेहद अहम बन गया। अब राजेंद्र भारती ने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख करते हुए अपनी सजा को चुनौती दी है। उन्होंने अदालत से न सिर्फ सजा को रद्द करने की मांग की है, बल्कि दोषसिद्धि पर रोक लगाने की भी अपील की है, ताकि उनकी राजनीतिक स्थिति पर पड़े असर को रोका जा सके। दिल्ली हाई कोर्ट ने उनकी याचिका पर संज्ञान लेते हुए संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर दिया है। अब इस मामले में अगली सुनवाई 15 अप्रैल को होगी, जहां यह तय होगा कि भारती को किसी तरह की राहत मिलती है या नहीं। इस पूरे घटनाक्रम का असर मध्यप्रदेश की सियासत पर भी साफ नजर आ रहा है। एक तरफ कांग्रेस इसे कानूनी लड़ाई के तौर पर देख रही है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक समीकरण भी इस मामले से प्रभावित होते दिख रहे हैं। कुल मिलाकर, अब सबकी नजर 15 अप्रैल की सुनवाई पर टिकी है, जहां यह मामला नया मोड़ ले सकता है।
किसानों को बड़ी राहत: MP में गेहूं बेचने की बुकिंग शुरू
भोपाल। मध्यप्रदेश के लाखों किसानों के लिए राहत की खबर है। मौसम की अनिश्चितता और लगातार बदलते हालात के बीच सरकार ने गेहूं उपार्जन की प्रक्रिया तेज कर दी है। आज से प्रदेशभर में समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने के लिए स्लॉट बुकिंग शुरू हो गई है, जिससे किसान अपनी उपज बेचने की तैयारी कर सकेंगे। प्रदेश में 10 अप्रैल से गेहूं की सरकारी खरीदी शुरू होगी। इस बार सरकार ने साफ कर दिया है कि खरीदी की शुरुआत छोटे किसानों से की जाएगी, ताकि जिन किसानों के पास सीमित उत्पादन है, उन्हें पहले अवसर मिल सके और उन्हें इंतजार न करना पड़े। सरकार ने इस साल गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2625 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। इसके अलावा 40 रुपये प्रति क्विंटल की प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी, जिससे किसानों को उनकी फसल का बेहतर दाम मिल सकेगा। यानी कुल मिलाकर किसानों को बाजार से ज्यादा सुरक्षित और फायदेमंद मूल्य मिलेगा। मौसम की बात करें तो इन दिनों प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश, आंधी और ओलावृष्टि का असर देखने को मिल रहा है। ऐसे हालात में किसानों के लिए फसल को सुरक्षित रखना बड़ी चुनौती बन जाता है। इसी वजह से समय पर खरीदी शुरू होना किसानों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, क्योंकि वे खराब मौसम से पहले या उसके बीच अपनी उपज बेच सकेंगे। सरकार का मानना है कि स्लॉट बुकिंग सिस्टम से खरीदी प्रक्रिया व्यवस्थित रहेगी, भीड़ कम होगी और किसानों को लंबी लाइनों या इंतजार की परेशानी नहीं उठानी पड़ेगी। कुल मिलाकर, मौसम की मार झेल रहे किसानों के लिए यह फैसला राहत भरा साबित हो सकता है—जहां एक तरफ समय पर खरीदी की सुविधा मिलेगी, वहीं दूसरी ओर बेहतर दाम भी सुनिश्चित होंगे।
Monday, April 6, 2026
हेमंत ऋतु में बीजेपी का चौतरफा विकास,, जिलों में बनेंगे आधुनिक कार्यालय...
सीएम मोहन यादव ने किसे बताया असली "धुरंधर"
Sunday, April 5, 2026
LPG संकट के बीच सरकार का बड़ा फैसला!
भोपाल। मध्यप्रदेश में एलपीजी संकट के बीच सरकार बड़ा फैसला लेने की तैयारी में है। गैस की बढ़ती मांग और सप्लाई में आ रही दिक्कतों को देखते हुए अब नए उपभोक्ताओं को सीधे 14 किलो सिलेंडर की बजाय 5 किलो का कनेक्शन देने की योजना पर काम किया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, इस संबंध में जल्द ही आधिकारिक आदेश जारी किए जा सकते हैं। फूड एंड सिविल सप्लाई विभाग लगातार गैस कंपनियों और एजेंसियों के साथ मंथन कर रहा है ताकि आम लोगों को राहत मिल सके और गैस की उपलब्धता संतुलित रखी जा सके। विभाग की अपर मुख्य सचिव रश्मि शमी ने इस मुद्दे पर गैस कंपनियों से विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी है। रिपोर्ट के आधार पर यह तय किया जा रहा है कि किस तरह से सप्लाई को बेहतर तरीके से मैनेज किया जाए और ज्यादा से ज्यादा लोगों तक गैस कनेक्शन पहुंचाया जा सके। सरकार की योजना है कि फिलहाल नए कनेक्शन 5 किलो के दिए जाएं, जिन्हें बाद में जरूरत के हिसाब से 14 किलो में कन्वर्ट किया जा सके। इससे एक तरफ जहां ज्यादा लोगों को गैस कनेक्शन मिल पाएगा, वहीं दूसरी ओर सप्लाई पर भी दबाव कम होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम मौजूदा संकट के बीच एक व्यावहारिक समाधान हो सकता है, जिससे जरूरतमंद परिवारों तक गैस की पहुंच सुनिश्चित की जा सकेगी। हालांकि, आम उपभोक्ताओं के लिए यह देखना अहम होगा कि यह व्यवस्था कितनी प्रभावी साबित होती है। कुल मिलाकर, सरकार का यह फैसला एलपीजी संकट के बीच एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है, जो आने वाले दिनों में गैस वितरण प्रणाली को नई दिशा दे सकता है।





