भोपाल। राजधानी भोपाल की सड़कों पर उस समय सियासी तापमान अचानक बढ़ गया, जब भारतीय जनता युवा मोर्चा ने कांग्रेस कार्यालयों के घेराव का आह्वान किया। प्रदेशभर में इस आह्वान का असर देखने को मिला — विदिशा से लेकर उज्जैन और ग्वालियर तक कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए।
मामला हाल ही में हुए AI इम्पैक्ट समिट के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं के एक विवादित प्रदर्शन से जुड़ा है। युवा मोर्चा ने इसे विरोध का आधार बनाया और कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
बैरिकेड्स, वॉटर कैनन और नारेबाजी
भोपाल में रेड क्रॉस अस्पताल के पास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। बैरिकेड्स लगाए गए, पुलिस बल तैनात रहा और हालात बिगड़ने की आशंका में वॉटर कैनन भी तैयार रखा गया।
युवा मोर्चा के अध्यक्ष श्याम टेलर के नेतृत्व में कार्यकर्ता आगे बढ़े। जैसे-जैसे भीड़ कांग्रेस कार्यालय की ओर बढ़ी, नारेबाजी तेज होती गई। कुछ कार्यकर्ता बैरिकेड्स पर चढ़ गए। पुलिस ने भीड़ को रोकने के लिए वॉटर कैनन का सहारा लिया, लेकिन प्रदर्शनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं दिखे।
टकराव में बदली सियासत
आखिरकार जब प्रदर्शनकारी कांग्रेस कार्यालय के पास पहुंचे, तो माहौल और गरमा गया। दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। पहले तीखी बहस हुई, फिर हालात बिगड़ते चले गए। पत्थर और लाठियां चलने लगीं। अफरा-तफरी के बीच कई लोग घायल हो गए।
सड़क पर एक ओर कांग्रेस कार्यकर्ता “राहुल गांधी जिंदाबाद” के नारे लगा रहे थे, तो दूसरी ओर बीजेपी कार्यकर्ता विरोध दर्ज करा रहे थे। बीच में पुलिस का कड़ा पहरा था।
आरोप-प्रत्यारोप और धरने की तैयारी
पूर्व मंत्री पीसी शर्मा घटनास्थल पर पहुंचे और युवा मोर्चा कार्यकर्ताओं पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने तत्काल एफआईआर दर्ज करने की मांग की और कहा कि कई कांग्रेस कार्यकर्ता घायल हुए हैं, जिनमें कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है।
कांग्रेस नेताओं ने हबीबगंज थाने में शांतिपूर्ण धरने की घोषणा की है। उनका कहना है कि जब तक दोषियों पर कार्रवाई नहीं होगी, आंदोलन जारी रहेगा।
राजधानी में फिलहाल हालात काबू में बताए जा रहे हैं, लेकिन राजनीतिक बयानबाजी और विरोध-प्रदर्शन के बीच प्रदेश की सियासत में एक बार फिर टकराव की तस्वीर साफ दिखाई दे रही है।
