भोपाल। मध्यप्रदेश में निगम-मंडलों की नियुक्तियों का दौर जारी है, लेकिन बड़े शहरों के विकास प्राधिकरणों में नियुक्तियां अब भी अटकी हुई हैं। ग्वालियर और जबलपुर विकास प्राधिकरण में नियुक्तियों के बाद अब सबसे ज्यादा चर्चा भोपाल और इंदौर विकास प्राधिकरण को लेकर हो रही है, जहां दिग्गज नेताओं के बीच खींचतान खुलकर सामने आती दिख रही है। सूत्रों के मुताबिक, भोपाल विकास प्राधिकरण के लिए कई बड़े नेताओं ने अपने-अपने समर्थकों के नाम आगे बढ़ाए हैं। इनमें केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव खेमे के नेताओं के नाम प्रमुख बताए जा रहे हैं। हालांकि, जिस नाम पर लगभग सहमति बनती नजर आई, उसका स्थानीय मंत्रियों विश्वास सारंग और कृष्णा गौर द्वारा विरोध किए जाने की चर्चा है। यही वजह है कि अब तक भोपाल विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष के नाम पर अंतिम मुहर नहीं लग पाई है। उधर इंदौर में भी हालात अलग नहीं हैं। यहां मंत्री कैलाश विजयवर्गीय समर्थक और मुख्यमंत्री खेमे के नेताओं के बीच पद को लेकर अंदरूनी टकराव की चर्चा तेज है। देवास में भी इसी तरह के समीकरण बनने की बात सामने आ रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा में आमतौर पर नियुक्तियों को लेकर खुला टकराव कम दिखाई देता था, लेकिन इस बार हालात बदले हुए नजर आ रहे हैं। लंबे समय बाद भी भोपाल और इंदौर जैसे बड़े विकास प्राधिकरणों के लिए नाम तय न होना इसी ओर इशारा कर रहा है। इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने भी भाजपा पर तंज कसा है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि भाजपा में अब “एक अनार सौ बीमार” जैसे हालात बन गए हैं और पदों के लिए अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आ रही है। हालांकि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने दावा किया है कि भोपाल और इंदौर विकास प्राधिकरण के अध्यक्षों के नाम जल्द घोषित कर दिए जाएंगे। लेकिन फिलहाल पार्टी के भीतर चल रही खींचतान और दिग्गजों के बीच शक्ति संतुलन की राजनीति अलग ही कहानी बयां कर रही है।

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