Sunday, May 31, 2026

दिल्ली का टिकट नहीं, एमपी की कमान! राज्यसभा रेस से दूर रहेंगे जीतू पटवारी?


भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर हलचल तेज है। इस बीच कांग्रेस खेमे से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। सूत्रों के मुताबिक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी राज्यसभा चुनाव में पार्टी के उम्मीदवार नहीं होंगे। बताया जा रहा है कि पटवारी ने खुद पार्टी हाईकमान के सामने चुनाव लड़ने को लेकर ज्यादा उत्साह नहीं दिखाया और संगठन में अपनी भूमिका को प्राथमिकता देने की बात कही है। हालांकि कांग्रेस की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन दिल्ली से भोपाल तक सियासी गलियारों में इस चर्चा ने जोर पकड़ लिया है। क्योंकि पिछले कुछ दिनों से जीतू पटवारी का नाम संभावित उम्मीदवारों में सबसे आगे माना जा रहा था। राजनीतिक जानकारों की मानें तो कांग्रेस फिलहाल मध्य प्रदेश में संगठन को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। ऐसे में पार्टी शायद जीतू पटवारी को प्रदेश की राजनीति में ही सक्रिय रखना चाहती है। आगामी नगरीय निकाय और पंचायत चुनावों के साथ-साथ 2028 विधानसभा चुनाव की तैयारियों को देखते हुए कांग्रेस किसी बड़े संगठनात्मक बदलाव के मूड में नहीं दिख रही। पटवारी के नाम के पीछे हटने की खबरों के बाद अब कांग्रेस के भीतर नए नामों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। पार्टी ऐसे चेहरे की तलाश में है जो संगठन, क्षेत्रीय संतुलन और जातीय समीकरण तीनों पर फिट बैठे। यही वजह है कि दिल्ली दरबार में कई दावेदारों की सक्रियता भी बढ़ गई है। कांग्रेस में राज्यसभा की सीट हमेशा सम्मान से ज्यादा संदेश की राजनीति मानी जाती है। इस बार भी तस्वीर कुछ ऐसी ही दिखाई दे रही है। भोपाल में नेता समर्थकों को आश्वस्त कर रहे हैं, तो दिल्ली में समर्थक अपने नेताओं को। राज्यसभा की एक सीट ने कांग्रेस के कई नेताओं की धड़कनें बढ़ा दी हैं। लेकिन फिलहाल ऐसा लग रहा है कि जीतू पटवारी ने इस दौड़ में शामिल होने से पहले ही अपने कदम पीछे खींच लिए हैं। अब सवाल यह है कि यह त्याग है, रणनीति है या फिर पार्टी का कोई बड़ा सियासी गणित? फिलहाल कांग्रेस ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं, लेकिन इतना तय है कि जीतू पटवारी के नाम को लेकर बनी चर्चा अब नई दिशा में मुड़ती नजर आ रही है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि कांग्रेस राज्यसभा के लिए किस चेहरे पर दांव लगाती है और उसके पीछे का राजनीतिक संदेश क्या होगा।

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