भोपाल। मध्यप्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर बीजेपी के भीतर हलचल तेज है। नेताओं के नाम दिल्ली पहुंच चुके हैं, लेकिन राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा जिस नाम को लेकर हो रही है, वह है कैलाश विजयवर्गीय। सवाल सिर्फ इतना नहीं कि वे राज्यसभा जाएंगे या नहीं... बल्कि यह भी कि क्या बीजेपी अब प्रदेश की राजनीति में नए शक्ति संतुलन की पटकथा लिख रही है? सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी की ओर से केंद्रीय नेतृत्व को भेजी गई संभावित नामों की सूची में कैलाश विजयवर्गीय, डॉ. नरोत्तम मिश्रा, विनोद भदौरिया, अखंड प्रताप सिंह, लालसिंह आर्य, रंजना बघेल, डामोर और संघ पृष्ठभूमि से जुड़े अभय महाजन के नाम शामिल हैं। लेकिन इन सबके बीच सबसे दिलचस्प चर्चा विजयवर्गीय को लेकर है। राजनीतिक जानकारों की मानें तो यदि कैलाश विजयवर्गीय को राज्यसभा भेजा जाता है, तो यह सिर्फ एक संसदीय नियुक्ति नहीं होगी, बल्कि मध्यप्रदेश बीजेपी की अंदरूनी राजनीति में बड़ा संकेत भी माना जाएगा। माना जा रहा है कि इससे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और कैलाश विजयवर्गीय के बीच लंबे समय से चल रहे सियासी मनमुटाव और शक्ति संतुलन की चर्चा भी शांत हो सकती है। दरअसल, मोहन सरकार बनने के बाद से ही सत्ता और संगठन के भीतर दो अलग-अलग पावर सेंटर की चर्चा लगातार होती रही है। कैलाश विजयवर्गीय संगठन और केंद्रीय नेतृत्व में मजबूत पकड़ रखने वाले नेता माने जाते हैं, जबकि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपनी अलग कार्यशैली और टीम के साथ सरकार चला रहे हैं। कई राजनीतिक फैसलों और नियुक्तियों को लेकर दोनों खेमों के बीच अंदरखाने असहजता की खबरें भी समय-समय पर सामने आती रही हैं। ऐसे में यदि विजयवर्गीय को राज्यसभा भेजा जाता है, तो इसे बीजेपी की “वन एरो, मल्टीपल टारगेट” रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। एक तरफ केंद्र में अनुभवी चेहरा मिलेगा, दूसरी ओर प्रदेश कैबिनेट में बदलाव का रास्ता भी आसान हो जाएगा। राजनीतिक गलियारों में तो यहां तक चर्चा है कि विजयवर्गीय की राज्यसभा एंट्री, मोहन कैबिनेट से उनकी विदाई का रास्ता भी बन सकती है। उधर, नरोत्तम मिश्रा का नाम भी लगातार चर्चा में बना हुआ है। बीजेपी के एक बड़े ब्राह्मण चेहरे के रूप में उनकी वापसी की संभावनाओं को भी राजनीतिक नजरिए से देखा जा रहा है। वहीं आदिवासी समीकरण साधने के लिए रंजना बघेल और डामोर के नामों पर भी गंभीरता से विचार किया जा रहा है।सबसे चौंकाने वाली एंट्री संघ पृष्ठभूमि से जुड़े अभय महाजन की मानी जा रही है। अचानक उनका नाम सामने आने के बाद कई नेताओं की राजनीतिक गणित बदलती दिखाई दे रही है। इससे यह भी संकेत मिल रहे हैं कि बीजेपी संगठन और संघ के संतुलन को भी साधने की कोशिश में है। फिलहाल, राज्यसभा की एक सीट ने बीजेपी के भीतर कई समीकरणों को गर्म कर दिया है। अब नजर दिल्ली पर टिकी है, क्योंकि अंतिम फैसला वहीं से होना है। लेकिन इतना तय माना जा रहा है कि इस बार राज्यसभा सिर्फ एक सीट का चुनाव नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश बीजेपी के भविष्य के सत्ता संतुलन का ट्रेलर साबित हो सकता है।

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