भोपाल। मध्यप्रदेश बीजेपी की नई प्रदेश कार्यसमिति का गठन अब तक नहीं हो पाने से सियासी गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने मई में ओरछा में प्रदेश कार्यसमिति की बैठक कराने के संकेत दिए थे, लेकिन मई खत्म होने को है और अब तक नई टीम का ऐलान नहीं हो पाया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर बीजेपी की नई कार्यसमिति का गठन कहां अटक गया है। दरअसल, इस बार संगठन प्रदेश कार्यसमिति को छोटा लेकिन ज्यादा प्रभावी बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक नई कार्यसमिति में केवल 106 सदस्यों को जगह देने की तैयारी है। यही फैसला अब संगठन के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है, क्योंकि सीमित जगह में वरिष्ठ नेताओं, पुराने कार्यकर्ताओं, नए चेहरों और क्षेत्रीय समीकरणों के बीच संतुलन बैठाना आसान नहीं माना जा रहा। पार्टी संगठन इस बार कार्यसमिति में युवाओं, सक्रिय कार्यकर्ताओं और जमीन पर काम करने वाले नेताओं को मौका देने के मूड में दिखाई दे रहा है। वहीं कई वरिष्ठ नेता भी अपने समर्थकों को संगठन में जगह दिलाने के लिए सक्रिय बताए जा रहे हैं। ऐसे में नामों को लेकर लगातार मंथन और अंदरूनी चर्चा का दौर चल रहा है। सूत्रों की मानें तो प्रदेश और जिला कार्यसमितियों को लेकर अधिकांश नाम लगभग तय हो चुके हैं, लेकिन अंतिम सूची पर सहमति बनने में वक्त लग रहा है। संगठन कोई ऐसा संदेश नहीं देना चाहता जिससे किसी गुट या बड़े नेता की नाराजगी सामने आए। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बीजेपी इस बार संगठन में कम लेकिन मजबूत टीम के फार्मूले पर काम कर रही है। लेकिन दिग्गज नेताओं की लंबी फेहरिस्त और समर्थकों को साधने की कोशिशों ने प्रदेश कार्यसमिति के गठन को फिलहाल उलझा दिया है। अब नजर इस बात पर है कि प्रदेश नेतृत्व कब तक इस बहुप्रतीक्षित टीम का ऐलान करता है।

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