Wednesday, March 25, 2026

मध्यप्रदेश में संविदा कर्मचारियों को लेकर आया बड़ा अपडेट

 


भोपाल। मध्यप्रदेश में संविदा कर्मचारियों के अधिकारों को लेकर अब सरकार सख्त नजर आ रही है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने राज्य के सभी विभागों, निगम-मंडलों, विश्वविद्यालयों, स्थानीय निकायों, आयोगों, प्राधिकरणों और अन्य संस्थाओं से स्पष्टीकरण मांगा है कि संविदा नीति 2023 अब तक पूरी तरह लागू क्यों नहीं की गई। दरअसल, 22 जुलाई 2023 को राज्य सरकार ने संविदा कर्मचारियों के लिए नई नीति जारी की थी। इस नीति में संविदा कर्मचारियों को कई महत्वपूर्ण सुविधाएं देने का प्रावधान किया गया था, लेकिन अब तक कई विभागों में इनका सही तरीके से पालन नहीं हुआ है। इसी को लेकर सामान्य प्रशासन विभाग ने सख्ती दिखाते हुए विस्तृत जानकारी मांगी है। सरकार द्वारा जारी इस नीति के तहत संविदा कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन के अनुसार वेतन समकक्षता, अनुकम्पा नियुक्ति, सेवानिवृत्ति पर ग्रेच्युटी, अवकाश सुविधा, वार्षिक वेतन वृद्धि और अन्य लाभ दिए जाने हैं। इसके अलावा कुछ मामलों में नियमित कर्मचारियों की तरह सुविधाएं देने और भविष्य में भर्ती प्रक्रियाओं में भी संविदा कर्मचारियों को प्राथमिकता देने का प्रावधान किया गया है। हालांकि, जमीनी स्तर पर स्थिति अलग दिखाई दे रही है। जानकारी के अनुसार, कई विभागों में केवल वेतन समकक्षता लागू की गई है, जबकि अनुकम्पा नियुक्ति, ग्रेच्युटी और अन्य सुविधाएं अब भी लंबित हैं। इसके चलते बड़ी संख्या में प्रकरण अटके हुए हैं और कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है। इतना ही नहीं, कई विभागों और उनकी योजनाओं, परियोजनाओं, विश्वविद्यालयों और नगर निगमों में काम कर रहे संविदा कर्मचारियों को अभी तक वेतन समकक्षता का पूरा लाभ भी नहीं मिल पाया है। कुछ मामलों में वेतन निर्धारण में भी विसंगतियां सामने आई हैं, जिससे कर्मचारियों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल सका है। संविदा कर्मचारी संगठनों का कहना है कि प्रदेश में हजारों प्रकरण ऐसे हैं, जिनमें कर्मचारियों को ग्रेच्युटी और अनुकम्पा नियुक्ति का लाभ नहीं मिला है। कई कर्मचारी इन मामलों को लेकर न्यायालय तक पहुंच चुके हैं और आदेश मिलने के बाद भी विभागों द्वारा कार्रवाई में देरी की जा रही है। इसी को देखते हुए सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और सचिव स्तर के अधिकारियों को निर्देश देते हुए एक तय प्रारूप में जानकारी मांगी है। विभागों से पूछा गया है कि उन्होंने नीति के प्रावधान लागू किए हैं या नहीं, और यदि नहीं किए हैं तो इसके स्पष्ट कारण बताएं। सरकार ने यह जानकारी प्राथमिकता के आधार पर मांगी है, जिससे साफ संकेत मिलते हैं कि अब इस मामले में जल्द ही ठोस कार्रवाई हो सकती है। कुल मिलाकर, सरकार के इस कदम को संविदा कर्मचारियों के हित में एक बड़ा निर्णय माना जा रहा है। अब देखने वाली बात यह होगी कि विभाग इस पर कितनी जल्दी अमल करते हैं और संविदा कर्मचारियों को उनके अधिकार कब तक मिल पाते हैं।

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