पुरे प्रदेश के अलग अलग हिस्सो के 15000 किसानो के एक ताजा सर्वे के बाद जो सच सामने आया है उसने प्रदेश को मिलने वाले कृषि कर्मण पुरुस्कार और सरकार के दावो पर सवाल खडे कर दिये है ....सी एम शिवराज भले ही खुद को किसान पुत्र कहे लेकिन उनके राज मे किसानो की माली हालत जमकर खस्ता हुयी है ..इस सर्वे के मुताबिक जिन किसानो ने पहले से कर्जा लेकर रखा था उन पर पिछ्ले 5 सालो मे कर्जा 12 गुना बढा है ...सर्वे के मुताबिक कडवा सच ये है की दुसरी और तीसरी श्रेणी का किसान 5 लाख से लेकर 12 लाख रुपये तक के कर्जे मे डुबा हुआ है .....सर्वे मे प्रदेश के सभी जिलो के प्रत्येक ब्लाक के किसानो को शामिल किया गया था ...सर्वे मे किसानो के खातो का विवरण भी लिया गया ..कई किसान इस दौरान अपनी सम्पत्ति भी दाँव पर लगाये बैठे है ...बदले हुये अग्रीकल्चर केलेंडर ने किसानो की हालत और खस्ता कि है ..सरकार की नीतीयो के फायदेमंद होने का अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है की किसानो ने दाम के लालच मे आठ माह मे होने वाली दलहन की फसल लगाना शुरु किया और उसमे मे भी वो घाटे मे है ...इसके अलावा आयात शुल्क कम करने के कारण भी किसानो को भारी नुकसान हुआ है ..ये सर्वे भारतीय किसान मजदूर महासंघ ने करवाया है ........किसानो के इन हालातो पर भारतीय मजदूर किसान महासंघ के राष्ट्रीय संयोजक शिवकुमार शर्मा ने कहा है की असल मे सी एम शिवराज किसान पुत्र है ही नही इसिलिये वो किसानो के दर्द को नही समझ पा रहे ..इस मामले मे सरकार के एक काबिला मंत्री ने रियेक्शन ही नही दिया तो विभाग के जिम्मेदार मंत्री भी उपलब्ध नही हुये .......

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