Wednesday, December 14, 2016

भारत में नोटबंदी के फैसले से नेपाल की अर्थव्‍यवस्‍था को नुकसान

काठमांडो:नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा 8 नवंबर को लागू किए गए नोटबंदी के फैसले का असर भारत के बाद सबसे ज्‍यादा जिस देश पर पड़ा है, वह नेपाल है। इस फैसले से नेपाल की अर्थव्‍यवस्‍था की रफ्तार नीचे आ गई है। एक तरफ जहां व्‍यापार पर जबर्दस्‍त असर पड़ा है वहीं पर्यटकों की तादाद घट गई है। साथ ही भारत में रह रहे नेपालियों द्वारा अपने देश भेजे जाने वाली रकम की मात्रा भी गिर गई है।

दुनिया की प्रमुख रेटिंग एजेंसी फिच की ग्रुप कंपनी बीएमआई रिसर्च ने बुधवार को इस बात की जानकारी दी। बीएमआई ने नेपाल की इकॉनमी के लिए लगाए गए अपने पहले के अनुमान को कम कर दिया है। पहले जहां इसने नेपाल की इकॉनमी की विकास दर का अनुमान 2.5 प्रतिशत लगाया था वहीं अब इसे 2.2 प्रतिशत कर दिया गया है। यह अनुमान इस वित्‍त वर्ष से लेकर जुलाई 2017 तक के लिए है। बीएमआई रिसर्च ने इसके पीछे भारत में नोटबंदी के फैसले को प्रमुख वजह बताया है।बता दें कि नेपाल की अर्थव्‍यवस्‍था करीब 21 अरब डॉलर (करीब 1416 अरब रुपये) की है और वित्‍त वर्ष 2015-16 के दौरान यह 0.8 प्रतिशत से भी कम की विकास दर से जूझ रही थी। नेपाल में 2015 में आए विनाशकारी भूकंप का इकॉनमी पर बहुत बुरा असर पड़ा था।

बीएमआई की एक रिपोर्ट में कहा गया, 'भारत से आने वाले फंड में खलल की वजह से पुनर्निर्माण संबंधी कार्यों पर असर हो सकता है। ऐसा इसलिए क्‍योंकि व्‍यापार, नौकरी और सहायता आदि के लिए नेपाल की अर्थव्‍यवस्‍था बहुत हद तक भारत पर निर्भर है।'

भारत में नोटबंदी के बाद नेपाल ने अपने यहां भारतीय करंसी को बैन कर दिया है। नेपाल राष्‍ट्र बैंक का कहना है कि जब तक उसे भारतीय रिजर्व बैंक की तरफ से नए नोटों के बारे में आधिकारिक संचार नहीं मिल जाता, तब तक भारतीय करंसी पर बैन रहेगा। नेपाल राष्‍ट्र बैंक ने कहा, 'जब तक हमें आधिकारिक तौर पर सूचित नहीं किया जाता, हम नए भारतीय नोटों को स्‍वीकार नहीं करेंगे।' ऐसा होने की वजह से भारतीय सीमा पर अनौपचारिक तरीके से व्‍यापार कर रहे हजारों नेपाली प्रभावित हुए हैं। ना तो उन्‍हें पैसा मिल पा रहा है और ना ही वे पेमेंट कर पा रहे हैं।

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