Saturday, May 23, 2026

हनीट्रेप में एमपी के कौनसे माननीय!


भोपाल। मध्यप्रदेश की राजनीति में इन दिनों मौसम गर्मी से नहीं, बल्कि “Honeytrap 2.0” की फुसफुसाहटों से ज्यादा तप रहा है। सत्ता के गलियारों में अचानक पुराने चैट डिलीट होने लगे हैं, कुछ माननीयों ने फोन बदल लिए हैं, तो कुछ अब हर कॉल पर “भाई रिकॉर्डिंग तो नहीं हो रही?” पूछकर बात शुरू कर रहे हैं। अब “हनीट्रैप पार्ट-2” ने फिर कई बड़े चेहरों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। इस बार चर्चा सिर्फ अफसरों या कारोबारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि कुछ माननीयों और रसूखदार नेताओं के नाम भी सत्ता के कॉरिडोर में तैरते बताए जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक इस पूरे नेटवर्क का तरीका बेहद फिल्मी लेकिन खतरनाक था। पहले सोशल मीडिया या जान-पहचान के जरिए संपर्क, फिर दोस्ती, फिर निजी मुलाकातें और वीडियो कॉल… और उसके बाद शुरू होता था “वीडियो वाले रिश्तों” का असली खेल। इस पूरे मामले में सागर की “मिस्ट्री गर्ल” रेशू उर्फ अभिलाषा चौधरी का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है। उसके कथित ऑडियो और चैट सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में बेचैनी और बढ़ गई है। कहा जा रहा है कि उसके संपर्क सिर्फ एक शहर तक सीमित नहीं थे, बल्कि भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर और रीवा तक फैले हुए थे। सबसे ज्यादा सनसनी उस दावे ने फैलाई है, जिसमें 100 से ज्यादा आपत्तिजनक वीडियो होने की चर्चा है। हालांकि जांच एजेंसियों ने किसी विधायक या नेता का नाम आधिकारिक तौर पर सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन सत्ता के गलियारों में हर कोई यही जानना चाहता है — “आखिर वो माननीय कौन हैं?” सूत्र यह भी बता रहे हैं कि कुछ वीडियो को लेकर कथित सौदेबाजी और “मैनेजमेंट” की कोशिशें भी हुईं। यही वजह है कि अब SIT गठन की चर्चाएं भी तेज हैं और कई लोग डर रहे हैं कि कहीं अगला खुलासा राजनीतिक भूचाल न ले आए।फिलहाल जांच जारी है… लेकिन भोपाल की राजनीति में इन दिनों सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला शब्द शायद यही है -“भाई, चैट डिलीट कर देना…”

Friday, May 22, 2026

मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के लिए अधिसूचना जारी,, कमलनाथ की दिल्ली की तैयारी..

मध्यप्रदेश में खाली होने वाली तीन राज्यसभा सीटों के लिए चुनावी तारीख घोषित हो गई है.. 10 राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों को लेकर चुनाव होना है। चुनाव आयोग ने चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है। चुनाव आयोग की ओर से जानकारी दी गई है कि 10 राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों पर 18 जून 2026 को चुनाव कराया जाएगा. मध्य प्रदेश की तीन सीटों पर होगा राज्यसभा चुनाव होंगे असल।में दिग्विजय सिंह ,जॉर्ज कुरियन और सुमेर सिंह सोलंकी की राज्यसभा सीट हो रही है खाली। सूत्रों की माने तो कमलनाथ ये उनके परिवार को कोई सदस्य दिग्विजय की जगह राज्यसभा जा सकता है ,,हालांकि जीतू पटवारी भी कोशिश में लगे है,,, दूसरी तरफ बीजेपी में भी कैलाश विजयवर्गीय को राज्यसभा भेजने के कयास है ,, हालांकि अंदरखाने की खबर ये है कि प्रहलाद पटेल में कोशिश में जुटे हैं

Thursday, May 21, 2026

कहां अटका बीजेपी की प्रदेश कार्यसमिति का गठन?


भोपाल। मध्यप्रदेश बीजेपी की नई प्रदेश कार्यसमिति का गठन अब तक नहीं हो पाने से सियासी गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने मई में ओरछा में प्रदेश कार्यसमिति की बैठक कराने के संकेत दिए थे, लेकिन मई खत्म होने को है और अब तक नई टीम का ऐलान नहीं हो पाया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर बीजेपी की नई कार्यसमिति का गठन कहां अटक गया है। दरअसल, इस बार संगठन प्रदेश कार्यसमिति को छोटा लेकिन ज्यादा प्रभावी बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक नई कार्यसमिति में केवल 106 सदस्यों को जगह देने की तैयारी है। यही फैसला अब संगठन के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है, क्योंकि सीमित जगह में वरिष्ठ नेताओं, पुराने कार्यकर्ताओं, नए चेहरों और क्षेत्रीय समीकरणों के बीच संतुलन बैठाना आसान नहीं माना जा रहा। पार्टी संगठन इस बार कार्यसमिति में युवाओं, सक्रिय कार्यकर्ताओं और जमीन पर काम करने वाले नेताओं को मौका देने के मूड में दिखाई दे रहा है। वहीं कई वरिष्ठ नेता भी अपने समर्थकों को संगठन में जगह दिलाने के लिए सक्रिय बताए जा रहे हैं। ऐसे में नामों को लेकर लगातार मंथन और अंदरूनी चर्चा का दौर चल रहा है। सूत्रों की मानें तो प्रदेश और जिला कार्यसमितियों को लेकर अधिकांश नाम लगभग तय हो चुके हैं, लेकिन अंतिम सूची पर सहमति बनने में वक्त लग रहा है। संगठन कोई ऐसा संदेश नहीं देना चाहता जिससे किसी गुट या बड़े नेता की नाराजगी सामने आए। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बीजेपी इस बार संगठन में कम लेकिन मजबूत टीम के फार्मूले पर काम कर रही है। लेकिन दिग्गज नेताओं की लंबी फेहरिस्त और समर्थकों को साधने की कोशिशों ने प्रदेश कार्यसमिति के गठन को फिलहाल उलझा दिया है। अब नजर इस बात पर है कि प्रदेश नेतृत्व कब तक इस बहुप्रतीक्षित टीम का ऐलान करता है।

Wednesday, May 20, 2026

गेहूं बेचने वाले किसानों को सरकार ने दी बड़ी राहत

 


भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने गेहूं बेचने वाले किसानों को बड़ी राहत दी है। जिन किसानों ने 23 मई तक स्लॉट बुक कर लिया है, उनसे अब 28 मई तक गेहूं खरीदा जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यह घोषणा करते हुए कहा कि सरकार किसान कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और किसी भी किसान का गेहूं खरीदी से नहीं छूटेगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि कई किसानों ने स्लॉट तो बुक कर लिए थे, लेकिन खरीदी केंद्रों पर लंबी लाइन और अन्य व्यवस्थागत कारणों से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। किसानों की इसी समस्या को देखते हुए सरकार ने खरीदी की अंतिम तारीख बढ़ाने का फैसला लिया है। सीएम मोहन यादव ने कहा कि इस साल मध्यप्रदेश ने गेहूं खरीदी में अपना ही रिकॉर्ड तोड़ दिया है। पिछले साल प्रदेश में करीब 77 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया था, जबकि इस बार सरकार 100 लाख मीट्रिक टन गेहूं उपार्जन का लक्ष्य हासिल करने जा रही है। अब तक करीब 91 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा जा चुका है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरे देश में सबसे ज्यादा किसानों से गेहूं खरीदने वाला राज्य मध्यप्रदेश बना है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे चिंता न करें, सरकार सभी स्लॉट बुक किसानों का गेहूं खरीदेगी। डॉ. मोहन यादव ने कहा कि वैश्विक चुनौतियों, भंडारण, बारदाना और ट्रांसपोर्ट जैसी दिक्कतों के बावजूद सरकार ने व्यवस्थाएं मजबूत की हैं। खरीदी केंद्रों पर किसानों को 2625 रुपए प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया जा रहा है। सरकार के इस फैसले से उन हजारों किसानों को राहत मिलेगी, जो स्लॉट बुक होने के बावजूद समय पर गेहूं नहीं बेच पा रहे थे।




तबादलों का रास्ता साफ! 1 जून से शुरू होंगे ट्रांसफर

भोपाल। मध्यप्रदेश के लाखों अधिकारियों और कर्मचारियों का लंबे समय से चला आ रहा इंतजार आखिर खत्म हो गया। मोहन कैबिनेट की बैठक में राज्य सरकार की तबादला नीति-2026 को मंजूरी दे दी गई है। नई नीति के तहत प्रदेश में 1 जून से 15 जून तक राज्य और जिला स्तर पर तबादले किए जाएंगे। सामान्य प्रशासन विभाग ने इसका ड्राफ्ट तैयार कर मुख्यमंत्री सचिवालय भेजा था, जिस पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मंत्रियों की सहमति के बाद अंतिम मुहर लगी। नई तबादला नीति में कर्मचारियों की सुविधाओं और मानवीय पहलुओं को भी प्राथमिकता दी गई है। सरकार ने तय किया है कि पति-पत्नी को एक ही स्थान पर पदस्थ करने के मामलों में विशेष तौर पर विचार किया जाएगा। वहीं गंभीर बीमारी से जूझ रहे कर्मचारियों को भी तबादलों में राहत दी जाएगी। मोहन कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए मंत्री चेतन कश्यप ने बताया कि मुख्यमंत्री की ए प्लस नोटशीट वाले तबादले 31 मई तक किए जाएंगे। लंबित आवेदनों का भी निराकरण किया जाएगा। हालांकि इन्हें औपचारिक तबादला नीति का हिस्सा नहीं बनाया गया है, लेकिन प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई होगी। नई नीति के तहत जिलों के अंदर होने वाले तबादलों के अधिकार प्रभारी मंत्रियों को दिए गए हैं। वहीं स्कूल शिक्षा विभाग के लिए अलग से तबादला नीति तैयार की गई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों पर यह तबादला नीति लागू नहीं होगी। सरकार ने ए प्लस नोटशीट वाले मामलों को सबसे ज्यादा प्राथमिकता देने का फैसला किया है। इसके अलावा बीमारी या विशेष परिस्थितियों वाले कर्मचारियों के आवेदन भी प्राथमिकता से निपटाए जाएंगे। मध्यप्रदेश की नई तबादला नीति को लेकर कर्मचारियों और अधिकारियों में उत्साह देखा जा रहा है। लंबे समय बाद आई इस नीति से कर्मचारियों को पारदर्शिता और राहत दोनों की उम्मीद है। वहीं मंत्रालय से लेकर जिलों तक अब तबादलों को लेकर हलचल तेज हो गई है।

Tuesday, May 19, 2026

अफसर-कर्मचारियों के तबादलों पर बड़ा अपडेट


भोपाल। मध्यप्रदेश में लंबे समय से तबादला नीति का इंतजार कर रहे सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए बड़ी खबर है। प्रदेश सरकार ने वर्ष 2026 की नई तबादला नीति तैयार कर ली है। सामान्य प्रशासन विभाग यानी GAD ने इसका ड्राफ्ट तैयार कर मुख्यमंत्री सचिवालय को भेज दिया है।सूत्रों के मुताबिक बुधवार को होने वाली मोहन कैबिनेट की बैठक में इस नई ट्रांसफर पॉलिसी को मंजूरी मिल सकती है। माना जा रहा है कि मंजूरी के बाद प्रदेशभर में तबादलों का दौर शुरू होगा। नई नीति में विभागीय जरूरत, प्रशासनिक व्यवस्था और कर्मचारियों की लंबे समय से लंबित मांगों को ध्यान में रखा गया है। सरकार इस बार तबादला प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने की तैयारी में है। राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में भी इस नीति को लेकर चर्चाएं तेज हैं, क्योंकि कैबिनेट मंजूरी के बाद कई विभागों में बड़े स्तर पर फेरबदल देखने को मिल सकते हैं। कर्मचारियों की नजर अब बुधवार की कैबिनेट बैठक पर टिकी हुई है।