Saturday, April 25, 2026
विकास प्राधिकरणों के लिए नाम तय,, स्थानीय मंत्रियों के समर्थकों को मौका!
Friday, April 24, 2026
निगम मंडल में नियुक्तियों का सिलसिला जारी, सिंधिया समर्थकों को बड़ा झटका
भोपाल। मध्यप्रदेश में लंबे इंतजार के बाद अब निगम-मंडलों और प्राधिकरणों में नियुक्तियों का दौर रफ्तार पकड़ चुका है। सरकार लगातार अहम पदों पर नियुक्तियां कर संगठनात्मक और प्रशासनिक संतुलन साधने में जुटी है। इसी कड़ी में केशव सिंह बघेल को कुक्कुट एवं पशुधन विकास निगम का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। इसे ग्रामीण और पशुपालन से जुड़े क्षेत्र में सरकार के फोकस के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं, ग्वालियर में भी बड़ी नियुक्ति करते हुए ग्वालियर व्यापार मेला प्राधिकरण में नई टीम की घोषणा की गई है। आदेश के मुताबिक अशोक जादौन को प्राधिकरण का अध्यक्ष और उदयवीर सिंह गुर्जर को उपाध्यक्ष बनाया गया है। सरकार के इस फैसले को ग्वालियर व्यापार मेले के बेहतर संचालन और व्यवस्थाओं को और मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। ग्वालियर मेला प्रदेश का प्रमुख आयोजन है, जहां हर साल बड़ी संख्या में व्यापारी और लोग शामिल होते हैं। राजनीतिक जानकारों की मानें तो इन नियुक्तियों के जरिए सरकार क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन साधने के साथ-साथ संगठन से जुड़े सक्रिय चेहरों को भी जिम्मेदारी दे रही है। कुल मिलाकर साफ है कि प्रदेश में अब नियुक्तियों का पहिया तेजी से घूम रहा है और आने वाले दिनों में कई और नामों पर मुहर लगने की संभावना है।
निगम मंडल की दावेदारी से बाहर हुए सभी वर्तमान विधायक
भोपाल। मध्यप्रदेश में निगम-मंडलों में नियुक्तियों का सिलसिला जारी है और आज चार और नामों पर मुहर लगने की तैयारी है। सूत्रों के मुताबिक, इस बार की नियुक्तियों में पार्टी ने साफ संकेत दे दिया है कि वर्तमान विधायकों और चुनाव हार चुके नेताओं को जगह नहीं दी जाएगी। जानकारी के अनुसार, इस सूची में वरिष्ठ नेताओं को प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि सक्रिय संगठनात्मक कार्यकर्ताओं को भी मौका देने पर जोर है। इसी बीच सिंधिया समर्थक मानी जाने वाली Imarti Devi और Mahendra Singh Sisodia को इस चरण में जगह नहीं मिलने की चर्चा है। वहीं, पूर्व मंत्री Ram Niwas Rawat का नाम भी फिलहाल अटका हुआ बताया जा रहा है, जिस पर अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। सूत्रों का कहना है कि पार्टी इस बार नियुक्तियों के जरिए संगठन में संतुलन साधने और नए चेहरों को अवसर देने की रणनीति पर काम कर रही है। यही वजह है कि मौजूदा विधायकों और हालिया चुनाव में हार चुके नेताओं को फिलहाल सूची से दूर रखा जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में इन संभावित नामों और फैसलों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। अब नजर इस बात पर टिकी है कि आखिर आज जारी होने वाली सूची में किन चेहरों को जिम्मेदारी मिलती है और कौन इंतजार में ही रह जाता है।
आज ही जारी होगी शहरीय विकास प्राधिकरण की भी लिस्ट
मध्यप्रदेश में लंबे समय से अटकी शहरी विकास प्राधिकरणों की नियुक्तियों को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। भारतीय जनता पार्टी अब से कुछ ही देर में उज्जैन, रतलाम, देवास और इंदौर के शहरी विकास प्राधिकरणों की सूची जारी करने जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, इन नियुक्तियों का पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं को काफी समय से इंतजार था, जो अब खत्म होने वाला है। पिछले कई महीनों से इन नामों को लेकर संगठन और सरकार के बीच मंथन जारी था और कई दौर की चर्चाओं के बाद सूची को अंतिम रूप दिया गया है। बताया जा रहा है कि इस सूची में क्षेत्रीय संतुलन, जातीय समीकरण और संगठन में सक्रिय कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दी गई है। साथ ही कुछ नए चेहरों को मौका देकर संगठन को मजबूती देने की रणनीति पर भी काम किया गया है। राजनीतिक हलकों में इन नियुक्तियों को लेकर हलचल तेज है और कई नामों को लेकर पहले से ही अटकलें लगाई जा रही हैं। अब नजर इस बात पर टिकी है कि आखिर किन चेहरों को जिम्मेदारी मिलती है और किन्हें इंतजार करना पड़ेगा। यह नियुक्तियां न सिर्फ संगठनात्मक संतुलन के लिहाज से अहम हैं, बल्कि आने वाले राजनीतिक समीकरणों पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है।
Thursday, April 23, 2026
MP times की खबर पर लगी मुहर, निगम मंडल की लिस्ट जारी
भोपाल। मध्यप्रदेश में लंबे इंतजार के बाद राजनीतिक नियुक्तियों की शुरुआत हो गई है। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने चार अहम आयोगों के अध्यक्षों के नाम फाइनल कर दिए हैं, जिससे साफ है कि सरकार अब नियुक्तियों की प्रक्रिया को तेजी देने के मूड में है। जारी लिस्ट के अनुसार, अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष पद पर कैलाश जाटव का नाम तय किया गया है। महिला आयोग की कमान रेखा यादव को सौंपी गई है। वहीं अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष के रूप में रामलाल रौतेल को जिम्मेदारी दी गई है, जबकि बाल संरक्षण आयोग का अध्यक्ष डॉ. निवेदिता शर्मा को बनाया गया है। इन नियुक्तियों को सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। लंबे समय से लंबित पड़ी इन नियुक्तियों को लेकर संगठन और सरकार के बीच लगातार मंथन चल रहा था, जिसके बाद अब इन नामों पर सहमति बनी है। माना जा रहा है कि आयोगों में नियुक्तियों के साथ ही अब निगम-मंडलों और अन्य बोर्ड्स में भी जल्द ही नियुक्तियों का सिलसिला तेज होगा। इससे पार्टी संगठन में सक्रिय कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देने के साथ-साथ राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश की जा रही है। राजनीतिक गलियारों में इन नियुक्तियों को लेकर चर्चा तेज हो गई है और अब नजर आगे आने वाली निगम-मंडल सूची पर टिकी हुई है।
निगम-मंडल में किसे मिलेगा पद? इन नामों पर टिकी नजरें
भोपाल। मध्यप्रदेश में लंबे इंतजार के बाद अब राजनीतिक नियुक्तियों का सिलसिला शुरू होने जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, इसकी शुरुआत आज विभिन्न आयोगों में नियुक्तियों से की जाएगी, जहां कई अहम पदों के लिए नाम लगभग तय हो चुके हैं। जानकारी के अनुसार, अनुसूचित जाति आयोग में कैलाश जाटव के नाम की चर्चा जोरों पर है, जबकि अनुसूचित जनजाति आयोग के लिए भात सिंह नेताम को जिम्मेदारी मिलने की संभावना जताई जा रही है। वहीं युवा आयोग में प्रवीण शर्मा का नाम प्रमुख दावेदार के रूप में सामने आ रहा है। सूत्र बताते हैं कि इन नियुक्तियों को लेकर संगठन और सरकार के बीच लंबे समय से मंथन चल रहा था। क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए नामों का चयन किया गया है, ताकि अलग-अलग वर्गों को प्रतिनिधित्व मिल सके। माना जा रहा है कि आयोगों में नियुक्तियों के बाद जल्द ही निगम-मंडलों और अन्य बोर्ड्स में भी नियुक्तियों की प्रक्रिया तेज होगी। यह पूरी कवायद संगठन में सक्रिय कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देने और राजनीतिक संतुलन साधने की रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। हालांकि, अभी आधिकारिक घोषणा का इंतजार है, लेकिन सियासी गलियारों में इन नामों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। अब नजर इस बात पर है कि सरकार और संगठन कब इन नियुक्तियों पर औपचारिक मुहर लगाते हैं।
आज आएगी राजनैतिक नियुक्तियों की पहली सूची, आयोगों से शुरुआत
भोपाल। मध्यप्रदेश में महीनों से अटकी बीजेपी की निगम-मंडल सूची आखिरकार आज जारी हो सकती है। पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए यह सिर्फ एक सूची नहीं, बल्कि लंबे इंतजार का अंत है- एक ऐसा इंतजार, जो बार-बार उम्मीद जगाता और फिर टलता रहा। सूत्र बताते हैं कि इस सूची के पीछे सिर्फ चयन नहीं, बल्कि सियासी संतुलन की पूरी गणित काम कर रही है। पिछले कई महीनों में नामों को लेकर खींचतान का दौर चलता रहा—कभी किसी नाम पर सहमति नहीं बनी, तो कभी किसी नेता की आपत्ति ने पूरी सूची को रोक दिया। हालात ऐसे रहे कि भोपाल से लेकर दिल्ली तक कई बार फाइलें गईं-आईं, लेकिन हर बार कुछ न कुछ अटक गया। आखिरकार मामला तब आगे बढ़ा जब संघ, संगठन और सरकार के प्रतिनिधियों के बीच भोपाल में लगातार बैठकों का दौर चला। कई स्तरों पर मंथन के बाद अब प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने नामों पर अंतिम सहमति बना ली है। सूत्रों के अनुसार, दिल्ली से भी इस सूची को हरी झंडी मिल चुकी है। इस बार की सूची को लेकर सबसे दिलचस्प बात यह है कि इसमें संतुलन साधने की कोशिश साफ दिखाई देगी। संगठन में सक्रिय कार्यकर्ताओं को जगह देने के साथ-साथ क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों का भी पूरा ध्यान रखा गया है। कुछ नाम ऐसे बताए जा रहे हैं जो सियासी गलियारों को चौंका सकते हैं, जबकि कई चेहरे पहले से चर्चा में बने हुए हैं। दरअसल, निगम-मंडल की ये नियुक्तियां केवल पद बांटने की प्रक्रिया नहीं हैं, बल्कि यह संगठन के भीतर संतुलन साधने, असंतोष को कम करने और आगामी राजनीतिक रणनीति को मजबूत करने का अहम जरिया भी हैं। अब सबकी नजरें आज होने वाली औपचारिक घोषणा पर टिकी हैं—क्योंकि इसी सूची से तय होगा कि पार्टी किसे ‘इनाम’ देती है और किसे अभी और इंतजार करना होगा।







