Monday, April 6, 2026

हेमंत ऋतु में बीजेपी का चौतरफा विकास,, जिलों में बनेंगे आधुनिक कार्यालय...

भाजपा प्रदेश कार्यालय में आज भाजपा का स्थापना दिवस मनाया गया, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने इस मौके पर कहा कि भाजपा की विचारधारा सहभागिता पर आधारित है। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के विचारों को मध्य प्रदेश भाजपा संगठन को देश का आदर्श प्रदेश संगठन माना जाता है,यही कारण है कि भाजपा ने अब एमपी में जिला कार्यालय को आधुनिक बनाकर नई मिसाल पेश करने की तैयारी कर ली है वैसे भी बीजेपी के वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के जिले में तकरीबन 20 साल पहले ही आधुनिक बीजेपी कार्यालय बन चुका है यही कारण था कि हेमंत खंडेलवाल को प्रदेश अध्यक्ष बनने के पहले ही प्रदेश कार्यालय के निर्माण की जिम्मेदारी भी दी गई थी.. इन जिलों में बन रहे आधुनिक भाजपा कार्यालय 17 जिलों में भाजपा कार्यालयों का शिलान्यास हुआ मंदसौर, बुरहानपुर में सोमवार से ही शुरू हुआ आधुनिक भाजपा कार्यालयों का निर्माण ग्वालियर, रतलाम और छिंदवाड़ा समेत प्रदेश के 17 जिलों में एक साथ पार्टी के नए जिला कार्यालय निर्माण के लिए भूमिपूजन : जबलपुर, ग्वालियर, भोपाल, सागर, उज्जैन में ग्रामीण जिला कार्यालय धार और इंदौर में ग्रामीण कार्यालयों का काम शुरू

सीएम मोहन यादव ने किसे बताया असली "धुरंधर"

सीएम मोहन यादव ने बीजेपी स्थापना दिवस के कार्यक्रम में जो संबोधन दिया वो चर्चा का विषय बना हुआ है,, सीएम ने कार्यकर्ताओं को संबोधित कर ते हुए कुछ ऐसा कह दिया कि जमकर तालियां बजी ,, सीम मोहन याद ने बीजेपी को फीनिक्स पक्षी बताया और पीएम मोदी को असली धुरंधर,, मुख्यमंत्री ने कहा कि मोदी जी ने जिस तरह पाकिस्तान को हर मोर्चे पर पछाड़ा है इसीलिए वो असली धुरंधर हैं,,बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा की प्रदेश के हर जिले में बीजेपी आधुनिक कार्यालय बनाएगी

Sunday, April 5, 2026

LPG संकट के बीच सरकार का बड़ा फैसला!

 


भोपाल। मध्यप्रदेश में एलपीजी संकट के बीच सरकार बड़ा फैसला लेने की तैयारी में है। गैस की बढ़ती मांग और सप्लाई में आ रही दिक्कतों को देखते हुए अब नए उपभोक्ताओं को सीधे 14 किलो सिलेंडर की बजाय 5 किलो का कनेक्शन देने की योजना पर काम किया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, इस संबंध में जल्द ही आधिकारिक आदेश जारी किए जा सकते हैं। फूड एंड सिविल सप्लाई विभाग लगातार गैस कंपनियों और एजेंसियों के साथ मंथन कर रहा है ताकि आम लोगों को राहत मिल सके और गैस की उपलब्धता संतुलित रखी जा सके। विभाग की अपर मुख्य सचिव रश्मि शमी ने इस मुद्दे पर गैस कंपनियों से विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी है। रिपोर्ट के आधार पर यह तय किया जा रहा है कि किस तरह से सप्लाई को बेहतर तरीके से मैनेज किया जाए और ज्यादा से ज्यादा लोगों तक गैस कनेक्शन पहुंचाया जा सके। सरकार की योजना है कि फिलहाल नए कनेक्शन 5 किलो के दिए जाएं, जिन्हें बाद में जरूरत के हिसाब से 14 किलो में कन्वर्ट किया जा सके। इससे एक तरफ जहां ज्यादा लोगों को गैस कनेक्शन मिल पाएगा, वहीं दूसरी ओर सप्लाई पर भी दबाव कम होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम मौजूदा संकट के बीच एक व्यावहारिक समाधान हो सकता है, जिससे जरूरतमंद परिवारों तक गैस की पहुंच सुनिश्चित की जा सकेगी। हालांकि, आम उपभोक्ताओं के लिए यह देखना अहम होगा कि यह व्यवस्था कितनी प्रभावी साबित होती है। कुल मिलाकर, सरकार का यह फैसला एलपीजी संकट के बीच एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है, जो आने वाले दिनों में गैस वितरण प्रणाली को नई दिशा दे सकता है।

MP के किसानों, व्यापार और पर्यटन को मिली बड़ी सौगात


भोपाल। मध्यप्रदेश को केंद्र सरकार से एक बड़ी सौगात मिली है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सोशल मीडिया के जरिए जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश के इटारसी से बैतूल सेक्शन में 22 किलोमीटर लंबे टाइगर कॉरिडोर को 4-लेन बनाने की मंजूरी दे दी गई है। इस परियोजना पर करीब 758 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। यह परियोजना सिर्फ सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा फायदा प्रदेश के किसानों, व्यापार और पर्यटन को भी मिलेगा। यह इलाका खेती के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण है और यहां कोयला, तांबा, ग्रेफाइट और सीसा-जस्ता जैसे प्राकृतिक संसाधन भी बड़ी मात्रा में पाए जाते हैं। सड़क के 4-लेन बनने से माल ढुलाई आसान और तेज होगी, जिससे व्यापार को बढ़ावा मिलेगा और किसानों को अपनी फसल बाजार और मंडियों तक पहुंचाने में कम समय और कम लागत लगेगी। साथ ही यात्रा भी ज्यादा सुरक्षित और सुगम हो जाएगी। इस परियोजना की खास बात यह है कि इसमें वन्यजीवों की सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखा गया है। जानवरों के सुरक्षित आवागमन के लिए 11 विशेष अंडरपास और ओवरपास बनाए जाएंगे, जिससे सड़क दुर्घटनाओं और वन्यजीवों की मौत के मामलों में कमी आएगी। इटारसी-बैतूल सेक्शन के इस हिस्से के अपग्रेड होने के बाद पूरा ग्वालियर से बैतूल तक का कॉरिडोर 4-लेन में तब्दील हो जाएगा। इससे लंबी दूरी की यात्रा का समय घटेगा और खासकर पहाड़ी इलाकों में सड़क सुरक्षा बेहतर होगी। इसके अलावा इस प्रोजेक्ट से प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों—माधव नेशनल पार्क, रातापानी और सतपुड़ा टाइगर रिजर्व—को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे इको-टूरिज्म को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है। कुल मिलाकर, यह परियोजना मध्यप्रदेश के विकास, रोजगार, व्यापार और पर्यटन के लिए एक बड़ी सौगात के तौर पर देखी जा रही है।

Saturday, April 4, 2026

MP में सियासत का सीक्रेट मिशन: विधायक बने टारगेट


भोपाल। मध्यप्रदेश में सियासत इन दिनों खुले मंच से ज्यादा बंद कमरों में तय होती दिख रही है। जून में होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए कागजों पर भले ही गणित साफ नजर आता हो—दो सीटें बीजेपी और एक कांग्रेस के खाते में—लेकिन असल खेल अब इस तय समीकरण को पलटने का है। बीजेपी ने तीसरी सीट पर कब्जे के लिए अंदरखाने ‘ऑपरेशन पॉलिटिक्स’ शुरू कर दिया है। विधानसभा की मौजूदा स्थिति इस पूरी रणनीति की कुंजी है। एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए 58 विधायकों की जरूरत होती है। बीजेपी के पास इस समय 164 विधायक हैं, यानी दो सीटें जीतने में उसे कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन तीसरी सीट के लिए आंकड़ा करीब 174 तक पहुंचता है, जहां बीजेपी को 10 अतिरिक्त वोटों की जरूरत पड़ती है। यहीं से खेल दिलचस्प और पेचीदा बनता है। कांग्रेस की स्थिति पहले ही कमजोर होती नजर आ रही है। उसके पास 64 विधायक थे, लेकिन विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा पर कोर्ट द्वारा मतदान पर रोक लगने के बाद संख्या घटकर 63 रह गई है। वहीं बीना से विधायक निर्मला सप्रे का रुख पहले से ही बीजेपी की ओर झुका हुआ माना जा रहा है। ऐसे में कांग्रेस का आंकड़ा कागजों पर जितना दिखता है, जमीन पर उतना मजबूत नहीं माना जा रहा। यही वजह है कि बीजेपी अब ‘क्रॉस वोटिंग’ और ‘मैनेजमेंट’ के जरिए तीसरी सीट का गणित साधने में जुटी है। पार्टी के भीतर चर्चा है कि अगर 4 से 5 विधायकों को अपने पक्ष में किया जा सके या वोटिंग के दौरान क्रॉस वोटिंग हो जाए, तो तीसरी सीट भी हासिल की जा सकती है। इस पूरे खेल में किसी भी तरह की खुली बयानबाजी से बचते हुए रणनीति को पर्दे के पीछे ही रखा जा रहा है। दिलचस्प यह भी है कि हाल के घटनाक्रम—जैसे विजयपुर के बाद दतिया विधायक राजेंद्र भारती की विधायकी जाना—को भी इसी बड़े सियासी समीकरण से जोड़कर देखा जा रहा है। भले ही कोई दल खुलकर इसे स्वीकार नहीं कर रहा, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे ‘समीकरण सेट करने’ की प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि बीजेपी की नजर खास तौर पर मध्यप्रदेश के मध्य क्षेत्र और ग्वालियर-चंबल बेल्ट के कुछ विधायकों पर है। इसके अलावा जिन विधायकों के कानूनी मामले लंबित हैं, उन्हें भी साधने की कोशिशें जारी हैं। यानी यह लड़ाई सिर्फ संख्या की नहीं, बल्कि प्रभाव, दबाव और मौके की भी है। उधर कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने विधायकों को एकजुट रखना है। पार्टी अंदरखाने सतर्क जरूर है, लेकिन फिलहाल डिफेंसिव मोड में नजर आ रही है। अगर कांग्रेस ने समय रहते मजबूत रणनीति और प्रभावशाली उम्मीदवार नहीं उतारा, तो यह खतरा भी बन सकता है कि उसके हिस्से की एकमात्र सीट भी खतरे में पड़ जाए। कुल मिलाकर मध्यप्रदेश में सियासत अब सीधी रेखा में नहीं चल रही, बल्कि हर कदम पर मोड़ ले रही है। कागजों का गणित कुछ और कहता है, जबकि जमीन पर चल रहा ‘ऑपरेशन पॉलिटिक्स’ कुछ और कहानी लिखने की तैयारी में है। अब नजर इस बात पर है कि कौन अपने पाले को बचा पाता है और कौन दूसरे के मैदान में सेंध लगा देता है। 

कांग्रेस vs बीजेपी: एक विधायक पर अटका पूरा गणित


भोपाल। मध्यप्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी तापमान तेजी से बढ़ रहा है और इस बार पूरी नजर एक ही नाम पर टिक गई है—निर्मला सप्रे। यह चुनाव सिर्फ सीटों का गणित नहीं, बल्कि निष्ठा और रणनीति की परीक्षा बनता जा रहा है। कांग्रेस खेमे में इस वक्त सबसे ज्यादा चर्चा इसी बात की है कि निर्मला सप्रे का वोट आखिर किस ओर जाएगा। सियासी गलियारों में यह सवाल तैर रहा है कि वह कांग्रेस के साथ खड़ी रहेंगी या फिर बीजेपी के पक्ष में झुकाव दिखाएंगी। यही एक वोट पूरे चुनाव की दिशा बदल सकता है। दरअसल, राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग की आशंका हमेशा बनी रहती है, लेकिन इस बार कांग्रेस ने पहले से ही अपनी रणनीति को ज्यादा सतर्क और कानूनी आधार पर मजबूत करने की तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, अगर वोटिंग में कोई ‘खेल’ होता है, तो उसे सीधे कोर्ट तक ले जाने की तैयारी है। यही वजह है कि कांग्रेस चाहती है कि वोटिंग के बाद स्थिति पूरी तरह साफ हो और यह सामने आए कि निर्मला सप्रे ने आखिर किसे वोट दिया। हालांकि राज्यसभा चुनाव में वोटिंग गोपनीय होती है, लेकिन पार्टी के भीतर इसे लेकर दबाव और निगरानी दोनों बढ़ा दी गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव अब ‘नंबर गेम’ से ज्यादा ‘नर्व गेम’ बन गया है, जहां हर विधायक की वफादारी परख में है। खासतौर पर निर्मला सप्रे का नाम इसलिए चर्चा में है क्योंकि उनका रुख आखिरी वक्त तक सस्पेंस बनाए हुए है। उधर बीजेपी भी पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और कोशिश में है कि कोई भी मौका हाथ से न जाने पाए। कुल मिलाकर, राज्यसभा चुनाव अब एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहां एक वोट न सिर्फ नतीजा बदल सकता है, बल्कि सियासी रिश्तों की असली तस्वीर भी सामने ला सकता है। आने वाले वक्त में यह साफ हो जाएगा कि निर्मला सप्रे किस पाले में खड़ी हैं, लेकिन फिलहाल मध्यप्रदेश की राजनीति में यह ‘एक वोट’ सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है।