Wednesday, March 25, 2026

VIP नहीं, आम आदमी जैसा अंदाज- ऐसे मनाया CM ने अपना जन्मदिन


भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने जन्मदिन के मौके पर सागर जिले का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने सादगी और जनसंपर्क का संदेश देते हुए किसान हरिदास रैकवार के खेत पर बने घर में पहुंचकर भोजन किया। मुख्यमंत्री का यह दौरा खासा चर्चा में रहा, क्योंकि उन्होंने अपने जन्मदिन को औपचारिक कार्यक्रमों से अलग आम लोगों के बीच मनाने का फैसला किया। सागर पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री सीधे किसान हरिदास रैकवार के खेत पर बने मकान में पहुंचे, जहां उन्होंने परिवार के साथ बैठकर सादा भोजन किया और आत्मीय बातचीत की। मुख्यमंत्री ने इस दौरान किसान परिवार की समस्याएं सुनीं और खेती-किसानी से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने प्रदेश सरकार द्वारा किसानों के लिए चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी भी दी और लाभ मिलने की स्थिति के बारे में फीडबैक लिया। स्थानीय लोगों में मुख्यमंत्री के इस कदम को लेकर खास उत्साह देखने को मिला। ग्रामीणों ने इसे सरकार और आम जनता के बीच बेहतर संवाद की पहल बताया। गौरतलब है कि सागर दौरे के दौरान मुख्यमंत्री अन्य विकास कार्यों और कार्यक्रमों में भी शामिल हुए। उनके इस दौरे को ग्रामीण क्षेत्रों में सीधा संवाद और जमीनी स्तर पर हालात समझने की पहल के तौर पर देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री का यह अंदाज—जन्मदिन पर किसान के घर भोजन करना—राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर एक मजबूत संदेश देता है कि सरकार जनता के साथ खड़ी है और उनकी समस्याओं को समझने के लिए सीधे उनके बीच पहुंच रही है।





क्या दिग्विजय को दे दी है कांग्रेस ने 2028 की कमान !

प्रदेश की सियासत में पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह एक बार फिर सक्रिय हो गए हैं? राजनीतिक गलियारों में ये चर्चाएं तेज हो गई हैं. उधर, भाजपा इसे अलग की नजरिए से देख रही है,, अब विजय का रामलाल के दर्शन करने जाना उनकी नर्मदा यात्रा की याद दिला रहा है,, हालांकि सवाल यह है कि दिग्विजय सिंह राज्यसभा की दावेदारी की मंशा अब भी तो नहीं रख रहे... देश के अन्य राज्यों समेत मध्य प्रदेश में लगातार चुनावों में हार के बाद कांग्रेस ने आगामी 2028 के विधानसभा चुनाव के लिए तैयारियां शुरू कर दी है. बड़ी बात यह है कि प्रदेश की सियासत में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह एक बार फिर सक्रिय हो गए हैं. दिग्विजय सिंह बीते महीनो में लगातार सक्रिय रहे है,, दिग्विजय सिंह अयोध्या रामलला के दर्शन के लिए जा रहे हैं,, माना जा रहा है कि 2028 में दिग्विजय सिंह अपने बेटे जयवर्धन सिंह को मुख्यमंत्री बनाने की पूरी कोशिश में लगे हुए हैं, इसके पहले कांग्रेस के पचमढ़ी प्रशिक्षण शिविर, भोपाल स्थित प्रदेश कांग्रेस कार्यालय और दिल्ली स्थित एआईसीसी हेड क्वार्टर में बड़े नेताओं के सामने चुनावी तैयारी के प्लान को लेकर अपना प्रेजेंटेशन दे चुके हैं. अब फिर से अटकलें तेज हो गई है कि दिग्विजय की नीति पर मध्य प्रदेश कांग्रेस आगे बढ़ रही है.,,अब इस पर सियासी बयानबाजी भी शुरू हो गई है...

Tuesday, March 24, 2026

भोपाल में शिक्षकों का बड़ा प्रदर्शन, खून से लिखा पत्र, ये हैं प्रमुख मांगें



भोपाल। राजधानी भोपाल में शिक्षक भर्ती को लेकर एक बार फिर बड़ा आंदोलन देखने को मिला। शिक्षक भर्ती वर्ग-2 और वर्ग-3 में पदवृद्धि की मांग को लेकर प्रदेशभर से आए अभ्यर्थियों ने अंबेडकर पार्क में जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी शामिल हुए, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी मौजूद रहे। अभ्यर्थियों ने थाली बजाकर अनोखे तरीके से विरोध जताया। इतना ही नहीं, प्रदर्शन के दौरान मुख्यमंत्री के नाम खून से पत्र लिखकर अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने की कोशिश की गई। अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने परीक्षा में 80 से 88 प्रतिशत तक अंक हासिल किए हैं, इसके बावजूद उन्हें अब तक नियुक्ति नहीं मिली है। उनका आरोप है कि सरकार पर्याप्त पद नहीं निकाल रही, जबकि प्रदेश में शिक्षकों की भारी कमी है।विधानसभा में पेश आंकड़ों का हवाला देते हुए अभ्यर्थियों ने बताया कि मध्यप्रदेश में कुल 2 लाख 89 हजार शिक्षक पद स्वीकृत हैं, जिनमें से करीब 1 लाख 74 हजार 419 पदों पर ही शिक्षक कार्यरत हैं। यानी लगभग 1 लाख 15 हजार 678 पद अब भी खाली पड़े हैं, खासकर वर्ग-2 और वर्ग-3 में। अभ्यर्थियों ने यह भी बताया कि प्रदेश के 1,968 स्कूल ऐसे हैं जहां सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे पढ़ाई चल रही है, जबकि करीब 46 हजार स्कूलों में केवल दो शिक्षक पदस्थ हैं। ऐसे में शिक्षा व्यवस्था पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। Pradrshankariyo की प्रमुख मांग है कि शिक्षक भर्ती वर्ग-2 और वर्ग-3 में पदों की संख्या बढ़ाई जाए और लंबे समय से इंतजार कर रहे करीब 50 हजार चयनित अभ्यर्थियों को जल्द नियुक्ति दी जाए। इसके साथ ही खाली पड़े सभी पदों पर चरणबद्ध तरीके से भर्ती प्रक्रिया पूरी करने की मांग भी उठाई गई। अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।

एमपी बीजेपी में फार्मूला तय,, इसी हफ्ते होगी ये नियुक्तियां!

मध्य प्रदेश भारतीय जनता पार्टी में नियुक्तियों का दौर जारी है, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल अप्रैल में प्रदेश कार्य समिति की बैठक की तैयारी कर रहे हैं, सभी मोर्चा में नियुक्ति के बाद प्रदेश कार्य समिति की भी घोषणा हो जाएगी,,प्रदेश कार्य समिति के लिए फार्मूला तैयार कर लिया गया है,, इसमें पूर्व सांसदों ,पूर्व विधायकों और पूर्व जिला अध्यक्षों को ज्यादा स्थान दिया जाएगा इसके अलावा मोर्चे के पूर्व प्रमुखों को भी जगह देने की पूरी तैयारी है माना जा रहा है कि एक सप्ताह के भीतर प्रदेश कार्य समिति की भी घोषणा कर दी जाएगी...

Monday, March 23, 2026

भोपाल में LPG वितरण का नया नियम, हर सेक्टर का हिस्सा तय

 


भोपाल। शहर में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई को व्यवस्थित करने के लिए नई व्यवस्था लागू की गई है। अब अलग-अलग सेक्टर को तय प्रतिशत के आधार पर सिलेंडर आवंटित किए जाएंगे, ताकि जरूरी सेवाओं को प्राथमिकता मिल सके और जमाखोरी पर रोक लगाई जा सके।nई व्यवस्था के तहत सबसे ज्यादा प्राथमिकता शैक्षणिक और चिकित्सा संस्थानों को दी गई है। इन्हें कुल आवंटन का 30 प्रतिशत हिस्सा मिलेगा और उनकी जरूरत के अनुसार पूरी आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। इसके बाद 35 प्रतिशत हिस्सा आवश्यक सेवाओं के लिए तय किया गया है, जिसमें पुलिस, सुरक्षा बल, सरकारी सेवाएं, महिला एवं बाल विकास संस्थान और आश्रय स्थल शामिल हैं। होटल, रेस्टोरेंट, कैंटीन, ढाबा और स्ट्रीट फूड कारोबारियों को तीसरी प्राथमिकता में रखा गया है। इनमें होटल और रेस्टोरेंट को 9-9 प्रतिशत, जबकि ढाबा और स्ट्रीट फूड को 7 प्रतिशत गैस मिलेगी। उद्योगों के लिए भी अलग प्रावधान किया गया है। फूड प्रोसेसिंग, पॉल्ट्री और डेयरी जैसे उद्योगों को 5 प्रतिशत आवंटन मिलेगा, जबकि अन्य उद्योग और उपयोगकर्ताओं के लिए भी 5 प्रतिशत हिस्सा तय किया गया है। सप्लाई के लिए 5 किलो, 19 किलो, 47.5 किलो और 425 किलो के सिलेंडर उपलब्ध कराए जाएंगे। साथ ही जमाखोरी रोकने के लिए सख्त नियम लागू किए गए हैं। अब उपभोक्ताओं को पिछले तीन महीनों की खपत के आधार पर ही सिलेंडर मिलेंगे। ऑनलाइन बुकिंग और रिकॉर्ड रखना अनिवार्य कर दिया गया है, और तय सीमा से अधिक सिलेंडर नहीं दिए जाएंगे। Nई व्यवस्था का उद्देश्य जरूरी सेवाओं को बिना बाधा गैस उपलब्ध कराना और बाजार में संतुलन बनाए रखना है।

भोपाल बजट: जेब पर राहत, वादों की फिर नई लिस्ट तैयार


भोपाल। शहर की सरकार यानी नगर निगम ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए करीब 3938 करोड़ 45 लाख रुपए का बजट पेश कर दिया है। इस बार की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि किसी भी तरह का नया टैक्स नहीं बढ़ाया गया है, हालांकि परिसीमन शुल्क बढ़ाने की तैयारी से आम उपभोक्ताओं पर असर पड़ सकता है।बजट में शहर के विकास के लिए बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने पर खास जोर दिया गया है। सीवेज सिस्टम सुधार, पानी की बेहतर व्यवस्था, सड़कों का निर्माण और ट्रैफिक सुधार जैसे मुद्दों को प्राथमिकता दी गई है। स्वच्छ भारत मिशन के लिए 84 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, वहीं सड़कों के निर्माण के लिए 30 करोड़ रुपए रखे गए हैं। इसके अलावा शहर के हर वार्ड को 50 लाख रुपए देने का ऐलान किया गया है, जिससे स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है। Naगर निगम ने स्ट्रीट लाइट, पार्क, सामुदायिक भवन और विश्राम घाटों के विकास के लिए भी बजट में प्रावधान किया है। साथ ही कोकता में ट्रांसपोर्ट नगर विकसित करने और शहर में अलग-अलग जगहों पर फैले व्यापार को व्यवस्थित करने के लिए नए बाजार विकसित करने की योजना भी सामने रखी गई है।बजट में सांस्कृतिक पहचान को बढ़ावा देने के लिए झील महोत्सव आयोजित करने और गुरु तेग बहादुर जी के नाम पर म्यूजियम बनाने का प्रस्ताव भी शामिल किया गया है।हालांकि, बजट पेश होने से पहले और उसके दौरान नगर निगम के सदन में जमकर हंगामा देखने को मिला। गोमांस और गौमाता के मुद्दे पर सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई, यहां तक कि गौमाता को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग भी उठी। अनुदान को लेकर भी विवाद हुआ, जब नेता प्रतिपक्ष ने निष्क्रिय समितियों को राशि देने पर सवाल खड़े किए, जिस पर महापौर और विपक्ष के बीच बहस हो गई।हंगामे और विरोध के बावजूद अंततः बजट को बहुमत के आधार पर पारित कर दिया गया। सत्ता पक्ष ने इस बजट को हर वर्ग के लिए राहत देने वाला और शहर के विकास को गति देने वाला बताया, जबकि विपक्ष ने इसे पिछले साल के बजट की पुनरावृत्ति बताते हुए सवाल उठाए। कुल मिलाकर नगर निगम ने इस बजट के जरिए शहर के विकास का एक बड़ा खाका पेश किया है, लेकिन असली चुनौती इन योजनाओं को जमीन पर उतारने की है। पिछले बजट के कई वादे अब भी अधूरे हैं, ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस बार की घोषणाएं हकीकत बनती हैं या फिर कागजों तक ही सीमित रह जाती हैं।