Friday, March 20, 2026
अपने मकसद से भटकी लाड़ली लक्ष्मी योजना? आंकड़ों ने खोली जमीनी सच्चाई
बेटियों के उज्ज्वल भविष्य का दावा… हजारों करोड़ का खर्च… और लाखों पंजीयन—लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से बिल्कुल अलग तस्वीर दिखा रही है। लाड़ली लक्ष्मी योजना को लेकर सामने आए ताज़ा आंकड़े बताते हैं कि जो योजना कभी सशक्तिकरण की मिसाल मानी जाती थी, वही अब अपनी प्रभावशीलता पर गंभीर सवालों में घिरी हुई है।
पिछले 19 साल में प्रदेश में 52 लाख से ज्यादा बेटियों का पंजीयन हुआ, लेकिन इनमें से सिर्फ करीब 20 प्रतिशत ही बारहवीं तक पहुंच पा रही हैं। यानी बड़ी संख्या में बेटियां बीच रास्ते में ही पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हैं। साल 2010-11 में पहली कक्षा में दाखिला लेने वाली 11.07 लाख बच्चियों में से केवल 3.44 लाख ही 12वीं तक पहुंच सकीं, और हाल के वर्षों में यह प्रतिशत और गिरकर करीब 20 प्रतिशत के आसपास रह गया है। छठी कक्षा तक पहुंचते-पहुंचते संख्या आधी रह जाती है और नौवीं तक आते-आते यह और कम हो जाती है। ये आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि शिक्षा तक निरंतर पहुंच बनाए रखना अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।
योजना पर हर साल हजारों करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं और मौजूदा बजट में भी करीब 1800 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, लेकिन इसके बावजूद जमीनी स्तर पर हालात उम्मीद के मुताबिक नहीं बदल पाए हैं। स्कूलों की गुणवत्ता, शिक्षकों की कमी और सामाजिक परिस्थितियों जैसे बुनियादी मुद्दे अब भी सामने खड़े हैं। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या सिर्फ आर्थिक सहायता देकर बेटियों की शिक्षा सुनिश्चित की जा सकती है, या फिर योजना अपने वास्तविक उद्देश्य से भटक चुकी है।
स्थिति यह संकेत देती है कि समस्या केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि क्रियान्वयन और प्राथमिकताओं में भी कहीं न कहीं कमी है। अगर योजना का लक्ष्य वास्तव में बेटियों को शिक्षित और सशक्त बनाना होता, तो इसके साथ शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने पर भी उतना ही ध्यान दिया जाता।
अब निगाहें डॉ. मोहन यादव सरकार पर हैं कि वह इन खामियों को कैसे दूर करती है। क्योंकि यह मामला केवल एक योजना का नहीं, बल्कि लाखों बेटियों के भविष्य का है। अगर हालात नहीं बदले, तो “लाड़ली” सिर्फ नाम तक सीमित रह जाएगी, हकीकत में नहीं।
एमपी में शुरू हुआ राजनैतिक नियुक्तियों का सिलसिला,, एल्डरमैनो की सूची भी जल्द
प्रदेश में भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं का इंतजार खत्म होता दिख रहा है,, निगम मंडलों और आयोग में नियुक्तियां शुरू हो गई है,, नवरात्रि के पहले दिन वित्त आयोग का गठन किया गया है,, पूर्व सांसद और पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया को आयोग का अध्यक्ष बनाया गया है,केके सिंह और वीरेंद्र कुमार सदस्य बनाए गए है,सूत्रों के मुताबिक एल्डरमैनो की सूची एक दो दिन में जारी हो सकती है
Thursday, March 19, 2026
1.39 लाख का कंप्यूटर, 1 लाख का प्रिंटर… इस विभाग में बड़ा गड़बड़झाला!
भोपाल। मध्य प्रदेश में शिक्षा विभाग से जुड़े टेंडरों को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। कांग्रेस ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक ने दावा किया है कि प्रदेश में “शिक्षा माफिया सिंडिकेट” सक्रिय है, जो टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर कर चुनिंदा लोगों को फायदा पहुंचा रहा है।
मुकेश नायक ने दावा किया कि वर्ष 2023 में शिक्षा विभाग से जुड़े टेंडरों में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार हुआ। आरोप है कि टेंडर की शर्तें इस तरह बनाई जाती हैं, जिससे कुछ चुनिंदा कंपनियों को ही फायदा मिले, जबकि बड़ी और सक्षम कंपनियों को प्रक्रिया से बाहर कर दिया जाता है।
उन्होंने कहा कि उपकरणों की खरीद में भी भारी अनियमितताएं सामने आई हैं। उदाहरण देते हुए बताया कि करीब 39 हजार रुपये कीमत के कंप्यूटर को लगभग 1.39 लाख रुपये में खरीदा गया, वहीं 25 हजार रुपये का प्रिंटर एक लाख रुपये में लिया गया।
कांग्रेस नेता ने इस पूरे मामले में शौरभ शर्मा और गौरव शर्मा के नाम सामने आने की बात कही। साथ ही यह भी आरोप लगाया कि टेंडर प्रक्रिया उस समय की आईएएस अधिकारी शिल्पा गुप्ता के कार्यकाल में जारी की गई थी।
कांग्रेस ने राज्य सरकार से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित करने और फोरेंसिक ऑडिट कराने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो पार्टी सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेगी।
नवरात्रि पर कर्मचारियों को बड़ा तोहफा, सरकार ने किया बड़ा ऐलान
भोपाल। मध्य प्रदेश के संविदा कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। स्वास्थ्य विभाग ने संभागीय कार्यालयों में कार्यरत संविदा कर्मियों के लिए समकक्ष वेतन (इक्विवेलेंट पे) निर्धारण के आदेश जारी कर दिए हैं। इस फैसले से प्रदेशभर के हजारों कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
जारी आदेश के अनुसार, अब संविदा कर्मियों को उनके कार्य और पद के आधार पर नियमित पदों के समान समकक्ष वेतन दिया जाएगा। लंबे समय से वेतन असमानता को लेकर उठ रही मांगों के बीच सरकार का यह कदम अहम माना जा रहा है।
खास बात यह है कि जो संविदा कर्मचारी पहले इस प्रक्रिया से वंचित रह गए थे, उनके लिए भी समकक्षता निर्धारण के निर्देश दिए गए हैं। इससे बड़ी संख्या में ऐसे कर्मचारियों को भी लाभ मिलेगा, जो अब तक वेतन निर्धारण के दायरे से बाहर थे।
स्वास्थ्य विभाग के निर्देशों में कंप्यूटर ऑपरेटर और सफाईकर्मी (स्वीपर) जैसे पदों पर कार्यरत कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन का लाभ सुनिश्चित करने की बात भी कही गई है।
सरकार के इस फैसले को संविदा कर्मचारियों के हित में बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि लंबे समय से चली आ रही वेतन विसंगतियों को भी दूर करने में मदद मिलेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने दी शर्तों के साथ कांग्रेस विधायक को राहत,, रामनिवास रावत को झटका
पिछले कुछ दिनों से मध्य प्रदेश की विजयपुर विधानसभा सीट को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है,,हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने इस सीट से कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा का निर्वाचन शून्य घोषित कर दिया था ,और नंबर दो पर रहे रामनिवास रावत को विधायक का अधिकार का निर्णय देते हुए मल्होत्रा को 15 दिन का समय दिया था ,,मुकेश मल्होत्रा ने इस अवधि में सुप्रीम कोर्ट की शरण ली थी जिस पर आज हुई सुनवाई में कांग्रेस विधायक को स्टे मिल गया है ,शर्तों के साथ दिए गए स्टे के साथ साथ सुनवाई की अगली तारीख जुलाई में तय की गई है!
Wednesday, March 18, 2026
किसानों को तोहफा देने जा रही सरकार, बोनस का ऐलान
भोपाल। मध्य प्रदेश में किसानों के लिए राहत भरी खबर है। राज्य सरकार ने गेहूं खरीदी पर 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने को मंजूरी दे दी है। यह अहम फैसला मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया।
सरकार के इस निर्णय से किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के ऊपर अतिरिक्त लाभ मिलेगा, जिससे उनकी आय में बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। रबी सीजन में बड़ी मात्रा में गेहूं उत्पादन को देखते हुए सरकार ने यह कदम उठाया है।
कैबिनेट में यह भी तय किया गया कि खरीदी के बाद जो गेहूं सरप्लस बचेगा, उसे ओपन मार्केट (खुले बाजार) में बेचा जाएगा। इससे भंडारण का दबाव कम होगा और सरकार को भी आर्थिक संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी।
सरकार का कहना है कि इस फैसले से किसानों को उनकी उपज का बेहतर दाम मिलेगा और वे अधिक मात्रा में सरकारी खरीदी केंद्रों पर गेहूं बेचने के लिए प्रोत्साहित होंगे।
इसके साथ ही खरीदी व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि किसानों को किसी तरह की असुविधा का सामना न करना पड़े।
राज्य सरकार के इस फैसले को किसानों के हित में बड़ा कदम माना जा रहा है, जो आने वाले समय में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देगा।
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